गूगल ऐडसेंस क्या है और इससे कमाई कैसे होती है


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गूगल ऐडसेंस पर मैंने कुछ छिटपुट लेख बहुत पहले लिखे थे. लेकिन जब हिंदी ब्लॉग्स के लिए गूगल ने अपनी सेवा दोबारा शुरू नहीं की तो धीरे धीरे इस संबंध में लिखने की रुचि कम होती गई. अक्सर ही कई मित्र, सहकर्मी इस बारे में जिज्ञासा प्रकट करते हैं कि आखिर गूगल और ऎसी ही बड़ी बड़ी वेबसाईट्स को फ़ायदा क्या होता है मुफ्त सेवाएं देने से?

दो दिन पहले ही एक सहकर्मी ने पूछा कि वेबसाईट्स चलाने से क्या आर्थिक लाभ होता है और कैसे होता है? मैंने मुस्कुरा कर कहा कि दो घंटे निकालिए मैं आपको सब बताता हूँ. हँसी मजाक में बात आई गई हो गई लेकिन मैंने निश्चय किया कि इस बारे में लिखा जाए और दोबारा कोई पूछे तो उसे यह लेख पढने के लिए दे दिया जाए.

इससे पहले बात आगे बढे, यह बताना चाहूँगा कि जब तक हमारा सुपुत्र, गुरुप्रीत था तब तक उसने गूगल ऐडसेंस के सहारे हर महीने हजारों लाखों रूपए कमाए. यह बात उसके घनिष्ट मित्र भी जानते हैं और पारिवारिक सदस्य भी. रोज़ाना अपने मित्र-सहायकों के साथ 12-14 घंटे काम करता था तब जा कर उसे यह मुकाम हासिल हुआ.

गूगल ऐडसेंस है क्या चीज?

गूगल ऐडसेंस, मशहूर सर्च इंजिन, गूगल की स्वामित्त्व वाली गूगल इनकार्पोरेटेड द्वारा चलाई जा रही ऑनलाइन विज्ञापन उपलब्ध कराने की मुफ्त सेवा है. मूल तौर पर, इन विज्ञापनों को वेबसाइटों के मालिक अपनी वेबसाईट्स में दिखा सकते हैं. यह विज्ञापन, शब्दों वाक्यों के रूप में, चित्र के रूप में या वीडियो के रूप में होते हैं. इन विज्ञापनों का सारा नियंत्रण, प्रबंधन, प्रशासन गूगल द्वारा किया जाता है.

जो विज्ञापन, वेबसाईट पर दिखाई देते हैं उन पर यदि वेबसाईट पर विचरण करता पाठक किसी भी कारण से क्लिक कर संबंधित विज्ञापनदाता की वेबसाईट पर जाता है तो गूगल, उस विज्ञापन दिखाने वाली वेबसाईट के मालिक को कुछ भुगतान करता है. थोड़ा थोड़ा करते हुए, यह भुगतान वेबसाईट मालिक के गूगल ऐडसेंस खाते में इकट्ठा होते जाता है और जब यह कमाई, 100 अमेरिकी डॉलर हो जाती है तो इसे भारतीय मुद्रा में बदल कर वेबसाईट मालिक के नाम का चेक, उसके डाक पते पर भेज दिया जाता है. (इस समय एक डॉलर की आधिकारिक विनिमय दर 60.05 रूपये है).

गूगल ऐडसेंस

इंटरनेट से पहले भी ऐसा होता था क्या?

बिलकुल होता था. होता है. याद कीजिए अक्सर ही किसी पर्यटक स्थल पर आपको, पहुंचते ही, युवकों का दल घेर लेता है. जब आप कहते हैं कि दो दिन किसी होटल में रूक कर, रुचि वाली जगहें देख रेल से लौट जाने का इरादा है तो कोई आश्वासन देता है कि बढ़िया होटल वह दिला देगा, कोई कहता है कि इलाके की सैर के लिए टैक्सी का इंतज़ाम उसके पास है, कोई कहता है कि लौटने का रेल टिकट वह एजेंसी से बनवा देगा. अगर आप किसी की ना सुन आगे बढ़ गए तो कोई बात नहीं लेकिन उनकी सेवायें आपने लीं तो वे एजेंट-युवक, जिनको संबंधित काम सौंपेंगे उनसे कुछ पूर्व-निर्धारित रकम, कमीशन के तौर पर ले ही लेंगे.

