घर में गैस रिसाव, तकनीक से बचाव

घरेलू मोर्चे पर गैस रिसाव से होने वाली घातक दुर्घटनाओं से बचने के लिए बाज़ार में उपलब्ध सेंसर और डिटेक्टर की जानकारी

सुबह तीन बजे अगर किसी नज़दीकी की कॉल आ जाए तो दिल धड़कना स्वाभाविक है. कहावत में कहा जाए तो मोबाइल पर उस दोस्त का नाम देख कलेजा मुंह को आ गया. उनींदी आँखों से नाम पढ़ झट से कान से मोबाइल लगा चिल्लाया मैं ” ओए! क्या हुआ बे?”

उधर से एक थकी बुझी सी आवाज़ आई “यार! तेरी वज़ह से आज हम बच गए”. मैं हैरान “यार लेकिन हुआ क्या?”

तब तक फोन भाभी के हाथ में था “भईया! इनको खाँसी थी बहुत. थोड़ी देर पहले पानी गरम करने गई तो हड़बड़ी में गैस खुला छोड़ आई. खिड़की से आती हवा से लौ बुझ गई और गैस फैलने लगी. तभी आपकी मेहरबानी से लगाए गए गैस अलार्म ने चीख पुकार मचा दी. वो तो गनीमत थी दो-तीन मिनट हुए होंगे नहीं तो ना जाने क्या होता.

बात ख़त्म करते करते रूआंसी हो गई थी भाभी. मैंने दिलासा दी कि अंत भला सब भला.अगली बार ऐसी गलती ना हो.

अगले दिन शुक्ला जी मिले और हाथ मिला, हैण्डपंप सरीखे हिला कर शुक्रिया अदा किया और ऐसी ही बातें आइंदा बताते रहने के लिए ‘धमकी’ दी.

दरअसल हुआ यह था कि जब भिलाई इस्पात संयंत्र में हालिया गैस रिसाव हुया तो तकनीकी रूझान वाले मित्रों में बहस छिड़ी इससे होने वाले नुकसान और बचाव की. जब मैंने इंटरनेट पर खोजबीन की ऐसे कई सस्ते उपाय नज़र आये जो ऐसी घातक परिस्थितियों के पहले ही चेतावनी दे सकते हैं.

दोस्तों के बीच इस पर चर्चा हुई. मैं भूल गया लेकिन शुक्ला जी के साथ हुए हादसे के बाद याद आया कि इस पर लिखा जाए.

एलपीजी गैस रिसाव

बात घरों की हो तो सबसे बड़ा गैस रिसाव का खतरा है एलपीजी का, खाना बनाने वाली गैस का. कभी रेग्युलेटर का ढंग से काम ना कर पाना, कभी पाइप में क्रैक हो जाना, कभी हवा से लौ का बुझ जाना इस खतरनाक गैस को फैला सकता है जो अंतत: प्राणघातक हो सकता है

गैस रिसाव यंत्र

घरेलू गैस के रिसाव की चेतावनी देने वाले कई ऐसे उपकरण बाज़ार में मिलते हैं जिन्हें गैस सिलेंडर या बर्नर से जोड़ने की कोई ज़रुरत नहीं. ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेज़न पर घरेलू बिजली से चलने वाला गैस अलार्म 900 ₹ में मिल जाता है. करना कुछ नहीं है बस दिए गये स्क्रू से कस दीजिये दीवार पर और बिजली के प्लग में लगा दीजिये तार. अगर कुछ प्रयोगवादी हैं तो केवल इसकी असेंबल्ड पीसीबी लीजिये ई-बे इंडिया पर 400 ₹ में और जैसा मर्जी उपयोग में लायें

आम तौर पर एक पाव मिठाई के डब्बे जैसे आकार का यह उपकरण अगर दूर कहीं बनी रसोई में आपको सुविधाजनक नहीं लग रहा, तो वायरलेस उपकरण भी मिलता है जिसका एक हिस्सा लगाया जाए गैस लीकेज वाली जगह पर तो उसका दूसरा हिस्सा 100 मीटर दूर तक रखा जा सकता है. अब या तो अपने पास रखें या फिर ऐसी जगह पर जहाँ सब सुन सके इसकी तीखी आवाज़.

यह वायरलेस गैस सेंसर भी अमेजन की वेबसाइट पर 2000 ₹ में मिलता है

कार्बन मोनोऑक्साइड रिसाव

यह तो बात हुई घरेलू गैस की. कई बार ऐसा भी होता है कि ठण्ड के दिनों में हम लकड़ी की आग/ अंगीठी हम अपने कमरे में रख लेते हैं और फिर उससे उत्त्पन्न होने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड की अधिकता से बेहोशी छाने लगती है या निद्रावस्था में ही मृत्यु हो जाती है. ऐसा ही कुछ गैरेज वगैरह में पेट्रोल-डीज़ल की गाड़ियों के चलते इंजिन वाले एग्जास्ट से भी होता है.

गैस रिसाव

इसके लिए 3 AA सेल से चलने वाला डिजिटल डिटेक्टर मिलता है बाजार में, यह लगातार दर्शाता भी रहता है कि कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर कितने PPM है. ऑनलाइन यह अमेज़न इंडिया पर 2000 ₹ के आसपास मिल जाता है

धुएँ, आग से बचाव

अब एक दूसरे तरह की परिस्थिति पर नज़र डाली जाए. ना तो गैस खुली रह गई और ना ही किसी तरह की तंग जगह है. गैस चूल्हे पर दूध रखा भूल कर ताला बंद कर चलते बने बाजार. इधर दूध उबल उबल कर खोवा बनने के बाद कोयला बन गया. पतीली जल गई, सारी रसोई धूएँ से भर गई. पता तब चला जब किसी ने खबर दी घर से धुयाँ निकलने की. जब तक कुछ कर पाए तब तक तो तापमान बढ़ते गया और आग लग गई.

ऐसे मौकों के लिए स्मोक/ फायर डिटेक्टर आते हैं बाजार में. जो धुएँ की उपस्थिति और आग को समझ कर चीख पुकार मचा देते हैं. 900 ₹ से 1600 ₹ तक विभिन्न प्रकार के यह डिटेक्टर अमेज़न इंडिया सहित कई वेबसाइट्स पर मिल जाते हैं.

इस तरह के डिटेक्टर/ सेंसर, सिलेंडर से कुछ दूरी पर हो तो बेहतर लेकिन कभी भी एग्जास्ट फैन/ खिड़की/ दरवाज़े के पास नहीं लगाना चाहिए. एलपीजी जैसी भारी गैस के लिए इसे फर्श से लगभग एक फुट की ऊंचाई पर लगा होना चाहिए और हाइड्रोजन जैसी हलकी गैस या धुएँ के लिए इसे छत से एक-दो फुट नीचे लगा होना चाहिए.

लगभग सभी सेंसर/ डिटेक्टर लो बैटरी इंडिकेशन, टेस्ट बटन और धूल से बचाव की सुविधा के साथ आते है. लगभग सभी के साथ दीवार, छत पर लगाने के लिए स्क्रू और निर्देश पुस्तिका के साथ दिए जाते हैं.

जब यह सारी जानकारियाँ दोस्तों के बीच आई तो ठहाकों के साथ पूछा गया कि और कौन कौन से सेंसर आते हैं यार? मैंने भी मुस्कुरा कर कहा कि इनका मामला अगले किसी लेख में लिख दूँगा.

इतने सस्ते उपाय सही नहीं है घर की सुरक्षा के लिए?

© बी एस पाबला

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