… बहुत हो गई ब्लॉगिंग, अब चला जाए ….

tensionपाबला जी …कुत्तों की तरह केवल भौकना जानते हैं/

around पाबला और उनके गैंग कि दादागिरि इस पुरे ब्लाग जगत पर है/
hah पावला … और … बेबकूफो की जमात अपने आप को हिंदुस्तान का प्रधान मंत्री समझती है/
adusपावला जी …कौड़ी काम के भी नहीं हैं/
nangih किसी का लिखा अख़बार से उठाकर छाप देना भी कोई ब्लोगिंग है?

इन जैसी बातों के अलावा हिन्दी ब्लॉग जगत से अब तक शुभचिंतकों का बेपनाह स्नेह व यथोचित आदर मिलता चला आया है।

इन सबके बीच मुझे याद आता है कि 18 सितम्बर 2005 को ब्लॉग जगत में आ कर एक बार पलायन करने के बाद 21 नवम्बर 2008 को जब पुन: इस मायावी दुनिया में प्रवेश हुया तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। ढ़ेरों मित्र बने, झड़पें हुईं, रूठना-मनाना हुया, नई तकनीकें सीखीं, मिठास भरी बातें हुईं, कड़वे अनुभव हुए।
एक दिन मुझे अपने ही ब्लॉग का जिक्र समाचार पत्र में किये जाने की खबर लगी। उत्सुकता हुयी कि आखिर वह कहाँ छपी है और क्या लिखा गया है। हमने पता लगाना शुरू किया। ‘विक्टोरिया नम्बर 203’ जैसा बड़ी टेढ़ी खीर वाला लगा यह काम। चाबी (पोस्ट) थी, लेकिन ताला (समाचार पत्र) नहीं! फिर खबर लगी कि ‘उसे’ एक ऐसे न्यूज़ पेपर पर देखा गया है। मैंने सोचा, पता नहीं ऐसे कितने ही ब्लॉगर होंगें, जिन्हें मालूम भी नहीं होता होगा कि उनकी किसी पोस्ट की, किसी समाचार पत्र या पत्रिका या ऐसे ही किसी प्रिंट मीडिया में तारीफ की गयी है, चर्चा की गयी है, उद्धृत किया गया है। पता चल भी जाये तो उसकी झलक पाने के लिए कितने ही पापड़ बेलने पड़ते होंगे। इस सोच का परिणाम यह निकला कि एक ब्लॉग बना डाला गया ‘प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा‘।
यह ब्लॉग 4 अप्रैल 2009 को प्रारंभ हुया, 100 घंटों के भीतर 100 हिट्स भी हो गई, 25 जून 2009 को 200 पोस्ट होने के बाद 2 सितम्बर 2009 को 1000 टिप्पणियाँ सुखद अहसास देती लगीं, 17 अक्टूबर 2009 को 500 पोस्ट्स पार हो गईं, 1000 पोस्ट्स का पड़ाव भी 22 फरवरी 2010 को आ पहुँचा, पिछले 4 अप्रैल को इसे एक वर्ष हो गया लेकिन मुझे ध्यान ही नहीं आया!
और आज, 14 जून 2010 को इस प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा वाले ब्लॉग की 1500वीं पोस्ट भी आ गई है। इन सबमें कुल मिलाकर, विभिन्न पत्र-पत्रिकायों की, लगभग 2200 कतरनें समाहित हैं।
इस अन्तराल में हिन्दी ब्लॉग जगत के हालात काफी बदल चुके हैं। कई अन्य समाचार पत्र-पत्रिकाएँ हिन्दी ब्लॉग लेखों को नियमित स्थान देने लगी हैं। ऑनलाईन पत्रिकायों के साथ-साथ रेडियो, टेलीविज़न पर भी हिन्दी ब्लॉगों को उद्धृत किया जाने लगा है। संभावनाएँ असीमित हैं और गूगल के मुफ़्त सेवा ब्लॉगस्पॉट की सुविधाएँ बेहद सीमित
इसलिए यह निर्णय लिया जा रहा है कि मुफ़्त के मंच पर इस प्रिंट मीडिया वाले ब्लॉग के द्वारा बहुत हो गई ब्लॉगिंग, अब चला जाए इसे लेकर एक सुसज्जित वेबसाईट की ओर। (क्रमश:)
… बहुत हो गई ब्लॉगिंग, अब चला जाए ….
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मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

… बहुत हो गई ब्लॉगिंग, अब चला जाए ….” पर 71 टिप्पणियाँ

  1. शीर्षल से थोडा भ्रम हुआ पर मुझे लगता है सरकारी आवास से ये अपनी कोठी तक की यात्रा की त्यारी है. पाबला जी का उत्साह ऐसे ही बना रहे और हम सभी को उनके ग्यान लगन और मेहनत का लाभ मिलता रहे.

