पिरामिड, पोप का आशीर्वाद और वेनिस की नहरें

मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण का कीर्तिमान बनाने वाले भिलाई के दो नवयुवक, मुम्बई-भिवंडी दंगों के बीच भारत से रवानगी के बाद जा पहुँचे विदेशी धरती पर और 8 जून को रवाना हो गए काहिरा की ओर।

लेकिन यह क्या? अभी शहर शुरू ही हुआ था कि फिसल पड़े मोटरसाइकिल सवार! चोटें तो नहीं लगी लेकिन झेंपे ज़रूर कि किसी ने देखा तो नहीं!!

काहिरा में भारतीय राजदूत श्री अल्फ़्रेड गोंसाल्विस से औपचारिक मुलाकात हुई। ठहरना हुआ यूथ हॉस्टल में। बाद में काहिरा के पश्चिम में लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित, दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक माने जाने वाले लगभग 450 फुट ऊँचे खुफ़ु पिरामिड, गीज़ा पिरामिड, 135 फुट लम्बे-110 फुट चौड़े स्फ़िंक्स के बीच घूमते हुए इन नौजवानों को ऐसा लगा मानों वे दोनों समय में कहीं गुम हो गए।


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पिरामिडों के सामने

ये सभी निर्माण अपने समय में रहे और अभी भी यह प्राचीन मिस्र-वास्तुकला के शानदार उदाहरण हैं, जिनके सामने अपने आप को तुच्छ महसूस किया जा सकता है।

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काहिरा में स्फ़िंक्स का एक मनोहारी दृश्य

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काहिरा में स्फ़िंक्स का एक मनोहारी दृश्य

9 जून की सुबह इन्हें एक झटका लगा जब यह पाया गया कि मोटरसाइकिल की एक तरफ की डिक्की तोड़ कर ज़्यादातर कलपुर्जे, दवाईयाँ व उपहार चुरा लिए गए हैं। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ करवा दी गई।

अभियान के शुरू में ही लगे इस झटके से बाद में महत्वपूर्ण कलपुर्जों की कमी से जूझना बड़ा दुखदायी था।

यहीं नील नदी पर मिले अलेक्स साईमन ने, बाद में, कनाडा पहुँचने पर इन्हें आश्रय दिया था। ऐसे ही एक मौके पर अशरफ़ नाम के एक किशोर की मदद अभी भी याद आती है।

11 जून को काहिरा से अलेक्ज़ेंड्रिया जाते हुए रेगिस्तान से गुजरती शानदार राजमार्ग जैसी सड़क के दोनों ओर रेत के विशालकाय टीले देखते हुए गुजरना एक अनूठा अनुभव रहा।

थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पानी के बड़े बड़े स्प्रिंकलर के बीच, प्रकृति के विरूद्ध, रेगिस्तान की हरियाली देखना भी सुखद था।

12 जून की सुबह समुद्री मार्ग द्वारा, अलेक्ज़ेंड्रिया से रवानगी हुई ग्रीस के पतरास हेतु। एयर इंडिया के श्री इलियास कोस्टांडी की मदद से समुद्री फ़ेरी द्वारा सस्ती यात्रा का प्रबंध हो गया था। मोटरसाइकिल सहित दोनों के लिए देने पड़े थे 235 अमेरिकन डॉलर।

चलते वक्त मोटरसाइकिल का चालान हो गया! कारण था अरबी में नम्बर प्लेट का ना होना।

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समुद्री मार्ग द्वारा इजिप्त के अलेक्सेंड्रिया से ग्रीस के पत्रास तक

भूमध्य सागर से गुजरते हुए ग्रीस की निर्मल, स्वच्छ, प्राकृतिक सुंदरता देखते बनती थी। एक तरफ हरा-नीला पानी, दूसरी तरफ हरियाली से भरपूर पहाड़ मन को भा गए थे। 14 जून को पतरास पहुँचने के पश्चात, ग्रीस में पहला दर्शनीय स्थल रहा ओलंपिया, जहाँ पहले ओलंपिक खेल हुए थे।

वह रात, इनकी पहली रात थी जब तम्बू में सोना था। जब तम्बू तानने लगे तो याद आया कि तम्बू तानने वाले डंडे तो काहिरा के यूथ हॉस्टल में ही भूल आए हैं।

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जुगाड़ जमाया गया। तीन तरफ सामान और चौथी ओर मोटरसाइकिल को बांध कर, तम्बू जैसा कुछ आकार दिया गया। थके हुए तो थे ही नींद ने तुरंत आ घेरा।

