नाक कान गले के डॉक्टर ने किया मेरे दांतों का इलाज़ !

कई बार ऐसा कुछ होता है जो हमें हैरान कर देता है. चाहे वह किसी डॉक्टर का वायलिन बजाना हो, किसी बच्चे की हाजिरजवाबी हो या फिर किसी इंजीनियर का शानदार फ़ुटबाल खिलाड़ी होना.

यह एक नैसर्गिक प्रतिभा है जिसे हम किसी के भी व्यवसाय या उम्र के बंधन में नहीं बाँध सकते लेकिन जब भी दायरे से बाहर गाहे बगाहे प्रदर्शित होती है तो कुछ अटपटा भी लगता है.

ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुया जब नाक कान गले  के विशेषज्ञ डॉक्टर ने मेरे दांतों का सफल इलाज किया.

बात है सन 1996 की! जब लगातार दो सड़क दुर्घटनाओं से चेहरे पर पड़ी चोटों से मेरे कई दांत टूटे, साथ ही साथ जबड़ा अपना स्वाभाविक आकार खो चुका था.

बचे खुचे कई दांतों की जड़ें हिल चुकीं. दर्द के मारे बुरा हाल होने लगा. जब भी थूक बाहर निकालूँ, खून के अंश दिखें. सुबह सो कर उठते तकिया यूं नज़र आए जैसे पायरिया की बीमारी हो अरसे से. टेढ़े हो चुके जबड़े से स्पष्ट बोलने में भी तकलीफ होने लगी.

भिलाई इस्पात संयंत्र के दंत चिकित्सा विभाग में लगातार इलाज़ चला लेकिन सुधार की गति बेहद कम महसूस हुई. कुछ भी मीठा खट्टा खाते दांतों में तेज दर्द भी उठने लगा. भोजन भी ढंग से ना कर पाता.

एक दिन सुबह की हड़बड़ी में नहाते हुए प्लास्टिक का मग दांतों से आ टकराया तो मेरी जान ही निकल गई दर्द के मारे, आँखों में आंसू आ गए.

उसी शाम अस्पताल की सीढियां उतर रहा था कि चिकित्सालय के वरिष्ठ नाक कान गले के विशेषज्ञ डॉ देवांगन से आमना सामना हो गया. वे पिता जी के अच्छे मित्र हैं.

उन्होंने देखते ही पूछा यहाँ कैसे? मैं उस समय बेहद हताश था दांतों में उठते दर्द और मनचाहा चिकित्सीय परिणाम ना मिलने के कारण. मैं रूआंसा हो उठा अपना हाल बताते.

मेरे कंधे पर दिलासा भरा हाथ रखते उन्होंने वहीँ खड़े खड़े एक स्लिप में दो नाम लिखे Thermoseal Paste और G-32 Tablets.

नाक कान गले के डॉक्टर ने किया इलाज़

हिदायत मिली कि G-32 की एक गोली को हथेली में मसल कर चूरा बना दो और मूंगफली के दाने से कुछ बड़े आकार तक का Thermoseal पेस्ट मिश्रित कर उँगलियों से धीरे धीरे मसूड़ों पर मालिश सरीखा कर दस मिनट तक रहने दिया जाए. फिर कुल्ला कर सब बाहर.   

धीरे धीरे यह रोज का काम हो गया. दर्द तुरंत तो कम होना नहीं था. और वैसे भी उस दर्द की आदत पड़ गई थी जीने की

समय गुजरता गया. कई महीनों बाद जब मुझे नहाने लिए प्लास्टिक का मग नहीं मिला तो वहीँ पड़ी पीतल की बाल्टी उठा ली, उसी से शरीर पर पानी उड़ेलने लगा.

आदत पड़ी हुई थी प्लास्टिक के मग की, उसके आकार की. हाथों को भी मालूम था कि उसे कितने दूर रोक लेना है शरीर से, लेकिन बाल्टी का आकार था उससे दस गुणा बड़ा!

