भैंसा भोजन, खिलखिलाती युवती, पीछा करते युवक और आधी रात का काठमांडू

छत्तीसगढ़ के भिलाई से सड़क मार्ग द्वारा भारत नेपाल सीमा पार कर काठमांडू पहुँचने की रोमांचक दास्ताँ

और इस तरह छत्तीसगढ़ से सड़क मार्ग द्वारा हम तीन हिंदी ब्लॉगर्स, काठमांडू सफ़र के पहले की दहशत से उबर कर, दही की तलाश करते, नागालैंड वालों द्वारा कार खींचे जाने के बाद 12 सितंबर की रात पहुँच गए थे गोरखपुर. अब अगली मंजिल थी भारत – नेपाल सीमा.

हालांकि हमें परिकल्पना सम्मान 2012 द्वारा 13 सितंबर को रखे गए सम्मान कार्यक्रम को देखते हुए अब तक नेपाल की सीमा में होना चाहिए था, लेकिन कई बार परिस्थितियाँ खुद के हाथों में नहीं रहती. सडकों की दुर्दशा से जूझते हम अपने ही तय किये गए समय का पालन नहीं कर पा रहे.

गोरखपुर पहुँच कर होटल के कमरे में हमें भोजन करते, गप्प मारते, टीवी पर खबरें देखते आधी रात हो गई. सुबह 4 बजे निकल पड़ने की ताकीद करते मैं कब नींद के आगोश में पहुँच गया, पता ही नहीं चला. सुबह जब मेरी नींद खुली तो ललित शर्मा जी, गिरीश पंकज जी घोड़े बेच कर सोते नज़र आये. मोबाईल की घड़ी पर नज़र डाली समय दिखा 07:02

बिस्तर से पैर नीचे रखते ही भौचंक्का रह गया मैं. रात के उन चंद घंटों में ही होटल में कमरे के फर्श पर ना जाने कहाँ से पानी आ गया था. जिसके कारण फर्श पर ही रखा गिरीश जी का बैग तर-बतर हो गया और उसमें रखे लगभग सारे कपड़ों से पानी निचोड़ने की नौबत आ गई. इधर, टीवी ऑन कर उसकी आवाज़ इतनी उंची की मैंने कि दोनों की नींद खुल जाए.

समय का पता चलते ही मुझ सरीखे उनकी भी बोलती बंद हो गई. कोई भी देर हो जाने की बात तक नहीं कर रहा था. लेकिन भीतर ही भीतर कोशिश थी कि ज़ल्द ही रवानगी ले ली जाए. नतीजा ये हुया कि एक घंटे के भीतर ही हम, कुल 2650 रूपयों का बिल भुगतान कर, होटल से बाहर 8 बजे अपनी मारूति ईको में बैठ चुके थे.

काठमांडू आने जाने के लिए हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा वाले रोचक संस्मरणों का संक्षिप्त विवरण यहाँ क्लिक कर देखें »


गोरखपुर से बाहर निकलते राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर आ कर, रोबोट कन्या नेवीगेटर को भारत – नेपाल सीमा के सुनौली की मंजिल बताई और श्री कृष्ण हॉस्पिटल के बगल वाले पेट्रोल पंप पर, नेपाल के पहले, भारत में आखिरी बार मैंने पेट्रोल टैक पूरा भरवा लिया 2500 रूपयों में. इससे पहले भी टुकड़ों टुकड़ों में पेट्रोल डलवा चुका था 4500 रूपयों का. गैस तो छत्तीसगढ़ की सीमा में ही ख़तम हो गई थी और ‘स्पीड’ पेट्रोल की तलाश असफल ही रही थी. अब मिल रहा था सादा, 10% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल.

