गूगल ने हमारे बच्चों पर निगाह रखी और घर पहुंचने में मदद की

जब उत्तर भारत की यात्रा पर गए हमारे सुपत्र गुरुप्रीत, द्विवेदी जी के सुपुत्र वैभव और अन्य मित्रों के साथ, जयपुर के पास स्थित भारत के सबसे डरावने स्थल के नाम से मशहूर भांगड़ के खंडहरों में गहराते अंधेरे के भीच भटक गए तो काफी समय तक स्वयं कोशिश करते रहे बाहर निकलने की। सहायता मिल नहीं रही थी। हार कर उसने मुझे फोन किया। मैं यहाँ, भिलाई में अपने कंप्यूटर पर उसकी लोकेशन देख पा रहा था। मैंने उसे अपने मोबाइल का उपयोग करने की याद दिलायी और बात बन गई।

यात्रा पर निकालने के पहले एक स्वाभाविक चिंता होने के नाते, मैंने उसे अपने नए-नवेले Nokia E51 पर गूगल के Latitude को डाउनलोड कर लेने की सलाह दी थी। जो उसने मानी भी और स्थापित कर सफलतापूर्वक कार्य करने की सूचना भी दी। गूगल मैप्स (Google Maps) तो पहले से ही उसने डाला हुया था।उस की इस 10 दिनों की यात्रा के दौरान, मैं उसे और उसकी ट्रेन पर निगाह रख पा रहा था।

भांगड़ में जब उसने अपनी ख़ुद की लोकेशन, मोबाईल पर देखी तो उसने गूगल मैप्स का सहारा लिया। भांगड़ से जयपुर पहुँचने के लिए दिशा निर्देश देते, मोबाइल को 3 सेकेण्ड भी नहीं लगे। अब ये महाशय एक बाइक पर पीछे बैठे बताते जा रहे थे और सामने वाला वैसे ही मुड़ते चले जा रहा था। साथ ही साथ मोबाइल में ही स्थित, उपग्रह की आँख, GPS के सहारे अपनी लोकेशन का जायजा भी किया जाता रहा। एक बार जयपुर की सीमा में आए तो बाक़ी राह आसान हो गई।

मैं कभी उस क्षेत्र में नहीं गया, किंतु जैसा गुरुप्रीत ने बताया, मुझे लगा कि वाकई में वे सभी नर्वस हो गए होंगे और स्थिति भयावह रही होगी। लेकिन गूगल की तकनीक से वे यथासमय उबर गए।

मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि हर घंटे फोन कर के पूछा जाता है कि इस वक्त कहाँ हो! तकनीक के इस युग में इस बार भी गूगल ने सबका काम आसान कर दिया है। गूगल लैटिट्यूड दरअसल गूगल मैप्स का नया अनुप्रयोग है। गूगल ने व्यस्त जीवनशैली को देखते हुये यह नई सुविधा दी है ताकि माता-पिता दूर रहते हुये भी अपने बच्चों पर निगाह तो रख सके। रात में उनका लाडला/लाडली कहां जा रहा/रही है, कितने बजे लौटेगा/लौटेगी, इस वक्त कहाँ है, सब पर पैनी निगाह रखी जा सकती है। गूगल की इस सुविधा को मोबाइल फोन या कंप्यूटर में लेकर आप अपने बच्चों, दोस्तों, परिजनों या सहकर्मियों की भौगोलिक स्थिति का पता लगा सकेंगे।

‘लैटीट्यूड’ नाम की इस सुविधा के जरिए कोई भी एक बटन दबाने भर से, उपयोगकर्ता स्वयं गूगल मैप में अपनी लोकेशन का अंदाजा लगा सकता है। उपयोगकर्ता इस सुविधा को ऑफ मोड में रख सकते हैं या फिर चुनिंदा मित्रों को इस के दायरे में आने की इजाजत दे सकते हैं। यदि उपयोग करने वाले ने अपने उस परिचित का फोटोग्राफ अपने फोन में डाल रखा है तो वह लोकेशन के साथ उस परिचित का फोटोग्राफ भी देख सकता है।

और हाँ, गूगल अपने ग्राहकों की आवाजाही का रिकॉर्ड भी अपने पास नहीं रखेगा। गूगल के कंप्यूटर में केवल आखिरी लोकेशन की पूछताछ का रिकॉर्ड दर्ज होगा। हालांकि इस फीचर से उपभोक्ता की निजता के हनन जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं लेकिन अपनी ओर से गूगल ने पूरे एहतियात बरते हैं।

