पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है


Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /home/hosthindi/public_html/bspabla.com/wp-content/plugins/wordpress-23-related-posts-plugin/init.php on line 380

पिछले दिनों जयपुर की सुनीता सनाढ्य पाण्डेय जी ने कहीं से मिली जानकारी साझा करते हुए पूछा था कि यह जानकारी सही है कि नहीं? मैंने उत्तर दिया कि दी गई जानकारी गलत है और दो तीन आधिकारिक लिंक्स दिए अपनी बात को सही साबित करने के लिए.

लेकिन उन्होंने आग्रह किया कि सरल भाषा में बताएं कि पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है.

तो देखा जाए कि यह झमेला क्या है!

भारत में लगभग अस्सी प्रतिशत तेल का आयात किया जाता है. यह तेल अपने प्राकृतिक रूप में होता है जिसे कच्चा तेल पुकारा जाता है जिसे बाद में विभिन्न उत्पादों के लिए परिष्कृत किया जाता है अपने हिसाब से.

सामान्यतया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कच्चा तेल प्रति बैरल के हिसाब से खरीदा और बेचा जाता है. एक बैरल में तकरीबन 160 लीटर कच्चा तेल होता है और इसका भुगतान अधिकतर अमेरिकी डॉलर्स में करने की बाध्यता चली आ रही.

इस प्रकार के लेन-देन में कच्चा तेल खरीदने वाला, बेचने वाले से निश्चित तेल की मात्रा पूर्व निर्धारित दरों पर किसी विशेष स्थान पर लेने पर राजी होता है. यह सौदे केवल नियंत्रित संस्थाओं द्वारा ही किए जाते हैं. भुगतान रोजाना और ताजा कीमतों के आधार पर तय किया जाता है. न्यूनतम खरीदारी 1,000 बैरल की होती है.

अब अगर गणना करनी हो तो इन संस्थायों में तय हुए सौदों के अनुसार जो कच्चा तेल भारत आयात करता है उसकी कीमत आजकल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 60 डॉलर प्रति बैरल मान ली जाए. मोटे तौर पर एक बैरल में होते हैं 160 लीटर.

अब अगर आज की तारीख की बात की जाए तो एक डॉलर है 65 रुपए के बराबर. तो 60 डॉलर गुणा 65 हुआ 3900 रूपये.

इसका मतलब हुआ कि अभी हमें 160 लीटर कच्चे तेल के लिए 3900 रुपए देने होंगे. ऐसे में एक लीटर कच्चे तेल की कीमत हुई करीब 25 रुपए हुई. (यह तेल कच्चा है और बेशक इसकी किसी भी मात्रा को परिष्कृत किया जाए तो उससे कम ही मिलेगी पेट्रोल की मात्रा.)

इसे साफ सुथरा करने के लिए इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम जैसी तेलशोधक कंपनी 4 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से अपना खर्च वसूलती है. तेलशोधक कंपनी से निकते अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत हो गई 29 रुपए. यह कीमत तो है आधार मूल्य. तेल कंपनियों द्वारा बाज़ार में ली जाने वाली असल कीमत.

अब इसे पहुँचना है पेट्रोल पंप तक. यहाँ से शुरू होता है सरकारों का दखल. तब इस 29 रूपये वाले मूल्य पर पर लगता है 17 रूपये से अधिक का विशिष्ट उत्पाद शुल्क. कीमत हो जायगी 29+17 = 46 रूपये

अब जो पेट्रोल पंप इसे बेचेगा उसको हर लीटर पर लगभग सवा दो रूपये का कमीशन दिया जाना है. तब कीमत में इसे जोड़ कर हो जाएगा 46+2.25 = 48.25 रूपये अब इस आखिरी कीमत पर लगाया जा रहा है वैट -Value Added Tax जो कि हर राज्य में अलग अलग है. वैट को समझने के लिए इसे बिक्री पर लगने वाला टैक्स मान लीजिये.

दिल्ली की बात की जाए तो इस लेख के लिखे जाने तक यह VAT 25 प्रतिशत है. मतलब 48.25 का 25 प्रतिशत हुआ 12 रूपये से अधिक! अब पेट्रोल पंप से बिकने वाले पेट्रोल की कीमत हो गई 48.25+12 = 60 रूपये से अधिक!

petrol-rate

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने दिल्ली के लिए इसे कुछ यूं समझाया है अपनी वेबसाइट पर

राज्यों द्वारा लिया जाने वाला यह मूल्य वर्धित कर -VAT ही विभिन्न राज्यों में पेट्रोल की कीमत के अलग – अलग होने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है.

यही वजह है कि मुंबई में अधिक वैट के कारण पेट्रोल, दिल्ली की तुलना में 5 रूपये महंगा है जबकि दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पेट्रोल की कीमत दिल्ली से ही लगभग 8 रूपये ज्यादा है.

देश में सबसे महंगे और सबसे सस्ते पेट्रोल की तलाश हो तो मेरी जानकारी के अनुसार आजकल की कीमतों के हिसाब से नॉएडा में पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग 69 रूपये है जबकि गोवा में यही कीमत 57 से कम रह जाती है.

हालांकि एक ही पेट्रोल पंप पर आपको अलग अलग कीमत वाले पेट्रोल भी मिल सकते हैं जो कि अपनी ऑक्टेन शक्ति, गंधक की मात्रा, इथेनॉल के प्रतिशत जैसे कारकों अनुसार कम ज्यादा होती है. (इथेनॉल वाले पेट्रोल के बारे में यह लेख पढ़ा जा सकता है इथेनॉल ! गाड़ी चलेगी दारू पीकर, ड्राईवर भले ही ना पिए !!)

