गोलकोंडा में बी एस पाबला

भूतों के डेरे वाले गोलकोंडा में बिताया हमने वक्त

अपनी कार चलाते हुए, भिलाई से बैंगलोर जाते, राह में हैदराबाद स्थित गोलकोंडा के किले की सैर और राह की घटनाओं का चित्रमय संस्मरण

गोलकोंडा किला देखने का फैसला तब हुआ जब मैं और ललित शर्मा जी अपनी स्मार्ट कार में बैंगलोर की यात्रा पर जाते, 6 मार्च 2016 की रात, हैदराबाद के होटल में रुके.

भोजन के बाद मैं गूगल मैप्स पर देख रहा था कि अगली सुबह  कितने बजे चला जाए, जिससे बैंगलोर पहुँचते अँधेरा  ना हो जाए. तभी गूगल नाऊ ने सुझाया कि हैदराबाद में ही  गोलकोंडा का प्रसिद्द किला आपकी राह में महज 40 किलोमीटर दूर ही है, देख लिया जाए.

इससे पहले ललित जी ने सुझाव दिया था कि चारमीनार चला जाए, लेकिंमैने नकार दिया कि सुबह सवेरे निकलना है तो शहर के बीचोबीच ट्रैफिक में आते जाते कई घंटे लग जायेंगे. लेकिन फिर चारमीनार को वापसी में देखने की योजना पर हम दोनों की सहमति  बन गई.

होटल स्टाफ से पता किया गया तो पता लगा कि पर्यटकों के लिए गोलकोंडा का किला सुबह साढ़े नौ बजे खुलता है. तो तय हुआ कि अगली सुबह 7-8 बजे होटल छोड़ दिया जाए और गोलकोंडा किला देख बैंगलोर की तरफ रवानगी ली जाए.

बिस्तर पर बैठे बैठे ही मैंने टीवी लगा लिया, जिसमें अधिकतर दक्षिण भारतीय चैनल ही दिखे. हिंदी चैनल्स के लिए ना जाने कितने ही सैकड़ों चैनल फलांगने पड़े. यहीं मुझे पता चला कि ‘कलर्स’ चैनल भी अब सभी भारतीय भाषायों में है, इससे पहले तो मुझे ईटीवी की ही विशेषता पता थी.

गोलकोंडा किला

टीवी चैनल बदलते मैं यह याद करने की कोशिश करता रहा कि इस गोलकोंडा किले के बारे में स्कूल की किताबों में क्या कुछ लिखा था? कमबख्त इतना ही याद आया कि इसे तेरहवीं शताब्‍दी में काकतिया राजवंश ने बनाया था.

सिंघम रिटर्न्स में गोलकोंडा
हिंदी फ़िल्म ‘सिंघम रिटर्न्स’ के एक गीत में गोलकोंडा किला
गोलकोंडा में फ़िल्म वांटेड का दृश्य
हिंदी फ़िल्म ‘वांटेड’ के एक लंबे दृश्य में गोलकोंडा किला
हीरो हीरालाल में गोलकोंडा
हीरो हीरालाल में गोलकोंडा

अजय देवगन – करीना कपूर अभिनीत ‘सिंघम-2’ के एक गाने की शूटिंग के कुछ दृश्यों को भी यहाँ फिलमाया जा चुका. सलमान खान की ‘वांटेड’ के खून-खराबे वाले दृश्य को भी गोलकोंडा किले में शूट किया गया. नसीरुद्दीन शाह वाली ‘हीरो हीरालाल’ के भी कई दृश्य यहीं के हैं. ‘द डर्टी पिक्चर’ के गीत इश्क सूफियाना और बॉबी जासूस के गीत ‘तू.’.की शूटिंग भी गोलकुंडा किले में ही हुई है.

एक वेबसाइट पर लिखा था कि हैदराबाद की रामोजी राव फिल्म सिटी के करीब होने के कारण इस किले में शूटिंग करना सुविधाजनक होता है. हालांकि, रात में आम लोगों को किले में जाने की इजाजत नहीं है,मगर फिल्मों की यूनिट को रात में भी इस किले में शूटिंग की इजाजत मिल जाती है.

