कोक के साथ मेन्टोस क्यों चूसा चबाया ना जाए!

मेन्टोस कैंडी मुंह में रखने के आगे पीछे कोक या पेप्सी जैसे ड्रिंक्स क्यों नहीं गटकनी चाहिए?

बात तीन चार वर्ष पहले की ही होगी. पुणे से लौटते हुए रेल के डब्बे में साथ ही के कूपे में अलग-अलग पीढ़ियों वाले दो परिवार रहे होंगे.  कभी अन्ताक्षरी खेलते हो-हल्ला, कभी ताश के पत्तों के साथ ठहाकों से सारा ए.सी. डब्बा गूंजते चला जा रहा था.

चलती रेल में खान-पान की आधिकारिक व्यवस्था संभालने वाले वैसे तो एक नियत समय पर भोजन चाहने वालों की सूची बना ले जाते हैं, लेकिन थोड़ी थोड़ी देर में नाश्ते, पानी, चाय जैसी चीजों के लिए एक चक्कर लगा ही लेते हैं उनके लोग.

जब भी ऐसा कोई फेरी वाला आता उन परिवारों के सदस्य शोर मचाते दसियों तरह के प्रश्न दाग देते. ये दूध ऊँटनी का तो नहीं है? चायपत्ती किस कंपनी की डालते हो? अंडा मुर्गी का ही है ना? ब्रेड कितने दिन पुरानी है? पेप्सी क्यों है कोक कोला क्यों नहीं? चिप्स के पैकेट में कितने चिप्स हैं?

ऐसे ही एक फेरे में जो बंदा आया उसके जिम्मे मुख शुद्धि-अशुद्धि वाली वस्तुएं थीं. सिगरेट, गुटखा, चूरन, सौंफ, चॉकलेट, टॉफी, हाजमोला आदि.

कुछ देर तो उस परिवार के साथ मोल-भाव और लेन-देन होता रहा उसका. लेकिन एकाएक ही तीखी आवाजें आने लग गई -तुमने ये सब रखा है तो उसको रखने में क्या दिक्कत है? अब क्या मैं डब्बे से कूद कर ले आऊँ? कौन है स्साले तुम्हारा मैनेजर, बुलाओ उसको!

मैंने कान उधर कर समझने की कोशिश की कि माज़रा क्या है. कुछ देर बाद शोर से छन कर आये शब्दों को जोड़ कर समझ आया कि उस परिवार में किसी बच्ची को चाहिए था मेंटोस! वही मेंटोस की गोलियां जिसे चूसने के थोड़ी देर बाद मुंह से हवा खींची जाए तो गले तक ठंडा ठंडा लगने लगता है!

ये मेन्टोस उस फेरी वाले के पास ना होना शायद किसी ‘बड़े’ के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था. मेंटोस क्या उसके पास तो हॉल्स भी नहीं था. एक एक कर सब उस फेरी वाले पर पिल पड़े और वो घिघियाये जा रहा था कि हमको आर्डर नहीं है मेंटोस रखने का! और सब पूछ रहे थे ब्बे क्यों नहीं है आर्डर!?

एक दो बार तो मेरा मन किया कि उनको बता दूँ इस मेन्टोस/ हॉल्स को न रखने के आदेश की वजह. लेकिन यह सोच चुप हो गया कि नाहक अपनी शांति और क्यों भंग करूँ उनसे उलझ कर. बाद में इंटरनेट पर लिख देंगे. फिर चाहे जो पढ़े

मेन्टोस हॉल्स

दरअसल ऐसा कई बार हो चुका और चलती रेल में भी दुष्टों ने ऐसा किया जब मेन्टोस के साथ पेप्सी या कोक पी लेने के तुरंत बाद भुक्तभोगी को दिल का दौरा पड़ा या एकाएक पेट फूल गया. तबीयत बिगड़ गई. बेहोश हो गए. कई मामलों में मौत की भी खबर है.

अब कोई अनजाने में ऐसा करे तो दोष किसी को नहीं दिया जा सकता. लेकिन ठगी जैसे अपराधों में इस तरह के मामले आने लगे जिसमें पता लगा कि जानबूझ कर कोई सहयात्री को मेंटोस दे कर पेप्सी/ कोक जैसा पेय दे देता है और फिर बिगड़ी तबीयत का मौक़ा उठा कर महंगे सामानों, धन को ले चंपत हो गया.

व्यवहारिक रूप से इस बात की पुष्टि होते ही भारतीय रेल ने अपनी खानपान व्यवस्था वालों द्वारा मेंटोस या हॉल्स जैसी कैंडी के वितरण पर अघोषित रोक लगा दी.

 

मेन्टोस कोक प्रयोग
मेन्टोस के साथ कोक का सेवन करने का प्रयोग करते व्यक्ति का वीडियो (क्लिक कर देखा जा सकता है)

इंटरनेट पर कई वर्षों से यह बहस छिड़ी हुई है कि इस कोक – मेन्टोस के जोड़ से मानव शरीर को कोई नुक्सान है कि नहीं. मौत हो सकती है कि नहीं.

