मानव-गाय भ्रूण: क्या हम प्राचीन ग्रंथ पढ़ रहे हैं

वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने यूरोप में एक ऐसे हाइब्रिड भ्रूण को विकसित किया, जिसका एक भाग मनुष्य का और एक भाग पशु का था। ब्रिटेन में न्यूकासल विश्वविद्यालय के एक दल ने क्लोनिंग पर शोध के दौरान इसको विकसित किया। मनुष्य और गाय के डीएनए के मिश्रण से तैयार किया गया यह भ्रूण केवल तीन दिन ही रह सका। प्रमुख शोधकर्ता डा. लीले आर्मस्ट्रांग के मुताबिक मानव भ्रूण कोशिकाओं में से लिए गए डीएनए को गाय के अंडाशय में से लिए गए अंडों में डालकर इस हाइब्रिड भ्रूण को तैयार किया गया।

बीबीसी में आए समाचार के अनुसार, विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. जान बर्न ने संपूर्ण शोध को नैतिक बताते हुए कहा कि इस भ्रूण को किसी सरोगेट मां के अंदर प्रत्यारोपित करने का कोई इरादा नहीं है। इस प्रयोग का मकसद जीन्स के उपयोग के तरीकों का अध्ययन करना है। अत: शोध का प्रारंभिक मकसद सामान्य जानकारी विकसित करना है कि स्टेम कोशिकाएं विकसित करना। यह काम बड़ी सावधानी से किया गया है। यह एक प्रयोगशाला संबंधी प्रक्रिया है और इन भ्रूणों को कभी भी प्रत्यारोपित नहीं किया जाएगा।

ब्रिटिश मीडिया ने प्रो. बर्न के हवाले से बताया कि हालांकि अभी प्रारंभिक तथ्य मिले हैं लेकिन आगे काफी कार्य किया जाना है। अगला चरण 6 दिनों तक रहने वाले भू्रण को विकसित करना है जिससे कि उसमें से स्टेम कोशिकाएं निकाली जा सकें।

भ्रूण संबंधी शोध का यह तथ्य ब्रिटिश सांसदों द्वारा देश में इस तरह के शोधों के भविष्य पर बहस की तैयारी के एक माह बाद आया है। संसद द्वारा इस शोध पर रोक न लगाए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान का नेतृत्व करने वाले लिबरल डेमोक्रेट सांसद डा। इवन हैरिस ने कहा कि यह खबर रोचक और उत्साहित करने वाली है लेकिन जब तक इसको प्रकाशित नहीं किया जाता यह लोगों तक नहीं पहुंचेगी।

उपरोक्त चित्र, मात्र एक चित्रांकन हैयदि किसी को, किसी तरह की असहजता/ असुविधा/ वितृष्णा हो, तो खेद है

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एक टिप्पणी on “मानव-गाय भ्रूण: क्या हम प्राचीन ग्रंथ पढ़ रहे हैं

  1. विष्णु के अवतार ,नरसिंह की याद आ गयी …..

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