जब ब्लॉगवाणी पर नापसंद क्लिक करते करते स्थिति एकाएक उलट गई

पिछले गुरूवार, 11 फरवरी को किसी कार्य से अपने शहर भिलाई के बीएसएनएल कार्यालय में था तो एक ब्लॉगर साथी ने मोबाईल पर सम्पर्क किया। अन्य कई बातों के बीच उनका उलाहना सा था कि आपकी पोस्ट्स नहीं आ रही इन दिनों! मैंने उन्हें वस्तुस्थिति बताई व अगली फुरसत पाते ही 12 फरवरी की शाम बिना चेतावनी गूगल द्वारा बंद किए गए ब्लॉग: वर्षों की मेहनत स्वाहा वाली पोस्ट लिख दी। आज भी कुछ फुरसत मिली तो सोचा कि आपसे भी साझा कर ली जाए एक मज़ेदार सी बात।

हुया यह कि 11 फरवरी की सुबह ही अजय कुमार झा से चैटिया रहा था। इसी चैट में वह मुद्दा उठा जिसे सबसे पहले ललित शर्मा ने मेरे ध्यान में लाने की कोशिश की थी। उस समय मैंने परवाह नहीं की, किन्तु अलबेला खत्री ने इसे बढ़ाया तो मेरा ध्यान इस ओर गया।
दर असल ब्लॉगवाणी संकलक ने अपनी ‘ब्लॉगवाणी पसंद’ पर हुए एक विवाद के बाद ताज़ा ताज़ा ‘ब्लॉगवाणी नापसंद’ का विकल्प भी आरंभ किया है और मेरी पोस्ट्स के साथ साथ अन्य कुछ ब्लॉगरों की पोस्ट्स को नापसंद किया जा रहा। मेरे प्रिंट मीडिया वाले ब्लॉग पर तो हर पोस्ट पर कम-से-कम एक नापसंद लग ही रही थी। इस पर कईयों द्वारा सम्पर्क किए जाने पर मैं यही कहता था कि भई मैं इस पसंद-नापसंद की चक्करघिनी से मैं बहुत पहले दूर हो चुका और मेरे किसी ब्लॉग पर ‘ब्लॉगवाणी पसंद’ का कोई विज़ेट नहीं है। कुछ ने अपने अपने कयास लगाए कि कौन हो सकता है यह सब समर्पण भाव से करने वाला।
मेरी निगाह में यह कारनामा आ चुका था। ऐसे माहौल में, 11 फरवरी की सुबह, दिन भर की पोस्ट्स निर्धारित करते हुए, चैट कुछ ऐसे हुई थी अजय कुमार झा के साथ
10:49 AM ajay: जी उसकी कोई चिंता नही है ….वैसे भी मि नापसंद जी अपना काम फ़ुल डेडिकेशन से कर रहे हैं आज भी देखिए सिर्फ़ मेरी पोस्टों में मिलेगा नापसंद
हा हा हा
10:50 AM me: हा हा, मुझे उत्सुकता है कि 3:30 वाली प्रिंट मीडिया वाली पोस्ट पर पसंद नापसंद का क्या गणित रहता है !
ajay: क्यों सर कुछ खास है क्या उसमें
me: हा हा
10:51 AM मुझे खुद नहीं पता-वह आम है या खास
ajay: मगर है क्या
उसी रात, मैंने उनसे नतीज़ा बताते हुए सम्पर्क किया। अजय जी तो बस ओह ओह करते रह गए
इस ऊपर वाले चित्र को क्लिक कर देखा जा सकता है ब्लॉगवाणी पर उस 3:30 वाली पोस्ट की लिंक को , जिसे हरे रंग के घेरे में दर्शाया गया है। अन्य पोस्टों के मुकाबले इस पर नापसंदगी तो नहीं है उल्टा इसकी पसंद भी बढ़ी हुई है। वैसे वह पोस्ट देखनी हो तो वह यहाँ है।
मैं आज भी निर्लिप्त हो कर अपना काम करते हुए, इस वाक्ये को याद कर हंस पड़ता हूँ।
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जब ब्लॉगवाणी पर नापसंद क्लिक करते करते स्थिति एकाएक उलट गई” पर 34 टिप्पणियाँ

  1. आप मस्त हो के अपना काम करते रहे..जलने वाले तो जल-जल मरेंगे

  2. मुझे तो ये अंगूठा-पुराण समझ ही नहीं आ रहा … ये तो कुछ-कुछ राग-अड़ंगी सा लगता है..

