मुझे जेल भिजवा ही दिया था उस लड़की ने!

हमेशा की तरह उस दिन भी डेज़ी» ने मुझे जगाया. अभी ठण्ड के मौसम में सुबह का अंधेरा छंटा भी ना था लेकिन उसने मचल मचल कर कूद कूद कर अपनी मर्जी के मुताबिक़ मुझे घर से बाहर निकलवा ही लिया.

ज़माने में कहने को तो कहा जाता है कि हम अपने पालतू को टहलाते हैं लेकिन मेरा कहना रहा है कि ये मूक मित्र मुझे टहलाते हैं 🙂 आम दिनों की तरह हमारा जो मार्ग होता था उस दिन भी उस पर ही चल पड़े दोनों.

अभी घर के पास वाले मोड़ पर पहुंचे ही थे कि हंसती खिलखिलाती पांच छः लड़कियों के झुण्ड से सामना हो गया. लगभग घेर ही लिया उन्होंने. डेज़ी शायद पहचानती होगी तभी उन्हें देख पूँछ हिलाने लगी थी.

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डेज़ी के साथ हमारी बिटिया

 

एकाएक ही उन लड़कियों में से एक ने आवाज़ दी “अंकल, रूको! आपसे कुछ पूछना है!!” मैं ठिठक गया. डेज़ी की और इशारा करते हुए एक ने मासूम प्रश्न उछला “ये लड़की है ना?” मेरे हामी भरते ही दूसरा प्रश्न तीखी आवाज़ में पूछा गया “फिर आप इसे लड़के के नाम से क्यों बुलाते हैं? डेजा कह के?”

फिर दूसरी आवाज़ आई “लड़की है तो लड़की रहने दो ना, लड़का क्यों बनाते हो?” इसके पहले मैं कोई ज़वाब देता, ख़्याल आया कि मैं क्या, मेरे पिता, दादा भी घर की बच्चियों को बेटों जैसा मानते थे, पुकारते थे. कभी किसी तरह का भेदभाव ना ज़ाहिर होने दिया कभी.

मुझे क्षण भर के लिए खामोश देख उन लड़कियों में से एक ने अपनी चप्पलें उतारी और अपने हाथों में ले लीं. दूसरी अपनी पतली, तीखी आवाज़ में चीख कर बोली “डेज़ी को लड़के जैसा नहीं बुलाना. मेरे पापा पुलिस में हैं, हम आपको जेल भिजवा देंगे!

मैंने मुस्कुराते हुए उन्हें समझाने की कोशिश की कि ये तो मेरा अंदाज़ है पुकारने का, इसमें लड़की को लड़का बनाने वाली कोई बात नहीं. लेकिन उन्होंने चेतावनी के रूप में फिर कहा कि लड़की लड़की होती है उसको लड़की जैसा ही पुकारो.

वे तो चले गईं लेकिन मैं ये सोचता आगे बढ़ा कि सारा नारीवादी समाज समानता की बात कर रहा और ये बच्चियाँ फर्क बनाए रखने की जिद पर हैं. क्या होगा इस दुनिया का!

आपका क्या ख़्याल है?

मुझे जेल भिजवा ही दिया था उस लड़की ने!
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बेहद चंचल डेज़ी हमारी पालतू German Boxer Dog हुआ करती थी. जो एकाएक ही हमसे बिछुड़ कर चलती बनी 🙁 देखिए यह लिंक https://www.bspabla.com/?p=95Powered by Hackadelic Sliding Notes 1.6.5

मुझे जेल भिजवा ही दिया था उस लड़की ने!” पर 12 टिप्पणियाँ

  1. हुम् । नारी बने हुए ही नारी के अधिकार लेने की गरज है… लड़का बनकर नहीं… 🙂
    टिप्पणीकर्ता सिद्धार्थ जोशी ने हाल ही में लिखा है: इंद्रियों को जीतने वाले के आगे अप्‍सराओं का नृत्‍यMy Profile

  2. बात अस्तित्व की है. भेदभाव की नहीं.लड़कियों की बात बिलकुल सही है डेजी बुलाया कीजिये :):)

  3. लड़कियों को समानता प्राप्त करने के लिए एक पुरुष नाम की जरूरत क्यों होनी चाहिए? यह भी तो हो सकता है कि हम लड़कियों को समानता देने के लिए लड़कों के नाम लड़कियों जैसे रखने लगें।
    टिप्पणीकर्ता दिनेशराय द्विवेदी ने हाल ही में लिखा है: किराएदार से मकान खाली कैसे कराएँ?My Profile

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