रंग बिरंगे फूलों की दुनिया में बीती एक सुबह

जिसकी सेवा के सहारे मेरी आजीविका चलती है उस भारतीय इस्पात प्राधिकरण वाले भिलाई इस्पात संयंत्र के उद्यानिकी विभाग द्वारा दशकों से हर साल फरवरी माह के प्रथम पखवाड़े के किसी रविवार को रंग बिरंगे फूलों की दुनिया से भरे फ्लावर शो का आयोजन किया जाता है.

इसी परंपरा को निभाते हुए इस वर्ष भी 8 फरवरी को मैत्रीबाग प्रबंधन ने प्रदेश के सबसे बड़ी पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस बार कुछ नई व आकर्षक चीजों को जोड़े जाने की औपचारिक सूचना, संयंत्र के इंट्रानेट पर तैर रही थी.

मैं कई वर्षों से मैत्री बाग नहीं गया था. वह मैत्री बाग़ जो भारत-रूस मैत्री के प्रतीक के तौर पर 60 के दशक में भिलाई की दक्षिण दिशा में बनाया गया और आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. इस बार यह मौक़ा नहीं छोड़ना है यह निश्चय कर चुका था.

रविवार का दिन छुट्टी का दिन था. फटाफट नाश्ता कर मैं बाइक ले कर भाग खड़ा हुया घर से दो किलोमीटर दूर मैत्री बाग़ की ओर कि झट से कुछ फोटो ले आऊँ भीड़ होने से पहले.

अब जो कुछ मैंने अपने कैमरे से 155 चित्रों के सहारे देखा वह मौजूद है इस नीचे दिए गए चित्र पर. इसी पर क्लिक कर आप भी देख सकते हैं वह नज़ारा

फूलों की दुनिया

भीड़ बढ़ने के पहले मैं तो लौट आया दो घंटों में. लेकिन आशा के अनुरूप पुष्प प्रदर्शनी में लोगों का हुजूम उमड़ चुका था. खबरें बताती हैं कि इस फूलों की दुनिया को देखने एक लाख से अधिक दर्शक पहुंचे, जिनमें बच्चे, युवा, प्रौढ़ के साथ ही बुजुर्ग भी शामिल रहे. नौका विहार, ट्वॉय ट्रेन,चिड़ियाघर, लॉन और फव्वारों की सुंदर सजावट के साथ ही बच्चों के लिए लगे तरह-तरह के झूले से मैत्री बाग में विशाल मेले सा माहौल था.

फूलों के पौधों, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों आदि के स्टॉल सहित वन्यजीव संरक्षण संबंधी पोस्टर, दुर्लभ लोकवाद्यों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी. फूलों से सजाये मोर, तितली आदि की बड़ी-बड़ी कलाकृतियां भी दिखीं. कबाड़ के लोहे से बनी आकृतियाँ भी मनमोहक थीं.

सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीआईएसएफ, जिला पुलिस, यातायात पुलिस, निजी कर्मचारियों के साथ लगभग 1000 जवान-कर्मचारी लगे हुए थे

लगभग 500 प्रतिभागियों ने जिन प्रतियोगितायों में हिस्सा लिया उनमें गमलों में लगे पौधे, कट प्लावर, सजावटी फूल, सब्जी व फल के पशु-पक्षी, वृक्ष एवं नक्शा आदि के मॉडल, रंगोली, फलों व सब्जियों की प्रदर्शनी भी थी और विभागीय माली और स्कूलों के बच्चों के लिए माला और बुके बनाने की प्रतियोगिता भी.

घूमते घूमते हमने भी एक खूबसूरत सी जगह देख अपनी सेल्फी ले ली कैमरे के टाइमर का उपयोग करते

रंग बिरंगे फूलों की दुनिया में बी एस पाबला

पूरे दिन शहर के सड़कें खाली नजर आई. सुबह 9 बजे लोगों की भीड़ जो शुरू हुई उसे दोपहर 12 बजे से मैत्री बाग जाने वाले रास्ते में होमगार्ड और पुलिस को नियंत्रित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी.

दूसरे दिन स्थानीय अखबारों में इस आयोजन को भरपूर स्थान दिया अपनी ख़बरों में. जिसे यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है»

आपने कभी ऐसे आयोजन का लुत्फ़ उठाया है?

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रंग बिरंगे फूलों की दुनिया में बीती एक सुबह” पर 10 टिप्पणियाँ

  1. काश ऐसी ही कोई प्रतियोगिता हमारे शहर में होती तो कितना मज़ा आता … आप बड़े ही खुशकिश्मत है जो आपको ऐसी सुंदर और मन को मोह लेने वाली प्रतियोगिता में जाने का अवसर मिला… रंग-बिरंगे फूलो का बाग़ किसी भी व्यक्ति का मन मोह लेता है और एक सुकून सा महसूस होता है. प्रकृति का खुशनुमा अनुभव इन प्रतियोगिता में बहुत ही दिलखुश करने वाला होता है …. आपके दिए गये चित्र भी बहुत आकर्षक और मनमोहक है … आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इतना सुंदर लेख लिखा और हमारी आँखों को ऐसी मनमोहक चित्रों के द्वारा सुकून प्रदान किया … धन्यवाद. :Approve:
    टिप्पणीकर्ता Navjyoti Kumar ने हाल ही में लिखा है: भारत में स्मार्टफोन और उसके एप्स की बढ़ती लोकप्रियता।My Profile

  2. बिनु सत्संग विवेक न होई. पावला जी, चलो आपके ब्लॉग के सत्संग से ये फायदा तो हुआ कि हम पाठकों के मन में भी ऐसी जगह और कार्यक्रमों में जाने का विचार बनने लगा. वाकई ऐसी चीजें हमारे मन को प्रसन्न करती हैं. ऐसी ही कम की बातें और अनुभव बताते रहें और हम सबको अच्छी-अच्छी चीजों के लिए प्रोत्साहित करते रहें.
    आपको और आपके परिवार को भी होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.
    अनिल साहू

  3. बहुत सुन्दर, पाबला जी बच्चे और फूल तो सुन्दर ही होते हैं।

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