जसपाल भट्टी जैसी मौत नहीं चाहता

पिछले वर्ष 2012 के अक्टूबर माह में जब मैं पारिवारिक त्रासदी से जूझ रहा था तो खबर मिली देश के जाने माने कलाकार जसपाल भट्टी की कार दुर्घटना में हुई दर्दनाक मृत्यु की. आशंका व्यक्त की गई कि यह हादसा वाहन चालक के नींद में होने के कारण हुआ होगा. इसी के साथ मुझे याद हो आया वह वाक्या जब मैं खुद, परिवार समेत ऎसी दुर्घटना का शिकार होते होते बचा था.

आज यह संस्मरण लिखने लगा तो साथ साथ यह भी बताने की इच्छा हुई कि आजकल ऎसी दुर्घटना से बचने के लिए अपनी स्मार्ट कार में क्या उपाय करता हूँ.

बात रही होगी 1993 की. रायपुर में रह रहे अपने चाचा के परिवार के घर रात्रि भोजन कर सपरिवार लौट रहा था अपनी मारूति 800 से. तब रायपुर से भिलाई एक साधारण सा मार्ग होता था. सारी राह विपरीत दिशा से आते यातायात का ध्यान देते अपने दिमाग को सजग रखते जब खुर्सीपार गेट पार हुआ तो चैन की सांस ली अपने व्यवस्थित औद्योगिक टाउनशिप में प्रवेश करने पर.

पीछे बैठे दोनों बच्चे और पास बैठी श्रीमती जी गहरी नींद में सो रहे थे. घने वृक्षारोपण वाले टाउनशिप में जब ठंडी हवाओं का झोंका टकराने लगा तो राह भर रोक कर रखी गई, भोजनोपरांत छा जाने वाली खुमारी ने हावी होना शुरू कर दिया.

फारेस्ट एवेन्यू पर बोरिया गेट से बढ़ती गाड़ी जवाहर उद्यान भी पार कर गई. मेरी आँखें कब बंद हो गई पता ही नहीं चला. लेकिन मस्तिष्क सजग था. रोबोट सरीखे एक्सेलेटर पर पाँव का दबाव बराबर बना रहा, हाथ स्टेयरिंग पर बाकायदा जमे हुए थे, कानों में आसपास की सारी आवाजें आ रहीं थी. कार भागे जा रही थी.
The road

अचानक, कानों में पहुँच रही आवाजें कुछ कर्कश होने लगीं. आँखें तो बंद थीं किंतु मस्तिष्क में संकेत पहुँच गया कि यह पहियों के मुरम के ऊपर चलने की आवाजें हैं. (सड़क किनारे डाली जाने वाली लाल मोटी बजरी को हमारे क्षेत्र में मुरम कहा जाता है)

मस्तिष्क में संकेत पहुंचा तो आँखों को निर्देश मिला कि खोलो, आँखें खोलो! और जैसे ही मैनें आँखें खोली तो देखता हूँ गाड़ी, सड़क पर अपनी बाईं ओर की जगह छोड़ कर दाहिनी ओर उतर चुकी है. हेडलाइट की रोशनी में दिखा पास भागता आ रहा एक मोटा सा पेड़. आव देखा ना ताव ब्रेक पैडल पर सारा जोर लगा कर कार रोकी. श्रीमती जी हड़बड़ा कर नींद से जागी “क्या हुआ?”

अब मैं क्या बताता. रिवर्स गियर लगा सड़क पर वापस कार ले कर आया. घर पहुंचा और कान पकडे, अब कभी खाना खाने के बाद कुछ घंटों तक कभी भी कार नहीं चलानी है, बाईक की बात अलग है.nap-alarm

फिर भी कभी कभी झपकी आ ही जाती है मस्त ठंडी हवा के झोंकों और आरामपरस्ती के माहौल में. इसलिए आजकल मैं सुरक्षा के लिहाज से एक यंत्र का प्रयोग करता हूँ जो मुझे नींद/ झपकी जैसी स्थिति में तीखे स्वर में चेतावनी देता है. वैसे है तो यह एक बेहद मामूली यंत्र. लेकिन इसके बनाने वाले को शाबासी तो मिलनी ही चाहिए.