अगले दिन 16 जून की दोपहर, एथेंस पहुँचने के पहले, Mycenae तथा Corinth खंडहरों का जायजा लिया गया। Acropolis व उसके Parthenon खंडहरों के रोमांच की बात ही कुछ और है। ये काफी ऊँचाई पर हैं, जहाँ से आधुनिक एथेंस को देखा जा सकता है। यहीं वह स्टेडियम भी देखा गया, जहाँ 1896 में हुए आधुनिक ओलम्पिक हुए थे।

इसके बाद बारी थी डेल्फ़ी की। 19 जून की उस रात, बर्फ़ीली पहाड़ी हवाओं का अहसास करते, माँस व सब्जियों को मिला कर बने एक स्थानीय व्यंजन Souvlaki का स्वाद लेते, वहाँ के लोक-संगीत bouzaki सुनते ये दोनों युवा स्वभाविक रूप से अपने आप को दुनिया में सबसे भाग्यशाली मान रहे थे।

20 जून को वे लौटना हुया पतरास। जहाँ से 21 जून को समुद्री मार्ग द्वारा रवानगी हुई इटली के ब्रिंडिसी (Brindisi) के लिए। मोटरसाइकिल समेत दोनों के लिए भुगतान करना पड़ा 63 अमेरिकन डॉलर का। इसी बीच निन्नी व विलियम से मुलाकात हुई जो बाद में हॉलेंड के मेज़बान बने

ब्रिंडिसी पहुँचना हुआ 21 जून की शाम को। मोटरसाइकिल के बीमा हेतु भारी भुगतान कर पोम्पई(Pompei) व नेपल्स (Naples) पार करते हुए अगली शाम को पहुँच गए रोम। उस दोपहर का भोजन था माऊँट वेसुवियस (Mt. Vesuvius) की चोटी पर। जहाँ वह सूखा लावा बिखरा हुआ था जिसने कभी प्राचीन पोम्पई (Pompei) व इरोलानो (Erolano) शहरों को निगल लिया था।

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वेटिकन में

24 जून को रोम की वेटिकन सिटी में पोप का आशीर्वाद ले, जब सेंट पीटर गिरजाघर (St. Peter’s cathedral) देखा तो देखते ही रह गए। एक एक इंच स्थापत्य का शानदार नमूना है। समान रूप से ही अद्भुत हैं माइकल एंजेलो का ‘द लास्ट जजमेंट’।26 जून की सुबह यात्रा शुरू हुई फ्लोरेंस की

राह में थी सुप्रसिद्ध पीसा की झुकती मीनार। अनिरूद्ध व सुनील अब तक उत्पादन, कला और सौंदर्य के लिए इतालवी दृष्टि व उनकी लगन से अवगत हो चुके थे, किन्तु अभी फ्लोरेंस शहर उनका इंतज़ार कर रहा था! प्रत्येक सड़क का हर कोना, नुक्कड़ कला का अद्भुत नमूना दिखा देता था। तंग गलियों में पुरानी इमारतें अपनी गर्वीली कहानी खुद-ब-खुद बयां कर रहीं थी। इस शानदार शहर की अद्वितीयता देखते ही बनती थी।

वे विश्वप्रसिद्ध उफ़्फ़िजी (Uffizi) कला दीर्घा भी गए। जहाँ प्राचीन नामी-गिरामी हस्तियों जैसे कि Raphael, Da Vinci, Michaelangelo, Bernini, Rembrandt, Ruebens, Goya, Van Dyek, Velasques आदि की कलाकृतियाँ मौजूद हैं। लेकिन निश्चित तौर पर फ़्लोरेंस का गर्व है माइकल एंजिलो की ‘डेविड’

पहले तो रात बिताई भारतीय राजदूत श्री अजमानी द्वारा प्रबंध किए गए इंडो-इटालियन योग सेंटर, फिर रूकना हुआ 300 वर्ष पुराने एक घर में जहाँ वे दोनों मेहमान थे बुज़ुर्ग दम्पत्ति एंटानिओ व मिशेला नैम के। जिन्होंने इन्हें भरपूर लाड़-प्यार दिया।

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इटैलियन दंपत्ति की मेज़बानी में

29 जून को फ़्लोरेंस से वेनिस जाते वक्त नहरों, पुलों व गंडोलाओं के जाल ने इन्हें खूब प्रभावित किया। वेनिस में इंडो-इटालियन योग सेंटर ही था रूकने का स्थान।

1 जुलाई को इटली से उत्तर की ओर जाते हुए ऑस्ट्रिया के वातावरण से सुनील व अनिरुद्ध ऐसा प्रभावित हुए कि वहीं एक किसान के घर, पिछवाड़े अपना डेरा डाल दिया, जो पहले ही मुर्गाबियों, बत्तखों और एक बड़े से सेंट बर्नाड प्रजाति के एक श्वान के कब्जे में था। अगले दिन तड़के ही वह जगह छोड़ने से पहले सप्रेम परोसे गया स्थानीय नाश्ते का तो क्या कहना!