गूगल एडसेंस की भाषा में आप पाठक हैं वेबसाईट के, काम करवा देने वाला युवक ब्लॉग, वेबसाईट का विज्ञापन है.  विज्ञापनदाता वह एजेंसी है जिस तक आपको पहुंचाया जाता है, भुगतान प्रति एजेंट-युवक कहलाता है PPC -Pay per click और युवक की महीने भर की कमाई कहलाई एडसेंस कमाई 🙂

अखबारों में विज्ञापन छपे मिलते हैं जिनमें यह भी लिखा होता है कि इस विज्ञापन की कतरन लाने पर 10% 15% की छूट ! ऐसे कई मामलों में अखबार को उतने ही विज्ञापनों का भुगतान किया जाता है जितनी कतरन दुकान वाले के पास पहुंचती हैं. मतलब, भुगतान प्रति विज्ञापन

अब अगर आपको विज्ञापनों से कमाई करनी है तो अखबार का मालिक तो होना पडेगा, मतलब कोई वेबसाईट या ब्लॉग तो होना चाहिए ना !

विज्ञापन, किस तरह दिखाए जाते हैं

ऑनलाइन विज्ञापन दिखाए जाने के दो तरीके मुख्य हैं पहला तो Contextual advertising (प्रासंगिक विज्ञापन) और दूसरा Behavioral targeting (स्वभावजन्य लक्ष्य)

Contextual advertising को कुछ यूँ समझिए कि कोई टीवी सीरियल अगर बच्चों पर केंद्रित कर दिखाया जा रहा तो उसमें आने वाले विज्ञापन में बच्चों की रुचि वाले उत्पाद की भरमार होगी. जैसे कॉम्प्लान, कैडबरी, टूथपेस्ट, बिस्कुट वगैरह. या फिर किसी विषय पर कार्यक्रम चल रहा हो, जैसे कि यात्रा. तो विज्ञापन दिखाए जाएंगे किसी होटल के, सस्ते टिकट के, सूटकेस/ बैग के 🙂

ऐसा ही वेबसाईट्स पर ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए होता है. उदाहरण के लिए About.com की यह लिंक देखी जाए जिसमें Kids’ Lunch Box Favorites की बात की गई है. इस पर किस तरह के विज्ञापन है यह खुद ही देख लीजिए

गूगल ऐडसेंस उदाहरण

ऐसा ही कुछ इस लिंक पर देखा जा सकता है जिसमें धनिया पुदीना चटनी की विधि बताई गई है और विज्ञापन कौन से दिख रहे आप खुद देख लीजिए

गूगल ऐडसेंस

आपने देखा कि जो कुछ लिखा गया है उससे ही संबंधित विज्ञापन, गूगल का सर्वर उस स्थान पर दिखाना शुरू कर देता है जो विज्ञापन के लिए निर्धारित किया गया है वेबसाइट के मालिक द्वारा.

Contextual advertising के अंतर्गत दिखाए गए विज्ञापन पूरी तरह से उस ऑनलाइन लेख में लिखे गए शब्दों पर निर्भर है जिसे ‘देख-पढ़’ कर विज्ञापन-सर्वर यह निर्णय लेता है कि उसके पिटारे में इन शब्दों से संबंधित कौन सा विज्ञापन दिखाना है. और अगर एक ही शब्द से संबंधित बहुत सारे विज्ञापन है तो विज्ञापन-सर्वर उस विज्ञापन को प्राथमिकता देगा जिसको दिखाने लिए ऊंची बोली लगाई है विज्ञापन देने वाली कंपनी ने. यह कोई ज़रूरी नहीं कि कोई एक ही विज्ञापन हमेशा दिखे. अगले ही किसी पल अगर वह पृष्ठ दोबारा देखा जाए तो संभव है कोई और विज्ञापन दिखे.

Behavioral Targeting को समझना हो तो उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति कपड़ों की दुकान पर जाता है चारखाने की कमीज़ तलाशते तो सेल्समैन तरह तरह की डिज़ाइन और रूपरेखा की कमीज़ सामने कर देता है. ग्राहक को पसंद आए या ना आए लेकिन पास ही खड़ा कोई और एक चतुर सेल्समैन कुछ ही समय में भांप लेता है कि आपने किस कपडे को कितना छू कर देखा, कौन से ब्रांड पर ज़्यादा ध्यान दिया, किस तरह के कॉलर में ज़्यादा दिलचस्पी ली, बंदे को आखिर चाहिए क्या?