गोलकोंडा के भूत

यह पढ़ते ही मुझे याद आ गया कि गोलकोंडा के इस किले को भारत की दस सबसे डरावनी सूची में रखा गया है. कई बार इधर उधर पढ़ चुका था  कि हैदराबाद के इस गोलकुंडा  किले में इसके कई पूर्व शासकों की आत्माएं भटकती रहती हैं. कई लोगों ने रात के समय इस किले से अजीबोगरीब आवाजें आने का दावा किया है. कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि इस किले में रानी तारामती की आत्मा आज भी नृत्य करती हैं. वगैरह… वगैरह…

इतना याद आते ही मैं रोमांचित हो उठा. बस यही सोचता रहा कि Wow! कोई भूत दिखेगा क्या दिन के उजाले में

विश्व प्रसिद्द कोहिनूर हीरा भी गोलकोंडा की हीरा खदानों से मिला था. जो अब ब्रिटेन के कब्जे में है. कोशिशे तो बहुत की जा रहीं उसे वापस लाने में लेकिन सफलता कब मिलेगी पता नहीं. इसे गोलकोंडा ना कह गोलकुंडा भी कहते हैं, गोल्लकोंडा  भी.

यह सब सोचते कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला. सुबह फटाफट तैयार हो हमने 7:30 पर होटल छोड़ दिया. कुल भुगतान किया गया 1260 रूपये का. 1200 किराया और 60 लक्जरी टैक्स. वैसे यह 24 घंटे का हिसाब किताब है.

गोलकोंडा की राह में

मैंने अपनी कन्या नेविगेटर को निर्देशित किया गोलकोंडा फोर्ट के लिए और हमारी स्मार्ट कार चल पड़ी सिक्स लेन वाले नेहरू आउटर रिंग रोड पर. इस राह पर चलते ही एक टोल प्लाजा मिला जिसने हमें एक पर्ची दी लेकिन पैसे नहीं लिए! कहा बाद में दे देना. वो तो तब पता चला जब नानकरामगुडा टोल पर  रोक 30 रूपए ले लिए गए.

गोलकोंडा की राह

लंगर हाउस रोड पर ही सड़क किनारे, मोपेड पर तीन चार बड़े बड़े डब्बे रखे एक बन्दा खडा था और उसके पास कुछ लोग खाते पीते दिखे. कार की गति कम कर देखा तो इडली बड़ा वाला प्रतीत हुया. रूक कर, उतर कर यह बात पक्की हो गई.

मैंने और ललित जी ने भरपेट इडली और उत्तपम्म खाए. सच बताऊँ!? इतनी स्पंजी और स्वादिष्ट इडली मैंने कभी नहीं खाई. साथ मिली सांबर और चटनी के तो क्या कहने

यहाँ से आगे बढ़ मैंने पेट्रोल डलवाया 1,000 रूपये का, 60.47 की दर से 16.53 लीटर.

हमारी कन्या नेविगेटर ने जहां हमें रूकने का संकेत दिया, वह गोलकोंडा किले के प्रवेश द्वार के निकट ही सड़क किनारे एक खुली पार्किंग थी. एक बंदे ने बाद में पैसे लेने का इशारा किया तो हम गाड़ी लॉक कर चल पड़े गोलकोंडा के प्रवेश द्वार तरफ.

गोलकोंडा टिकट काउन्टर

गोलकोंडा प्रवेश टिकट

टिकट ले हम करने लगे किले की सैर. धीरे धीरे आगे बढ़ते, हम दोनों चलते चले गए किले के ऊपरी हिस्से की ओर. फोटो भी साथ साथ लेते रहे.

एक ऊंचाई पर मेरा गला सूखने लगा तब ध्यान आया कि पानी की बोतल लाना भूल गया मैं. ललित जी को मैंने कह दिया कि अब और ऊपर नहीं चढ़ने का मन नहीं. वे मुझे वहीँ रूकने की सलाह दे आगे बढ़ गए. मैं भी वहीँ समय गुजारते फोटो लेते रहा.