‘स्पीड’ की तलाश में एक दिलचस्प बात दिखी. हमें मुंह मोड़ते देख हर पेट्रोल पंप वाला दुहाई देता था कि उसके पंप का पेट्रोल बहुत बढ़िया है वो आगे वाला या पड़ोस वाला तो चोर है उसके पास मत डलवाना पेट्रोल. मैं एक क्षण के लिए इस उम्मीद में ठिठकता कि वो बंदा पुकार कर कहे -चलो दो रुपये कम कर दूंगा लीटर में 😀

राष्ट्रीय राजमार्ग 29, इस वक्त तो एक बढ़िया चौड़ी सडक है. शायद भारत में प्रवेश करती राह होने के नाते व्यवस्थित रखी गई होगी. अभी हमें चले एक घंटा ही हुया था कि भूख लग आई. कैंपियरगंज के कुंजलगढ़ में बढ़िया चाय बनवा कर ललित जी, गिरीश जी ने अपनी अपनी पसंद का भरपेट नाश्ता किया. मैंने सतर्कता ही बरती क्योंकि ड्राइव करते समय भरपेट नहीं खाता, भले ही बार बार खाना पड़े रूक कर.

घुमावदार सड़कों पर मज़े से 80 – 90 की रफ्तार से गाड़ी चलाते हम सुबह साढ़े दस बजे पहुँच चुके थे नौतनवा. वही नौतनवा, जहाँ के लिए मेरे शहर से सीधे, रेलगाड़ी चलती है. यहाँ से बाहर निकलते ही एक सूचना पटल दिखा -सुनौली 10 किलोमीटर! लेकिन हमारी रोबोट कन्या नेवीगेटर ले गई उससे उलटी सड़क पर. ललित जी ने उम्मीद जताई कि वो शहर के अन्दर जाता होगा रास्ता, ये बाय-पास होगा. लेकिन जब बेहद संकरी सड़क गांवों के बीच से गुजरी तो महसूस हुया ये हमें किसी और राह पर ले आई है.

गनीमत रही कि दूरी सिर्फ 4 किलोमीटर बताई जा रही थी और दूर ही निगाहों के सामने एक बड़ा सा आबादी क्षेत्र दिख रहा था. मौक़ा देख हमने एक चित्र यहाँ भी ले लिया.

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भारत -नेपाल सीमा पर सुनौली के पास

आखिरकार धूल उड़ाती सड़क पर जब सामने दिखा -भारत सीमा समाप्त, तो मैंने उस बेहद गहमागहमी वाली सड़क पर एक चेक पोस्ट का बोर्ड लगी इमारत के सामने 11:10 पर गाड़ी रोकी.

उधर, ललित जी उतर कर पूछताछ करने गए इधर, अपन ने दो-चार फोटो ले ली.

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ललित जी खबर ले कर आये कि ये तो ट्रक्स वगैरह के लिए भारत सरकार की चौकी है. हम लोगों को सीमा पार कर नेपाल सरकार द्वारा जारी कागजात लेने होंगे अपनी मारूति ईको के लिए. मानव तो पैदल ही जा सकते हैं नेपाल सीमा में!

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मैंने धीरे धीरे गाड़ी आगे बढाई और नेपाल सीमा पर प्रवेश करते ही बाईं ओर दिख गया भैरहवा भन्सार कार्यालय, भन्सार कार्यालय का मतलब कस्टम कार्यालय.

ठीक उसकी उलटी तरफ है सड़क पार है वाहनों को खडा करने का स्थान . मैंने वहां गाड़ी खडी की. समय हो गया था 11:20. अभी उतर कर ढंग से माहौल का जायजा भी ना ले पाया था कि एक युवक पास आ कर बोला कि वह सारी कागजी कार्यवाही करवा देगा मिनटों में और मेहनतनामा होगा भारतीय मुद्रा का 100 रूपया

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नेपाल सीमा स्थित भैरहवा कस्टम कार्यालय

खर्च कितना होगा? तो बताया गया कि नेपाली 500 रूपया देने पर, कार के लिए एक दिन का परमिट बनता है और अस्थाई नंबर दिया जाता है नेपाल का. स्वयं निर्धारित दिनों से एक दिन भी अधिक रुके नेपाल में तो दंड देना पडेगा नेपाली 1100 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से. हम तीनों ने आपस में तय किया कि लौटना तो 15 सितंबर को है फिर भी 16 सितंबर तक का परमिट बनवा लिया जाए.

