भिलाई में हुई ब्लॉगर चिन्तन बैठक के आरंभिक दो निर्णयों की घोषणा

आज से ठीक एक सप्ताह पहले, स्थानीय हिन्दी ब्लॉगरों की एक आकस्मिक बैठक भिलाई-दुर्ग में हुई थी, जिसे बाद में चिंतन बैठक का नाम दिया गया। पूर्वनियोजित बैठक न होने के कारण कई ब्लॉगरों को सूचना नहीं मिल पाई थी। मैराथन बैठक कही जा सकने वाली इस बैठक के दौरान, कई मह्त्वपूर्ण सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं। जिनमें से एक का संकेत राजकुमार ग्वालानी अपनी पोस्ट में दे चुके हैं। लिए गए निर्णयों पर बैठक में शामिल न हो पाने वाले, ज्ञात सक्रिय ब्लॉगर साथियों की भी सहमति ले ली गई है।
पहला महत्वपूर्ण निर्णय है, छत्तीसगढ़ के हिन्दी ब्लॉगरों की एसोसिएशन बनाए जाने का। इस संबंध में की जाने वाली वैधानिक प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। इस संस्था के बैनर तले सदस्यों की हितों की रक्षा व सहयोग के अलावा,

इंटरनेट व संचार सूचना माध्‍यमों में:

  • हिन्‍दी एवं छत्‍तीसगढ़ी के उन्‍नयन हेतु लेखन को प्रोत्‍साहन,
  • क्षेत्रीय साहित्‍य, संस्‍कृति व परंपराओं के संरक्षण व संवर्धन हेतु कार्य,
  • हिन्‍दी के प्रचार-प्रसार हेतु कार्य,
  • शिक्षण-प्रशिक्षण हेतु कार्य,
  • कम्‍प्‍यूटर प्रोग्रामों व वेब साईट्स आदि का निर्माण,
  • अन्‍य माध्‍यमों सहित जन शिक्षण के द्वारा सामाजिक विकास हेतु कार्य,
  • शासन की हिन्दी प्रोत्साहन योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना,
  • हिन्‍दी भाषा एवं छत्‍तीसगढ़ी भाषा के उन्‍नयन के लिए सेमीनार, वर्कशाप आदि प्रचार-प्रसार माध्‍यमों का निरंतर आयोजन
शामिल किए जाने की योजना है।
इस छत्तीसगढ़ हिन्दी ब्लॉगर एसोसिएशन के लिए सुझाव , अपेक्षायें, प्रतिक्रियायें आदि का cghbar@gmail.com पर स्वागत है।
दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय, प्रारम्भिक तौर पर देवनागरी लिपि में लिखे गए ब्लॉग्स की चर्चा का वेबसाईट आधारित मंच बनाया जाना था। जिसमें सदस्य चर्चाकारों का मूलत: मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से संबंधित होना, प्राथमिक तौर पर, बैठक में उपस्थित ब्लॉगरों द्वारा स्वीकार किया गया। इस चर्चा मंच को आकार दिया जाना प्रारम्भ हो गया है। एक डोमेन www.chitthacharcha.com का पंजीयन करवा कर, इस पर कार्य शुरू किया जा चुका है, जिसके मकर संक्रांति (14 जनवरी 2010) तक पूर्ण होने की संभावना है। तत्संबंध में आप अपने सुझाव , अपेक्षायें, प्रतिक्रियायें आदि suggest@chitthacharcha.com या chitthacharcha@gmail.com पर भेज सकते हैं। कालांतर में इस चिट्ठाचर्चा वेबसाईट पर अन्य भारतीय भाषायों को भी स्थान दिया जाएगा।
इस चर्चा मंच की दो विशिष्ठ बातें भी बैठक में सैद्धांतिक रूप से तय हुईं कि इसमें, हिन्दी ब्लॉगिंग से जुड़े चर्चाकारों के साथ-साथ समाज के अन्य क्षेत्रों से, इंटरनेट से परिचित ऐसे व्यक्ति भी अपना अभिमत दे पाएँ, जो भले ही हिन्दी ब्लॉग लेखन न करते हों, लेकिन नज़र जरूर रखते हों हिन्दी ब्लॉगों पर। ऐसे व्यक्तियों के दृटिकोण से भी हिन्दी ब्लॉग्स को देखा जाना एक स्वस्थ परम्परा होगी। इसी कड़ी में, चर्चाकारों को, अगली किसी बैठक में तय होने वाले निर्दिष्ट बिन्दुओं के मानदंड पर, समानुपाती मानदेय दिए जाने के विचार को भी सहर्ष सहमति दी गई।
सम्प्रति, इन दो महत्वपूर्ण निर्णयों का, मूर्त रूप लिए जाने की प्

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भिलाई में हुई ब्लॉगर चिन्तन बैठक के आरंभिक दो निर्णयों की घोषणा” पर 53 टिप्पणियाँ

  1. बधाईयां जी बधाईयां, एक सार्थक और आवश्यक कदम है, और इसकी आवश्यक्ता भी एक अरसे से महसूस की जा रही थी। एक रचनात्मक कदम की ओर अग्रसर है छत्तिसगढ़ के ब्लागर, घोषणा के लिए आभार

  2. उस चिन्तन बैठक में इतनी महत्वपूर्ण बातें हुईं, और उनमें से कई अस्तित्व में भी आने लगीं तो निश्चय ही यह उस बैठक की सफलता है !

