दोपहर के बाद आनंद दे गई वो …

अजय कुमार झा आजकल मुझसे खूब शिकायत करते हैं कि मैं अपने ब्लॉग्स पर कुछ नहीं लिखता। ब्लॉग्स इन मीडिया, ब्लॉग गर्व, ब्लॉग मंडली, ब्लॉग मंच संबंधित वस्तुस्थिति बताने पर भी वह अपना स्नेह भरा आग्रह बनाए रखे हैं।

आज मैंने ठान लिया था कि हालिया दिल्ली यात्रा संस्मरण की शुरूआत की जाए लेकिन ऑफिस से लौटते हुए ही आंधी तूफ़ान ने ऐसा तांडव मचाया कि इलाके की बिजली ही गुल हो गई गई। यूपीएस की बिजली बचाए रखी कि बाक़ी कम्प्यूटरों के काम आ जाए।

शाम होने के पहले ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। कुछ सूझा नहीं तो आज हुई इस बारिश वाली वीडियो को ही अपलोड कर अजय जी के आग्रह का मान रखना पड़ रहा।

आप भी मज़ा लीजिए इस घनघोर बारिश का जो झुलसा देने वाली दोपहर के बाद आनंद दे गई। और हाँ …. स्पीकर ऑन रखिएगा


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दोपहर के बाद आनंद दे गई वो …” पर 17 टिप्पणियाँ

  1. आनंद आ गया जी । दिल्ली तो जल रही है अभी । यही बारिस देखकर खुश हो लेते हैं ।

  2. इतनी बारिश ! वाह जी .यहाँ तो पारा आसमान छू रहा है.वैसे ये लताओं से ढकी दीवारे पहले भी देखि है मैंने आपके फोटोज में.अपने घर से रिकोर्डिंग की है न ?
    इन लताओ में फ़ूल आते हैं?या पत्तियों वाली बेले ही है? है बडी खूबसूरत. बागवानी का शौक भी है लगता है पेड़ पौधे लगाने या लगवाने का.हा हा हा देख लीजिए कितनी चीजे देख ली इस क्लिप में मैंने.क्या करूं?ऐसिच हूँ मैं तो.

  3. इस बारिस को हमारे यहां भेज दो, इसकी हमें इस समय सख्त जरुरत है,

  4. अजय भाई की शिकायत जायज है , आप दूसरों की मदद करने में ही लगे रहते हैं और हम आपको पढ़ कम पाते हैं ! इस शिकायत में मुझे शामिल समझिये !
    शुभकामनायें आपको !

  5. मी लॉर्ड,

    शिकायत दर्ज की जाए…

    कैमरा सिर्फ बाहर की बारिश पर फोकस क्यों रहा…अंदर टेबल पर काजू की प्लेट और सोमरस के पैमाने की तरफ क्यों नहीं मुड़ा…

    जय हिंद…

  6. देखिये आपकी पोस्ट यहाँ भी पहुँच गयी, बारिश के साथ।

  7. मई की बरसात में रिमझिम के बजाय छकाछक ध्वनि और सरसराहट, वासत्व में आनंद दे गई।

  8. सत श्री आकाल !
    मजा आ गया ! ठंड पे गई रूह नू !
    बारिश वेख के ते गल करके !
    मौज लौ!
    पापा जी नू वी सत श्री आकाल ,
    सब नू प्यार !
    अशोक सलूजा !

  9. यूं लगा ठंडी फ़ुहारें यहां तक आ रही हों …………दिल्ली वाले तो झुलस रहे हैं ………………चलिये दिल खुश हुआ ये देखकर्।

  10. भारत की बारिश देख कर मजा आ गया, हमारे यहां तो कई कई दिन चलती हे बरसात, आप के इस विदियो मे बिजली तो चमकी, लेकिन आवाज नही आई कडक दार बिजली की…. बहुत बहुत धन्य्वाद बचपन की बरसात की याद दिला दी जिस मे हम नहाते थे

  11. आप मजाक तो नहीं कर रहे। यह तो सावन का नजारा है और आप कह रहे हैं बैशाख की। बरसात की सरसराहट का आनन्‍द ही अलग रहा।

  12. हम तो रांची में हैं जहां का मौसम बहुत सुहाना होता है….यहां आइए तो ये बारिश अक्सर मिलेगी…
    वैसे आपकी बारिश में भी भीग गई..भीगने का मजा ही कुछ और है…

  13. मेरा मन तो इसमें कूदने को हो गया…

  14. दुआ करें कि ऐसी ही बारिश जुलाई में भी हो ….

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