गूगल ऐडसेंस मायाजाल

Behavioral Targeting का मायाजाल

और फिर वह चतुर सेल्समैन चिपक गया किसी भूत की तरह, उस संभावित ग्राहक के साथ ! फिल्मी कहानी जैसे समझ लीजिए कि वह ग्राहक अगर कहीं अखबार उठा कर पढ़े तो उसमें एक पर्चा मिल रहा, उसकी पसंद के कपड़े, ब्रांड, कॉलर वाली कमीज़ के किसी ठिकाने वाली दुकान की इत्तेला देते हुए, वह कोई टीवी चैनल देखने लगे तो उसकी पसंद वाली कमीज़ पहने कोई मॉडल, कार ड्राइव करते दिखे टीवी विज्ञापन में, सड़क पर चहलकदमी कर रहा हो वो व्यक्ति, तो सामने की बड़ी सी होर्डिंग में उसकी पसंद दर्शाती कमीज़ पर किसी छूट का ऐलान दिखे 😀

अब गूगल ऐडसेंस की बात करें तो इंटरनेट पर आप किस वेबसाइट पर जाते हैं?, कौन कौन से पृष्ठ देखते हैं?, कितने समय तक देखते पढ़ते हैं?, कौन सी लिंक पर क्लिक करते हैं?, सर्च के सहारे किस चीज की तलाश करते हैं? पलक झपकते ही इन सब बातों का लेखा जोखा तैयार हो जाता है Browser Cookies के रूप में. और फिर, जब आप उसी ब्राउज़र में वेबसाईट पर लौट कर आते हैं या किसी और वेबसाईट पर जाते हैं तो वहाँ विज्ञापन देने वाले पहले से ही आपकी ‘हरकतों’ की Cookies फाइल लिए बैठे रहते हैं कि अब इसको इसकी रुचि के विज्ञापन दिखा ही दिए जाए. पट्ठा बच कर किधर जाएगा 😀

फिर क्या है! चाहे Contextual advertising का मायाजाल हो या Behavioral targeting चारा. इधर पाठक ने क्लिक किया उस ऑनलाइन विज्ञापन पर, उधर वेबसाईट मालिक के खाते में जमा हो गई कुछ रकम

गूगल ऐडसेंस की प्रक्रिया

गूगल, किसी भी ब्लॉग या वेबसाईट मालिक को मुफ्त ऐडसेंस खाता बनाने की सुविधा देता है. व्यक्ति को एक ऑनलाइन फॉर्म भर कर आवेदन करना होता है. व्यावहारिक तौर पर कुछ ही घंटों में स्वीकृति या अस्वीकृति की सूचना, आवेदन करते समय दिए गए ई-मेल पर आ जाती है.

स्वीकृत किए गए खाते में लॉगिन किए जाने पर विभिन्न आकार, प्रकार, रंग संयोजन वाले विज्ञापनों के डिजाईन तैयार किए जा सकते हैं और उसके परिणाम स्वरूप उत्तपन्न हुआ छोटा सा जावा स्क्रिप्ट कोड प्राप्त कर संबंधित वेबसाईट में डाल दिया जाता है.

गूगल ऐडसेंस हीट मैप

वेबसाईट में विज्ञापन किस जगह दिखाए जाएं इसके लिए एक स्थापित तथ्य है जिसका पालन करना बहुत लाभदायक होता है. इसे हीटमैप कहा जाता है. ऊपर दिए गए चित्र के अनुसार पाठक की निगाह लाल, नारंगी, पीले रंग के स्थानों पर क्रमश: सबसे अधिक, कुछ कम और बहुत कम पड़ती है.

google-adsense-approvalजैसे जैसे विज्ञापनों पर, पाठकों द्वारा किए गए वास्तविक क्लिक्स की संख्या बढ़ती है वैसे वैसे गूगल ऐडसेंस खाते में रकम इकट्ठा होते जाती है. जब यह 10 डॉलर पहुँचती है तब गूगल की ओर से एक PIN जारी किया जाता है. जो खाता धारक के डाक पते पर भेज दिया जाता है. इसकी सूचना खाते के कंट्रोल पैनल पर देखी जा सकती है. यह PIN किसी भी खाते के लिए एक बार ही जारी किया जाता है.

