नाइट्रोजन बेहतर है कार के टायर में


Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /home/hosthindi/public_html/bspabla.com/wp-content/plugins/wordpress-23-related-posts-plugin/init.php on line 380

पिछली बार जब मैंने यमुना एक्सप्रेस वे पर फर्राटे भरे हमारी गाड़ी ने वाली पोस्ट लिखी तो कई सहयोगी/ मित्रों ने ने जिज्ञासा प्रकट की उस खबर के संदर्भ में जिसमें बताया गया था की यमुना एक्सप्रेस वे पर कई गाड़ियों के टायर फट जाने से घातक दुर्घटनाएं हो चुकी.

उनका कहना था कि मैंने बिना सोचे समझे 100 किलोमीटर से ऊपर रफ़्तार बनाये रख कर बहुत जोखिम लिया. एक मित्र ने तो नाराज़गी भी ज़ाहिर की कि पिताजी के साथ होते इतनी लापरवाही क्यों की. बात सही भी थी सबकी. यमुना एक्सप्रेस वे पर टायर फटने से कई मौतों की खबरें मैं पढ़ चुका था. ज़्यादातर दुर्घटनाएं तभी हुईं जब गाड़ियां तेज़ रफ़्तार में रहीं.

मैंने सभी को आश्वस्त किया कि मेरी चेष्टा हमेशा सुरक्षा अपनाने की रही है और इस बार भी हमेशा की तरह अपनी मारुती ईको के टायरों में नाइट्रोजन का इस्तेमाल ही किया.

दरअसल होता यह है कि नायलॉन धागों से बने गाड़ी के टायर, घर्षण की वजह से गरम होते हैं. गरम होने की यह प्रक्रिया तब और तेज़ी से बढ़ती है जब वाहन की गति बढ़ी हुई हो या टायर कुछ हद से ज़्यादा घिस चुके हों. द्रुतगामी मार्गों पर आते ही वाहन चालक मचल ही उठता है रफ़्तार बढ़ाने के लिए और यमुना एक्सप्रेस वे जैसे मार्गों की तकनीक के कारण कई बार टायर फटने से प्राणघातक हादसे हो जाते हैं.

जिन सडकों की ऊपरी सतह ठोस कंक्रीट की हो उन पर टायर, डामर की सड़क के मुकाबले ज़्यादा गर्म होते है. भारत जैसे गर्म वातावरण वाले देश में तो यह कुछ ज़्यादा ही तेजी से गरम होते हैं. उनमें हवा का दबाव निर्धारित सीमा से कम हो तो और भी ज़्यादा तेजी से गरम.

तेज, महंगी गाड़ियाँ में भले ही टायर भी बेहतरीन लगे हों लेकिन उनके प्रयोग की सही जानकारी बहुत कम व्यक्ति ही रखते हैं. कुछ आम बातें हैं जिनका पालन कोई भी कर सकता है जैसे कि वाहन निर्माता के निर्देशानुसार टायर में हवा का दबाव सही रखना, टायर के ट्रेड की गहराई खत्म होने के पहले ही टायर बदल देना, व्हील एलाइनमेंट और बैलेंसिंग एक निश्चित समयावधि में करवाते रहना.

नाइट्रोजन टायर

मैं इन सभी उपायों के अलावा एक और चीज पर भी ध्यान देता हूँ कि अपनी मारुती ईको के ट्यूबलेस टायर्स में आम तौर पर डाली जाने वाली हवा के बदले नाइट्रोजन ही डलवाऊँ.

इसका सबसे पहला साधारण सा फायदा तो यह होता है कि बार बार टायर में ‘हवा’ का दबाव चेक नहीं करवाना पड़ता. क्योंकि नाइट्रोजन के मुकाबले, कंप्रेस्ड एयर 10 गुना अधिक ‘रिसती’ है. हमारे सुपुत्र ने अप्रैल 2012 में जो मोटरसाइकिल ली थी उसके टायरों में नाइट्रोजन ही है. पिछले महीने, दो साल बाद मुझे याद आया कि जांच करवा लेनी चाहिए टायर्स की तो पता चला कि ज़रूरत ही नहीं अभी कुछ और नाइट्रोजन डलवाने की 🙂 यही हाल मेरी मारुति ईको का है.

अरसे से नाइट्रोजन का प्रयोग, इसके गुणदोषों के कारण, रेसिंग कारों, हवाई जहाज़ों और सेना के वाहनों में होता रहा है. सबसे पहले तो यह कि इससे जंग नहीं लगता Non-corrosive है, दूसरा, यह गैर ज्वलनशील है Non flammable , तापमान के घटने बढ़ने से इसका आयतन तकरीबन नहीं बदलता. समुद्र तल से ऊंचाई बढ़ने पर भी इसके आयतन मैं मामूली बदलाव होता है. जबकि साधारण हवा में यह खूबियां नहीं होतीं.

Non-corrosive, Non flammable होने का कारण है कि इस विशुद्ध नाइट्रोजन में नमी नहीं होती जबकि साधारण हवा में 78% नाइट्रोजन होने के साथ साथ 20% ऑक्सीजन भी होती है. ऑक्सीजन समाहित होने के कारण ही यह टायर से रिसती भी है.


