महाप्रयोग में प्रयुक्त, ब्रॉडबैंड से 10 हजार गुणा तेज कम्प्यूटर प्रणाली में हैकरों की सेंध

ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य को खोलने के लिए किए जा रहे महा प्रयोग को विफल करने की एक साजिश नाकाम कर दी गई है। दरअसल इस प्रयोग के चालू किए जाने के दिन इससे पैदा होने वाले डेटा को इकट्ठा करने के लिए कल की दुनिया की 10,000 गुणा तेज कम्प्यूटर प्रणाली ‘ ग्रिड को भी सक्रिय किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हैकरों ने लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) के कंप्यूटरों में सेंध लगाकर उनको ठप्प करने की कोशिश की। महाप्रलय की आशंका के चलते इन हैकरों ने एलएचसी की वेबसाइट को हैक किया। महाप्रयोग को अंजाम दे रही यूरोपियन आर्गेनाइजेशन ड्डार न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हैकिंग के मामले की जांच की जा रही है। ‘जीएसटी’ या ग्रीक सिक्योरिटी टीम नाम के हैकरों के एक समूह ने इसकी जिम्मेदारी ली है। इस समूह ने एलएचसी की वेबसाइट को प्रभावित किया। यह वेबसाईट इस पोस्ट के लिखे जाते तक जनता के लिए अनुपलब्ध है।

वैज्ञानिकों ने इसका पता चलते ही इसे अपने कंप्यूटरों के नेटवर्क से असंबद्ध कर दिया। हैकरों का चेतावनी भरा संदेश पहले कंप्यूटर तक पहुंचा था। संदेश में लिखा था, ‘हम 2600 हैं, हमसे ना टकराएं।’ जब वैज्ञानिक इस प्रयोग को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, उससे पहले ही हैकरों ने इस वेबसाइट पर कई अनचाही फाईलें लोड कीं। समझा जाता है कि यह हैकर वेबसाइट के संवेदनशील और अहम आंकड़ों और सूचनाओं को बदल देना चाहते थे। इससे परमाणु के अंशों को आपस में टकराकर सृष्टि के सृजन का राज जानने की दुनिया भर के सात हजार वैज्ञानिकों की अब तक की मेहनत पर पानी फिर सकता था। विस्तृत समाचार यहाँ मौजूद है।

सर्न कंपनी ने ग्रिड सिस्टम पर सात साल पहले काम करना शुरू किया था। दरअसल कॉलीडेर एक्सीलिरेटर पर काम करने के दौरान महसूस हुआ कि इससे एक साल में इतना डेटा निकलेगा, जो सीडी को एक-के ऊपर-एक रखे जाने पर 40 मील लंबी कतार लगा सकता है। यानी उस वक्त इस डेटा को संभालने के लिए कोई सिस्टम नहीं था और ऐसे में इस महाप्रयोग को शुरू करने का कोई खास मतलब भी नहीं था, क्योंकि ऐसा करने पर पूरी दुनिया के इंटरनेट सिस्टम में गड़बड़ी पैदा होने की आशंका थी।

इस कम्पयूटर प्रणाली ‘द ग्रिड’ की कुछ और अधिक जानकारी पूर्व प्रकाशित पोस्ट पर देखी जा सकती है।

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