  3. अच्छा जभी खुशदीप भाई ने मेरी एक पोस्ट पर कमेण्ट मे लिखा था पता नही किसी को ये पोस्ट पसंद कैसे नही आई,उस समय तो मुझे समझ मे नही आया मगर अब पता चल रहा है कि लोग ऐसा भी करते हैं।वैसे पाब्ला जी पसंद और नापसंद करने का पूरा प्रोसेस मुझे मेल कर देंगे तो अच्छा रहेगा।मुझे ये सब लफ़्ड़े आते नही है।पहले ठीक था एक जगह क्लिक करो हो जाता था।

  4. पाबला जी ये खेला बहुत लंबा चलने वाला है
    आइये एक नई पोस्ट देखिये

  5. rajeev taneja jee se 100% sehmat hai apan to saheb, bas yahi accha laga ki aap laute to sahi blog par, i mean zindagi ke mele me….

    yaaraa naal baharaa, mele mitraan de….

    😉

    ye punjabi me hi kahte hain na?

  6. aap bhi na Pabla ji kis soch mein hain…ye angootha, post ke liye nahi hai Postmaster ke liye hain…ha ha ha ha..
    is angoothe ki hamlogon ko adat kar leni chahiye…

  7. पाबला जी मुझे भी अभी यह खेल समझ नही आया, ओर वेसे भी मै तो इस झमेलो से दुर ही भला

  8. क्या करना है इस पसंद नापसंद से. ब्लॉग तो पसंदीदा है जी.

  9. ऊंचे लोग, ऊंची नापसंद…
    पाबलाजी, इस नापसंद को मैं खेत में खड़े कनकौओ या नज़रबट्टू की तरह लैता हूं…बेचारा कितनी लगन और श्रद्धा से अपना काम करता है…

    जय हिंद…

  10. ये नापसंद हम भी अपने कुछ पोस्ट पर झेल चुके है, कम से कम टीप कर तो बता दो भाई, कि क्यों नापसंद है।

  11. एक बार तो हम ही आप की पोस्ट को निगेटिव मार्किंग कर गए।ष ऊपर के बजाए नीचे का बटन दब गया। फिर दुबारा दबा कर ठीक किया।

  12. द्विवेदी जी की तरह ही हर रोज किसी से निगेटिव बटन दब जाता होगा, पर फिर वो ठीक नहीं करता होगा 🙂 Who cares !

  13. "मेरी पोस्ट्स के साथ साथ अन्य कुछ ब्लॉगरों की पोस्ट्स को नापसंद किया जा रहा।"

    मुझे तो लगता है कि ब्लॉगवाणी पसंद बटन पोस्ट के लिये है और नापसंद बटन ब्लॉगर के लिये है याने कि जिस ब्लॉगर को आप पसंद नहीं करते उसके पोस्ट में नापसंद बटन को चटका दीजिये। और हाँ, पसंद या नापसंद करने के लिये पोस्ट को पढ़ने की कोई जरूरत भी नहीं होती।

  14. ओह सर आपने क्यों इतने डेडिकेटेड जी के पेट ….नहीं नहीं ..अंगूठे पर लात मार दी ….बताईये भला अब वे क्या करेंगे यदि उनका मन थम्स डाऊन करने का हुआ तो ….
    अजय कुमार झा

  15. आप अभी भी इस पसन्द-नापसन्द के चक्कर में पड़े हैं?

  16. @ Suresh Chiplunkar

    ना जी, मैं तो पहले ही कह चुका कि इस चक्करघिनी से बाहर हूँ और अपने ब्लॉग्स पर ब्लॉगवाणी पसंद का विकल्प भी नहीं रखा है 🙂

  17. किसी दिलजले का दिल जलता है तो ऐसे काम करता है. थोडा सा पेट्रोल मैं डाल देता हूं. माचिस अजय झा जी दिखा देंगे.:)

    आप तो पुण्य का काम कर अर्हे हैं जो उनका गुबार निकाल कर हल्का होने का मौका देरहे हैं.:)

    रामराम.

  18. ये ससुरा पसन्द नापसन्द का चक्कर ही गलत है….

  19. पाबला जी , चिंता मत करिए —नापसंद में भी पसंद छुपा है।

  20. पसंद नापसंद से क्या फर्क पड़ता है.सानु तो एदी परवाह नहीं ।

  21. अब तो नाइस ही लिखना पड़ेगा!

  22. @ चन्द्र कुमार सोनी

    ब्लॉगवाणी के बारे में जानना चाहते हैं?
    क्या जानना चाहते हैं स्पष्ट करें या ईमेल पर सम्पर्क करें
    कहीं आप यह तो नहीं जानना चाह रहे?
    देखिएhttp://blogbukhar.blogspot.com/search/label/blogvani

  23. आपके " निर्लिप्त होके " का जवाब नहीं ।

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