गूगल लैटिट्यूड (Google Latitude) के जरिये आप न सिर्फ अपने परिचितों की लोकेशन का पता लगा सकते हैं, बल्कि यदि उनसे मिलना चाहते हैं तो यह भी आसान है। लैटिट्यूड आप को बताएगा कि आप अपने किसी परिचित तक पहुंचने के लिए किस रूट यानी रास्ते का इस्तेमाल करें। यदि किसी ने पहले से अपने मोबाइल में गूगल मैप्स डाउनलोड कर रखा है तो उसे गूगल मैप्स को अपग्रेड करना होगा। ऐसा करने से उसे गूगल लैटिट्यूड की सेवा हासिल हो जाएगी। यदि कोई उपयोगकर्ता पहली बार गूगल मैप्स डाउनलोड कर रहा है तो उसे खुद-ब-खुद इसकी सर्विस मिलने लगेगी। यह ऐप्लिकेशन गूगल के फोन G1, ज्यादातर कलर ब्लैकबेरी फोन, ज्यादार विंडोज मोबाइल डिवाइस और कुछ दूसरे स्मार्ट फोन पर काम करता है।

गूगल ने यह सर्विस थोड़ी देर से शुरू की है। loopt.com और where.com सहित कई कंपनियां लोकेशन आधारित सेवा पहले से मुहैया करा रही हैं। ये कंपनियां बेसिक मोबाइल से लेकर हाई एंड मोबाइल तक के लिए इस तरह की सेवा मुहैया करा रही हैं। ये अनुप्रयोग जीपीएस सैटलाइट, वाई-फाई या फिर सेल्युलर टावर के जरिये उपयोगकर्ता को टटोलते हैं।

पर गूगल लैटिट्यूड की खासियत यह है किआपकी इजाजत के बगैर कोई भी आप के लोकेशन का पतानहीं लगा पाएगा। आप भी यदि यह मुफ्त की सुविधा प्राप्त करना चाहते हैं तो गूगल लैटीट्यूड की साईट देखिये।

ठीक है, हमें ना बतायें कि इस सुविधा का आप क्या करेंगे, लेकिन इसके कुछ और रहस्य, तरकीबें जाननी हों तो बतायेंगे ना?

गूगल ने हमारे बच्चों पर निगाह रखी और घर पहुंचने में मदद की
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15 comments

  • विजय वडनेरे says:

    पाबला जी: गुगल मैप्स और लैटिट्युड कैसे इंस्टाल करें और कैसे इस्तेमाल करें, इस बारे में भी एक पुरी विस्तृत पोस्ट की दरकार है अब आपसे।

  • राजीव जैन Rajeev Jain says:

    पोस्‍ट अच्‍छी जानकारी परक है

    शुक्रिया

    मैं भी कोशिश कर रहा हूं सीखने की कि कैसे होगा

    वैसे यह जगह भानगढ है हिंदी में

  • संगीता पुरी says:

    बहुत जानकारी भरा आलेख है … इस तकनीक के बारे में सुना तो था … पर अभी तक उपयोग नहीं किया है।

  • Gagan Sharma, Kuchh Alag sa says:

    वाह जी वाह,
    देखते भी रहो और पता भी न चले कि देख रहे हो।

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    आप ने यह राज जाहिर किया। वैभव ने तो मुझे कुछ भी उल्लेख नहीं किया। हाँ, भांगड़ जाने की बात जरूर बताई थी। वहाँ रात्रि में जाना मना है। लोकोपवाद यह है कि रात्रि को वहाँ भूत मिलते हैं। ये लोग भूत तलाश करने गए थे। लेकिन इन्हें कोई भूत नहीं मिला। कहीं यह भी तो गूगल महाराज का ही चमत्कार तो नहीं था। कल से पता लगे कि भूत होते तो हैं पर जिन के पास गूगल लेटीट्यूड की सुविधा होती है उन्हें दिखाई नहीं देते।

  • Ratan Singh Shekhawat says:

    बहुत अच्छी तकनीकी जानकारी देने के लिए आभार !