हर बार बदली हुई कीमतों के निर्धारण.का विवरण हर पेट्रोलियम कम्पनी सार्वजनिक करती है. इस संबंध में हिंदुस्तान पेट्रोलियम द्वारा दिल्ली में कीमत का ब्यौरा यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है. भारत पेट्रोलियम और इंडियन आयल की लिंक इसलिए नहीं दे रहा क्योंकि उनकी वेब कड़ी हर 15 दिन में बदल जाती है.

पेट्रोल की BS II तथा BS III श्रेणी का तकनीकी विवरण यहाँ क्लिक कर समझा जा सकता है जबकि BS IV श्रेणी का विवरण यहाँ क्लिक कर मिलेगा. यह BS, भारत स्टैण्डर्ड का लघु रूप है.

पेट्रोल की कीमत 2013

कच्चा तेल 110 का, डॉलर 64 का, पेट्रोल 76 में

यह रहस्य आप सुलझाईये कि जब 2013 में दुनिया में कच्चा तेल 110 डॉलर था, एक डॉलर 64 रूपये का था तो भारत में पेट्रोल की कीमत रही 76 रूपये. जबकि अब 2015 में दुनिया में कच्चा तेल 45 डॉलर है , एक डॉलर 66 रूपये का है तो भारत में पेट्रोल की कीमत 61 रूपये कैसे?

पेट्रोल की कीमत 2015

कच्चा तेल 45 का, डॉलर 66 का, पेट्रोल 61 में

यह एक अलग बहस का मुद्दा है कि एक बैरल कच्चे तेल से कितना पेट्रोल मिलता है और सहायक उत्पादों का क्या होता है?

लेकिन आप तो यह बताईये कि सरल भाषा में लिख पाया कि नहीं?

पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है
4.2 (83.33%) 6 votes
Print Friendly, PDF & Email

मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है” पर 18 टिप्पणियाँ

  1. अंकलजी ,बेहद लाजवाब तरीके से , हमेशा की तरह ।

    जय हो

  2. एक जिज्ञासा है क्या इस कीमत में पेट्रोल को पेट्रोल पम्प तक पहुँचाने का परिवहन शुल्क भी शामिल है ? और वो कितना होता हैं ?

    • Approve
      जब कीमत 29 रूपये होती है रिफाइनरी से निकलते हुए तब परिवहन शुल्क शामिल है इसमें
      कितना है यह नहीं बताया गया

  3. आपने बहुत ही अच्छी तरह से समझाया….पर रहस्य तो रहस्य ही रह गया…उस पर से भी तो परदा उठाइये…..:)

    आपका खूब शुक्रिया इस लेख के लिए…

    सुनीता सनाढ्य पाण्डेय

    • Ssshh
      रहस्य कोई ख़ास नहीं
      दशमलव के बाद के कुछ अंकों की चिंता और गुणा-भाग की बारीकी बिना समझा जाए तो
      2013 में दुनिया में कच्चा तेल 110 डॉलर था, एक डॉलर 64 रूपये का था, 45 का हुआ एक लीटर कच्चा तेल!
      डीलर के पास पहुँचते इसे 50 हो जाते
      डीलर कमीशन था डेढ़ रुपया
      एक्साइज ड्यूटी दस रूपये थी और वैट रहा 20 %
      50 + 1.50 + 10 + 13 = 74.50

  4. पेट्रोल का हिसाब किताब बड़े अच्छे से समझाया आपने ..धन्यवाद

    शिक्षक दिवस-सह-जन्माष्टमी की बहुत-बहुत हार्दिक मंगलकामनाएं!

  5. सरकार को लगभग चार से छह महिने की खपत के लिये तेल अग्रिम खरीदना पडता है। सैनिक और सुरक्षा विभागों के लिये, परिवहन के लिये और देशवासियों की अन्य जरुरतों के लिये। दाम बढने पर तो दाम बढाया ही जाता है और अगर घट जाये तो घाटा पूरा करने के लिये भी दाम बढाया जाता है। छह महिने पहले सौ रुपये की चीज खरीदी और आज साठ रुपये की रह गई तो चालीस का नुकसान हो गया, इस घाटे को भी जनता के पैसे से पूरा करती है सरकार

  6. बहुत सुंदर विवेचना की है आपने । बड़े ही सरल शब्दों में जनसाधारण को समझाने की कोशिश की है कि पेट्रोल की कीमतों पर बड़ी तेल उत्पादक कंपनियां और सरकारें बड़ा घालमेल कर देश की आमजनता की उम्मीदों पर पलीता लगाने में जुटी हैं। वाकई में ताज्जुब इस बात का है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद पेट्रोल की कीमत उम्मीद के मुताबिक क्यों नही घट रही है । क्या कोई निष्पक्ष जांच एजेंसी है, जो दूध का दूध और पानी का पानी करे देश की जनता के बीच ।

  7. यह रहस्य आप सुलझाईये कि जब 2013 में दुनिया में कच्चा तेल 110 डॉलर था, एक डॉलर 64 रूपये का था तो भारत में पेट्रोल की कीमत रही 76 रूपये. जबकि अब 2015 में दुनिया में कच्चा तेल 45 डॉलर है , एक डॉलर 66 रूपये का है तो भारत में पेट्रोल की कीमत 61 रूपये कैसे?

    सौ टके की बात

  8. AGAR IS TARAH SAMJHAYA JAY TO DES KE POORE PAISE KA HISAB HAR NAGRIK JAN JAYEGA AUR LUT KHATOS BAND HO JAYEGI

इस लेख पर कुछ टिप्पणी करें, प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
[+] Zaazu Emoticons