प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा की 1000 टिप्पणियों के बहाने कुछ बातें

जब गिरिजेश राव जी की ई-मेल आई तब मुझे भी ख़्याल आया कि प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा वाले ब्लॉग पर 1000 टिप्पणियाँ हो रही हैं। ई-मेल में उनकी प्यारी सी शिकायत थी कि 1000वीं टिप्पणी अपने नाम होने की आकांक्षा लिए भटक रहे हैं, उपयुक्त लिंक ही नहीं मिली। मेरा ज़वाब गया कि

” … टिप्पणी लिंक बंद कर दिया था क्योंकि सार्थक टिप्पणियाँ ही नहीं आतीं। बस यही लिखा जाता है कि बधाई, आपको बधाई, उनको बधाई, इनको बधाई, दोनों को बधाई, तीनों को बधाई, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आदि आदि! अरे दिए गए ब्लॉग की लिंक पर पढ़ कर कुछ कहें तो अपनी मेहनत का फल मिलते खुशी हो। चलिए आपके लिए, लेटेस्ट पोस्ट पर टिप्पणी तंत्र खोल रहा हूँ, उम्मीद है हजारवीं या 1001वीं टिप्पणी आपकी होगी, उसके बाद फिर बंद हो जायेगा टिप्पणी तंत्र …”

उन्होंने भी इसी बात को उद्धृत करते हुए कह दिया कि “… आप लोग इस बात पर ध्यान दीजिए। यह प्लेटफॉर्म अच्छा होगा – ऐसी बहसों के लिए।” मैंने भी टिप्पणी पढ़ी और मुस्कुरा कर रह गया कि किसको फुरसत है ऐसी बातों पर बहस करने की, जब आए दिन यह विवाद सामने आता रहता है ‘बिना पढ़े ही टिप्पणियाँ की जा रहीं।’


इसी बहाने मैंने सोचा दो बातें लिख ही लूँ

जैसा कि मैंने 4 अप्रैल 2009 को इस ब्लॉग की शुरूआत करते हुए लिखा था, एक दिन मुझे अपने ही ब्लॉग का जिक्र समाचार पत्र में किये जाने की खबर लगी। बताने वाला यह नहीं बता पाया कि समाचार-पत्र कौन सा था, लेकिन पोस्ट ज़रूर बता दी। उत्सुकता हुयी कि आखिर वह कहाँ छपी है और क्या लिखा गया है। हमने पता लगाना शुरू किया। ‘विक्टोरिया नम्बर 203’ जैसा बड़ी टेढ़ी खीर वाला लगा यह काम। चाबी (पोस्ट) थी, लेकिन ताला (समाचार पत्र) नहीं! सोचा, पता नहीं ऐसे कितने ही ब्लॉगर होंगें, जिन्हें मालूम भी नहीं होता होगा कि उनकी किसी पोस्ट की, किसी समाचार पत्र या पत्रिका या ऐसे ही किसी प्रिंट मीडिया में तारीफ की गयी है, चर्चा की गयी है, उद्धृत किया गया है।

मैंने ऐसे साथियों को आमंत्रण दिया जो अपने ब्लॉगों पर अपनी कतरनों की जानकारी दे रहे थे, साथ ही यह भी कह दिया कि ब्लॉग में सहभागी नहीं बनना चाहते वे यदि संबंधित सूचना भी मुझ तक पहुँचा दें तो बहुत सा समय बच जायेगा। इसके बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। जो शामिल हुए उनमें से एकाध ने अपने ब्लॉग की कतरन डाली और अंतर्ध्यान हो गए।

25 जून 2009 आते आते इसने 200 का आंकड़ा पार कर लिया और एकाध सप्ताह में 400 को छू ले। इस बीच तीन ब्लॉगर साथी मिले जो अपनी अपनी व्यस्ततायों के बीच इस ब्लॉग में लगातार यथासंभव योगदान दे रहे हैं। शेफाली पांडे जी माह में लगभग दो बार, उत्तर भारत के समाचार पत्र की ताजा कतरनों को स्कैन कर भेजती हैं, अजय कुमार झा जी माह में दो बार, नई पुरानी कतरनों का संकलन, कुरियर या डाक द्वारा भेजते हैं, कुमारेन्द्र सेंगर जी समय मिलते ही अपने मोबाईल से ही कतरन का चित्र उतार कर पेश करते हैं। कुछ स्तंभ लेखक स्वयं ही संपर्क कर, उस स्तंभ की पीडीएफ फाईल भेज रहे हैं, जो स्कैन किए जाने की अपेक्षा ज़्यादा साफ सुथरी होती है।