  • Anil says:

    बहुत अच्छी जानकारी। जब मैं ऐसा कोई फोन लूंगा जिसमें अंतरजाल के अनुप्रयोग चल सकें, तब मैं भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकूंगा। तब तक ऐसे ही काम चलाना पड़ेगा! धन्यवाद!

  • खरी-खरी says:

    माननीय पाबला जी, आप किसी उत्पाद का इस तरह से विज्ञापन करते है तो क्या आपको पैसे मिलते है? यदि हाँ तो बताये। हम भी इस बारे मे बहुत कुछ लिख सकते है। और यदि नही तो भी बताये क्योकि मुफ्त मे पब्लिसिटी करके आप उत्पाद का करोडो का फायदा कर रहे है और आपको कुछ नही मिल रहा है। मुझे लगता है कि बहुत से पुराने ब्लागर इस तरह बहुत कमा रहे है। फिर नये ब्लागर को क्यो न पैसे मिले?

  • PD says:

    आया था कुछ और लिखने मगर खरी-खरी जी की बात पढ़कर अब कुछ और ही लिख रहा हूं..

    @ खरी-खरी जी – क्या आपको ऐसे ही हर किसी पर प्रश्न उठा कर और हर बात पर असंतुष्टी जता कर प्रसिद्धी पाने का शौक है क्या?(क्षमा करें, मैंने आपका ही लहजा आप पर प्रयोग किया है..) और अगर आपको लगता है कि गूगल को ऐसे पोस्ट से फायदा होता होगा और इस कारण वह लोगों को पैसा देता होगा ऐसे पोस्ट के लिये तो हमें भी बतायें.. मैं हर दिन ऐसे तकनीकी जानकारी से भड़े पोस्ट लिखने को तैयार बैठा हूं..
    मेरे हिसाब से गूगल ऐसे मुकाम पर है कि उसके बारे में कोई लिखे या ना लिखे, उसे कोई फर्क नहीं परने वाला है.. वह लोगों को पैसा बांट कर पोस्ट लिखवाये उससे अच्छा वह कुछ लोगों को नौकरी पर रख लेगा ऐसे पोस्ट लिखने के लिये.. गूगल में मेरे भी कुछ मित्र काम कर रहे हैं, और कम से कम ऐसी कोई जानकारी उनके पास तो नहीं है..

    @ पाबला जी – वैभव ने मुझसे भी यह किस्सा कहा था मगर गूगल के उपयोग की बात गोल कर गया था..

  • anitakumar says:

    लो जी गुरुप्रीत ने लेटिटूड का लिंक भेज कर जोइन होने का न्यौता तो दिया था मैने कहा बच्चा मैं क्या करुगीं इसका , वो चुप रहा। हम जोइन तो हो गये लेकिन उसने हमें ये किस्सा नहीं सुनाया।
    अब जा के समझ आया कि इसका क्या फ़ायदा है। अब ये बताये कि इसे मोबाइल पर कैसे डाले। मेरे पास नोकिया -एन96 है।

  • भुवनेश शर्मा says:

    मान गये वाकई कमाल की चीज है…..एक और विस्‍तृत पोस्‍ट का इंतजार 🙂

  • भुवनेश शर्मा says:

    आपसे एक और गुजारिश है कि अपने आर्काइव को ठीक कर दें…ये अब भी सितंबर 2005 की पोस्‍ट ही दिखाता है…नयी पोस्‍टों की कोई सूचना नहीं देता

  • बी एस पाबला says:

    भुवनेश जी, आपने ‘यादें’ शीर्षक देख लिया है।

    यादें तो होती ही पुरानी हैं 🙂
    वैसे उसी शीर्षक के नीचे यदि जायें तो सम्पूर्ण पोस्टें समेटे हुए वर्ष प्रदर्शित हो रहें हैं, उन्हें खोलते जाईये। फिर देखिये।

    5 एकदम नई पोस्टें, दायीं ओर ‘कल की ही तो बात है’ के अंतर्गत देखी जा सकती हैं।

    सरप्राईज़ पोस्ट के लिए बांयीं ओर ‘क्या आपको मालूम है?’ के अंतर्गत ‘इन राहों से हम गुजर चुके’ पर क्लिक किया जा सकता है।

  • काजल कुमार Kajal Kumar says:

    भारत में इस सबकी ज़रूरत ही क्या है हर चार कदम पर तो दस आदमी रास्ता बताने वाले मिलते हैं 🙂

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