ब्रुक बॉँड रेड लेबल चायपत्ती के अनजान खतरनाक रसायन और मेरी आपबीती

पिछले दिनों परिवार में हुए कुछ हादसों के चलते व्यस्तता बढ़ गई थी। रात की शिफ्ट होने के कारण दिन भर में आवश्यक कार्य निपटा ही लिए जाते थे। किन्तु दो रातें मुझ पर भारी बीतीं।

23 जून की रात्रि बिटिया की तबीयत इतनी बिगड़ी कि उसे आपात्कालीन चिकित्सा हेतु अपने नियोक्ता के अस्पताल ले जाना पड़ा। तेज बुखार, गले में तीव्र पीड़ा, जी मिचलाना, बदन का ऐंठना जैसे लक्षणों से लगा कि कथित वायरल फिवर तो नहीं। मलेरिया भी जाँच में नहीं पाया गया। दर्द निवारक इंजेक्शन, Perinorm व DNS की IV ड्रिप्स के बाद भी स्थिति सुधरने में समय लग गया।

उजाला होने के पहले घर तो आ गये लेकिन बेहद हताश सी लग रही थी बिटिया। वैसे तो कुछ कहती नहीं है छोटी मोटी व्याधियों पर लेकिन उस दिन तो रो ही पड़ी थी। गले का अंदरूनी दर्द खतम ही नहीं हो रहा था।

हमें भी चिंता हो रही थी कि घर से बाहर की खाद्य सामग्री से परहेज करने वाली बिटिया को ऐसी किस वस्तु ने अपना असर दिखाया कि नौबत अस्पताल की आ गई?

दोपहर होते होते माता जी ने भी शिकायत की। वे अस्थमा की पुरानी मरीज हैं। जैसे तैसे दवाईयों से नियंत्रित रखती हैं उसे उभरने से। कह रहीं थीं कि शायद दवाईयों का असर खतम होते जा रहा है आजकल। मैंने उन्हें टाला कि बदलते मौसम के कारण ऐसा हो रहा होगा।

शाम होते होते बिटिया का बुखार फिर बढ़ने लगा। बदन गर्म होने पर आजकल नहाने की डाक्टरी सलाह मिलती है। तीन बार नहाने के बाद वह भी झल्ला गई। दवाईयाँ चल ही रहीं थीं। तीसरे दिन कुछ ठीक रहा।

इधर मेरे गले में भी सूजन जैसा महसूस होने लगा। ख्याल आया कि अपने कार्य स्थल पर शायद किसी तरह की गैस ने असर दिखाया हो। लेकिन मामला कुछ और ही महसूस हुया। देर रात फिर बिटिया ने गुहार लगाई तो फिर जा पहुँचे अस्पताल। इस बार ड्रिप लगी DNS के साथ Ciprofloxacin, दर्द निवारक इंजेक्शन के बाद।

रात को ही बड़ी माथापच्ची हुई बिटिया के साथ। एक एक संभावना पर विचार किया गया कि ऐसा क्यों हुया होगा। ऐसा क्या है जिसके ग्रहण करने से इतनी तकलीफ हो रही। वहीं हमने निर्णय लिया कि नाक-कान-गला विभाग के प्रमुख रहे, हमारे पारिवारिक मित्र डॉक्टर देवांगन, जो सेवानिवृत्ति के बाद अपना क्लिनिक चला रहे हैं उन्को दिखाया जाये।

इस बीच बुखार उतरने लगा था लेकिन ड्यूटी पर मौज़ूद डॉक्टर ने बिटिया को भर्ती किये जाने के आदेश लिख दिए। हादसों से उपजी पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिये जाने व घर में ही उचित देखभाल का भरोसा दिलाये जाने पर उन्होंने लिख दिया कि मरीज इच्छुक नहीं भर्ती होने के लिए।

घर तो वापस आ गये। आते ही डॉ देवांगन को कॉल किया गया। पता चला वे बैठे हैं क्लिनिक में। नहा धो कर पहुँच गये उनके पास। गला अंदर से देखते ही चौंक पड़े। अरे! अंदर तो मवाद पड़ चुका है, सूजन भी है। उनकी हड़बड़ाहट देख मैं भी नर्वस हो गया। उन्होंने तुरंत भर्ती होने की सलाह दी। लो जी जिस से कतरा रहे थे वही स्थिति फिर सामने!