कुल मिला कर नतीजा यह निकाला जा सकता है कि टायर में नाइट्रोजन का इस्तेमाल करने से एवरेज बढ़ता है, टायर का बढ़ता तापमान कम किया जा सकता है, वाहन का बेहतर नियंत्रण होता है, रिम और टायर का जीवनकाल बढ़ता है, दबाव बराबर बना रहता है वगैरह… वगैरह … वगैरह

नाइट्रोजन का प्रयोग तो आजकल के पसंदीदा आलू चिप्स के पैकेट्स में नमी को दूर रखने के लिए भी धड़ल्ले से हो रहा. इसके और भी कई दसियों उपयोग हैं. देखिये इस वीडियो लिंक में

ये तो हुई कुछ जानकाारियाँ. व्यवहारिक तौर पर कंप्रेस्ड एयर हर जगह मिल जायेगी लेकिन नाइट्रोजन ईनी गिनी जगह पर मिलती है. जहां तक मेरी जानकारी है मेरे अपने शहर, भिलाई में केवल दो ही पम्पस पर यह उपलब्ध है. हालांकि कहा जाता है कि नाइट्रोजन डलवाना महंगा पड़ता है लेकिन मेरे शहर में यह मुफ्त मिलती है. टायरों में नाइट्रोजन डालने वाले अक्सर यह सलाह भी देते हैं कि दोपहिया वाहनों में नाइट्रोजन डले टायर का दबाव कम हो तो नाइट्रोजन से ही दबाव बराबर किया जाना चाहिए, जबकि चार-पहिया वाहनों में दबाव बनाये रखने के लिए कंप्रेस्ड एयर का सहारा लिया जा सकता है.

कई जगह यह भी पढ़ने मिला कि नाइट्रोजन की सारी ढकोसलेबाज़ी केवल बाज़ार का खेल है. मुझे व्यक्तिगत तौर पर जो अनुभव हुए हैं उनसे तो संतुष्टि है. पिछली बार मैंने टायरों में कब नाइट्रोजन डलवाई थी अब याद नहीं लेकिन उसके बाद भिलाई से काठमांडू आना जाना हुआ, फिर भिलाई से पंजाब भी आया गया अपनी मारुति ईको से. एक बार पुणे का चक्कर भी लग गया. स्थानीय भाग-दौड़ के साथ कुल मिला कर 20,000 किलोमीटर चल चुकी होगी. टायर बदल गए, घिस गए लेकिन ना तो सामान्य पंक्चर की नौबत आई ना ही बार बार ‘हवा’ डलवाने की.

तो अगर नाइट्रोजन डले टायर्स का कोई नुकसान नहीं तो हर्ज ही क्या है बेहतर ड्राइविंग अनुभव के लिए इसका प्रयोग करने में? भले ही आप तेज़ रफ़्तार ना चलाते हों!

नाइट्रोजन बेहतर है कार के टायर में
2.6 (52%) 5 votes
Print Friendly, PDF & Email

मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

नाइट्रोजन बेहतर है कार के टायर में” पर 22 टिप्पणियाँ

    • Heart
      स्नेह बनाए रखियेगा नवीन जी

  1. ब्लॉग बुलेटिन आज की बुलेटिन, गुरु गुरु ही होता है… ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !
    टिप्पणीकर्ता ब्लॉग बुलेटिन ने हाल ही में लिखा है: गुरु गुरु ही होता है… ब्लॉग बुलेटिनMy Profile

  2. डिअर पाब्ला जी.

    नाइट्रोजन filled टायर्स के बारे में बताने के लिए धन्यवाद. आपसे अनुरोध है के क्या तलाशते हुए लोग आ रहे हैं को साइट से हटाने के बारे में सोचिये. लोगों की सर्च में बहुत सेक्सुअली explicit शब्द और वाक्य आपकी ब्लॉग की गरिमा ख़राब कर रहे हैं

    मनोज

    • Approve
      आपने इस और ध्यान दिलाया, आभार आपका

      निश्चित तौर पर, कुछ की वर्ड असहज कर देते हैं पाठक को
      समय समय पर इनको फिल्टर भी करता रहता हूँ, फिर भी कभी ऐसा शब्द आ ही जाता है
      हटाता इसलिए नहीं कि कई आईडिया भी मिल जाते हैं इससे

      एक बार पुन: आभार

  3. बहुत उचित जानकारी है,

    जब मै मुंबई -पूना रोड पर अत्य-अधिक रफ़्तार से गाड़ी चला रहा था,तो साथ बैठे व्यक्ति को घबराहट हुई, उनके कहने को अमल करते हुवे स्पीड ८०-१०० कर दी. बाद में मैंने इस बात पर गौर किया कि अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने के क्या परिणाम हो सकते है.

    १.टायर फट सकता है.२.सामने कोई अचानक आ जाये,मौत से भिडंत हो सकती है,३.कार भी चकना चूर हो सकती है.ओर भी कई कारण हो सकते है.”
    कार बनाने वाली कंपनिया भी पहले सेफ्टी सुरक्षा को मद्दे-नजर रखते हुवे कारो का निर्माण कर रही है-हमें भी अपनी ओर दुसरो की सुरक्षा के लिए उचित नियमो का पालन करना चाहिए.

    नाइट्रोजन सुझाव के लिए. आभार!

    • Approve
      नियमो का पालन तो करना ही चाहिए.

  4. मैं सड़क पर कई वर्षों से कार चला रहा हूँ परन्तु दुर्भाग्य वष मैंने कभी भी दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर नाइट्रोजन फिलिंग एयर पंप नहीं देखा है … कोई लिस्ट या कोई लिंक भेज दीजिये . आप तो ज़िंदगी में भरपूर अनुभव समेटे हुए हैं/ लेख आपके अनोखे व्यक्तितव पर और प्रकाश डालता है . धन्यवाद

  5. ज्ञान वर्धक जानकारी ! आज से जयपुर में नाइट्रोजन भरने वालों की तलाश शुरू 🙂

इस लेख पर कुछ टिप्पणी करें, प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
[+] Zaazu Emoticons