नतीजा वही हुया!! मग के धोखे में जब बाल्टी आई चेहरे की ओर, तो दन्न से आ टकराई दांतों से. मैं नहाते रहा. कोई एक मिनट बाद दिमाग में कौंधा कि बाल्टी टकराई है दांतों से. याद आया कि उस प्लास्टिक मग के टकराने जैसा तो कोई दर्द नहीं हुआ अब.

चौकन्ने दिमाग ने पूरे जोर से कोशिश की कि कोई दर्द महसूस हो दांतों में. लेकिन नहीं कोई दर्द नहीं था दांतों में. फिर तो मैं खुशी के मारे कूद कूद कर, हल्ला कर कर नहाते रहा.

वह दिन है और आज का दिन. मैंने इस दोनों को अपनाया हुया है नियमित तौर पर. टूटे हुए दांत तो वापस नहीं आ सके लेकिन दर्द तो गया ही, दांतों की जड़ों ने भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली, खून रिसना बंद हो गया. समय के साथ जबड़ा भी अपने पुराने आकार में आ चुका.

मैं अक्सर ही मित्रों से कहता हूँ कि कमाल देखो नाक, कान, गले के डॉक्टर ने मेरे दांतों का इलाज कर दिया.

डॉ देवांगन अभी सेवा-निवृत होने के बाद भिलाई के श्रेयस काम्प्लेक्स में अपनी सेवाएं देते हैं. एलोपैथी वाले Thermoseal Paste का संक्षिप्त विवरण इस लिंक पर क्लिक कर पाया जा सकता है और आयुर्वेदिक G-32 Tabalets की जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

ऐसी ही कोई विरोधाभासी बात आपको भी याद आई?

© बी एस पाबला

नाक कान गले के डॉक्टर ने किया मेरे दांतों का इलाज़ !
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नाक कान गले के डॉक्टर ने किया मेरे दांतों का इलाज़ !” पर 23 टिप्पणियाँ

  1. अभी सेन्सोडाईन पेस्ट काम में लेते हैं. मगर यह जानकारी खूब काम में आने वाली है भविष्य में.
    टिप्पणीकर्ता वाणी गीत ने हाल ही में लिखा है: टोटा…. लघु कथाMy Profile

    • Smile
      सेंसोडाइन भी ऐसा ही कुछ है

      आभार वाणी जी

  2. अरे वाह ! बहुत बढ़िया जानकारी …टेबलेट से तो सामना हुआ है मगर पेस्ट के बारे में आज पता चला ….

  3. आदरणीय बड़ी उत्तम जानकारी दी आपने…इसके लिये आपको साधुवाद…
    “ज़िंदगी के मेले” से पहले जानकारी का सूनापन सालता था किंतु अब नित नयी जानकारियाँ मिलती रहती हैं…अपने बेटे और मित्रों को भी ये लिंक साझा कर रहा हूँ…।

  4. शुरुवात में भावुक कर दिया था आपने.
    लेकिन, अंत में ख़ुशी हुयी.
    भगवान भला करें डॉ साहब का.
    थैंक्स.
    चन्द्र कुमार सोनी

    • Heart
      वे डॉक्टर अंकल आज भी मिलते हैं तो उन्हें थैंक्स कहता हूँ मैं

  5. बढ़िया जानकारी, कई बार वाकयी ऐसा होता है।

    मुझे कुछ सालों पहले चेहरे पर फुन्सियों की बड़ी भारी समस्या हुई। स्किन वाले एक डॉक्टर से लम्बे समय तक इलाज कराया लेकिन लाभ न हुआ। इलाज कई महीनों चलता रहा, डॉक्टर साहब दवाई भी खुद देते थे, फीस और दवाई में कई रुपये खर्च हो गये पर फुन्सियों थोड़ी सी कम होती फिर बढ़ जाती।