कुल anti-sleep-alarm-bspablaमिला कर 200 रूपये से भी कम कीमत पर मिला यह उपकरण मुझे अपने कान में कुछ यूँ लगाना होता है जैसे आजकल के बच्चे ब्लूटूथ का डोंग्ल लगाते हैं. बस इसका स्विच ऑन करो और नींद आने की स्वाभाविक क्रिया के तहत जब सर सामने की ओर ढुलका तो एक निश्चित कोण के बाद इसमें लगा बज़र तीखी ध्वनि उत्त्पन्न करता है.

अब, कोई चाहे तो अपनी सुरक्षा के लिए इसे धारण कर ले वरना बड़े बड़े कानूनों के बाद भी हेलमेट, सीट बेल्ट से परहेज करने वालों के समान चलाता रहे कार और फिर चलती कार में जसपाल भट्टी  के सपने देखे नींद में.nap-alarm-bspabla

सिर्फ ड्राइवर्स के लिए नहीं, मुझे तो 15 ग्राम के वजन वाला यह यंत्र सिक्यूरिटी गार्ड, मशीन ऑपरेटर, परीक्षा देते बच्चों के लिए भी मुफीद लगता है. सर आगे की ओर कितना झुकाने पर चेतावनी मिले इसे आप स्वयं निर्धारित कर सकते हैं इसका कोण व्यवस्थित कर.

हालांकि एक तकनीक प्रेमी होने के नाते, बेहतरी के लिए इसमें स्वयं कुछ परिवर्तन करने की सोच रहा लेकिन मूल रूप में भी यह कारगर है अपने काम में.

मुझे तो बढ़िया लगा, लेकिन आपको कैसा लगा यह यंत्र?

इसे यहाँ क्लिक कर खरीदा जा सकता है

जसपाल भट्टी जैसी मौत नहीं चाहता
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जसपाल भट्टी जैसी मौत नहीं चाहता” पर 27 टिप्पणियाँ

  1. आपके यन्त्र बड़े काम के हैं। इंजन में भी इसी तरह के यन्त्र लगे होते है, ६० सेकेण्ड तक कुछ नहीं होने पर बज़र बजाते हैं।

    • :Smile:
      सुरक्षा के उपाय तो होने ही चाहिए

  2. aaj hi bchchon ko aur unke papa ko bolti hun. market me pataa lgaaye. apne bde suputr ji do baar durghtnagrst ho chuke hain. bss ishwar ne sath diya aur chhoti moti chot se hi nibt gye.
    aapke lekh jankari poorn hote hain. mujh jaise anadiyon ne bahut kuchh seekha hai ab tk.

  3. हैलो सर क्या आप बता सकते है की ये उपकरण कैसे मंगाया जा सकता है………………..

  4. जानकारी के लिए धन्यवाद् .वैसे इस उपयोगी उपकरण को बाज़ार या इ-बे में किस नाम से ढूंढा जाए

  5. यह तो बड़े काम का यंत्र है सर जी … और सही कहा आपने … केवल वाहन चालक ही नहीं यह यंत्र सिक्यूरिटी गार्ड, मशीन ऑपरेटर, परीक्षा देते बच्चों के लिए भी मुफीद लगता है !

    इस जानकारी के :THANK-YOU:
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: ८०० वीं पोस्ट :- शिक्षा का व्यवसायीकरण = कक्षा एक किताबें दसMy Profile

  6. अपनी रक्षा करना मतलब अपने चाहने वालों को भी ख़ुशी और सुकून देना
    होता है …..और ये आप का फर्ज़ भी है ! खुश रहें,स्वस्थ रहें!
    टिप्पणीकर्ता ashok saluja ने हाल ही में लिखा है: सुकून मिलता है ….अतीत में !!!My Profile

  7. जी हाँ , खाने के बाद और सोने से पहले गाड़ी नहीं चलानी चाहिए।
    जेट लेग में भी नहीं चलानी चाहिए।
    गजेट तो बढ़िया लगता है।

  8. जुलाई में तो पढ़ी नहीं …..जब जागे तब सबेरा …. बता दिया सबको घर में ..सचेत करते हुए ….. थैंक्यू

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