चिट्ठाचर्चा डॉट कॉम खरीदा गया तो अपराध की गर्त में चले गए!?

अपने सम्बोधन के पश्चात अनिल पुसदकर जी ने जब छत्तीसगढ़ की ब्लॉगर बैठक में मुझे मंच पर आमंत्रित किया तो मैंने, चिट्ठाचर्चा डॉट कॉम पर डेढ़ माह तक निस्वार्थ भाव से हो रहे कार्य के लगभग संपन्न हो चुकने के बाद, कुछ चुनिंदा ब्लॉगरों द्वारा इस प्रक्रिया पर नैतिकता व भावना का मुल्लमा चढ़ा कर इसकी नीयत पर प्रश्न उठाए जाने की बातों को साझा करना चाहा। मसिजीवी की पोस्ट पर चिट्ठाचर्चा डॉट कॉम खरीदे जाने को अपराध की गर्त में जाना बताए जाने के बाद, हिन्दी ब्लॉग जगत के शुरूआती ब्लॉगरों में से एक देवाशीष का मुझे फोन कर, सौहाद्र बिगड़ने की बात करते हुए, उस डोमेन को अनूप शुक्ल जी को दे दिए जाने की गुज़ारिश की संक्षिप्त बातें मैंने साथियों के सामने रखी।

(उपस्थित साथियों के चित्रों का कोलाज़, क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है)
वहीं मैंने स्पष्ट कर दिया कि यह डोमेन मेरा नहीं है, छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर्स का है, उनकी एसोसिएशन का है, इसकी घोषणा खुलेआम की गई है, चोरी छिपे यह कार्य नहीं हुया है। मंच से ही इस व्यवधान का समाधान पूछे जाने पर उपस्थित साथियों में से मात्र संजीत त्रिपाठी जी को छोड़ कर, अग्रिम पंक्ति के ब्लॉगरों ने इस डोमेन का उपयोग अन्यत्र किए जाने का विरोध किया। (इस संबंध में संजीत त्रिपाठी जी ने अपनी पोस्ट में कुछ प्रश्न उठाए हैं, जिनका उत्तर मैं व्यक्तिगत तौर पर अगली पोस्ट पर देना पसंद करूँगा।) उस समय इस मुद्दे पर अधिकतर ब्लॉगर उदासीन ही दिखे। बाद में आपसी बातचीत में मुझे ज्ञात हुया कि वे इससे अनभिज्ञ हैं, इस चिट्ठाचर्चा नाम की चिड़िया को जानते ही नहीं क्योंकि वह उनके घर (ब्लॉग) पर कभी आई ही नहीं! तब मुझे लगा इसे ले कर मेरा गंभीर होना शायद गलत है व नाहक ही इस नाम की अहमियत का ढिंढोरा पीटा जा रहा है।
चूंकि अब तक इस डोमेन व इस पर हुए कार्य के लिए हुए व्यय की प्रतिपूर्ति नहीं हो पाई थी, अत: जब यह बहुमत हुया कि इस मुद्दे को एसोसिएशन के सद्स्यों के बीच चर्चा कर कोई दिशा दी जाएगी तो मैंने भी अपनी बात खतम करते हुए मंच से विदा लेनी चाही कि स्वामित्व के मामले पर यदि यह डोमेन कहीं लावारिस रह गया, विवादित हो गया तो इसे खुले बाज़ार में छोड़ दिया जाएगा जिसे लेना हो अब तक हुए व्यय की अधिकतम कीमत दे कर ले जाए। (इस मुद्दे से सम्बंधित फोन व मंच की बातों की ऑडियो रिकॉर्डिंग मेरे पास उपलब्ध है, जिन्हें कुछ संशय हो वह इसकी प्रतिलिपि उचित कारण बता कर ले सकता है)
अंत में एक प्रस्ताव मैंने दिया कि ब्लॉगिंग की विभिन्न तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए एक दिवसीय कार्यशाला रखी जाए, जिसका स्वागत व अनुमोदन साथियों ने हर्ष ध्वनि से तत्काल कर दिया। इसके पश्चात ब्लॉगर साथियों ने अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए ब्लॉगिंग संबंधित समस्यायों, स्मृतियों, सुझावों, जिज्ञासायों की झड़ी लगा दी। कुछ ब्लॉगर साथियों ने इस संबंध में अपने अपने ब्लॉग पर अनुभव बांटे हैं। उनका अवलोकन किया जा सकता है। बैठक के दौरान भारत सहित विश्व के अन्य हिस्सों से कुछ ब्लॉगर साथियों ने जीवंत सम्पर्क बनाए रखते हुए अपनी रूचि दिखाई।
बैठक की औपचारिक समाप्ति के बाद छोटे छोटे समूहों में आपसी वार्तालाप करते, एक दूसरे को अपना पता-ठिकाना बताते, विदा लेते साथी बिखर गए।
एक अनौपचारिक बैठक व रात्रि भोज की व्यवस्था अनिल पुसदकर जी के स्थानीय फार्महाउस में की गई थी, जिसकी सम्पूर्ण व्यवस्था अनिल जी के मित्रों, डॉ अजय सक्सेना, लक्ष्मण जी आदि के सौजन्य से की गई थी। इस बैठक में अनिल पुसदकर के मित्रों के अलावा ब्लॉगर साथी गगन शर्मा, अरविन्द झा, श्याम कोरी, जी के अवधिया, ललित शर्मा, डॉ महेश सिन्हा, अभिषेक प्रसाद, राजकुमार ग्वालानी ने भी शिरकत की। अजय कुमार झा, शरद कोकास, संजीव तिवारी जी ने इस बैठक में मोबाईल के जरिए सभी साथियों से सम्पर्क बनाए रखा।
अनौपचारिक बैठक तो फिर अनौपचारिक ही होती है। ब्लॉगिंग से जुड़े लगभग हर पहलू पर खुल कर बातें हुईं, झड़पें हुईं, रूठना मनाना हुया। यूँ समझिए कि मज़ा ही आ गया।
देर रात जब मैं भिलाई पहुँचा तो आधी रात बीतने को थी। सामने टीवी पर खबर चल रही थी कि उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण मौसम और बिगड़ सकता है
पुनश्च:
इस पोस्ट के लिखे जाते तक कतिपय ऐसे आरोपनुमा वक्तव्य सामने आ गए हैं जिनका सिलसिलेवार उत्तर अगली पोस्ट में व्यक्तिगत तौर पर देने का प्रयास करूँगा
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चिट्ठाचर्चा डॉट कॉम खरीदा गया तो अपराध की गर्त में चले गए!?” पर 30 टिप्पणियाँ