    शुभकामनायें ।

  3. हिंदी ब्लोग्गिंग के भविष्य को उज्ज्वल बनाने और बनाए रखने के लिए जिस सकारात्मक दिशा की जरूरत थी ……उसका आगाज़ आप लोगों ने किया ….ये अपेक्षित था ..इसलिए मुझे दोहरी खुशी हुई…..॥ शुभकामना तो दूंगा ही …साथ ही अपने साथ साथ सभी मित्र ब्लोग्गर्स से यही आग्रह करूंगा कि….ऐसे प्रयासों को ही आत्मसात करें …और आगे बढें ..इसी से हमारी हिंदी ब्लोग्गिंग को भी विस्तार मिलेगा ॥
    अपने क्षेत्र विशेष के लिए आप ;लोगों द्वारा किया जा रहा प्रयास तो ….आप सबका कर्तव्य है ही ..उसे आप निभा रहे हैं ये अच्छी बात है ..॥
    शुभकामनाएं ….

  4. लगता है तलंगाना की हवा अब ब्लागरी में भी लग गई है 🙂

    शुभकामनाएं स्वीकारें।

  5. सभी निर्णय स्वागत योग्य हैं। इस को एक सार्थक सामूहिक पहल कहा जा सकता है। इन में सब से मह्त्वपूर्ण निर्णय छत्तीसगढ़ हिन्दी ब्लागर एसोसिएशन बनाना है।

  6. hamu maan aap man ke sang hawan ga bade bhai jai johar le le bane kaaam karat hawa hamu man la jhan bhulahu

    chor-bazar.blogspot.com

    chotta kanhi ke – Sudhir Pandey

  7. ये हुई न बात..
    गुटबाजी के बिना बात ही नहीं बन रही थी 🙂

  8. बढ़ते चिट्ठों की संख्या देख इस प्रकार की सार्थक पहल का स्वागत है. इस माध्यम से अनेक सामूहिक प्रयासों को एक मंच एवं दिशा मिलेगी.

    हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार के लिए यह एक प्रभावी पहल है.

    स्वागत है एवं अनेक शुभकामनाएँ.

  9. यह एक सार्थक और आवश्यक कदम था जो आप लोगों ने ऊठाया. आज इस तरह के निष्पक्ष मंचों की बहुत आवश्यकता है तभी एक सार्थक और उचित माहोल ब्लागर भाई बहनों को मिल सकेगा. और वो बिना किसी के दवाब मे आये अपनी बात कह सकेंगे.

    आपको बहुत बधाई और शुभकामनाएं.

    रामराम.

  10. हिन्दी चिट्ठाकारी के उज्जवल भविष्य हेतु इस प्रकार के सार्थक प्रयासों की नितान्त आवश्यकता है…..आप लोगों नें ये बीडा उठाया है तो इसके लिए आप सब लोग बधाई के पात्र है! शुभकामनाएँ!!!!!

  11. हिन्दी ब्लॉगिंग के उज्जवल भविष्य के लिए किए जा रहे आपके प्रयास सराहनीय हैँ

  12. रपट बढ़िया रही।
    बहुत कुछ सीखने को मिला!

  13. वाह जी वाह बल्ले बल्ले !!! जय हो ! दे दना दन!
    पाबला जी बहुत ही सुन्दर प्रयास ….नही काम जी !!
    आज तीन महीने के अन्तराल मे पहली बार सुना हु कि छोटे सम्मेलन मे बडा निर्णय !!! नही तो बडें सम्मेलन मे तो छोटी बतों का भी जनाजा निकाल दिया जाता है…..गुरुवर शानदार है ……
    ग्वालानी जी आपसे एक सवाल है जी पुछू की नही …चलो पुछ ही लेता हु ….
    क्या यह सीरियल ब्लास्ट के अन्तर्गत आता है हा जी 🙂
    मै आपके शुभचिन्तक मे से हु मेरी बात को अन्यथा ना ले अगर आज कुछ गलत भी लिखुगा तो बस इसिलिये क्युकि बहुत खुश हु जी ये हुई ना मौलिकता …
    जय हो!!!
    दे दना दन!!

  14. @ cmpershad said…
    लगता है तेलंगाना की हवा अब ब्लागरी में भी लग गई है 🙂

    आदरणीय प्रसाद जी हमारी मंशा कोई तेलंगाना जैसे किसी अलगाववाद या गुटबाजी या फिर खेमेबाजी की नहीं है, यह एक सृजनात्‍मक प्रयास है.

    @ Sudhir Pandey

    सुधीर पाण्‍डेय जी आप हमारे साथ हैं, आपको हम नहीं भूलेंगें.