गोलकोंडा
गोलकोंडा किले के टिकट घर से प्रवेश द्वार की ओर
गोलकोंडा
मुख्य दरवाजे के पहले उकेरा गया गोलकोंडा किले का संपूर्ण मानचित्र
गोलकोंडा
लोहे का बना मुख्य द्वार. हाथियों की मार से बचने बड़ी सी कीलें भी
गोलकोंडा
मुख्य द्वार की ओर तनी तोप
गोलकोंडा किला
गोलकोंडा किले के ऊपरी हिस्से की ओर जाते ललित शर्मा जी
गोलकोंडा
गोलकोंडा किले से हैदराबाद शहर का एक दृश्य
गोलकोंडा
गोलकोंडा किले में एक सेल्फी

… और फिर ना जाने मैंने कितने ही फोटो लिए. वे सारे चित्र इस लिंक पर क्लिक कर देखे जा सकते हैं.

इसी बीच 10 बजे के आसपास हैदराबाद निवासी मशहूर ब्लॉगर विजय सप्पत्ति जी की कॉल भी आई. आवाज में खुशी झलकती साफ़ महसूस कर रहे थे मेरे कान. उन्होंने अपने निवास पर आमंत्रित किया लेकिन मैंने उन्हें लौटते हुए मिलने का वादा किया.

सुनसान जगहों पर भूत तो नहीं दिखे लेकिन युगल खूब दिखे आपस में बतियाते

गोलकोंडा से रवानगी

जब हमने किला छोड़ा तब करीब साढ़े दस  बज रहे थे. बाहर ही एक नींबू पानी वाला था जहाँ बैठ सुस्ताते मैंने दो गिलास मसाला नींबू सोडा पी डाला. ललित जी एक दृश्य देखते ही कह उठे ‘धन्य है तू सोडे वाले’

गोलकोंडा

चलते चलते हमने उस दिन, गोलकोंडा में आख़िरी सेल्फी ली और 11  बजे चल पड़े बैंगलोर की ओर. वहां जो होटल, हमारे लिए  बिटिया ने बुक करवाया हुआ था उसकी दूरी रह गई अब 580 किलोमीटर.

हमारी कन्या नेविगेटर का कहना था कि वहां पहुँचते रात के 10 बज जायेंगे!

गोलकोंडा

महबूबनगर जिले के फारुखनगर पहुँचते ही एक होटल दिखा. जहाँ चाय पी हम आगे बढे.

120 की स्पीड से कार चलाते, सोलिपुर सर्विस रोड पर मुझे कुछ ऐसा नजर आया कि ललित जी को देखने का इशारा किया. उन्होंने जब तक कार रोकने को कहा तब तक तो 500-600 मीटर आगे जा चुका मैं.

गोलकोंडा के बाद

यहाँ एक चबूतरे पर भारत के कई महापुरुषों की मूर्तियाँ  एक साथ, एक ही अंदाज में खडीं की गईं थी, जो कि दूर से ही आकर्षित करती हैं.

ललित जी जब तक आगे बढ़ अलग अलग कोणों  से इन सबकी तस्वीरें लेने गए, तब तक हाईवे पेट्रोलिंग जीप मेरे पास आ रूकी. उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? मैंने बताया कि उधर फोटो लेने गए हैं! उनमें से एक बोल पडा कि हिव्य पर ऐसे गाड़ी खड़ी  करना मना है, तुरंत ही चल दो. मैंने हॉर्न बजा बजा ललित जी को  वापस बुलाया.

आगे बढ़ते ही हमें भूख लग आई. ललित जी ने एक ऐसा होटल दिखाया जहाँ जलेबियों जैसे अक्षरों में कुछ लिखा था लेकिन खाने पीने की चीजों के चित्र भी दिखे. मैंने गाडी मोड़ी  और मुंह हाथ धो जम गया कुर्सी पर.

गोलकोंडा बाद भोजन

रोटी जरूर ताजी आती रही लेकिन सेल्फ सर्विस के अंदाज में हमारे सामने दाल सब्जी से भरे स्टील के जगनुमा बर्तन रख दिए गए. चखने के बाद जो जितना पसंद हो ले लिया जाए.