लिफ़ाफ़े में छपा हुआ PIN पाए जाने पर उसे खाते के कंट्रोल पैनल में निर्धारित स्थान पर प्रविष्ट किया जाता है. इस प्रक्रिया का मंतव्य यही जांच करने की है कि व्यक्ति का पता सही है या नहीं. और जो चेक भेजा जाएगा वह सही जगह पहुंचेगा ही.

जब खाते में 100 अमेरिकी डॉलर या इससे अधिक हो जाते है तो इसे भारतीय मुद्रा में बदल कर वेबसाईट मालिक के नाम का अकाउंट पेयी चेक, उसके डाक पते पर भेज दिया जाता है. जिसे संबंधित व्यक्ति अपने उसी नाम वाले बैंक खाते में जमा कर सकता है.

… और यह क्रम अगले 100 अमेरिकी डॉलर या इससे अधिक होने तक चलता रहता है.

गूगल ऐडसेंस प्रक्रिया


गूगल ऐडसेंस प्रक्रिया का Flow chart

… कुछ और बातें

गूगल ऐडसेंस से कमाई का ज़रिया इतना आकर्षक है कि बेहद मामूली व्यक्ति की बात छोडिए, बड़ी बड़ी कंपनियों की वेबसाईट्स इसके सहारे आमदनी बढाने में लगी हुई हैं. फिर चाहे वह समाचारपत्र -नवभारत टाइम्स हो, टीवी चैनल -आज तक हो या फिर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज !

भारत में, अपुष्ट जानकारी के अनुसार, गूगल ऐडसेंस से कमाई करने वालों की सूची में सबसे ऊपर हैं www.labnol.org वाले अमित अग्रवाल, जो एक महीने में 40, 000 डॉलर (25 लाख रूपए) कमाते हैं. पूरे विश्व की बात की जाए तो यह ताज़ www.ehow.com वालीं Courtney Rosen के सर पर है. वह एक महीने में 5,00,000 डॉलर (3 google-adsense-revenueकरोड़ रूपये) कमाती हैं. यह मज़ाक नहीं एकदम सच है.

लेकिन इतना आसान भी नहीं है ये. www.ehow.com के कुल 62,000 से अधिक पृष्ठ हैं जिन पर रोज़ाना 4 करोड़ से अधिक क्लिक्स होते हैं. www.labnol.org के कुल 9,000 से अधिक लिंक्स हैं जिन पर रोज़ाना 50 लाख निगाहें डालते हैं पाठक.

इंटरनेट पर बिखरी खबरें बताती हैं कि किसी लेख में कुछ विशेष शब्दों से संबंधित विज्ञापन पर पाठकों द्वारा एक बार ही क्लिक किए जाने पर गूगल ऐडसेंस वाले, वेबसाईट मालिक के खाते में एकमुश्त 150 डॉलर भेज देते हैं. विज्ञापन दर्शाने की रणनीति सटीक हो तो, इकलौता एक शब्द Insurance ही एक बार में करीब 55 डॉलर दिलवा सकता है.

गूगल ऐडसेंस जितनी रकम वेबसाईट मालिक को कमीशन के रूप में भुगतान करता है उससे कहीं ज़्यादा वह उस विज्ञापनदाता से प्राप्त करता है जिसने विज्ञापन दिया है. इसी गोरखधंधे के चलते 2013 कैलेण्डर वर्ष में गूगल को 55,51,90,00,000 डॉलर की आमदनी हुई है. मतलब 3,336,778,777,570 रूपये.

देखने में तो गूगल ऐडसेंस से कमाई करना बहुत आकर्षक लगता है लेकिन ऐडसेंस खाता बना लेने के बाद मेहनत बहुत करनी पड़ती है. पाठक आने बहुत ज़रूरी है, आते रहना ज़रूरी है. विज्ञापन ‘खींचने’ वाली उम्दा लेख सामग्री वाले पृष्टों की संख्या जितनी अधिक हो उतना अच्छा.