और हम भी अपनी धुन में इन सबको एक स्थान पर दर्शाए जाने की जिम्मेदारी लिए हुए हैं

कुछ साथियों ने इस ब्लॉग से जुड़ने की इच्छा जाहिर की तो कई प्रकरणों से सबक लेते हुए एक विनम्र निवेदन किया गया कि पहले वह अपने ब्लॉग के अलावा अन्य किसी ब्लॉग की 5 कतरने भेज दें, फिर उन्हें शामिल कर लिया जाएगा। जाहिर है, कोई ऐसा कर नहीं पाया। अब तो उन साथियों को भी इस ब्लॉग से हटाया जा रहा जिन्होंने सौजन्यतावश सद्स्यता तो ले ली पर आगे स्वभाविक तौर पर कोई योगदान नहीं कर पाए।

बहुतेरे साथियों की जिज्ञासा रही है कि इस काम को अंजाम कैसे दिया जाता है? तो होता यह है कि सबसे पहले, ई-पेपर या स्कैन की गई कतरन का एक सॉफ्टवेयर द्वारा Gamma Correction किया जाता है, उसी सॉफ्टवेयर से उसकी चारों ओर से कटाई छंटाई की जाती है, फिर उसे कागज से फाड़े जाने का प्रभाव दिया जाता है। फिर उसमें, दूसरे सॉफ्टवेयर से, वाटरमार्क/ मुहर लगाने का कार्य किया जाता है। पहले वाटरमार्क होता था, आजकल रबर स्टैम्प का प्रभाव रहता है। इस रबर स्टैम्प को एक तीसरे सॉफ्टवेयर की सहायता से तैयार किया गया है। इसके बाद जा कर जब वह कतरन पोस्ट में लगती है तो संबंधित ब्लॉग की तलाश की जाती है। फिर उस पोस्ट को खोजा जाता है, उसकी लिंक लगाई जाती है। तब कहीं जा कर पब्लिश का बटन दबता है! मतलब पेपर वर्क ना के बराबर्

कतरन की सजावट में तो कोई समय नहीं लगता, बमुश्किल 2 मिनट में काम खतम! लेकिन कई बार ब्लॉग/ पोस्ट तलाशने में आधा-आधा घंटा लग जाता है बात नहीं बनती, फिर ऐसे ही छोड़ दिया जाता है बिना लिंक के। होता यह है कि ब्लॉग का नाम है हिंदी का, लिखा जाता है अंग्रेजी के अक्षरों में। अधिकतर ब्लॉगों में पुरानी पोस्ट्स के लिए आर्काईव्स लगे हुए नहीं हैं, जिससे पोस्ट तलाशने में सहूलियत होती है। बस लेबल लगा कर छोड़ दिए हैं। यह ब्लॉग भी उन्ही साथियों के रह्ते हैं जो यह कहते पाए जाते हैं कि उनके ब्लॉग पर पाठक नहीं आते। अरे आएंगे कैसे जब मुझ जैसा तलाश नहीं पाता चाही गई पुरानी पोस्ट्स को। तो नया पाठक क्या कर सकता है, भाग खड़ा होगा!

अब वापस आया जाए गिरिजेश जी वाले मुद्दे पर। बस मन में एक बात आती है कि काश इन पोस्टों पर बधाई देने के अलावा उसकी विषयवस्तु पर भी कोई कुछ कहे, किन्तु 1000 टिप्पणियों में से शायद 10 ही टिप्पणियाँ ऐसी होंगी जिनमें बधाई या तारीफ के शब्दों को छोड़कर अन्य सार्थक बातें कही गईं होंगी।

अब तो यह भी सोच रहा हूँ एक समाचारपत्र विशेष में विशिष्ट (राजनैतिक) ब्लॉगों के बार-बार किए जा रहे उल्लेख के चलते उनको स्थान देना बंद किया जाए। शायद उन ब्लॉगों को इसकी परवाह भी ना हो। आखिर ब्लॉग की अवधारणा भी कोई चीज है। उम्मीद है इसी बहाने उन स्तंभ लेखक को संदेश भी मिल जाए कि समाचारपत्र में वही विषय देख देख कर लोग ऊब चुके हैं। ब्लॉग को ब्लॉग ही रहने दो, भले ही उनकी चर्चा प्रिंट मीडिया में होने लगी हो।

आप सभी का धन्यवाद, जो समय समय पर इस छोटे से प्रयास की सराहना करते रहे। ये कारवाँ जारी रहेगा।

लेख का मूल्यांकन करें

प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा की 1000 टिप्पणियों के बहाने कुछ बातें” पर 14 टिप्पणियाँ

  1. Sarthak baten to post me hota hai baki to us sarthak baat par badhayi aur tareef hoti hai.

    par thik hai ham bhi aage se sarthak baat hi kiya karenge..