उस युवक को कागजी कार्यवाही के लिए चाहिए थे केवल गाड़ी का पंजीयन प्रमाणपत्र और मेरा ड्राइविंग लाइसेंस. शक की कोई गुंजाइश नहीं दिखी मुझे. मैंने उसे 4 दिन के हिसाब से भारतीय मुद्रा में 1250 रूपये दिए और वह दौड़ गया भन्सार कार्यालय की ओर

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भैरहवा कस्टम कार्यालय के पास लगा सूचना पटल

जैसा कि जानकारी दी गई, उसके अनुसार नेपाल में, भारतीय मुद्रा वाले 500 व 1000 के नोट वैधानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है. विनिमय के अनुसार भारत का 100 रूपया, नेपाली मुद्रा में 160 की ताकत रखता है. मतलब, यदि आपको कोई कीमत नेपाली मुद्रा में बताई जाए तो उसे 1.6 से भाग दिए जाने पर भारतीय मूल्य का अंदाज़ लगाया जा सकता है. हालांकि, कानूनी रूप से प्रतिबंधित किये जाने के बावजूद भी, अधिकतर स्थानों पर भारतीय 500, 1000 के नोट स्वीकारे जाते हैं. नेपाल में आम तौर पर भारतीय नुद्रा को IC और नेपाली मुद्रा को NC कह पुकारा जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय रोमिंग शुरू हो चुकी थी मेरे एयरटेल नंबर पर. रिलायंस वाला तो खामोश हो गया था और बीएसएनएल बेचारा पोस्टपेड था उसे कोई उम्मीद भी ना थी. एयरटेल के संदेश थे कि भारत को एक भी कॉल की गई या वहां से आई तो 15 रूपये काटेंगे बैलेंस से, एसएमएस किया तो लगेंगे 25 रूपये. और यही दर रहेगी स्थानीय नेपाल कॉल या संदेश की.

तब तक एक स्पाईस नेपाल का संदेश भी आ धमका एयरटेल पर अपनी रोमिंग दरें ले कर. आने वाली स्थानीय कॉल 100 रूपये प्रति मिनट, 50 रूपये जाने वाली कॉल के, 25 रूपये एसएमएस के! और अगर भारत को कॉल किया तो 150 रूपये प्रति मिनट!!

हम सब सोच में पड़ गए कि ऐसा कैसे चलेगा? घर वालों से संपर्क कैसे बना रहेगा. मुझे कोई विशेष चिंता नहीं थी. मेरा है ही कौन परिवार में छोटा बड़ा जो घड़ी घड़ी पूछता रहे -कहाँ हो क्या कर रहे 🙂

फिर भी समय का कोई ठिकाना नहीं, कब – कहाँ – कैसा मौक़ा पड़ जाए कोई कह नहीं सकता. इसी विचार से पूछताछ करने पर बताया गया कि भारतीय नागरिकों द्वारा पहचान-पत्र दिखाए जाने पर मोबाईल सिम मिल सकता है. पास ही की दीवार के पार जाकर कोशिश की तो अगले ने केवल मतदाता पहचान-पत्र के आधार पर ही सिम देने की बात कही. मैं लौट आया. लौटते हुए एक हाथ से  भारतीय 2000 रूपये देकर दूसरे हाथ से नेपाली 3200 रूपये ले आया. कोई लिखा-पढ़ी नहीं, कोई पूछताछ नहीं..

फिर हमारी बातचीत सुन, उसी युवक ने कहा कि वह बिना किसी पहचान पत्र के सिम दिलवा सकता है. खर्च होगा नेपाली 350 रूपया. उसमें भी 200 का बैलेंस मिलेगा. नंबर शुरू होगा तुरंत. स्थानीय (नेपाल) कॉल होगी 2 नेपाली रूपये की, भारत को कॉल होगी 3 नेपाली रूपये की, टैक्स अलग! लौटते हुए सिम वापस किया तो सौ रूपये वापस.

