तैयार हो जाईये, अब आपकी तन्हाई का साथी रोबोट बनेगा

व्यक्तिगत रुचि की बात करें, तो मुझे हॉलीवुड की फिल्म I, Robot का वह दृश्य बहुत रोमांचित करता है, जब सड़क पर, पर्स लिए दौड़ते मानवनुमा रोबोट की पृष्ठभूमि में, एक युवती मानवनुमा रोबोट से आज के आम दृश्यों जैसे बतियाती दिखती है। अभी भी रोबोट को लेकर आम लोगों में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं होता है, क्योंकि इन्हें कुछ खास कामों के लिए ही प्रोग्राम किया जाता है, लेकिन अब हो सकता है कि रोबॉट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाएं। अब वैज्ञानिक ऐसे काल्पनिक रोबोट को साकार करने के लिए कमर कस चुके हैं, जो मानवीय भावनाओं को भी समझ सकेंगे और जिनसे आपका रिश्ता कुछ ऐसा होगा, जैसे वे आपके परिवार के सदस्य हों।

पिछले दिनों यूरोपीय यूनियन के इंजीनियर, मनोवैज्ञानिकों और कंप्यूटर विशेषज्ञों की जमात ने एक अहम प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए बैठक की। इस प्रोजेक्ट की खासियत थी ऐसी मशीन, जिसका आप ही की तरह अपना व्यक्तित्व होगा। करीब 66 लाख पाउंड के प्रोजेक्ट ‘लिरिक’ (Living with Robots and Interactive companions) में यूरोप के सात देशों की 10 यूनिवसिर्टी ने भाग लिया यह प्रोजेक्ट चार साल तक चलेगा।

यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के पीटर मैक ओवन इस प्रोजेक्ट के समन्वयक हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में ऐसे रोबोट बनाने की कोशिश की जाएगी, जो लोगों के साथ उनकी भावनाओं के अनुरूप अपने आप को ढालकर उनकी जिंदगी में शामिल हो जाए। उन्होंने कहा, ‘ऐसा रोबोट बनाने के लिए हमें यह जानना होगा कि लोग इस तरह के साथी से आखिर उम्मीद क्या करेंगे। हम नहीं चाहते कि लंबे समय में उनका यह साथी उनके लिए बोझ लगने लगे

अभी तक फोन और कंप्यूटर जैसी मशीनों ने साबित कर दिया है कि कैसे मशीनें इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाती हैं। अब देखना यह होगा कि अगली पीढ़ी की रोबोटनुमा मशीनों इंसानों के साथ अपना तालमेल कैसे बैठा सकेंगी। मैक ओवन ने कहा, ‘हम ऐसी मशीन की कल्पना कर रहे हैं, जो एक नौकर की तरह आपके हर काम में आपका हाथ बंटाए। मिसाल के तौर पर यह मशीन ऐसी होनी चाहिए, जो इंटरनेट की सारी सूचनाओं को जुटाकर बाजार से आपके लिए सामान ला सके।

इंग्लैंड की यूनिवसिर्टी ऑफ हर्टफोर्टशायर के प्रफेसर कर्स्टन डाउटनहैन ने कैस्पर नाम का एक रोबॉट बनाया है, जो दो साल के बच्चे जैसा दिखता है। यह चेहरों के हावभाव बदल सकता है। इसे कुछ गेम्स भी खेलने के लिए भी प्रोग्राम किया गया है। कर्स्टन ने एक शोध के आधार पर पाया कि लोग चाहते हैं कि रोबॉट की शक्ल उस व्यक्ति की तरह हो, जिसके साथ वे सबसे ज्यादा बात करते हों। मैक ओवन को पूरा विश्वास है कि रोबोट्स की खासियतों की वजह से लोग इनके साथ एक खास रिश्ता बना लेंगे।

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