फोर्ड फाउंडेशन, अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी

मेरे ख्याल से आज तक मैंने सार्वजनिक तौर पर राजनैतिक आलेख नहीं लिखा. क्योंकि आम तौर पर धर्म, राजनीति से संबंधित बातें अंतहीन होती हैं जिनका कोई निष्कर्ष नहीं निकल सकता. एक बार एक कथित इंटरव्यू में मैंने कहा भी था कि जो मुद्दा वैसे ही आग लगा देने में सक्षम हो, तो उसकी बात कर होम करते हाथ क्यों जलाऊँ मैं? लेकिन इन चुनावों में एक बात जो बार बार उछाली जा रही है उसे ले कर मैंने निश्चय किया कि कुछ लिखा ही जाए. ये मुद्दा है फोर्ड फाउंडेशन द्वारा आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंंद केजरीवाल को धन दिए जाने का.

पिछले कुछ माह से, विशेष तौर पर दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान इस बात को खूब उछाला गया, दुष्प्रचारित किया गया कि अरविन्द केजरीवाल ने अपने गैर-सरकारी संगठन (Non Governmet Organisation -NGO) के बहाने एक अमेरिकी संस्था, फोर्ड फाउंडेशन (Ford Foundation) से चंदे के रूप में भारी भरकम धन प्राप्त किया है इसलिए वो अमेरिकी खुफिया संस्था -सी आईए के एजेंट हैं, इसलिए अगर वे कोई पद पा गए तो विदेशी संस्थाओं के प्रभाव में आ कर ऐसे काम करेंगे कि देश बरबाद हो जाएगा.

पिछले दिनों ही दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि जनलोकपाल औऱ स्वराज की बात करने वाले केजरीवाल ने, सीआईए की सहयोगी फोर्ड फाउंडेशन की सहायता ली है। लेकिन वह ‘आप’ पार्टी आज तक विदेशों से मिल रहे फंड तक के बारे में कोई जवाब नही दाखिल करा पाई है फिर वो चाहे होम मीनिस्टरी में हो या कोर्ट!

फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवकसंघ के मुखपत्र, पांचजन्य पर दिखा कि अशोक सिंघल जी कह रहे कि अरविंद केजरीवाल को ‘मैग्सेसे पुरस्कार’ दिया गया , यह पुरस्कार फोर्ड फाउंडेशन द्वारा उन लोगों को देने की कोशिश होती है जो अमरीका के हित में कार्य कर सकें। अरे! इसका मतलब यह हुआ कि मदर टेरेसा, जे पी नारायण, किरण बेदी भी सीआईए से जुड़े रहे!! इनको भी तो मैगसेसे पुरस्कार मिला है.

ऎसी खबरें टीवी, अखबारों पर पढ़ देख मुझे लगता था कि यार! अरविंंद ने सच में कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया है चंदा ले कर! यहाँ, भारत में तो कितनी ही संस्थाओं को विदेशों से अफरात धन मिलता है. फिर मैंने कंधे उचका दिए कि राजनीति में यह सब तो भ्रम फैलाया ही जाता रहा है अपने को क्या!!

लेकिन यह आक्रमण थमा नहीं. इस बीच फेसबुक पर मेरी राजनैतिक चुटकियों पर पारिवारिक सदस्यों को लेकर छींटाकशी शुरू हुई, एक लिंक मिली फोर्ड फाउंडेशन पर सफाई की, भाजपा समर्थक मित्र सुरेश चिपलूनकर की टिप्पणी दिखी -दुष्प्रचार का ज़वाब दुष्प्रचार से ही देना चाहिए, प्रकाश गोविन्द जी ने एक लिंक दिखाई तो मेरा मन किया कि लिखा ही जाए इस पर.

आम तौर पर एक कहावत बेहद सटीक बैठती है भाजपा समर्थकों पर -राई का पहाड़ बना देना. फिर चाहे वह पुण्य प्रसून बाजपेयी – अरविन्द केजरीवाल की अनौपचारिक बातचीत का वीडियो हो या फोर्ड फाउंडेशन का चंदा! अब एक झूठ को सौ बार बोलने से वह सच बन जाता है, इस रणनीति की बात नहीं करूंगा. लेकिन जब मैंने तलाशना शुरू किया तो मज़ा ही आ गया.

शुरूआत हुई तब, जब पिछली 7 मार्च को नवभारत टाइम्स का एक खबरनुमा पृष्ठ दिखा कि जिस फ़ोर्ड फाउंडेशन के पैसे को लेकर अरविंद को सीआईए का एजेंट कहते हैं भाजपा वाले, उसी फ़ोर्ड फाउंडेशन से गीर फाउंडेशन जिसके चेयरमैन खुद मोदी जी है उस गीर फाउंडेशन को फ़ोर्ड फाउंडेशन से $122,000 मिला था 2002 मे. फिर तो मोदी भी हो गये सीआईए एजेंट 🙂 उसी पृष्ठ पर एक कड़ी भी थी फोर्ड फाउंडेशन की. 200 पन्नों वाली इस रिपोर्ट में मुझे सरसरी तौर पर कुछ नहीं मिला.

