बिना पेट्रोल के चलने वाली बाइक बनी मेरे शहर में

कल जब पिता जी स्थानीय समाचार पत्र देख रहे थे तो उन्होंने अपनी कर्मस्थली रही और मेरे जनम स्थान दल्ली राजहरा की एक खबर की ओर मेरा ध्यान आकर्षित किया। खबर में बताया गया था कि दल्ली राजहरा में रहने वाले महेन्द्र भारद्वाज ने बिना पेट्रोल से चलने वाली दो पहिया वाहन का निर्माण किया है। यह बाईक पहले बैटरी से स्टार्ट होगी। पहले ही गियर में बैटरी से थोड़ी ऊर्जा लेकर बाद में यह अपनी ऊर्जा से चलेगी। स्टार्ट होने के बाद बैटरी से इंजन का संपर्क टूट जाता है लेकिन गाड़ी चलती रहती है।

यह बाईक 100 से भी ज्यादा किलोमीटर लगातार चलने में सक्षम है। इस बाईक का निर्माण और प्रेक्टिकल करते वक्त लगभग दो लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। महेन्द्र ने इसका निर्माण २ साल में किया। इसमें चार गियर तथा 25 किमी प्रति घंटा स्पीड है। इस बाईक का वजन 150 से 180 किलोग्राम तक है। इस दिलचस्प खबर में आगे बताया गया था कि महेन्द्र दसवीं कक्षा में अनुत्तीर्णहै।

इसका प्रदर्शन पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भी किया गया था। मुख्यमंत्री ने इनके इस अविष्कार को क्रांतिकारी बताते हुए कहा था कि महेन्द्र भारद्वाज ने यह साबित कर दिखाया है कि यदि कुछ नया कर दिखाने का हौसला हो तो कठिन परिस्थितियों में भी प्रतिभाएं सितारों की तरह दुनियां के सामने आ जाती है। मुख्यमंत्री ने इस अविष्कार के लिए कुछ माह पूर्व प्रोत्साहन राशि 53000 रुपए की सहायता प्रदान की थी। मुख्यमंत्री ने भारद्वाज के इस खोजी अविष्कार को राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राजधानी रायपुर में संचालित पेटेंट सूचना केन्द्र के माध्यम से मुंबई पेटेंट कार्यालय में पेटेंट करवाने का भी वायदा किया है।

पिता जी के चेहरे की मुस्कुराहट काफी देर तक बनी रही। मैंने सोचा क्यों ना इसे अपने साथियों से भी बाँटा जाये।

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8 comments

  • हिमांशु । Himanshu says:

    बेहतरीन सूचना । बधाई भी आपको ।

  • संगीता पुरी says:

    महेन्‍द्र का यह प्रयास काबिले तारीफ है .. मोटर साइकिल में पेट्रोल भरवाने से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह अच्‍छी खबर है .. हालांकि बाजार में ऐसे मोटरसाइकिल के आने में काफी देर होगी .. फिर भी इस खबर से कुछ उम्‍मीद तो की ही जा सकती है।

  • नीरज गोस्वामी says:

    कमाल का आविष्कार किया है…चमत्कार करने वाले और हुनर मंद के लिए जगह और शिक्षा का कोई महत्व नहीं हुआ करता…
    नीरज

  • राज भाटिय़ा says:

    बहुत अच्छी जानकारी दी आप ने,महेन्दर को प्रोत्साहन देना चाहिये हमारी सरकार को, ऎसे वाहन खरीदारी करने के लिये घरेलू महिलाओ के लिये बहुत उपयोगी होते है, या फ़िर उन लोगो के लिये जो नजदीक नोकरी करते हो, हमारे यहां बेटरी से चलने वाले ऎसे वाहन है, जो २५ किमी की रफ़तार से ही चलते है, लेकिन बेटरी चार्ज करनी पडती है.
    हमारे इस बाह्दुर महेन्दर को बहुत बहुत शावास
    ओर आप का धन्यवाद इस समाचार को यहां तक पहुचाने के लिये

  • Udan Tashtari says:

    बहुत अच्छी खबर आई यह तो आपके शहर से..

  • ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey says:

    समझ में नहीं आया। अन्तत: ऊर्जा का स्त्रोत क्या है? यह अपनी ऊर्जा से चलेगी का क्या अर्थ है? सेल्फ-प्रोपेलिंग वेहीकल कैसे बन सकता है। बैटरी से अगर केवल प्रारम्भिक गति मिलती है तो उसके बाद के घर्षण को ओवरकम करने को ऊर्जा कहां से आती है?

  • Shastri says:

    अविष्कार तारीफे काबिल है, लेकिन भौतिकी के आधारभूत नियमों के लंघन के कारण मेरे मन में शक बाकी है!!

    सस्नेह — शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

  • Rajat Narula says:

    its a wonderful blog….

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