  1. पाबला जी,
    आपका दिल क्या कहता है? उसकी सुनो।
    करो मन की, सुनो……….. किसी की भी नही।
    मुण्ड़े, मुण्ड़े, मतरिभिन्ना। हम किस-किस को खुश करेंगे?

  2. पाबला जी,

    मसिजीवी जी के जिस पोस्ट का आपने उल्लेख किया है उसकी भाषा कितनी नैतिक है?

    "चिट्ठाचर्चा.कॉम" डोमेननेम लेने वाले पर सीधा सीधा साइबर स्क्वैटिंग का आरोप लगाया गया है उस पोस्ट में याने कि साफ साफ चोर बताया जा रहा है डोमेननेम लेने वाले को।

    नैतिकता का प्रश्न क्या ऐसी भाषा में उठाया जाता है?

    एक डोमेननेम को मुद्दा बना कर जबरन विवाद उठाया जा रहा है।

    वैल्यू तो काम की होती है नाम की नहीं। सही काम करने पर नाम तो अपने आप हो जायेगा चाहे वह नाम "चिट्ठाचर्चा.ब्लॉगस्पॉट.कॉम" का हो या फिर "चिट्ठाचर्चा.कॉम" का।

    हम लोगों की मीटिंग की इतनी अच्छी रिपोर्टिंग करने के लिये धन्यवाद!

  3. पाबला जी, हम भी इससे अनभिग्य ही हैं।
    लेकिन इतना ज़रूर समझ में आता है की ब्लॉगजगत में क्यों किसी की नियत पर शक करना चाहिए।
    सभी तो क्षमतानुसार अपना अपना योगदान दे रहे हैं, हिंदी को बढ़ावा देने में।
    शुभकामनायें।

  4. भाई, चिट्ठा चर्चा का डोमेन बिकाऊ था। खरीद लिया गया। अब उस पर इतना विवाद और नैतिकता की बातें क्यों। इस नाम से अभी भी कई डोमेन लिए जा सकते हैं। चिट्ठा चर्चा.ऑर्ग या कुछ और। इस नाम से इतना ही मोह उमड़ रहा है तो बाकी सारे बुक करवा लें। इस में क्या परेशानी है? उस में भावुक होने जैसा क्या है? मुझे समझ नहीं आया।
    आप की सीधी बेबाक रिपोर्टिंग पसंद आई।

  5. ऐसा लगता है कि हम यहाँ ब्लॉगिंग नहीं लड़ाई झगड़ा और सिर फ़ुटव्वल करने आये हैं। पाबला जी की बातों से सहमत। लोग कहते हैं कहने दो जी, लोग भी तभी कहते हैं जब कोई अच्छा कार्य आप करने जा रहे हों तो लोगों की टाँग खींचने की आदत तो रहती ही है।

  6. उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण मौसम और बिगड़ सकता है…

    अभी आँधी तूफान की संभावना भी बताई है क्या?