    @ काजल कुमार Kajal Kumar said…
    ये हुई न बात.. गुटबाजी के बिना बात ही नहीं बन रही थी 🙂

    काजल भाई जहां तक मैं समझता हूं इसमें कोई गुटबाजी नहीं है.

    इसके अतिरिक्‍त आप सबने छत्‍तीसगढ ब्‍लागर्स एसोसियेशन का उत्‍साह बढाया इसके लिए बहुत बहुत आभार.

  15. सन्जीव जी क्या हम आपसे अलग है श्री मान जी :)..
    युवा टिप्पणी कर्ता मै हु क्या ?:)

  16. पंकज भाई आप हमसे कतई अलग नहीं हैं, आपने हम पर भरोसा रखा है यह बडी बात है. आपने अपनी टिप्‍पणी में मौलिकता संबंधी सार्थक बातें की है.

  17. काजल कुमार का धन्यवाद किया जाना चाहिए छत्तीसगढ़ के बलोगरों की ओर से। आखिर उन्होने माना है कि बात बन गई है। अब भले ही वे नाराजगी से बचने के लिये गुटबाजी शब्द का उपयोग कर रहे हैं।

  18. बहुत ही बढ़िया निर्णय। हमारी शुभकामनाएं स्वीकार करें। इस वैबसाइट के पूरी होने का इंतजार हैं। प्रावधान होता तो हम अभी से फ़ोलोअर की सू्ची में अपना नाम दर्ज करवा देते।

  19. सबसे पहले तो शुभकामानाऍ स्वीकार करे। जिस तरह हिन्दी चिठठो की सख्या का गुणाक बढ रहा है उसमे आप सभी का यह प्रयास सार्थक प्रतित हो रहा है। निष्पक्ष मन्च की आवश्यकता महसुस करी जा रही थी। एवम हिन्दी चिठ्ठो का समय समय प‍र अवलोकन चिठठा-चर्चा के माध्यम से सही ढग से कर सकते है। सबको बराबर का अवसर मिले निष्पक्ष चर्चा की अपेक्षा है पुर्वत सरकारो (चर्चाओ) ने भेदभाव निति को अपनाया था इसलिए नतिजे हमारे सामने है।

    हार्दीक मगलकामनाऐ।

    महावीर बी सेमलानी "भारती"

  20. भाई यह ठेंगा नहीं है यह एक अंतर्रराष्ट्रीय संकेत है जिसका अर्थ सफलता से है ,एक दूसरा संकेत भी एक दूसरे लालटेन वाले चित्र मे है जिसके लिये दुश्यंत जी ने कहा है " एक चिंगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों इस दिये में तेल से भीगी हुई बाती तो है ।" आप सभी ब्लॉगर दोस्तों के लिये है यह पैगाम इसे सकारात्मक रूप से ही लें ।

  21. पंकज जी, यह सीरियल ब्लास्ट का ही धमाका है, लेकिन सुखद धमाका जिससे ब्लाग बिरादरी को बहुत फायदा होगा।

  22. सभी निर्णय महत्वपूर्ण एवं सराहनीय हैं!

    शुभकामनाएँ!!

  23. मै जानना चाहता हु कि क्या मै भी इसका हिस्सा हु या अभी इन्तेजार करना होगा

  24. @ नवीन प्रकाश

    नि:संदेह आप भी इसका हिस्सा हैं।

    साथ ही साथ छतीसगढ़ से जुड़ा हर हिन्दी ब्लॉगर अपने आप को इसका हिस्सा माने

    बी एस पाबला

  25. बहुत बहुत बधाई इस पहल पर -छत्तीसगढ़ ब्लॉगर असोसिएशन एक सांस्कृतिक अवधारणा भी बने यह शुभकामना है !

  26. मुझे लगता है कि यहाँ एक विस्तृत टिपण्णी की भी जरूरत है ….
    चर्चा मंच जितने ज्यादा हों उसमे मुझे कोई बुराई नहीं दिखती लेकिन ब्लॉगर संगठन के प्रस्तावित गठन से मेरी कतई सहमति नहीं हो सकती !

    अगर मैं भविष्य में झाँक कर देखने की मानसिक हैसियत रखने का थोड़ा भी दावा करूँ तो इसका लम्बे समय में दुष्प्रभाव ही नजर आयेगा |

    ……भले ही आप कितने ही रचनात्मक क्यों ना हों?
    हर संगठन का गठन अंततः नकारात्मकता ही उभारता नजर आता है ………. इतिहास इसका गवाह है !!

    फिर भी शुभकामनाएं …..

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    फिर भी शुभकामनाएं …..

  34. दो दिन बाद आज वापस रायपुर लौट कर ब्लागजगत मे आया तो पता चल रहा है इस ब्लास्ट का।मेरी भी शुभकामनायें।

  35. एक सकर्मक प्रयास .

    ………लेकिन भाई शरद कोकास क्या लालू पार्टी वाले हैं 🙂 लालटेन से जुड़े 🙂

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