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bspabla-nepal-border-paper भारत – नेपाल सीमा पार करने के बाद  नेपाली अधिकारियों द्वारा बनाए जाते हैं वाहन के कागजात और नंबर प्लेट 2013-09-15 13.57.50

तब तक हमारे कस्टम वाले कागज़ात आ चुके थे और नंबर प्लेट भी. एक नज़र डाली तो उलझन में पड़ गया. तारीखें कुछ समझ ही नहीं आ रही थीं. तब हमें बताया गया कि यहाँ, नेपाल में अंग्रेजी तारीखें नहीं चलती, हिंदू वर्ष चलता है.

संतुष्ट हो, मैंने झट से 200 भारतीय रूपये थमाए और वह दस मिनट में सिम ले आया. अपने डबल सिम वाले मोबाईल में वह Ncell कंपनी का सिम डाल, पुणे में बिटिया को कॉल किया, कुछ सेकेण्ड बात कर अपने नेपाल नंबर की जानकारी दी. अरे ! मेरा नेपाल नंबर काम कर रहा था 😀

खुली धूप में तप चुकी मारूती ईको को जब मैंने स्टार्ट किया तो दोपहर के सवा बारह बज चुके थे. काठमांडू में परिकल्पना सम्मान के आयोजकों को उनके नेपाली फोन नंबर पर सूचना दी कि अभी भैरहवा से चल पड़े हैं, तो हमें बता दिया गया -रात नौ बजे तक पहुंचोगे फिर. कार्यक्रम तो शुरू होने वाला है दोपहर दो बजे.

अंतिम कागजी कार्यवाही के लिए हमें सिद्धार्थ मार्ग पर होते हुए चार किलोमीटर की दूरी पर एक कस्टम कार्यालय से सील ठप्पा लगवाना था, जिसके लिए उस मध्यस्थ युवक का साथी हमारे साथ था. अभी हम पार्किंग से सड़क पर पहुंचे ही थे कि एक अजीब सी दाढ़ी वाले व्यक्ति ने हाथ दे हमें रोका. साथ बैठे लडके ने जानकारी दी कि चेकिंग होगी. मैंने कागजात दिखाए उसने सारा सामान देखा. फिर इशारा किया जाने का.

कस्टम कार्यालय से उस लड़के ने सारी औपचारिकता पूरी करवा कागजात हमें लौटाए. वापस काठमांडू जाने के लिए हम पीछे मुड़े, करीब आधा किलोमीटर बाद उस लड़के को उतार हम चल दिए परासी रोड पर.

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भैराहवा से काठमांडू

ये तो हुई भारत से आ कर नेपाल में प्रवेश करने के बाद वाले हालातों की.

संस्मरण कुछ ज़्यादा ही खिंच रहा. इसलिए अब, इसके दूसरे हिस्से में  काठमांडू की ओर बढ़ने तथा पहुँचने वाले वृतांत के लिए यहाँ क्लिक करें

भैंसा भोजन, खिलखिलाती युवती, पीछा करते युवक और आधी रात का काठमांडू
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7 दिनों में, भिलाई से सड़क मार्ग द्वारा
काठमांडू आने जाने के लिए हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा वाले प्रतिदिन के रोचक संस्मरण 8 हिस्सों में में लिखे गए हैं. जिन्हें रुचि अनुसार पढ़ा जा सकता है इन कड़ियों पर क्लिक कर

  1. काठमांडू सफ़र के पहले की दहशत
  2. काठमांडू की ओर दही की तलाश में तीन तिलंगे
  3. काठमांडू जाती कार को नागालैंड वाले खींच ले गए
  4. भैंसा भोजन, खिलखिलाती युवती, पीछा करते युवक और आधी रात का काठमांडू
  5. नेपाल की मुर्गी, उसकी मुस्कान, मेरी नाराज़गी और लाखों का मुआवजा
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