  2. डरा ही दिया था आपने .. पर क्रमश: देखकर तसल्‍ली मिली .. आपकी मेहनत काबिले तारीफ है !!

  3. आपने डरा दिया था। अब वेबसाइट की ओर जा रहे हैं

  4. अजी मै तो छुट्टीयो पर हुं, लेकिन सर सरी नजर फ़िर भी ब्लांग पर मार लेता हुं, अजी बादशहो तुसी से डरा ही दित्त सी, पर पंजाब दे शेर ऎमे नही जांदे जी, हुन्न थोडी तसल्ली होई, धन्वाद

  5. आपने डरा दिया था। अब वेबसाइट की ओर जा रहे हैं। पाबला जी आपको बधाई हो

  6. शीर्षक देखकर तो लगा कि आज पाबला जी टंकी की और कैसे ?
    पर अंतिम क्रमश : वाली लाइन ने राहत दी 🙂

  7. श्री पाबला जी, मैने एक नही अनेक बार अनेक मंचो पर कहा कि आपके दोनो ब्‍लागों को बहुत ही सार्थक मानता हूँ। भले ही आज तक महाशक्ति की केवल एक ही रचना आपके इस मंच पर आयी हो 🙂

    आपने एक लिंक का उपयोग किया है उसे 1 महीने बाद पुन: रीपिट करना अनावश्‍यक लगा। आपकी ब्‍लाग शिद्धता सर्व विदित है, आपका कर्म ही मुझे आपका प्रसंसक बनता है।

    जय श्रीराम

  8. डराने के सिवा कुछ करते हैं ?
    हे भगवान .
    उस पर शुरू की पंक्तियाँ.लगा किसी ने फिर आपको हर्ट किया है…..अरे वीरजी ! कुछ भी करिये बंदी तो एक बात जानती है फूल मिले ना मिले बेटा पत्थर तो तैयार है ही सो इं सबसे नही डरते कि कोई हमारे लिए क्या कहता है.हम अच्छे हैं ये स्र्तिफिक्त लोग दे तभी पता चलेगा हमें?
    हा हा हा .
    पर यहाँ मामला दूसरा निकला हाँ पत्थर यहाँ भी दिखे चाहें आपने खुल कर उन पत्थरों या जख्मों का ज़िक्र भले ही ना किया हो.
    एक सुसज्जित वेबसाईट की ओर आपके कदम! स्वागत और शुभकामनाएं.अरे कभी हमारे ब्लोग का ज़िक्र भी होगा लोग हमें भी पढेंगे.अपना तो कोई गोड फादर नही ना इधर.
    बहुत खुश हूँ ये पढ़ कर.इस नई वेब साईट से अच्छे ब्लोग्स और लेखकों से परिचय होगा.नयों को नई पहचान मिलेगी.

  9. चलिए डरा भी लिया! क्रमशः भी कर दिया। अब कल तक प्रतीक्षा करनी होगी। खैर वेब साइट का विचार सही है।
    घुघूती बासूती

  10. आप ब्लॉगजगत और हिंदी की जो सेवा कर रहे हैं वो काबिले तारीफ़ है!

  11. मैं तो यह लिखने आया था कि मैं भी चल रहा हूं आपके साथ। लेकिन अब तो जरूर चल रहा हूं आपके साथ। मजा आ रहा है आपके साथ। कोई देगा गल भी तो खा लूंगा आपके साथ। आपका साथ तो है आपका साथ। आपके साथ की तो बहुत निराली है बात।

  12. चलो जी अच्छा है कि आप और भी अच्छी अपनी वैबसाइट बनाने जा रहे हैं. बधाई. आशा है उसे भी चिट्ठाजगत व ब्लागवाणी पर लिस्ट करेंगे ताकि हमें भी आपकी ताज़ा ख़बरों की जानकारी मिलती रहे 🙂

  13. शीर्षक देखते ही मानो दिल ने धडकना ही बंद कर दिया हो …
    पढने पर अब जाकर साँस में साँस आयी है –
    ना दैन्यं न पलायनंम vind3

  14. हर महीने १०० पोस्ट्स से भी ज्यादा । भाई यह तो एक अजूबा सा ही है । कितनी मेहनत करते हैं आप ।
    डटे रहें । शुभकामनायें ।

  15. मै तो फ़ोन करने ही जा रहा था शीर्षक पढ कर .

  16. आपके ब्लॉग से ही मालूम हुआ था कि हिन्दुस्तान या जनसता में मेरे ब्लॉग की चर्चा हुई है। यह प्रयास आपका बहुत अच्छा रहा। निवेदन है कि इसे बंद मत कीजिएगा।

  17. आपको जाने ही कौन देगा?