    कब तक ठीक होने की संभावना जताई है??

    -अंधड़ में तो छतरी ले कर भी आयें तो काम न बन पायेगा. 🙂

  7. सर दूसरी इनिंग भी देखी , लगता है अब नैतिकता को भी परखना होगा , अभी हाल ही में कुछ शब्दों को परिभाषित करने की कोशिश में बहुत कुछ लिखना पढना पड गया था , नैतिकता को भी समझना पडेगा लगता है ,वास्तविक दुनिया के हिसाब से तो जानते हैं बस ब्लोग जगत में इसके निहितार्थ तलाशते हैं , रपट एकदम सटीक जा रही है
    अजय कुमार झा अह

  8. पाबला जी नमस्कार
    चलिए इस खबर के बहाने हमारी फोटो हमें दिखाई पड़ी. बहुत ही सुन्दर ढंग से आपने सम्मलेन का वर्णन किया है. इस डोमेन स्पेस वैगरह का हमे तो ज्ञान नहीं है इसलिए कार्यशाला आयोजन करने सम्बन्धी सुझाव अच्छे लगे. ……….. बहुत संदर लगे रहिये वैसे भी आप इस कार्य के लिए समर्पित हैंही

  9. पाबला जी नमस्कार
    चलिए इस खबर के बहाने हमारी फोटो हमें दिखाई पड़ी. बहुत ही सुन्दर ढंग से आपने सम्मलेन का वर्णन किया है. इस डोमेन स्पेस वैगरह का हमे तो ज्ञान नहीं है इसलिए कार्यशाला आयोजन करने सम्बन्धी सुझाव अच्छे लगे. ……….. बहुत संदर लगे रहिये वैसे भी आप इस कार्य के लिए समर्पित हैंही

  10. आप ना काहीं काम के डार पात फ़ल फ़ुल्।
    औरन को रोकत फ़िरे रहिमन पेड़ बबुल्॥

  11. अरे अरे क्यो सब लड रहे है? भाई अब मेरे नाम से किसी का मेल आई दी हो तो यह मतलब नही कि मै उस से लडना शुरु कर दुं,सुनो सब की करो अपने मन की…अगर ज्यादा दिक्कत हो तो उसे नीलामी पर लगा दो लेकिन एक खास रक रख कर जहां से बोली शुरु हो… फ़िर देखे कोन बोलता है.
    वेसे मुझे एक डोमेनो फ़्रि मै मिल रहा है जो .de, .eu, .info मै है, लेकिन आप का हाल देख कर डर गया हुं, इस लिये नही ले रहा

  12. सारी कही सुनी अब ब्लॉग जगत के सामने है

    बिना किस प्रतियोगिता या आयोजन के अपने वोट दें
    या शायद नहीं ?

    मुझे तो लगता है प्यार से माँग लिया होता तो पाबला जी सरदार हैं, डोमैन क्या चीज है अपना सर क़ुरबान कर दिये होते.इतनी गंद मचाने की कोई जरूरत नहीं थी

  13. @ डा. महेश सिन्हा जी.

    अगर बिना गंद मचाये कोई काम करले तो उसका नाम अनूप शुकुलवा नाही न होसकता है. का समझे? उसका नाम फ़ुरसतिया युं ही नाही है.

    जय छत्तीसगढ!

  14. मैं तो अब तक़ समझ ही नही पा रहा हूं विवाद का कारण क्या है?ब्लाग जगत को मैं परिवार जैसा मानता था मगर लगता है कि शायद मुझे ही गलतफ़हमी हो गई थी।

  15. जैसा कि अपन ने अपने रपट में कहा है कि
    मीट में अधिकांश मौजूद ब्लॉगर के तो सर के उपर से गुजर गया था यह मुद्दा।

    रहा सवाल यह कि अग्रिम पंक्ति( ?) के ब्लॉगरों द्वारा इस डोमेन का उपयोग अन्यत्र किए जाने का विरोध, तो इस अग्रिम पंक्ति के व पिछड़ी पंक्ति के ब्लॉगरों की परिभाषा यदि स्पष्ट हो जाती तो कुछ कहना आसान होता।

    आप पारिभाषित करने का कष्ट करें तो मै शायद अपनी अगली पोस्ट में इस पर कुछ कह सकूंगा…

    प्रतीक्षारत……

  16. @ संजीत त्रिपाठी

    फिलहाल:
    अग्रिम पंक्ति के ब्लॉगर = उस कक्ष में लगी कुर्सियों की अग्रिम/ पहली पंक्ति में बैठे ब्लॉगर

  17. ha ha, sahi paribhasha di aapne, to us hisab se to mai us agrim pankti se bhi aage lage sofe par baitha tab……

    😉

  18. इतनी सी बात का फ़साना बना दिया…
    पाबला जी,
    अब तो लगने लगा है ब्लॉग जगत में मूर्खों की संख्या ज्यादा है…
    कहा जाता है आप किसी बुद्धिमान से तो लड़ सकते हैं लेकिन मूर्ख से लड़ना कठिन है…!!

