दो घंटे की सूचना, तीन शहरों के चार ब्लॉगरों की मुलाकात: सिद्धेश्वर जी भिलाई में थे!

विश्व दूरसंचार दिवस वाले दिन, 17 मई को एक औपचारिक कार्यक्रम से घर लौटा। रात को कम्प्यूटर जी के सामने धूनी रमायी तो ईमेल के इनबॉक्स में दो लाईनों की मेल दिखी – नमस्कार पाबला जी,आपके ब्लाग पर अक्सर जाना होता है …23/ 24 मई में मैं भिलाई में रहूंगा, ब्लागर बिरादरी का एक सदस्य होने के नाते उस दौरान आपसे मिलकर … आपसे संपर्क कैसे हो सकेगा? मैं आपको … परेशान तो नहीं कर रहा हूँ? आदरसहित-

पहले एक-दो बार टिप्पणियाँ दे चुके इन ब्लॉगर साथी ने व्यक्तिगत सम्पर्क किया था। इंटरनेट के आभासी वातावरण में विचरण के दौरान हुयी गलतियों के बाद अपनाये हुये अपने सतर्कता के सिद्धांत पर अमल करते हुये मैंने वापसी मेल से ज़वाब दिया कि आप अपना नम्बर दे दीजियेगा, मैं आपसे सम्पर्क कर लूँगा, परेशानी वाली कोई बात नहीं। दूसरे ही दिन उनका मोबाईल नम्बर मुझे मिल गया। तुरंत फोन कर मैंने बात भी कर ली। वे एक पारिवारिक यात्रा पर छत्तीसगढ़ की यात्रा पर आ रहे थे। रायपुर, बिलासपुर सहित भिलाई भी उनकी यात्रा के स्थानों में से एक था।

24 मई की सुबह मेरे कारखाने की युवती ‘रोज़’ ने सूचना दी कि आपके एक ब्लॉगर साथी से आपकी मुलाकात निर्धारित है। मुझे भी याद आया। फोन से सम्पर्क किया गया। पता चला कि हमारे ब्लॉगर साथी तो अभी बिलासपुर में ही परिवार के साथ आनंद उठा रहे हैं। 26 मई को वापसी का रिजर्वेशन है। भिलाई की यात्रा संभव नहीं लग रही। थोड़ी मायूसी तो हुयी किंतु पारिवारिक माहौल में समय न निकाल पाना मैं अपनी मुम्बई यात्रा के दौरान महसूस कर चुका था।


25 मई की सुबह जब द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा के अंतिम दिन वाली पोस्ट लिख रहा था तो मोबाईल की घंटी बजी। ‘भाई साब, मैं भिलाई पहुँच गया हूँ, सेक्टर 1 में हूँ’। वाह! मैं तो उछल ही पड़ा। पता पूछना चाहा तो उन्होंने जिस व्यक्ति को मोबाईल थमाया वे मेरे पुराने कार्यस्थल के सहकर्मी निकले। 20 वर्ष बाद उनसे बात हो रही थी! उन्हीं ने बताया कि जीजा जी कल रात तक तो अपनी असमर्थता बता रहे थे बिलासपुर से भिलाई आने के लिए और आज अचानक आ पहुँचे। फिर आते साथ ही आपका नाम लेकर मुलाकात की बात करने लगे!

मैंने दोपहर का समय निश्चित किया कि अभी अभी तो पहुँचे हैं, साँस तो ले लें। फिर संजीव तिवारी जी को संपर्क किया मैंने। उन्हें पहले ही बता चुका था। हम दोनों ने यह कार्यक्रम बनाया कि दोपहर का भोजन तिवारी जी के देखरेख में चल रहे होटल हिमालय के रेस्टोरेन्ट में किया जाये। द्विवेदी जी की पोस्ट खत्म करते करते हमने एक सूचना और जोड़ दी उसमें कि जब यह पोस्ट प्रकाशित हो रही होगी उस समय हम होंगे भिलाई में पधारे कबाड़खाना तथा सस्ता शेर के एक सदस्य के साथ।
(सिद्धेश्वर सिंह)

वे ब्लॉगर साथी थे कर्मनाशा वाले सिद्धेश्वर सिंह जी। जिनकी भागीदारी कबाड़खाना, सस्ता शेर तथा नैनीताली और उत्तराखंड के मित्र में भी है।

जब मैं सेक्टर 1 के लिए रवाना हो रहा था तो तिवारी जी का फोन आ गया कि दुर्ग शहर के एक ब्लॉगर साथी हैं जो सिद्धेश्वर जी के आने सी सूचना मात्र से ही उत्कंठित हैं। वे भी लंच में शामिल रहेंगे। मैंने जब परिचय जानना चाहा तो पता चला कि वे मुझसे मिलने के लिए भी उत्सुक हैं। बात हो रही थी शरद कोकास जी की।