  2. आपका यह प्रयास वाकई अतुलनीय है . एक अच्छा नेटवर्क होना भी जरूरी है जो आपको उपलब्ध है . कम लोग लेकिन निरंतर काम करते हुए इस प्रयास को आगे बढाते हैं. आपका संपादन का ख्याल भी सही है कि, ब्लॉग को ब्लॉग ही रहने दो .

  3. मुझे तो जब कोई बधाई वगैरह मिलती है तो उजबक की तरह हो जाता हूँ कि अब सामने वाले को क्या कहूँ….बातचीत का अगला क्रम ही भूल जाता हूँ….फिर सोचता हूं यार ये कृत्रिम (Artificial) भाव व्यक्त करना भी अजीब चीज है, कमबख्त अच्छा खासा बोल रहा था, बधाई बोलकर दूरी को नपवा दिया 🙂

  4. देर आयद, दुरुस्त आयद!!
    मैं तो अब भी बधाई ही लिख रहा हूँ।

  5. आप ने जब टिप्पणी बक्सा बंद किया तो बुरा लगा था। लेकिन अब उस की वजह समझ आ रही है। टिप्पणी उतनी महत्वपूर्ण नहीं है। यह ब्लाग कर रहा है अनायास ही होने वाले इतिहास को दर्ज कर रहा है जो महत्वपूर्ण काम है। आशा है आप को सहयोग देने वालों की संख्या में और वृद्धि होगी।

  6. वाह कमाल है आप भी लेकिन अच्छा लगा, लेकिन यह कमेंट बक्स बन्द ना करे, हम जेसो को टिपण्णी देने मै समय कम लगता था, इस कामेंट बक्स को ढुढने मै ज्यादा.
    तो लिजिये आज की पोस्ट की बधाई

  7. भाई जी
    थोडा दिल बड़ा करिए 🙂 धन्यवाद् और अच्छा से काम चलाइए.

  8. आपका सोचना सही है कि प्रविष्टियों के कंटेंट पर भी बात की जानी चाहिये ।
    यह तो किसी विशिष्ट ब्लॉगर की भी बहुतेरी प्रविष्टियों पर नहीं होता यहाँ ।

    एक और चीज है- एक ही पोस्ट में कई प्रविष्टियों की कतरनें आ जाती हैं, इसलिये भी शायद विस्तार से कुछ न कह पाने की मजबूरी हो जाती हो ।

    आपने अपनी अन्तःप्रेरणा से यह महनीय़ कार्य शुरु किया है – यह इतिहास निर्मित कर रहा है । इसका सारा श्रेय आपको है । निर्विकार रहना भी एक मजेदार भावदशा है ।

  9. आपका सोचना सही है कि प्रविष्टियों के कंटेंट पर भी बात की जानी चाहिये ।
    यह तो किसी विशिष्ट ब्लॉगर की भी बहुतेरी प्रविष्टियों पर नहीं होता यहाँ ।

    एक और चीज है- एक ही पोस्ट में कई प्रविष्टियों की कतरनें आ जाती हैं, इसलिये भी शायद विस्तार से कुछ न कह पाने की मजबूरी हो जाती हो ।

    आपने अपनी अन्तःप्रेरणा से यह महनीय़ कार्य शुरु किया है – यह इतिहास निर्मित कर रहा है । इसका सारा श्रेय आपको है । निर्विकार रहना भी एक मजेदार भावदशा है ।

  10. सच कहा आपने कि होना तो ये चाहिए कि ब्लागर को बधाई देकर सिर्फ टिप्पणी के रूप में अपनी उपस्थिति दर्शाने की खानापूर्ती न की जाए,अपितु ब्लाग या उस पोस्ट की विषयवस्तु पर अपने विचार रखें जाए…..तो ही इस प्रयास की सार्थकता दिखाई देगी……वर्ना तो इस ब्लाग का कोई उदेश्य ही नहीं बनता!!!

  11. मैं अब तक न समझ पाया कि इतना सशक्त माध्यम उपलब्ध होने पर भी भाई लोग प्रिण्ट का ग्लैमर क्यों मान कर चलते हैं! 🙂

  12. @ ज्ञानदत्त जी सटीक प्रश्न किया है आपने . समाचारपत्र को अपने पाठकों की संख्या का अंदाजा होता है और ये बहुत बड़ी संख्या है बड़े समाचारपत्रों के पास . ब्लॉग अभी काफी पीछे है इस मामले में विशेषकर हिंदी ब्लॉग .

इस लेख पर कुछ टिप्पणी करें, प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