  18. टाइटल बढ़िया दिया है गुरु… हिट्स पर हिट्स झेलो अब… 🙂 🙂

    ये "टंकी", है तो बड़े काम की चीज़… 🙂

  19. सादर वन्दे !
    जय हो ! आपने अपने शीर्षक के माध्यम से बहुत ही जघन्य मजाक किया है |
    वो कहते हैं ना जोर का झटका धीरे से लगा |
    रत्नेश त्रिपाठी

  20. पाबला जी आप कहते हैं कि
    'संभावनाएँ असीमित हैं और गूगल के मुफ़्त सेवा ब्लॉगस्पॉट की सुविधाएँ बेहद सीमित।'
    इसे स्पष्ट करेंगे।
    मेरे कुछ मित्रों ने लिखना छोड़ दिया। जिनके अपने वेबसाइट थीं। वे पैसा न दिया जाने कि वजह से गायब हो गयीं। लेकिन जो मुफ्त सेवायें ले रहे थे उनकी वेबसाइट अभी भी हैं। मुझे तो लगता है कि मुफ्त सेवा ही बेहतर है। जब तक असीमित संभावनायें कुछ स्पष्ट न हों।

  21. संस्था की तरह काम करते हैं आप !
    आपके विभिन्न ब्लॉग्स खुद ही अपनी योग्यता/उपयोगिता सिद्ध करते हैं !
    सुखद है वेबसाइट के रूप में इस ब्लॉग का ढल जाना ! बधाई !

  22. *अब जो लोग पाबला जी को नहीं जानते हैं उनका डर जाना स्वाभाविक है । ऐसे लोग अस्पताल में भरती हो सकते हैं ।
    *कुछ लोगों को हार्ट अटैक भी आ सकता है ।
    *कुछ लोग खुशी के मारे ……
    *ऐसा क्यों करते हैं पाबला जी ?
    इसका जवाब जल्द ही दिया जायेगा । अगली किश्त में …

  23. अभी आया हूँ घर पर….शीर्षक पढते ही एक झटका सा लगा..लेकिन पोस्ट पढ़ने के बाद तसल्ली हुई…

  24. आपका प्रयास रंग लाया…. और अब पूर्ण रूप ले चुका है….

  25. पाबला जी,
    गज्जब डरा दिये थे आप. 🙂

  26. आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

  27. आपके कारण ही हम स्‍वयं को विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में पाते हैं। आप का कार्य तो स्‍वर्णाक्षरों में लिखने योग्‍य है। आपको बधाई वेबसाइट के लिए। बस डराइए मत।

  28. अरे भाई आपने तो डरा ही दिया था …प्रिंट मीडिया वाला ब्लॉग बहुत काम की चीज है.
    आप का कार्य बहुत सराहनीय है जनाब ….

  29. घबराहट पैदा कर दी आपने….जारी रहिये.

  30. कुछ तो लोग कहेंगें, लोगों का काम है कहना, जब उनके ब्‍लॉग की चर्चा प्रिंट मीडिया में होगी तो वे भी इसी ब्‍लाग से आशा रखेंगें.

    यह विचारणीय है कि धर्मार्थ में यह श्रमसाध्‍य व समय लगने वाला कार्य संभव नहीं है फिर भी संभव हो सके तो इसे निरंतर रखें.

  31. जाइए आप कहां जाएंगे…
    ये नज़र लौट कर आएगी…

    बादशाहो पंगा एवें जया ल्या करो, दूजा सिवा-सिलाया रवे…नहीं ते सुई-सिलाई वी त्वाणु लियाणी पऊ…

    जय हिंद…

  32. इस हेतु आपको हार्दिक शुभकामनाएँ।

  33. …कहां जा रहे हो भाई जी … उस रास्ते का लिंक भी दे देते तो हम भी उसी दिशा में निकल लेते …!!!

  34. शीर्शक देख कर लगा,यह क्या हो रहा है? खैर हार्दिक बधाई ।

  35. आपका परिवार धन्य है पाबला जी जिसको आप जैसी सौगात मिली !
    आज जब मैं हिंदी ब्लागजगत पर ब्लागिंग देखता हूँ तो अधिकतर जगह अपने अपने उद्देश्य को लेकर ब्लाग लिखे जा रहे हैं ! आपके द्वारा किये गए प्रयास, जिसमें जाने अनजाने ब्लागर लाभान्वित होते हैं , बेहद प्रसंशनीय होने चाहिए !

    अगर कुछ लोगों ने आपको भारी भरकम गालियों से सराहा है तो यकीनन इससे आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी ! आशा है इसी शेर दिली ( शेर तो तुसी हो ही) …हमारा बड़ा भाई …गुरु का शिष्य …जियो इस परिवार के सरताज …क्यों उदास होते हो ! सब तुम्हारे साथ हैं !