मैंने वस्तुस्थिति बताई तो कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी और एंटीबायोटिक्स के साथ लगातार बेटाडिन से गरारे करने को कहा। काफी देर तक इस तरह की गंभीर समस्या की जड़ के बारे में उस बुजुर्ग डॉक्टर के साथ सलाह मशवरा करने पर जो नतीज़ा मैंने निकाला उसे आपके सामने रख रहा

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घेरों के अंदर चातुर्य देखा जा सकता है

हुआ यह था कि राशन की खरीदारी करते समय एक नज़र में सामने दिख रहे ब्रुक बॉंड रेड लेवल का एक पैक हमने उठा लिया था अपने संयंत्र के सुपर बाज़ार से। सामने उस पर नेचुरल लिखा दिखा शायद इसलिए। बस यही फसाद की जड़ निकला। इसे हम पहले भी भुगत चुके हैं इसलिए कह रहा।

दिखने पढ़ने में तो बहुत अच्छा है इसका लेबल और जानकारी भी बढ़िया। लेकिन अंदरूनी बातें ऐसी हैं कि वैसे तो इस पर बहुत कुछ लिखा है कि अश्वगंधा, मुलेठी, तुलसी, अदरक, इलायची आदि के गुणों के बारे में। एक नज़र में महसूस होता है कि यह सब अवयव हैं इसमें। किन्तु ऐसा है नहीं।

इन्हीं गुणों के नीचे ** लगाकर लिख दिया गया है कि यह सब आयुर्वेद में बताये अनुसार स्वास्थ्य लाभ हैं। दूसरी ओर यह साफ साफ लिख दिया गया है कि यह सुगंधित चाय पत्ती है और इसमें अश्वगंधा, मुलेठी, तुलसी, अदरक, इलायची की सुगंधियाँ फलां फलां मात्रा में मिलाई गई हैं। अब इन सुगंधियों वाले रसायनों का जिक्र नहीं है यहाँ।

बस इसी कृत्रिम सुगंध वाले रसायनों ने बिटिया के गले सहित हमारे परिवार को अस्पतालों के चक्कर लगवा दिये।

अब चायपत्ती बदलने के साथ स्थिति सुधर गई है। पहले भी यह नौबत आई थी कुछेक वर्षों पहले। तब भी ऐसा ही हुया था। सामान्य चाय पत्ती से ठीक रहता है। ऐसे रसायनों वाली चायपत्ती से मामला बिगड़ जाता है। खास तौर पर गले का।

दोबारा वही स्थिति आने पर अब, दो सीलबंद डब्बे उसी सुगंधित चायपाती वाले, रसीद सहित खरीद कर एक को तो रासायनिक प्रयोगशाला को भेज दिया है। परिणाम संदेहास्पद आने पर दूसरे डब्बा, कोल्ड ड्रिंक में कीटनाशकों को उजागर करने वाली संस्था को भेजूँगा। डॉक्टरों के तमाम कागजात भी संभाल रखें है।

इन निष्कर्षों तक पहुँचने के लिए मुझे कुछ वेबसाईट्स की बहुत मदद मिली जिनमें माऊथशटकन्ज़्यूमर हेल्थ प्रमुख हैं। इसके अलावा कन्ज़्यूमर रिपोर्ट्स, सी द सी, हॉट पोटाटो की जानकारियाँ उम्दा थीं।

ठीक यही किस्सा प्रोक्टर एंड गैंबल के जमाने में क्लियेरिसिल साबुन का था जिससे नहाने से गले की समस्यायें हो जाती थीं। जिसे कम्पनी ने तुरंत बाज़ार से हटा लिया था। सुना है, हाल ही के दिनों में उसे फिर बाज़ार में Reckitt Benckiser India द्वारा उतारा गया है।

आपके साथ भी ऐसा ही कुछ कुछ होता है क्या?

ब्रुक बॉँड रेड लेबल चायपत्ती के अनजान खतरनाक रसायन और मेरी आपबीती
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ब्रुक बॉँड रेड लेबल चायपत्ती के अनजान खतरनाक रसायन और मेरी आपबीती” पर 19 टिप्पणियाँ

  1. आशा है कि बिटिया रानी अब ठीक होंगी।

  2. अरे पाबला जी, मैंने भी आप की ही तरह आयुर्वेदिक चीजों के फेर में पड कर इस चाय का इस्तेमाल किया है। इसमें हरे रंग की सूखी पत्ती भी होती है जो अच्छी लगती है….लेकिन पता नहीं था कि ये खतरनाक भी हो सकती हैं।
    अभी पिछली चाय जो खत्म हुई है वह तो यही चाय थी। अच्छा किया आपने यहाँ पोस्ट के जरिये बताया।

  3. बहुत सटीक कथन . एक बार मुझे चाय पीकर काफी एलर्जी का सामना करना पड़ा.

