द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा: प्रयोजन, उनकी उलझन, मेरी नाराजगी

इस वर्ष फरवरी माह के पहले,  तीसरा खंबाअनवरत ब्लॉग के लेखक व कोटा, राजस्थान में वकालत कर रहे दिनेशराय द्विवेदी जी का, उनके सुपुत्र सहित भिलाई प्रवास हुया था। मैंने तब ही यह निश्चय कर लिया था कि इस प्रवास की कुछ बातें तभी साझा करूँगा जब उनके भिलाई प्रवास का उद्देश्य पूरा हो जायेगा। उद्देश्य की पूर्ति तो इसी माह, मई के प्रथम सप्ताह में हो गयी किंतु उसके बावज़ूद शिफ्ट ड्यूटी से पनपी आलस्यता से कुछ दिन और गुजर गये। इस सप्ताह नाईट शिफ्ट है तो सोचा कि अब और देर ठीक नहीं।

दिवेदी जी से मेरा परिचय, उन्हीं के कार्यक्षेत्र से जुड़े एक ब्लॉग लेखन के दौरान हुया था। उन्होंने भी लगभग उसी समय अपना तीसरा खंबा ब्लॉग शुरू किया था। वे मेरे बारे में जानना चाह रहे थे। बस यूँ ही सिलसिला चल निकला और अब तक निर्बाध चल रहा है।

(दिनेशराय द्विवेदी जी व उनके सुपुत्र वैभव द्विवेदी)

उनके सुपुत्र वैभव, इंदौर से एमसीए कर रहे हैं और यह उनका अंतिम सेमेस्टर है। पाठ्यक्रम के मुताबिक किसी संस्थान में विषय आधारित एक प्रोजेक्ट करना होता है इसी सिलसिले में चर्चा छिड़ी तो द्विवेदी जी ने भिलाई इस्पात संयंत्र में गुंजाईश की बात पूछी। हमने भी उनको सूचित कर दिया कि वैभव यहाँ भिलाई तकनीकी संस्था (जिसका ताजा नामकरण मानव संसाधन विकास केंद्र है) से अपना प्रोजेक्ट कार्य कर सकता है। यह तकरीबन पिछली दीपावली के आसपास की बात है। उसी समय द्विवेदी जी से चैट के वक्त उनकी वेबसाईट का पंजीयन कर एक अस्थायी पेज बना दिया गया था।

वैभव का संक्षिप्त डाटा मिल जाने पर मैंने अधिक जानकारी जुटा कर उन्हें यह पक्की सूचना दे दी कि यहीं भिलाई इस्पात संयंत्र के मानव संसाधन विकास केंद्र में उनका काम बन जायेगा। इसी बीच द्विवेदी जी ने उल्लेख किया कि उनकी सुपुत्री पूर्वा 2 फरवरी को बल्लभगढ़ में अपनी नयी नियुक्ति पर उपस्थिति देगी, इधर वैभव को भी जनवरी के अंत तक अपना प्रोजेक्ट और ट्रेनिंग भिलाई शुरू करनी थी। वह खुद भिलाई आ कर अपना प्रोजेक्ट और ट्रेनिंग प्रारंभ कर सकता था। लेकिन मेरा आग्रह था कि वैभव के साथ द्विवेदी जी भी सपरिवार भिलाई पहुँचें और कम से कम तीन-चार दिनों के लिए रूकें। द्विवेदी जी भी सोच रहे थे कि मेरे सुपुत्र से अपनी वेबसाईट की रूपरेखा पर आमने-सामने की चर्चा कर लें। फिर भी उन्होंने उपरोक्त परिस्थिति का उल्लेख किया और कहा कि मैं एक दिन से अधिक नहीं रुक सकूंगा। मैंने नाराजगी जाहिर करते हुये कह दिया कि आप के आने की भी क्या आवश्यकता है। वैभव को भेज दीजिए काम हो जाएगा!

नाराजगी ने अपना काम किया। अपनी मुम्बई यात्रा के दौरान द्विवेदी जी से सूचना मिली कि उन्होंने 27 जनवरी का भोपाल से और 30 जनवरी का दुर्ग से टिकट करवा लिया है। साथ ही यह भी जोड़ दिया ‘शोभा (पत्नी) को लाने का मन था। लेकिन पूर्वा 23 जनवरी को कोटा पहुँच रही है अत: उन्हें साथ ला पाना संभव नहीं है।’

शब्दों के सफर वाले अजित वडनेरकर जी के निवास से रवाना होकर द्विवेदी जी भिलाई आने के लिए छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पर सवार होने ही वाले थे कि हमनें उनके मोबाईल की घंटी बजा दी और यह सुनिश्चित कर लिया कि हाँ वे भिलाई आ रहे हैं।एक छोटी सी जानकारी भी दे दी कि वे दुर्ग स्टेशन पर ही उतरें, मैं वहाँ मौज़ूद रहूंगा।

आगे का वृतांत अगली पोस्ट में।
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द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा: प्रयोजन, उनकी उलझन, मेरी नाराजगी” पर 8 टिप्पणियाँ

  1. द्विवेदी जी से आपके मिलन की कथा सुन रहे हैं..जारी रहें.

  2. किस्सा जारी रखें।उन्हे यंहा आकर गये काफ़ी समय हो गया मगर ऐसा लगता है कि कल की ही बात है।वाकई जादूई व्यक्तित्व है उनका।

  3. बताते जाइए,हम अगली किश्त की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
    घुघूती बासूती

  4. पाबला जी,तुसी ग्रेट हो…
    सुनाते जाइये…मज़ा आ रहा है।

  5. पाबला जी,
    दिनेश जी के बारे में जानकार अच्छा लगा कि वे भिलाई आए थे। हमारी भी बहुत दिनों से आपसे मिलने की तमन्ना है। हमारा हमेशा भिलाई आना होता है, लेकिन हमारे पास न तो आपका मोबाइल नंबर है न पता। हम अपना मोबाइल नंबर दे रहे हैं उचित लगे तो काल करके कृपया अपना नंबर बना दें। इस बार भिलाई आए तो आपके दर्शन भी करने जरूर आएंगे। धन्यवाद …. हमारा मोबाइल नंबर 98267-11852, 9300350053, 94255-11983

  6. Dinesh uncle ke bare me padhna mujhe hamesha se hi achchha lagta raha hai.. so aage ke intjar me hun.. 🙂

  7. सुँदर यादेँ और चित्र भी
    – लावण्या

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