भिलाई में फिर जमी ब्लॉगरों की महफिल: एक नए ब्लॉगर के साथ

नाईट शिफ्ट से आ कर दोपहर की नींद का मज़ा ही कुछ और है। उस दिन दोपहर के भोजन बाद धूप में कुछ देर आराम से बैठा ही था कि खुमारी छाने लगी। हवा में ठंडक तो थी ही। मोबाईल को वाईब्रेशन में रख लम्बी तान सो गया। आँखें खुली तो 5 बज चुके थे। हाथ में मोबाईल आते ही नज़र डाली तो संजीव तिवारी, शरद कोकास की साढ़े तीन बजे के आसपास की मिस्ड कॉल दिखीं। शरद जी ने उलाहना दिया कि कब से आपको कॉल कर रहे हैं। मैंने वस्तुस्थिति बताई उन्हें।
जब उन्होंने बताया कि ललित शर्मा आए हुए हैं रायपुर से, तो मुझे ध्यान आया कि एक दिन पहले शर्मा जी ने सम्भावना व्यक्त की थी भिलाई आने की। मैंने शरद जी से पौन घंटे की मोहलत ली और पहुँच गया सुपेला के हिमालय हॉटल के रेस्टोरेन्ट में। सामने ही एक अपरिचित चेहरे के साथ बैठे दिखे शरद कोकास, संजीव तिवारी, ललित शर्मा। शरद जी ने परिचय करवाया ‘ये हैं स्टेट बैंक में कार्यरत् बालकृष्ण अय्यर, मेरे सहकर्मी, अनिल पुसदकर के सहपाठी और अब हम सबके साथी ब्लॉगर’
बालकृष्ण अय्यर रायपुर में कार्यरत् थे। हाल ही में वे भिलाई स्थानांतरित हुए और आते ही शरद जी ने उनका ब्लॉग बनवा दिया। बालकृष्ण जी का रूझान रंगकर्म की ओर भी है और वह इस शौक को शिद्दत से पूरा भी करते हैं।
ललित शर्मा दोपहर से ही आए हुए थे और अब लौटने को तत्पर थे। लेकिन बातों का दौर चला तो रात के 8 बज गए। अजय कुमार झा व अनिल पुसदकर के बीच एक टिप्पणी को ले कर पनपी गलतफहमी से शुरू हुई बात इस बात पर आ कर ठहर गई कि जब तक दो ब्लॉगरों के मध्य आपसी संवाद नहीं होगा तब तक ऐसी नौबत आने की संभावना बनती रहेगी। बहुमत इसी बात का था कि आपसी संवाद बढ़ाया जाए
इसी मुद्दे पर बात जब आगे बढ़ी तो टलते आ रहे ब्लॉगर सम्मेलन की रूपरेखा भी बनने लगी। संभावित समय, पाश्चात्य नव वर्ष का निश्चित किया गया। आयोजन स्थल, रायपुर की बजाए भिलाई में ही रखे जाने हेतु विमर्श हुया।
बालकृष्ण अय्यर व अनिल पुसदकर के साथ स्कूल की मज़ेदार बातों के बीच शरद जी एक अच्छा कैमरा खरीदने की चाहत कर बैठे। विभिन्न जानकारियाँ दे कर बालकृष्ण जी ने उनकी चाह्त को पंख लगा दिए। किसी बात पर दोनों के बीच जो नोक-झोंक हुई वह देखते ही बनती थी।
इस बार की महफिल में हुई बातों को विस्तार पूर्वक लिखने का बहुत मन था मेरा। लेकिन कतिपय व्यस्तता के कारण बस मन मसोस कर रह जाना पड़ रहा है। आप अंदाज़ा लगा लीजिए कि हम मिल बैठे थे 2 नवम्बर को और पोस्ट आ रही है आज 10 नवम्बर को!
ललित शर्मा जी को जब लगातार फोन आने शुरू हुए तो उन्होंने इज़ाज़त चाही हम सबसे। उन्हें जाना था रायपुर-धमतरी मार्ग पर अभनपुर्। हमेशा की तरह चलते चलते एक सामूहिक फोटो भी लिया गया। ज़ल्द ही पुन: मिल बैठने के निश्चय के साथ हमने भी रवानगी ली।
आप कब आ रहे हैं, भिलाई?
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भिलाई में फिर जमी ब्लॉगरों की महफिल: एक नए ब्लॉगर के साथ” पर 16 टिप्पणियाँ

  1. अच्छी रही आपकी चर्चा । हम भी मिलने के इच्छुक हैं आपसे, कहिए कब मिल रहें हैं।

  2. @ शरद जी एक अच्छा कैमरा खरीदने की चाहत कर बैठे। विभिन्न जानकारियाँ दे कर बालकृष्ण जी ने उनकी चाह्त को पंख लगा दिए। किसी बात पर दोनों के बीच जो नोक-झोंक हुई वह देखते ही बनती थी।