एक पक्ष का यह कहना है कि बेशक कोक के साथ मेंटोस के सेवन से इंसान के पेट में बुलबुलों के तूफ़ान से विस्फोट जैसा उबाल आता है लेकिन मौत तो नहीं हो सकती. पेट फूल सकता है, दिल पर जोर पड़ सकता है जिसका असर हर मानव पर अलग अलग होगा. कोई निश्चित नतीज़ा नहीं निकाला जाना चाहिए.

दूसरा पक्ष कहता है कि जब कोक में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मेंटोस के घटक मिलते हैं तो सायनाईड उत्पन्न होता है जो बुलबुलों के उफ़ान के साथ मौत भी दे सकता है., पेट तो खैर फूलेगा/ फटेगा ही!

दुनिया में कई लोगों ने जानबूझ कर खतरा मोल ले इस प्रयोग को दोहराया और नुकसानदायक पाया है. इंटरनेट पर बिखरी जितनी भी  जानकारियों मैंने देखीं पढीं, उन सबमें यही चेतावनी है कि जानबूझ कर कभी भी मेन्टोस – कोक का सेवन एक साथ ना करें. घातक हो सकता है’. याद रखने के लिए ख़ास तौर पर मिंट वाली कैंडी और भूरे रंग का सोडा एक साथ कभी नहीं.

यह लिंक देखे जा सकते हैं

http://en.wikipedia.org/wiki/Diet_Coke_and_Mentos_eruption

http://www.discovery.com/tv-shows/mythbusters/mythbusters-database/diet-coke-and-mentos-make-stomach-explode/

http://www.newscientist.com/article/dn14114-science-of-mentosdiet-coke-explosions-explained.html#.VTj3UFJwiVA

यही बातें मैं रेल के उन सहयात्रियों को बताना चाहता था लेकिन झुण्ड के हुडदंग को देखते चुप रह गया.

अब कोई ऐसा करता मिले तो आप बताएँगे उसे यह सब?

कोक के साथ मेन्टोस क्यों चूसा चबाया ना जाए!
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16 comments

  • पाबला जी, वास्तव में आपके ब्लोग में ऐसी जानकारी मिलती है जो हिन्दी के किसी ब्लोगसाइट पर मैंने तो नहीं देखी।

  • अजय says:

    हम तो आपके लिखे को पढ़ा देंगें। आगे पढ़ने वाला समझे।
    टिप्पणीकर्ता अजय ने हाल ही में लिखा है: Women Empowerment or misuse of equality rightsMy Profile

  • रोकना तो पडेगा!
    अब तो आपकी पोस्ट भी पढा सकते हैं!!
    टिप्पणीकर्ता वाणी गीत ने हाल ही में लिखा है: राजस्थान में अक्षय तृतीया ….धर्म और परंपराMy Profile

    • बी एस पाबला says:

      Tounge-Out
      लिस्ट में एक और चीज जुड़ गई ना वाणी जी?

  • shashank says:

    मैं दोनों चीज़े इस्तेमाल करता हूँ अलग-अलग, पर आज आपने जो बताया है, मैंने कभी ऐसा सुना तक नहीं था। धन्यबाद। …

  • Prashant PD says:

    नहीं बताएँगे.. हम भी घर आकर आपके पोस्ट का लिंक शेयर करेंगे, अब वहां बेवकूफ झुंडो से कौन उलझे? 😀
    टिप्पणीकर्ता Prashant PD ने हाल ही में लिखा है: डिस्क ब्रेकMy Profile

  • rajeshwari says:

    मैं आपके लेखन की बहुत बड़ी प्रशंसक हूँ. आपके लेख दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए बहुत सी ज्ञानवर्धन जानकारियां देते हैं.
    आप हमेशा इतना सुन्दर और रोचक ढंग से लेखन का क्रम बनाये रखें, हम ईश्वर से यही दुआ करते हैं.

    • बी एस पाबला says:

      Heart
      शुभकामनाओं हेतु आभार राजेश्वरी जी

  • आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (25-04-2015) को “आदमी को हवस ही खाने लगी” (चर्चा अंक-1956) पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक
    टिप्पणीकर्ता डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने हाल ही में लिखा है: दोहे “जितना चाहूँ भूलना उतनी आती याद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)My Profile

  • Ashish Naithani says:

    इस विषय पर लगातार सुना जा रहा था किन्तु कितना सच है कितना झूठ, कहना व विश्वास करना मुश्किल था. आपकी इस पोस्ट से धुंध छंट गयी. निःसंदेह बेहद खतरनाक है.
    आपका बहुत-बहुत शुक्रिया !! 🙂

    आशीष नैथानी !
    हैदराबाद !!

  • Shiv Kumar Dewangan says:

    बड़े भैय्या पाब्ला जी,
    यह सब जानकारी जो आपने दी है वह वाकई कमाल की है पर यह अपने ज्ञान और बचाव के लिए तो ठीक है, पर अगर इस तरह अगर सफर में, पान ठेलों में, किसी को यह जानकारी अगर दी जाए, तो उसे विश्वास दिलाना असंभव तो नहीं पर कठिन अवश्य है. बिना सबूत के वह आसानी से तो मानेगा ही नहीं, फिर क्यों कोई माथा-पच्ची करे. सीधे सीधे मानता है तो ठीक, वरना वो अपने रस्ते-मैं अपने रस्ते.
    बहरहाल जानकारी के लिए धन्यवाद.

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