From Siddheshvar Singh visits Bhilai

 

(शरद कोकास)

जब मैं सेक्टर 1 से मौर्या टाकीज़ वाले अंडरब्रिज़ से होते हुए होटल हिमालय पहुँचा तो रिसेप्शन से पता चला कि तिवारी जी इंतज़ार कर रहे थे, अभी-अभी ऊपरी फ्लोर पर गये हैं। सूचना भेजी गयी। एक मिनट में ही तिवारी जी सामने थे। गर्मजोशी के माहौल में अभिवादनों के बीच हम लिफ्ट से ऊपरी फ्लोर पर रेस्टारेंट जा पहुँचे। सीधे-सरल, निश्छल व्यक्तित्व वाले सिद्धेश्वर जी बता रहे थे कि परिवार के बीच इतना कम समय बच रहा था कि भिलाई आने का अवसर ही नहीं बन पा रहा था। फिर ससुराल की खातिरदारी के बीच पनपते आलस्य को भगा कर आ ही पहुँचा, बस अभी शाम को वापस चला जाना है। कल गरीब रथ से रिज़र्वेशन है बिलासपुर से।

साहित्य से जुड़े सिद्धेशवर जी अपनी धीर-गंभीर आवाज़ में अपना परिचय साझा कर रहे थे। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में खटीमा के एक महाविद्यालय में हिंदी के व्याख्याता, ब्लॉगिंग में आकर एक नई दुनिया से परिचित हुये। यह माध्यम उन्हें अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम लगता है। कुछ देर बाद जब अपने अपने क्षेत्र के ब्लॉगरों का परिचय भी दिया जाने लगा, अन्य की बातें की जाने लगीं तो सिद्धेश्वर जी ने सहज रूप में पीडी और लवली जैसे भाई-बहन का उल्लेख भी किया। मैंने जब बताया कि उन दोनों ने तो एक-दूसरे को कभी देखा तक नहीं तो वे चकित रह गये। ऐसे ही कई मसलों पर हमारा एक-मत था कि यह है ब्लॉग पावर!

From Siddheshvar Singh visits Bhilai

 

(संजीव तिवारी)

इस बीच शरद कोकास जी आ पहुँचे थे। मेरी भी उनसे पहली मुलाकात थी। वे भी साहित्य से जुड़े हुये हैं। फिर क्या था। तिवारी जी छत्तीसगढ़ी साहित्य से जुड़े हुये हैं। उनके, सिद्धेश्वर जी और शरद कोकास जी के बीच इतनी बातें हुयीं, इतने व्यक्तियों, साहित्यकारों, प्रकाशकों के फोन नम्बर का आदान प्रदान हुया। कितनों की ही बातचीत एक-दूसरे से करवायी गयी। इतने नाम सुने हमने कि अब कुछ याद ही नहीं रहा! अब सोचता हूँ कि अगली बार कहीं ब्लॉगरों के बीच बैठना हुया तो एक वॉयस रिकॉर्डर ले जाऊँगा जिससे बाद में, बातचीत का ब्यौरा याद किये जाने में आसानी होगी।


शरद जी भोजन कर आये थे। उनकी मनाही के बाद हम जुटे भोजन में। वार्तालाप चलता रहा, स्वादिष्ट लंच ठंडा पड़ गया लेकिन बातों की गर्माईश बनी रही। गर्मागरम कॉफी के दौर में एक-दूसरे के परिवार की बातें साझा की जाने लगीं। अपने कार्यों के बारे में बताते हुये समय बीतता चले गया। मुझे सिद्धेश्वर जी के परिवार का आग्रह याद आया तो घड़ी पर नज़र पड़ी। समय इतनी जल्दी बीतेगा मुझे अंदाज़ नहीं था। सिद्धेश्वर जी अनमने से थे। धीरे से कारण पूछा तो पता चला कि वे इस छोटी सी मुलाकात से संतुष्ट नहीं थे। अगली बार कुछ अधिक समय के लिए आने की बात कह शायद अपने आप को ही दिलासा देते से लगे।

अंत में जब वे विदा लेने लगे तो अपने दिल की बात कह ही बैठे कि भरे मन से जा रहा हूँ। मन तो हमारा भी भर आया था, किंतु कह नहीं सके।
दो घंटे की सूचना, तीन शहरों के चार ब्लॉगरों की मुलाकात: सिद्धेश्वर जी भिलाई में थे!
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दो घंटे की सूचना, तीन शहरों के चार ब्लॉगरों की मुलाकात: सिद्धेश्वर जी भिलाई में थे!” पर 16 टिप्पणियाँ

  1. बहुत खूब पाबला जी…जिन्दगी के मेले मैं ऐसे अनोखे मिलन ..यादगार ही साबित होते हैं….बहुत ही रोचक मिलन समारोह रहा ….और उसका वर्णन उससे भी मनमोहक…..