लेकिन यह देखते रहा मैं, कि कैसी कैसी खबरें हैं! एक खबर थी कि सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है।

इन वकील साहबान का कहना है कि केजरीवाल की भ्रष्टाचार भगाने की मुहिम फोर्ड फाउंडेशन के पैसे से चल रही है, फोर्ड फाउंडेशन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन है जो दुनिया के कुछ देशों में सिविल सोसाइटी नाम से मुहिम चला रहा है।” इन के मुताबिक फोर्ड फाउंडेशन कई देशों में सरकार विरोधी आंदोलनों को समर्थन देता रहा है, साथ ही आर्थिक सहयोग भी मुहैया कराता है। इसी रास्ते उन देशों में अपना एजेंडा चलाता है। एक और कड़ी भी मिली किसी जासूस की बात करती

मैं तो डर गया 😀 अरे! अब तो मेरा देश गया ही गया गड्ढे में.इसे तो अब नरेंद्र मोदी साहेब ही बचा सकते हैं. उन्होने तो विदेशों से चंदा नहीं लिया है, भले ही देश के धन्ना सेठों से लिया होगा. वो क्या उनके राज्य में किसी ने विदेश से चंदा ना लिया होगा.

इससे पहले निश्चित हो कर बैठता, एक कड़ी मिली आम आदमी पार्टी की वेबसाईट पर. जिसमें वही पुरानी 200 पन्नों वाली लिंक थी, लेकिन पृष्ठ संख्या दिए जाने से मुझे आसानी हुई किसी नतीजे पर पहुँचने पर.

geer-ford-donation

कुल मिलाकर यह पता चला कि गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक सरकारी संस्था गीर फाउंडेशन (GEER Foundation) ने भी फोर्ड फाउंडेशन से 1,22,000 डॉलर लिए थे (2002 Annual Report, page 42) इसके अलावा भी Gujarat Institute of Development Research (GIDR) ने फोर्ड फाउंडेशन से 1,97,759 डॉलर लिए.

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अरे! तो और भी ज्यादा गंभीर मामला है- एक सरकारी संगठन द्वारा CIA की प्रायोजित एजेंसी से अनुदान ग्रहण करना, जिसका तथाकथित उद्देश्य है अनुदान प्राप्त करने वाले देशों को अस्थिर करना !! क्या कोई भी सस्था अपने देश को अस्थिर बनाने के लिये उनका दान या अनुदान ग्रहण करेगी? या उसका देश ऐसा करने के लिये इस बात की इजाज़त देगा?

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इस रिपोर्ट के अनुसार तो गुजरात की पांच संस्थाओं ने US $ 4,69,654 प्राप्त किये। क्या भारत सरकार या देश की किसी अन्य राज्य सरकार ने Ford Foundation को, अमरीका की CIA द्वारा प्रायोजित राष्ट्र विरोधी, गलत सगठन माना है?

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी लेकिन फ़िलहाल तो मुझे यही लग रहा कि अगर बीजेपी की सरकार और उसके मुखिया फोर्ड फाउंडेशन से चंदा ले कर खुश हैं तो अरविंद केजरीवाल को काहे दुत्कार रहे!?

फोर्ड फाउंडेशन, अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी
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फोर्ड फाउंडेशन, अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी” पर 14 टिप्पणियाँ

  1. नरेन्द्र मोदी जिंदाबाद.. वो जो भी करेंगे सही करेंगे.. वे तो भगवान् का एक दूसरा रूप हैं.

    यह मैं नहीं कह रहा, उनके अंधभक्तों के मुंह से कई बार सुन चूका हूँ. 😉

  2. लो जी कर लो बात
    अब तो आप भी सी आई ए एजेंट हो गए 🙂

    इन मोदी भक्तों से भगवान बचाये
    इनमें और तालिबानों में कोई अंतर नहीं
    दोनों के दिमाग ब्रेनवाश हो चुके हैं
    टिप्पणीकर्ता Prakash Govind ने हाल ही में लिखा है: एक दिलचस्प और सच्चा किस्साMy Profile

  3. अब तैयार रहिये इन अन्धो के अनाप शनाप जवाबो के लिए ।

  4. वैसे गुजरात वालों को फ़ोर्ड से ज्यादा मदद मिली है, इसका मतलब तो यही समझ में आता है.. कि बाकी तो सब समझदार हैं
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: आटा, सब्जी, प्रेमकपल और पुलिसचौकीMy Profile

  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (25-03-2014) को “स्वप्न का संसार बन कर क्या करूँ” (चर्चा मंच-1562) पर भी होगी!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
    परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

  6. इलेक्शन के लीए हर पार्टी चंदा मांगती है, चाहे वह कांग्रेस हो बीजेपी या कोई और पार्टी।जीत के मकसद को लेकर क्या क्या नही हो रहा है, इसके पहले जब कांग्रेस में सत्ता का जोर था,सिर्फ यहि पूछा जाता था,टिकट के लिए तुम कितना कंट्रीब्यूट करो गे,या कर सकते हो।जितने पर कमाई के साधन निश्चित थे।यहाँ तक की पैसे और शराब भी बांटी जाती थी।
    सिर्फ जीत हसींल करने के लिए-परन्तु आज जनता अपने अधिकारो को पहचानने लगी है,वह भी पैसे ले कर वोट उसी को करती है जिसके प्रति उसकी चाहत है। चंद फोर्ड या किसी से किसी ने भी लिया हो,जरुरी नहीं है वह उसका पिछलग्गू बन जाये। इस देश में प्रधान मंत्री बईमान नहीं हो सकता -यदि हुवा तो उखाड कर फेक दिया जायेगा।यह अलग बात थी मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री पर आरूढ़ कर कांग्रेस सोनियां गांधी ने भी भ्रष्टाचार की व्याख्याए स्काम में दी है।

  7. पावला जी आँखें खोल दी। देश का क्या होगा यही एक चिंता सताये जा रही है।

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