व्यक्तिगत तौर पर मैं इस काम को खेती-किसानी बागवानी सरीखा मानता हूँ. केवल बीज छिड़कना काफी नहीं. कैसी कतार बनाई जाए, पानी कब देना है, कितना देना है, कटाई छंटाई करनी पड़ती है, पशु पक्षियों से बचाव कैसे किया जाए आदि आदि. सारी मेहनत के बाद अगर मौसम खराब तो सब स्वाहा

कई बार गूगल एडसेंस खाता बिना सूचना के बंद भी कर दिया जाता है और पिछले भुगतान के बाद इकट्ठा हुई सारी आमदनी भी अदृश्य हो जाती है. ऐसा क्यों होता है जानने के लिए पढ़िए यह लेख

इंटरनेट से आमदनी संबंधित कुछ लेख यहाँ क्लिक कर पढ़े जा सकते हैं

इस लेख में गूगल ऐडसेंस की जानकारी सरसरी तौर पर ही दी गईं है कि किसी ब्लॉग/ वेबसाईट पर एक छोटा सा कोड डाल कर उस ब्लॉग का मालिक आमदनी कैसे कर सकता है . इसके अलावा भी बारीकियों वाले बहुत से तकनीकी विवरण है जिन पर विमर्श किया जा सकता है. उसके लिए तो ब्लॉग मंच पर आएं

मैंने सही बताया कि कुछ गड़बड़ कर दी?

© बी एस पाबला

गूगल ऐडसेंस क्या है और इससे कमाई कैसे होती है
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मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

गूगल ऐडसेंस क्या है और इससे कमाई कैसे होती है” पर 34 टिप्पणियाँ

      • बड़े भैया पाब्ला जी,
        बहुत समय के पश्चात् आपका इंटरनेट पर लेख गूगल ऐडसेंस से कमाई कैसे होती है यह पड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. सचमुच बहुत ही अच्छी जानकारी आपने यहाँ शेयर की है. इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई. जैसा मैंने आपके बारे में मैंने सुना था, उससे कहीं ज्यादा ज्ञानवान आपको पाया. ऐसे ही इसी प्रकार की जानकारियों से आप हमें अवगत करते रहें, जिससे हमें भी थोड़ा बहुत ही कुछ न कुछ कमाई होती रहे. क्या ब्लॉग लिखने से भी कुछ कमाई हो सकती है? कृपया इस सम्बन्ध में भी कुछ लिखने की कृपा करें. चूंकि कोई भी काम इतना आसान नहीं होता की सभी लोग इसके माध्यम से कुछ कमाई कर सके. फिर भी कोई कार्य इतना कठिन भी नहीं होता की उसे असंभव माना जा सके. बहरहाल आपका पूरा लेख बहुत ही अच्छा एवं जानकारियो से परिपूर्ण है. इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ. भविष्य में और अच्छी जानकारियो के इन्तेजार में-शिव कुमार देवांगन और मेरा इ मेल पता है-shivdewangan23@gmail.com

  1. बहुत ही सुन्दर और प्रभावी जानकारी

  2. ये तो समझ में आ गया कि मेहनत बहुत करनी पड़ती है, लेकिन क्‍या मेहनत करनी पड़ती है, यह शायद खुद करके देखने से ही पता चलेगा। वैसे हिंदी वालों को भी एडसेंस वाले एड देते हैं। मैं एक बार ले चुका हूं, लेकिन बाद में वह खात ब्‍लॉक हो गया था…
    टिप्पणीकर्ता Astrologer Sidharth Jagannath Joshi ने हाल ही में लिखा है: Planet, combination and Mental qualitiesMy Profile

    • Approve

      सही है, मेलोडी खाओ खुद जान जाओ

  3. श्री पाबला जी, आपका लेख काफी अच्छा लगा मगर तकनीकी जानकारी ज्यादा न होने के कारण और केवल हिंदी की जानकारी के चलते शायद मेरे लिए अनुपयोगी है. क्या हिंदी प्रेमी के लिए भी कुछ उम्मीदें है?

  4. लबनोल.ऑर्ग वाले अमित अग्रवाल जी आगरा के रहने वाले है और भारत के सबसे पहले प्रोफेशनल ब्लॉग्गर है !!!