  2. हम्‍म । वॉयस रिकॉर्डर नहीं वीडियो रिकॉर्डर ले जाईयेगा और हां वेब कैम से सजीव प्रसारण भी कर दीजियेगा । वैसे आपसे हम इससे भी ज्‍यादा से भी ज्‍यादा की उम्‍मीद करते हैं ।
    मज़ा आया इस ब्‍यौरे में ।

  3. वैसे आईडिया बुरा नहीं है युनूस जी!

    अगली बड़ी ब्लॉगर मीट की वेबकास्टिंग कर ही डाली जाये

  4. अच्छा लगा इस ब्योरे को पढ़ कर पाबला जी. यूँ ही मिलते मिलाते रहिए..

  5. दुर्ग, रायपुर और भिलाई! से ब्लागरों के आगमन और मुलाकातों की रपटें और कुछ दिन बाद संभावित ब्लागर सम्मेलन! लगता है कुछ बरसों में तीन नगरों का यह समुच्चय हिन्दी ब्लागरी का प्रयाग हो लेगा। जहाँ जाए बिना ब्लागर को मुक्ति नहीं।

  6. पाब्ला जी गलत बात है ये,आपने हमे बुलाया तक़ नही। भई हम भी मिल लेते सिद्धेश्वर जी से।

  7. लगता है भिलाई के सितारे आजकल खूब चमक रहे हैं। दो साल पहले जब हिन्दी ब्लोगजगत से जुड़ी थी तब इक्का दुक्का ब्लोगर मीट के बारे में पढ़ा था अब तो जगह जगह ज्यादा से ज्यादा ब्लोगर मीट हो रही हैं। ये भी हिन्दी ब्लोगजगत के परवान चढ़ने की एक निशानी है।
    अगली बार वेबकास्टिंग देखेगें। अगला कौन सा ब्लोगर आ रहा है/रही है?

  8. badhai ho saheb aap sabhi milne walo ko.

    hame to vaha maujud na rah pana khal raha hai…..

    kahir, fir kabhi jald hi…..

  9. बड़े भाई,
    शुक्रिया दिल से !
    और क्या कहूँ ?
    संवेदनाओं के तंतु ऐसे ही जुड़े रहें !

  10. पाबला जी बहुत सुंदर लगा आप का यह मिलन, हमारे यहां भी अरुणा जी आई हुयी है, हमारी मुलाकात भी कई बार हो चुकी है, मेने अब उन्ही पर छोड दिया , वो जब भारत वापिस आयेगी तभी अपनी डायरी भी खोले गी, उस से पहले मै कुछ ज्यादा लिखू तो उस डायरी का मजा उतना नही रहेगा,
    सभी चित्र भी बहुत अच्छॆ लगे.
    धन्यवाद

  11. वाह, आपका भिलाई तो ब्लौगर मिलन के लिए प्रसिद्ध होता जा रहा है। कभी शायद हम भी टपक पड़ें।
    घुघूती बासूती

  12. पाबला जी सोनी एरिक्सन का फोन रखिये कभी भी कहीं भी रेकॉर्डिन्ग कीजिये! बाकी विवरण और फोटो सब मस्त है।

  13. yah kalpanik duniya kitne hi vastwik sambandhon ka dwar kholti hai.

  14. "दो घंटे की सूचना, तीन शहरों के चार ब्लॉगरों की मुलाकात: सिद्धेश्वर जी भिलाई में थे!"

    बढ़िया मुलाकात रही,
    लगता है हमें भी आपके शहर में
    आना ही पड़ेगा।

  15. यह पाबला जी का कमाल है अगली बार युनुस भाई के सुझाव यानि सजीव प्रसारण की कोशिश की जायेगी .पाबला जी का कारखाना ज़िन्दाबाद .संजीव जी हमारे जनसम्पर्क अधिकारी का रोल बखूबी निभाते हैं .द्विवेदी जी अपनी सूची में दो नाम और जोड सकते हैं दुर्ग भिलाई रायपुर के साथ राजनांदगाँव और बिलासपुर भी .लवली कुमारी जी कम्पुटर के स्क्रीन पर दिखाई देने वाली यह दुनिया वास्तव में वास्तविक ही है. आप सभी का यहाँ स्वागत है आप जब भी आयें पाबला जी को बस सूचित कर दें आपको यहाँ बहुत प्यार मिलेगा .

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