  4. बिटिया स्वास्थय लाभ ले रही है, संबंधित कलचर टेस्ट की रिपोर्ट का इंतज़ार है।

    सतीश जी, चायपत्ती स्वयं Antioxidants का एक समृद्ध स्रोत है- और अच्छी सेहत के लिए इसमें किसी भी जड़ी बूटी के मिश्रण की जरूरत नहीं है। इस नेचरल शब्द से मुझे मतिभ्रम हो गया था कि शायद यह सामान्य से बेहतर होगी।

  5. hm bhi is jhanse me pad chuke hain achchha huaa aapne samay rahte sawdhan kar diya ..bitiya ab thik hogi asha hai.

  6. पाबला जी पहले तो बिटिया को जल्द ठीक होने की कामनाये करते है,क्या इन कम्पनियो को , मिलावट करने वालो को कोई लगाम नही डाल सकता जो लोगो के जीवन से खेलते है. हर जगह मिलावट ही मिलावट, पीने के पानी से ले कर दवा तक मिलावट

  7. सर में तो टाटा की पीता हूँ..और नेचुरल, हर्बल का तो मुझे भी नहीं पता..कभी ब्रांड नहीं बदलता..वैसे मुझे पता नहीं था की इतना घालमेल चल रहा है…शुक्र की सब जल्दी ही संभल गया….आपकी पोस्ट तो चेतावनी की तरह लगी ..

  8. ऐसे खतरनाक केमिकल्स के कारण चाय पीने के उपरांत मुझे भी एरीदमिया (हृदय के धड़कनों में गड़बड़ी की समस्या)हो जाती है. और मैं भी इस समस्या की जड़ को बड़ी मशक्कत से पकड़ पाया था!

  9. शुक्र है अपन तो चाय पीते ही नहीं….आजकल बाजारवाद के फेर में पड़कर सब मुनाफा बटोरने में लगे हैं…और ऊपर से तुर्रा ये कि भारत में क्‍वालिटी कंट्रोल जैसी कोई चीज है भी तो कागजों में…
    आपका कदम बिलकुल उचित है…रेड लेबल इस तरह से धोखा दे रहा है… जब सारे सबूत इकट्ठा हो जायें तो उसका बैंड बजाने में बहुत आसानी रहेगी…मुझसे कोई सहयोग अपेक्षित हो तो बताईयेगा…वैसे मार्गदर्शन के लिए द्विवेदी सर हैं ही.

  10. ऐसे बड़े ब्रांड भी ऐसी हरकत करें तो आम ब्रांड क्या करते होंगे….?

    बिटिया के जल्द से तंदरुस्त होने की दुआ करता हूँ….. आमीन.

  11. हर वर्ष ठंड के दिनों में तो हमलोग इस चायपत्‍ती का उपयोग तो करते हैं .. पर मार्च महीना आते ही बंद कर देते हें .. कभी समस्‍या नहीं आयी .. अधिक गर्मी की वजह से समस्‍या आयी हो .. या फिर नकली भी हो सकती है .. जो भी हो .. कार्रवाई अवश्‍य होनी चाहिए।

  12. जब नामचीन कम्पनियों का ये हाल है तो छोटी मोटी कम्पनियों से तो इन्सान उम्मीद भी क्या कर सकता है!! ये बढिया रहा कि आपने इनकी खटिया खडी करने के लिए कमर कस ली है।
    वैसे पाबला जी, आप पंजाबी होने का धर्म भी बखूबी निभा रहे हैं। यूँ ही नहीं कहते कि "पंजाबी पिच्छे पया वी माडा":)

  13. ऐसा भी हो सकता है ये तो सोचा न था…..अभी कुछ समय पहले नैचुरल शब्द और इन सभी तत्वों का नाम सुनकर हमने भी ये चाय प्रयोग की थी….मगर अब जब बात ऐसी है तो तौबा……गुड़िया का स्वास्थ्य जल्द ठीक हो इन्हीं शुभकामनाओं के साथ….

    साभार
    प्रशान्त कुमार (काव्यांश)
    हमसफ़र यादों का…….

  14. जानकारी देने के लिए धन्यवाद
    वीनस केसरी

  15. पावला जी कमाल की जानकारियाँ देते हैं आप। मैने ये सुगन्धित चाय इस लिये बन्द की थी कि मंहगी चाय के बदले वो सुगन्ध के नाम पर पता नही क्या डालते होंगे तो मेरा शक सही निकला। लेकिन आपके प्रयास को दाद देनी पडेगी कि असली सच सामने लाये। आज से बच्चों के लेज़ बन्द। लेकिन क्या क्या बन्द करें हर चीज़ मे मिलावट्! धन्यवाद बिटिया शीग्र स्वस्थ हो। शुभकामनायें।

    • Ssshh
      कुछ हुआ तो था लेकिन कंपनी ने कहा कि किसी भारतवासी को पता न चले कि क्या हुआ 😀

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