स्वादिष्ट भोजन से तृप्त हो 7 मार्च की उस दोपहर, कार को फिर दौड़ा दिया हैदराबाद  – बैंगलोर हाईवे पर. जो मूल रूप में नेशनल हाईवे 7 है और एशियन हाईवे  43 भी कहलाता है.

गोलकोंडा

गोलकोंडा

गोलकोंडा

गोलकोंडा

इस बीच गुणा भाग किया तो पता चला कि भिलाई से चलने के बाद, अब तक तीन अलग अलग जगहों से 3000 रूपयों का 50 लीटर पेट्रोल डलवा चुका.

गोलकोंडा से बैंगलोर

फिर तो रायकल टोल पर दोपहर 12:20 बजे 58 रूपये, 1:30 बजे 90 रूपए, पुल्लुर में 3:20 बजे 90 रूपये, अम्काथादु में 4 बजे  90 रूपए, कासेपल्ली में 4:35 बजे 85 रूपए, मरुर में 5:20 बजे 95 रूपये,  बागेपल्ली में 6:30 बजे 80 रूपए टोल टैक्स देते हम शाम  7:30 बजे अनंतपुर होते जा पहुंचे बैंगलोर से पहले चिकबल्लापुर.

जहाँ हाईवे के किनारे एक चकाचौंध साफ-सुथरा रेस्टारेंट दिख रहा था, होटल प्रणव.

गोलकोंडा से बैंगलोर

हमने इडली- बड़ा संग चाय की चुस्कियां लीं, कुछ ठहाके लगाए, कुछ फोटो खिंचवाई.

बैंगलोर शुरू होते ही 8 बजे एक टोल प्लाजा पर 80 रूपए का भुगतान किया और इस महानगर की गाड़ियों के भागते दौड़ते रेले के बीच अपनी कार भी शामिल कर दी. राह में कई बार ऐसा ट्रैफिक जाम मिला जहाँ गाड़ियों के समुद्र में कई कई मिनट कार को चुपचाप खड़ा कर एसी की आती ठंडी हवा का मजा लेते रहे.

फिर आखिर में वह समय आया जब  9 किलोमीटर लंबा एक ऐसा एलिवेटेड एक्सप्रेस वे मिला, जिस पर उड़ने के पहले रात 9 बजे मेरी कन्या नेविगेटर ने घोषणा कर दी कि आप अपनी मंजिल पर 9:25 बजे पहुँच जायेंगे.

उस अनंत दूरी के लग रहे पुल से उतरते ही एक और टोल प्लाजा दिखा. भुनभुनाते हुए मैंने कार रोकी तो कर्मचारी ने इशारा किया कि हो गया है! कब कैसे हुआ की चिंता ना करते मैंने कार आगे बढ़ा दी.

यहीं हमने देखा कि मोटरसाइकिल स्कूटर वाले भी टोल  टैक्स पटा रहे.


इस तरह, दोपहर 11 बजे गोलकोंडा किले से अपनी स्मार्ट कार  चलाते हम पहुंचे बैंगलोर के दक्षिण-पूर्व इलाके, इलेक्ट्रॉनिक सिटी के होटल में साढ़े नौ बजे. तकरीबन दस घंटे!

बिटिया को सूचना दे, कमरे पर कब्जा कर, तरोताजा हो, कपड़े बदल हम दोनों टहलते चल दिए भोजन के लिए. क्योंकि यह एक ऐसा होटल था जिसमें सौजन्यता स्वरूप चौबीसों घंटे फ्री वाई-फाई और सुबह का फ्री नाश्ता होने के बावजूद रूम सर्विस नहीं.

अब अगले दिनों का हाल, अगले लेख में. प्रतीक्षा कीजिए

© बी एस पाबला

*** एशियन हाईवे की जानकारी इस लिंक पर क्लिक कर पाई जा सकती है

*** कन्या स्वर वाले जीपीएस नेविगेटर की जानकारी  इस लिंक पर क्लिक कर पाई जा सकती है.

भूतों के डेरे वाले गोलकोंडा में बिताया हमने वक्त
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