    शरद जी मामला आगे बढा की नहीं-हा हा हा
    एक यादगार मुलाकात
    पावला जी आपका आभार-चौदह चाँद लगाने के लिए

  3. फोटो में आप लोगो की ख़ुशी जाहिर हो रही है

  4. पाबला जी,
    ए गल ठीक नहीं ए…आप वक्त वक्त पर चार यार मिलकर समां गुलजार करते रहते हैं और हम मीलों दूर बैठे जलते-भुनते कुड़-कुड़ करते रहते हैं…फिलहाल तो आपके दिल्ली आने का इंतज़ार है…

    हां, एक बात और राज भाटिया जी के ब्लॉग पर पंगे वाली पोस्ट में मेरी एक टिप्पणी आपके जवाब का इंतज़ार कर रही है…

    जय हिंद…

  5. पावला जी सहमत हूँ,खुशदीप सहगल से आपका दिल्ली आने का इन्तजार हमें भी है ।

  6. पाब्ला जी, आपका विवरण देने का तरीका बडा ही रोचक है, आपकी इस पोस्ट के बाद तो शरद को वही कैमरा खरीदना पड़ेगा, कीमत…. हा..हा..हा..

  7. फोटो देख कर ही अभिभूत हूँ। दुबारा भिलाई आने की तमन्ना है। पर कब्बी इत्थे कोटा बिच भी आओ यारां!

  8. @देख भाई अय्यर .. ये ललित जी और पाबला जी बहुत सीनियर हैं इनके चक्कर में नहीं आना ये ऐसे ही चाहत को पंख लगवाते हैं ताकि आप इच्छाओं के आसमान मे उड़ते रहो..हाँलाकि फिर आपकी इच्छाओं को पूर्ण करने मे मदद भी करते हैं । गनीमत पाबला जी ने वो इस वार्तालाप के दौरान खींचे गये मेरी मुखमुद्रा के सैड वर्ज़न का फोटो नही लगाया लेकिन हो सकता है आगे लगाये क्योंकि उस दिन कह रहे थे ..पूरी एक पोस्ट का मैटर है भाई ..
    @बहरहाल पाबला जी .. आपको बहुत बहुत धन्यवाद । आपकी दिल्ली यात्रा सफल हो और आप हम सभी छत्तीसगढ के ब्लॉगर्स के प्रतिनिधि के रूप मे हमारी भावनायें दिल्ली के ब्लॉगर्स तक पहुंचाने मे सफल हो यह कामना ।

  9. हम कब आयेंगे भिलाई ये तो नहीं जानतेलेकिन उधर से गुजरना हुआ तो फिर आपके यहाँ ही रुकना होगा 🙂

  10. वहां की मंडली जमा ली न …अब फ़ारिग होईये…जल्दी से ..हम दरी बिछा के बैठे हैं कबे से ..

  11. अगली भारत यात्रा में वहाँ न आये तो लौटेंगे नहीं…यह तय जानिये. इतना लुभवा दिये हैं. 🙂

  12. भिलाई से मिलाई की हमको भी तमन्‍ना है।

  13. पाबला साहब…..देख कर ही लग रहा है आपलोगों ने बहुत अच्छा समय बिताया…
    बधाई…

  14. अय्यर हां हम सभी उसे अय्यर ही कह्ते आयें है,इक बेहद ईमानदार और अपने सिद्धांतो का पक्का इंसानो की दुर्लभ और लुप्तप्रायः प्रजाति का जीव है।उसने तक़ जो भी किया पूरी मेहनत और लगने से किया,उसके ब्लाग जगत मे आने से निश्चित ही ब्लाग परिवार समृद्ध ही होगा।हम सैद्धांतिक़ रुप से कभी एक दुसरे से सहमत नही होते थे।खुलकर बहस भी करते थे,वो बेचारा हमेशा अपने सिद्धांतो पर टिका रहता और हम लोग सिर्फ़ जीत का सिद्धांत समझते थे।बहुत खुशी हुई अय्यर को फ़िर से अपने साथ देखकर्।पाब्ला जी अब उसके और साथियों रंगकर्मियों को भी ब्लाग जगत मे लाने की ज़िम्मेदारी आपकी।अय्यर का बहुत-बहुत स्वागत और उसका ब्लाग बनाने के लिये शरद भाई का आभार्।वैसे मुझे ये मौका चूकने का अफ़्सोस रहेगा।ललित ने मुझसे भिलाई चलने के लिये कहा ज़रूर था पर मुझे पता नही था कि अय्यर आयेगा और यंहा भी कुछ लफ़ड़े ज्यादा ही थे उस दिन्।खैर ज़ल्द ही आता हूं।

  15. बहुत बढ़िया ………………जरूर आयेगे भिलाई !
    वैसे उस दिन आपसे बात कर बहुत ख़ुशी हुयी और जल्द ही मिलने की इच्छा भी है देखिये कब मिलने होता है ?

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