    एक दिन एक परिचित घर आये जो पेश से कैमिस्ट थे। मेरी फुन्सियाँ देखकर बोले कि इनका कुछ इलाज क्यों नहीं करवाते। मैंने बताया कि फलाँ डॉक्टर से इलाज करवा रहा हूँ पर बहुत इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुई। बोले हमसे क्यों नहीं पूछा, उन्होंने एक दवा Azithromycin लिखकर दी और बोले कहीं से भी ले लेना। मैं उनकी ही दुकान से लाया और खाने लगा। पता खत्म होने से पहले ही फुन्सियाँ निपट गई।

    अब कुछ महीनों बाद अगली गर्मी में फिर शरीर पर फुन्सियाँ होने लगी तो मैंने पास के स्टोर से लेकर वही दवा ली पर अब ठीक न हुई। एक बार उनकी दुकान पर गया तो मैंने बताया कि इस बार उस से ठीक नहीं हुई। देखकर बोले अब बीमारी दूसरी है, हर बार एक ही दवाई थोड़े न काम करेगी। फिर उन्होंने दूसरी दवा दी, इस बार थोड़ा अधिक समय लगा पर अब भी ठीक हो गई।

    तो यह घटना मेरे साथ भी हुई की एक प्रशिक्षित डॉक्टर की दवाई से बीमारी ठीक न हुई पर कैमिस्ट की दवाई से हो गई।

  6. दातों के डॉक्टर को देखकर ही सिहर जाता हूँ । अपने चचेरे भाई के दातों का इलाज करवाने दुर्ग बस स्टैंड के सामने एक दाँतों के डॉक्टर के पास दांत तुड़वाने गया था। काफी मशक्कत के बाद भी दाढ नहीं टूट पा रही थी । डॉक्टर ने अपने पूरे औजार इस्तेमाल कर डाले मुझे भाई का सर जोर से पकड़ने को कहा और पूरा जोर लगाकर आखिर कड़ाक की आवाज़ के साथ डॉक्टर ने दांत बाहर निकाला । हम दोनों भाइयों ने राहत की सांस ली मगर डॉक्टर साब पसीने पसीने हुए जा रहे थे । 2-3 मिनट के बाद बहुत भारी आवाज़ में डॉक्टर साब बोले माफ़ कीजिये गलती से बाज़ू वाला दांत टूट गया । भाई की हालात खराब हो गई । आगबबूला हो गया ये सुन कर । आखिर कार डॉक्टर ने मुआवजा के तौर पर पूरा मुफ़्त में इलाज़ करके दिया । तब से हम दांत दर्द होने पे ही सिहर जाते हैं । आपका लेख पढ़ कर थोड़ी राहत मिली ।

    • Afraid
      मैंने भी छेनी हथौड़े से दांत तोड़ते देखा है
      तब से बहुत घबराता हूँ दांतों वाले डॉक्टर से

    • Smile
      जगह का तो पता नहीं अमित जी लेकिन ऑनलाइन ठिकाने बहुत हैं

  7. गजब,
    इसे ही कहते हैं तजुर्बा . वैसे भी एक जिज्ञासु इंसान सदा अपने कान आँख खुले रखता है नई जानकारी हासिल करने के लिए

    • Approve
      ये बात तो सही है

      आभार गगन जी

  8. गज़ब की घटना है और गज़ब का इलाज .. आपके ब्लॉग पर जब भी आते है कुछ नया ही पाते है

  9. पाबला जी, बहुत उपयोगी जानकारी दी है आपने! धन्यवाद .

  10. Sir Meri haight 5 foot 9 inch he Mera weight 52 kg he Muje aur haight badhani nahi he to me kya karu daily Muje morning me uthata Hu to Meri haight 1 inch badh jati he aur evening tak utar jati he Me dumbbells exercise aur pus ups bhi Marta Hu to sir muze haight rokne ki koi medicine bataia

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