गुजरात के किसान: आत्महत्या, सच्चाई, सफाई और सरकार

आज ऐसा कुछ हुआ कि मुझे चौंकना पड़ा. फेसबुक पर एक मित्र ने गुजरात के किसानों की आत्महत्या पर गुजरात सरकार की कथित सफाई देती एक खबर की कतरन अपने स्टेटस पर लगाई. मैंने वहीं टिप्पणी में उन वेबसाईट की लिंक दीं जो बताती हैं कि इस संबंध में गुजरात सरकार का ज़वाब गलत है. दोपहर को एक नज़र गई तो दिखा कि वह टिप्पणियाँ हटा दीं गईं हैं. तब मैंने सोचा कि इस पर, इंटरनेट के सहारे कुछ तलाश किया जाए .

दरअसल, हालिया लोकसभा चुनावों की गहमागहमी के बीच आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपनी गुजरात यात्रा के बाद, भारतीय जनता पार्टी द्वारा भावी प्रधानमंत्री के रूप में उतारे गए नरेंद्र मोदी पर कुछ सवालनुमा आरोप लगाए कि उनके दस वर्षीय मुख्यमंत्रित्वकाल के गुजरात में 800 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है. और फिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरते हुए, अपने भाषण में गुजरात में पिछले 10 साल में 5 हजार से ज्यादा किसानों द्वारा आत्महत्या करने की बात कही

खबरों के अनुसार, इस पर पहली बार गुजरात सरकार ने अरविंद केजरीवाल के इन आरोपों का जवाब दिया और उन्हें भ्रमजाल फैलाने वाला बताया. हालांकि अपने ज़वाब में गुजरात सरकार ने कथित दावा किया कि गुजरात में पिछले दस वर्षों में एक ही किसान ने आत्महत्या की है. साथ ही साथ खिल्ली भी उड़ाई कि मात्र दस दिनों में 800 किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा बढ़कर एकदम से 5,874 कैसे हो गया! इसे केजरीवाल का सबसे बड़ा झूठ भी करार दे दिया.

मैंने रूख किया राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की वेबसाइट का. और नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल के प्रथम व अंतिम उपलब्ध रिपोर्ट्स (2002 तथा 2012) निकालीं. कई खण्डों में बंटी 2002 की रिपोर्ट है 300 से अधिक पृष्ठों की तथा 2012 की रिपोर्ट है 318 पृष्ठों की.

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2002 की रिपोर्ट में गुजरात

जब इन्हें खंगाला गया तो पता चला 2002 की Accidental Deaths & Suicides in India रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में खेती किसानी वाले 570 व्यक्तियों ने आत्महत्या की, जिसमें 482 पुरूष व 88 महिलाएं थीं.

उधर, 2012 की Accidental Deaths & Suicides in India रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में खेती किसानी का काम करने वाले 564 व्यक्तियों ने आत्महत्या की. इनमें 472 पुरूष व 92 महिलाएं थीं.

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2012 की रिपोर्ट में गुजरात

मैंने इन दो वर्षों का योग किया तो नतीज़ा आया 1134 ! फिर यूं ही 2007 और 2010 की रिपोर्ट्स ‘उठाई’ तो आंकड़ा आया क्रमश: 317 व 523 !! फिर तो मैंने बाक़ी जगह निगाह ही नहीं डाली.

अब अगर औसत निकालने की कोशिश को प्रति वर्ष 500 मान लिया जाए तो इन दस वर्षों के गुजरात में 5000 किसानों की आत्महत्या हुईं कि नहीं? तो फिर एक सरकारी ज़वाब में केवल एक किसान के आत्महत्या की बात कैसे आई?

जिन्हें रुचि हो वे राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा जारी 1967 से 2014 तक के आंकड़े यहाँ देख सकता है और किसी भी आलोचना के पहले इस बात का ध्यान रखें कि यहाँ आंकड़े, खुद राज्य सरकार द्वारा भेजे जाते हैं ना कि अन्यत्र से इकट्ठा किए जाते हैं.

बेशक, अन्य राज्यों की स्थिति गुजरात से भी खराब है लेकिन इस लेख का संदर्भ, एक व्यक्ति के आरोपों के ज़वाब में मिथ्या जानकारी दिए जाने के संदर्भ तक ही सीमित है.

बताईए झूठा कौन?

गुजरात के किसान: आत्महत्या, सच्चाई, सफाई और सरकार
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गुजरात के किसान: आत्महत्या, सच्चाई, सफाई और सरकार” पर 6 टिप्पणियाँ

  1. सही आकलन है… जानकारीपूर्ण.

    .ये साइडबार में “क्या तलाशते हुए आ रहे हैं लोग?” लगाने का औचित्य क्या है, पाबला जी? 🙂

  2. Heart
    एक टोटका है, पाठक को साइट पर बनाए टिकाए रखने का
    😉

  3. पाब्ला जीआप भी अरविंद केजरीवाल के एजेंट हो .

  4. सच कहते हैं झूठ के पैर नहीं होते , वह तो उड़कर चलता है। .
    बहुत बढ़िया जागरूक करती प्रस्तुति

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