जब घुघूती जी ‘बार’ में बैठी मिलीं

घुघूती जी से मेरा परिचय अनिता कुमार जी ने करवाया था। ब्लॉग तो घुघूती जी का पढ़ता रहा था, लेकिन टिप्पणी शायद नहीं की कभी। जब पहली बार मैंने चैट पर उनसे सम्पर्क किया तो उन्होंने एकदम सही सही अक्षरों में लिखकर पंजाबी में अभिवादन किया तो मैं जरा चौंका था। क्योंकि अधिकतर पंजाबी-भाषी व्यक्तियों को, संबंधित शब्दों में वर्तनी की गलतियाँ करते देखते रहता हूँ। पता चला वे हैं तो फिलहाल गुजरात में, लेकिन पंजाब में खासा समय बिता चुकीं हैं और गुरमुखी भी पढ़ चुकी हैं। फिर तो अक्सर ही चैट पर बातें होती रहीं। एक बार उनके कम्प्यूटर में कुछ समस्या आई तो फोन से भी सम्पर्क हुया।

हाल ही में पता चला कि वे मुम्बई का रूख कर रहीं हैं। मुम्बई में अनिता जी से उनकी मुलाकात का ब्यौरा घुघूती जी के ब्लॉगअनिता जी के ब्लॉग पर देखा जा सकता है। मुम्बई से रवाना होते हुए उन्होंने मुझसे, मुम्बई में मुलाकात का वादा ले लिया। गुजरात पहच कर संक्षिप्त सी कॉल में हाय-हैलो हुई तो गर्म मौसम का जिक्र किया उन्होंने। तब मैंने अपनी पोस्ट पढ़ने को दी तो हँसते हुये उन्होंने कुछ बारिश गुजरात में भेजने के लिए कहा।
उस दिन मैं अपनी सेकेंड शिफ्ट में दोपहर डेढ़ बजे घर से निकल ही रहा था कि मोबाईल बज उठा, देखा तो घुघूती जी थीं। कॉल रिसीव करते ही मैंने पूछ लिया कि कहाँ हैं आप? उनकी आवाज आई “आज तो हम बार में बैठें हैं”। अब मेरी बोलती बंद -घुघूती जी बार में!? शायद मेरे कानों को इलाज की जरूरत आ पड़ी है, सोचते हुये मैंने धीरे से फिर पूछा तो जवाब आया “बार में…, बार में”!! मैंने अपने आप को आश्वस्त करते हुये पूछा कि आपने कब से बार में बैठना शुरू कर दिया? घुघूती जी ने बेहद सहज भाव से बताया कि पाँच वर्ष पहले जब गुजरात आई थी तब भी ऐसे ही ‘बार’ में बैठना पड़ा था, अब गुजरात छोड़ना पड़ रहा है तो ‘बार’ में बिताना पड़ रहा है समय।
अयं। यह क्या बात हुई। मन मेरा मानने को तैयार ही नहीं था इस बात को। फिर जब घुघूती जी ने अपना हाल बताना शुरू किया तो समझ में आया कि वे कह रही थीं कि इतनी बारिश हो रही है कि बगीचा, घर पानी में डूब रहा है और वे बाढ़ जैसे हालातों में घिरी बैठी हैं और मुझे बता रही हैं कि “आज तो हम बाढ़ में बैठे हैं।”
लो कर लो बात! अपने आप पर झेंपते हुए जब मैंने बताया कि मेरे कानों ने क्या सुन डाला था तो दोनों ओर ठहाकों की झड़ी लग गई। कल जब घुघूती जी की वह बाढ़ जैसे हालातों से जूझने वाली पोस्ट पढ़ी तो यह किस्सा याद हो आया।
आज उनका जनमदिन भी है। बधाई देते हुये एक बार फिर उस बाढ़ का मजा आ गया।
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26 comments

  • अनूप शुक्ल says:

    घुघुतीजी को जन्मदिन मुबारक! बार (बाढ़) से जल्द बाहर आने की शुभकामनायें।

  • मनोज गौतम says:

    पाबला जी किसी भी विशय पर आप बहुत ही सुन्दर लिखते हैं । आपके ब्लॉग हमेशा पढ़ते रहते हैं और कई बार तो मनविन्दर भिम्भर जी से आपके बारे में सुनता रहा हूँ लेकिन आपको कमेन्ट पहली बार कर रहा हूँ । धन्यबाद !