  19. अच्छा जवाब दिया है आपने!

  20. sanjeet ko kisi ne poochha thaa kyaa vo chatayee par baithe the yaa sofe par.phir yah sofe par baith kar chavvani chhaap harkatein kyon kar rahe hai.
    sach kaa saath denaa seekho o sofe par baithane vaalon

  21. प्यार में कभी-कभी अइस्सा हो जाता है…छोटी सी बात का फ़साना बन जाता है …
    बढ़िया रिपोर्ट

  22. यह डोमेन खरीदकर किसी ने कोई गलत कार्य नहीं किया यदि इस नाम से उनलोगों को इतना ही प्यार था तो पहले खुद क्यों नहीं खरीद लिया ? जिन लोगों की महज १०.०० $ में मिलने वाले डोमेन को खरीदने की औकात नहीं रही उन्हें इस पर विवाद उठाने और नैतिकता का पाठ पढाने का कोई हक़ ही नहीं है |

    ये सब सिर्फ फालतू का विवाद व बेकार के आरोप है | जो चीज बाजार में बिकाऊ है उपलब्ध है उसे कोई भी खरीद सकता है |

  23. पावला साहब, इस बारे में बहुत ज्यादा तो नहीं मालूम मगर आप निश्चिन्त रहिये ! हम हिन्दुस्तानियों की यही तो सबसे बड़ी खासियत है कि जिस मुद्दे पर उछलने जसी कोई बात नहीं होती उसी पर ज्यादा उछलते है !

  24. मुझे यह बताया गया है कि पंकज अवधिया ने उसी बैठक में मंच से घोषणा की थी कि छत्तिसगड से जुडा उनका कोई वेबसाइट प्रोज्र्क्ट आपके सुपुत्र महोदय के पास 70 लाख के ठेके पर है।ऐसा ही कुछ पहले भी ज्ञानदात्त पान्डे जी के मानसिक हलचल पर वे बता चुके है। http://halchal.gyandutt.com/2009/04/blog-post_24.html
    मैं मानता हूँ कि हमारे आपके साथियो का सहारा ले कर किसी योजना के तहत छत्तिसगढ के खिलाफ खास तरह का दुष्प्रचार किया जा रहा है। आप डरिये मत विभीष्ण तो हर जगह मिल जायेगे।
    बेशक आप जान जायोगे कि मैं कौन हू लेकिन बेनामी रहना मेरी मजबूरी हैं। नाम से कमेन्ट करता तो विश्वासघाती कहलाता

  25. उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण मौसम और बिगड़ सकता है…

    तथा स्थिति तनावपूर्ण किंतु नियंत्रण में है , ऐसा लग रहा है ।
    पाबला जी सीधी सी बात है-कोई चीज उपलब्ध थी किसी ने ले लिया । आपने किसी की डील कैंसिल कराके तो हथियाया नही है । काहे की चिंता और चर्चा


  26. जो सोयेगा, वह खोयेगा !
    जो जागेगा, वह पावेगा ।

    उत्तर पश्चिमी दिशा से यदि अँधड़ आता है, तो ओले के रूप में निट्ठल्ले भी टपक सकते हैं ।
    यदि आप लागत मात्र लेकर यह डोमेन प्रतिहस्ताँतरित करते हैं, तो यह ज़ायज़ होगा.. पर ?
    पर, अधिकतम बोली की बात नागवार गुज़रने वाली है । सर्वसम्मति ले लें, प्याले में यह तूफ़ान कब तक चलता रहेगा ?

  27. ह्म्म्…तो बेनामी अर्थात एनॉनिमस भैया, अब का जवाब दें आपको, जब आपमें अपनी पहचान बताने का माद्दा ही नहीं है तो। खुश रहिए ऐसे मुखौटे पहनकर ही… मजे करिए, मजे लीजिए…जस्ट एंजॉय मैन

  28. समझ में नहीं आता,इन छोटी,छोटी बातों में झगड़ा क्यों ?

  29. बेहतरीन रिपोर्टिंग !
    यह डोमेन पर कैसा झगड़ा । खाली था, बिकाऊ था- ले लिया गया ।

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