  5. जब तक एडसेंस हिंदी भाषा को सपोर्ट नहीं करेगा, हिंदी वालों को उम्मीद नहीं ही करनी चाहिए. सबसे बड़ी समस्या तो तकनीक की है – एडवर्ड्स अभी भी हिंदी विज्ञापन दिखाने में सक्षम नहीं हो पाया है – टेस्टिंग तो पिछले आठ-दस वर्षों से चल रही है!!!
    अलबत्ता प्राइम एकाउंट होल्डर हिंदी साइटें जैसे कि वेबदुनिया, भास्कर आदि एडसेंस का बखूबी और भरपूर इस्तेमाल करती हैं, और एक पेज के छोटे से खबर को दस पेज में तोड़ कर दस पेज लोड कर भरपूर एडसेंसी कमाई का अवैध रास्ता अख्तियार करती हैं!
    टिप्पणीकर्ता रवि ने हाल ही में लिखा है: बस, टाकटाइम और डेटा प्लान का कोई जुगाड़ हो जाए…My Profile

    • Pleasure
      मैं भी मुस्कुराता हूँ एक पेज की छोटे सी खबर को दस पेज में तोड़ कर दस पेज लोड कर कमाई के रास्ते पर

  6. लेकिन भारतीयों के लिए इसकी अप्रूवल पाना बहुत कठिन है. 6 महीने के वेटिंग पीरियड का कोई तो तोड़ होगा पाबला जी?
    टिप्पणीकर्ता Nishant Mishra ने हाल ही में लिखा है: खुशी : HappinessMy Profile

    • Sad
      तोड़ तो है लेकिन भारतीय, जुगाड़ में ज़्यादा भरोसा रखते हैं

  7. आप ने सही जानकारी दी है, मुझे भी पिछले १ साल से इसका लालच पड़ गया है गूगल एडसेंस से अब तक १.५ लाख ले चूका हूँ | न किसी की उधारी और न किसी की चाकरी !!!

      • Smile

        जैसा कि लिखा ही हुआ है इस कड़ी में, बात Applications for participation in the (Adsense) program की है
        आप यहाँ दर्शाई गई भाषा के लिए आवेदन कीजिए , खाता बन जाए तो हिंदी में इसका जावा कोड प्रयोग कर लें

  8. पाबलाजी,
    नमस्कार
    आपका लेख हमेशा काम के होते है. मेरी रूचि यह जानने में है की ब्लॉग को भी यह लाभ मिल सकता है की नहीं.
    मनोज कुमार
    http//mpreporter.blogspot.in

  9. Smile

    ब्लॉग को भी यह लाभ मिल सकता है मनोज जी

    मेरा एक निष्क्रिय ब्लॉग देखिए http://janamdin.blogspot.com

    ऊपर नीचे निगाह दौड़ाईएगा

  10. मेरा एडसेंस खाता कभी अनसपोर्टेड भाषा कह कर तथा कभी insufficient content कह कर रिजेक्ट किया जा रहा है…

  11. जैसा कि लिखा ही हुआ है इस कड़ी में, बात Applications for participation in the (Adsense) program की है
    आप यहाँ दर्शाई गई भाषा के लिए आवेदन कीजिए , खाता बन जाए तो हिंदी में इसका जावा कोड प्रयोग कर लें
    खाताधारक हैं हम परन्तु इसका जावा कोड कैसे प्राप्त करे ?
    टिप्पणीकर्ता raghunath singh ranawat ने हाल ही में लिखा है: तनावMy Profile

    • Amazed
      ओह्ह! उन दिनों सफर पर रहने के कारण आपकी इस टिप्पणी पर निगाह ही नहीं पड़ी.

      अब तक तो समाधान हो गया होगा रघुनाथ जी?

  12. पाब्ला जी, आपका गूगल एडसेंस पर लिखा आलेख पढ़ने लगा, तो उसमे दिए लिंक, ” जब तक हमारा सुपुत्र, गुरुप्रीत था” की तरफ मुड़ गया. मन इतना द्रवित हुआ की फिर मूल आलेख पर नहीं लौट पाया. रेल की पटरियों पर बिखरे अपने जीवन को समेट कर आपने किस तरह अपने आपको जीवन की मुख्य धारा से जोड़ा होगा ये सिर्फ आप ही जान सकते हैं. अभी तक हम एक जिंदादिल और निस्वार्थ जानकारियां हिंदी में बाँटने वाले सरदार, बी इस पाबला को ही जानते थे.

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