  • mehek says:

    arth ka anarth ho gaya,vaise ye baar(badh) wala kissa bahut mazedar raha:)

  • रंजन says:

    हा हा हा..

  • लवली कुमारी / Lovely kumari says:

    हा हा हा हा ..पूछिये मत पढ़ के जो हंसी आई ..

  • Nirmla Kapila says:

    घुघुती जी को जन्मदिन मुबारक आपका भी आभार इस रोचक पोस्ट के लिये हाँ याद आया आज हिन्दी अजीत मे चार पानछ ब्लाग्स का जिक्र है अभी लिघ्ट चली गयी है बैकप नेही है

  • PD says:

    🙂
    Ghighuti ji ko bahut bahut badhai janmdin ki.. 🙂

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    घुघूती जी की तो छोड़िए। हम तो बहुवचन में बार ही कहे जाते हैं।

  • महेन्द्र मिश्र says:

    घुघुती जी को जन्मदिन मुबारक…

  • राजीव तनेजा says:

    पहले तो मैँ भी आपकी पोस्ट का शीर्षक पढ कर कुछ सोच में पड़ गया था…

    खैर!..आप बढिया रोचक शैली में अपनी बात कहते हैँ….मज़ा आया पढकर…

  • अजय कुमार झा says:

    पाबला जी मुझे तो लगा ..कमाल है जन्मदिन का इत्ता कमाल का ग्रैंड सेलीब्रेशन…हा..हा..हा..मगर शुक्र है की कुछ और ही निकला…चलिए ..वे जल्दी से बार (बाढ़ ) से निकल आयें ..यही कामना है ..किस्सा रोचक है,…और अब मैं भी फूंक फूंक कर फोन करूंगा क्या पता आप मुझे कहाँ बिठा दें

  • काजल कुमार Kajal Kumar says:

    अर्थ अनर्थम्
    🙂

  • anitakumar says:

    बार बार दिन ये आये बार बार दिल ये गाये कि घुघूती जी जियें हजारों साल ये मेरी है आरजू, हैप्पी बर्थडे टू हर हैप्पी बर्थडे टू हर्………।

    मजेदार रहा ये सुनना सुनाना

  • संगीता पुरी says:

    हा हा हा !!

  • रंजना [रंजू भाटिया] says:

    🙂 बार किस्सा याद रहेगा बहुत मजेदार रहा यह तो

  • रंजना [रंजू भाटिया] says:

    🙂 बार किस्सा याद रहेगा बहुत मजेदार रहा यह तो

  • रंजना [रंजू भाटिया] says:

    🙂 बार किस्सा याद रहेगा बहुत मजेदार रहा यह तो

  • Udan Tashtari says:

    हा हा!! यह भी बहुत मजेदार रही. घुघूती जी का जन्म दिन है तो बार में होंगी, मैं तो यही सोच कर फोन रख देता. 🙂

  • सतीश पंचम says:

    घुघुती जी को जन्मदिन की बधाई। रोचक संस्मरण।

  • नितिन | Nitin Vyas says:

    घुघुती जी को जन्मदिन की बधाई।

  • शरद कोकास says:

    बारिश का मौसम है शिवनाथ की कृपा रहे वरना हम को भी बार मे बैठना पडेगा

  • लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` says:

    घुघूती जी ,
    साल गिरह की बढीयां कहानी रही ! आपको जन्म दिन की शुभकामनाएं –
    स स्नेह,
    – लावण्या

  • Anil Pusadkar says:

    घुघुती जी को बधाई और आप को भी।अच्छा हुआ सीधे टिकट कटा कर बार मे मिलने नही चले गये।हा हा हा हा हा।

  • जितेन्द़ भगत says:

    मेरी तरफ से भी घुघूती जी को जन्‍मदि‍न की ढेरों शुभकामनाऍं।

    ईश्‍वर उनको 'बार' से बचाऍं:)

  • ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey says:

    हम तो पीते नहीं। बार/बाढ़ नहीं सूखे में बैठे हैं। अकालग्रस्त की सम्भावना है यहां कुछ जिलों की।
    घुघुतीजी को जन्मदिन मुबारक!

  • Science Bloggers Association says:

    देर से सही, पर मुबारकबाद तो दी ही जासकती है।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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