  36. जहां भी जाईये हम आपको उधर ही मिलेंगे
    स्नेह बनाये रखियेगा

  37. बहुत डरा देते हो पाबला जि। अभि तो आपको बधाई।आपका उत्साह ऐसा हि बना रहे भले हि लोग अपनी बेवकुफी दिखाये

  38. शीर्षक पढ़कर मुझे भी अजीब लगा की अचानक क्या हुआ जो ब्लॉग छोड़ने वाले हैं? फिर जब पढ़ा तब पता चला कि आप तो डरा रहे थे। मैं तो यही कहना चाहूँगा कि ब्लॉगिंग ज्यादा आसान है, अभी तो गूगल द्वारा दी जाने वाली सुविधाएँ सिर्फ शुरुआत हैं आगे और भी नया देखने को मिलेगा।

    "ब्लॉग अच्छे हैं"

  39. आपकी मेहनत काबिले तारीफ है !!अंतिम क्रमश : वाली लाइन ने राहत दी

  40. रोमन लोगों की तरफ से भी बधाई स्वीकारें सर… 🙂

  41. पाबला जी, आप सच में ग्रेट हो | हर कोई आप का मुरीद बन जाता है, आप के बारे में आपके ही शब्दों में कहना ज्यादा सही होगा कि, "कम्पयूटर अविश्वसनीय रूप से तेज, सटीक और भोंदू है.
    पाबला अविश्वसनीय रूप से धीमा, अस्पष्ट और प्रतिभावान है.
    लेकिन दोनों मिलकर, कल्पना-शक्ति से ज़्यादा ताकतवर हैं !!"

  42. सभी शुभेच्छुओं को उनकी शुभकामनाओं व बधाई हेतु धन्यवाद

  43. @ काजल कुमार

    आपकी टिप्पणी के एक अंश पर मेरी यही प्रतिक्रिया है
    कि
    कभी नाव नदी पर, कभी नदी नाव पर!

  44. @ Suresh Chiplunkar

    आजकल शो-रूम का ज़माना है 🙂

  45. @ उन्मुक्त

    आपकी टिप्पणी के प्रत्युत्तर में एक पोस्ट ही लिखनी पड़ेगी, प्रतीक्षा करें

  46. @ Anonymous

    आपकी टिप्पणी इसलिए नहीं हटाई जा रही कि उसमें अपमानजनक भाषा है, बल्कि इसलिए हटाई जा रही कि आप अपने ब्लॉग पर मॉडेरेशन लगा कर मेरी टिप्पणियों को प्रकाशित न करने की सार्वजनिक घोषणा कर चुकी हैं।

    यदि ज़्यादा ही शौक है मेरे खिलाफ़ ज़हर उगलने का तो आप अपने ब्लॉग पर जी भर कर गालियाँ दे लें मुझे। आप अपने मन की कीजिएगा, फिर मैं अपने मन की करूँगा।

    वैसे भी आप कभी मौलिक लेखन नहीं कर पाईं, जो कुछ आपके ब्लॉग पर है वह दूसरे ब्लॉग या ब्लॉगरों की आलोचना ही है।

    चिकित्सा विज्ञान आपकी सहायता कर पाए, यह मेरी हार्दिक इच्छा है।

    फिलहाल तो आपकी टिप्पणी हटाई जा रही। उम्मीद है अगली बार आप वह काम नहीं करेंगी जिसके बारे में आपके प्रवचन आए दिन मिलते रह्ते हैं।

  47. @ DHEERAJ

    बेशक ब्लॉगिंग ज्यादा आसान है और गूगल द्वारा नया भी देखने को मिलेगा। किन्तु याद रखें दुनिया में कोई भी चीज मुफ़्त नहीं मिलती, किसी ना किसी रूप में कीमत चुकानी ही पड़ती है।

  48. @ सतीश सक्सेना

    न तो उदास हूँ न ही खिन्न! बस कुछ कुंठितों पर मुस्कुरा रहा हूँ। परमात्मा इन्हें कभी बुद्धि ना दे 🙂

  49. हा हा हा ! बहुत बढिया

    शुभकामनाएं-बधाईयाँ

  50. बहुत बहुत शुभकामनाये सरकारी आवास से कोठी तक तो शर्मा जी ने पहुँचा ही दिया अब महल तक पहुँचें

  51. बहुत बहुत बधाई हो जी.
    ब्लॉग से वेबसाईट की तरफ जाने के आपके फैसले की मैं सराहना करता हूँ.
    मैं आपके साथ था, हूँ, और भविष्य मैं भी रहूंगा.
    धन्यवाद एवं हार्दिक बधाई.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  52. फलदार पेड़ों पर ही पत्थर मारे जाते हैं वीरजी! इसलिए ज्यादा दिल से नही लगाना इन बातों को.आप तो लगे रहिये.मेहनत रंग ला रही है जी.सब देख रहे हैं.

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