मोटरसाइकिल से किये गए विश्व भ्रमण के संस्मरणों को कुल 10 आलेखों में संजोया गया है. सारे आलेखों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें»


2 जुलाई को विएना से रवाना हो कर दोनों जब 5 जुलाई को लिंज़ पहुँचे तो इनका हार्दिक स्वागत किया भिलाई में रह चुके श्री एस के दत्त व श्री डी आर के राव ने। यहीं Voest Alpine Steel Plant की कन्वर्टर शॉप देखने का मौका भी मिला

अब तैयारी है तत्कालीन पश्चिमी जर्मनी की ओर चलने की. जहाँ दिखी बीयर की दीवानगी, मोटरसाइकिल का बिगड़ना और रात का वह नज़ारा

पिरामिड, पोप का आशीर्वाद और वेनिस की नहरें
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पिरामिड, पोप का आशीर्वाद और वेनिस की नहरें” पर 13 टिप्पणियाँ

  1. हम भी हैं तैयार
    है कल का इंतजार

  2. कुछ मित्रों की शिकायत मिली है कि पोस्ट में दिखाए गए मानचित्रों में कुछ भी नहीं दिखाई देता या लाल रंग में दर्शाया हुया मार्ग नहीं दिखता

    विश्लेषण पश्चात यह संभावना बन रही है कि यह समस्या इंटरनेट एक्सप्लोरर 6 का उपयोग करने वालों को हो रही है

    इन साथियों से आग्रह है कि वे क्रोम, ओपेरा , फायरफॉक्स, सफ़ारी आदि का उपयोग करें या इंटरनेट एक्सप्लोरर का नया संसकरण स्थापित कर लें

    सब कुछ ठीक हो तो कुछ सेकेंड्स तक मानचित्र लोड होने का इंतज़ार करें

  3. यात्रियों ने भले ही मोटरसायकिल से यात्रा की हो पर आप की पोस्ट तो अंतरिक्ष यान पर यात्रा कर रही है। बहुत तेज चल रहे हैं।

  4. वाह -रोमांचित कर देने वाली यात्रा -लगता है आप साथ साथ हैं

  5. आनंद आ गया । पढ़कर वास्तविक चरित्र पर आधारित फ़िल्म "मोटरसाईकल डायरी" की याद आ गयी । बिल्कुल वैसा ही लग रहा है ।
    क्रमशः इंतजार है ।

  6. पाबला जी ,बाहर गया हुआ था आज ही लौटा हूँ । सारी किश्तें एक साथ पढ़ ली बहुत मज़ा आ रहा है । जो एडवेंचर हम खुद नही कर सकते उसका वर्णन भी उतना ही मज़ा देता है । मुझे याद है उन दिनो जब यह दोनो बन्धु विश्वयात्रा की तैयारी कर रहे थे । लेकिन आपके द्वारा प्रस्तुत नक्शे और चित्रों से इस वर्णन मे चार चांद लग गये हैं । अगर 1984 में यह लिखा जाता तो इस तरह नही लिखा जाता । यह ब्लॉगिंग का कमाल है । इसे जारी रखें ।

  7. हमें तो लग रहा है आपके साथ साथ घूम रहे है इन जगह पर कल की पोस्ट नहीं पढ़ पाए थे
    आज पढ़ ली

    अब कल का इंतज़ार

  8. बहुत ही दिलचस्प और अद्भुत यात्रा वृत्तांत है सर । बहुत मजा आ रहा है पढते हुए । दुनिया की सैर , उनकी बातें तरह तरह के व्यंजन उनकी जानकारियां , बहुत ही श्रम से लिखी जा रही है ये पोस्टें आपको धन्यवाद बहुत बहुत सर
    अजय कुमार झा

  9. aapko kausaa desh sabse achchhaa lagaa??????
    shopping main kaunsaa??????
    living/lifestyle main kaunsaa???
    security/surakshaa main kaunsaa??
    aaw-bhagat/swaagat/yaa respect/welcome main kaunsaa????
    please reply.
    thanks.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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