तली हुई टिड्डियाँ, रात की रंगीनी और मेक्सिको की सुंदरियाँ

मोटरसाइकिल से दुनिया की सैर का विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए, सलाहें-योजना-तैयारी के बाद भिवंडी के दंगों से होते हुए विश्वमोहिनी पर सवार हो विदेशी धरती के रोमांच के बाद, पिरामिड और वेनिस की नहरों से गुजर, आधी रात का वह अनोखा नज़ारा देखते हुए, विदेशी धरती पर बाईक रैली के पुरस्कार जीत कर, जर्मन युवती के घर रात बिता कर, कनाडा के चांदनी चौक से होते हुए भिलाई के मोटरसाइकिल सवार सुनील थवानी व अनिरूद्ध गुहा चल पड़े अमेरिका से.

6 दिसम्बर 1984 को लारेडो (Laredo) और नेवूआ (Neuva) सीमा से होते हुए दोनों युवा मेक्सिको की ओर जाते हुए 7 दिसम्बर को मॉँटेरी (Monterrey) पहुँचे जहाँ वे मेहमान थे एक स्थानीय ‘ताजमहल रेस्तरां’ की मालकिन सुश्री सारा मेजिया के

भारत के प्रति उसकी दीवानगी देख आश्चर्य ही हो रहा था। वहीं मुलाकात हुई जीवा आनंदम से (जिन्होंने दिल्ली के ‘फुरसत में’ पर इनका इंटरव्यू देखा था)

10 दिसम्बर को मेक्सिको शहर के Teotihuacan पिरामिड और Aztec खंडहर देखे। मेक्सिको यूनिवर्सिटी का भ्रमण किया तो यह जान कर हैरान रह गए कि वहाँ की छात्र संख्या लगभग 3 लाख है! कुछ समय बीता इस्कॉन के सदस्यों के साथ।

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मॉँटेरी-Monterrey में स्थानीय ताजमहल रेस्तरां की मालकिन, सारा के साथ

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मेक्सिको के एक स्थानीय अखबार की खबर

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ISKON के सद्स्यों के साथ

एक दोपहर का भोजन भारतीय राजदूत श्री एन पी जैन के घर हुआ तो रात का भोजन श्री अजीत कुमार, सेकेंड सेक्रेटरी के साथ।

14 दिसम्बर को जब वे दक्षिण अमेरिका जाने के लिए port of Veracruz पहुँचे और मोटरसाइकिल सहित दक्षिण अमेरिका जाने के लिए जहाज की तलाश की तो कोई तैयार नहीं हुआ क्योंकि मध्य अमेरिका और निकारागुआ के बीच ‘युद्ध’ चल रहा था। इसके अलावा भारतीय दूतावास ने भी न जाने की सलाह दी।

बड़ी निराशा के साथ उन्हें दक्षिण अमेरिका जाने का विचार त्यागना पड़ा। फिर सोचा गया कि मेक्सिको को कुछ और छाना जाए।

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मेक्सिको की इन सुंदरियों ने जिद कर फोटो खिचवाई

यही सोच कर वे 18 दिसम्बर को चल पड़े घने जंगलों के बीच पलेन्को (Palenque) की ओर्। Mayan खंडहरों का नज़ारा देखते हुए, वे रवाना हुए छिपास (Chiapas) राज्य के एक कच्चे रास्ते से। प्राकृतिक सूंदरता मन मोह ले रही थी।

Tiacolulu (Oxaca से 20 किलोमीटर दक्षिण की ओर) में इन्होंने 2000 वर्ष पुराने साइप्रस के वृक्षों को देखा, दक्षिणी तट पर Pia De La Cuesta (Acapulco) में 23 दिसम्बर को क्रिसमस की पूर्व संध्या का स्थानीय त्यौहार ‘Nevidad’ में शामिल हुए; जेट युग का रिज़ॉर्ट देखा; 25 दिसम्बर को Cuernavaea स्थित फूलों की घाटी; 25 दिसम्बर को Tasco –चांदी की खदान वाला सुरम्य शहर; स्पेनिश शहर Guadalahara व Guanajuato होते हुए Curnevaca में 28 दिसम्बर को नववर्ष की पूर्व संध्या का समारोह अदनान गुरेरो परिवार के साथ मनाया गया।

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अदनान गुरेरो परिवार के साथ, नव वर्ष की पूर्व संध्या पर

इस बीच कुछ कुछ स्थानीय भाषा सीख ली थी और मेक्सिकन लोगों से घनिष्टता बढ़ा ली थी। इसी कारण जब वहाँ से रवानगी हुई तो मन उदास था, दुखी था।

3 जनवरी को जब वे अमेरिका की सीमा से 100 किलोमीटर दूर थे तो मोटरसाइकिल बिगड़ जाने पर एक पर्यटक सेवा ‘Green Angles’ वालों ने सीमा तक लिफ़्ट दी। सीमा पर, उस ताजमहल रेस्टरां वाली सारा से पुन: मुलाकात हुई।

बाईक इतनी बिगड़ चुकी थी कि आखिरकार इंजिनों के पिस्टन ही बदलने पड़े। खराब मौसम में फीनिक्स की ओर जाते हुए 11 जनवरी को एल पासो (El Paso) से भारी बर्फ़बारी में गुजरना रोमांचक रहा।

इस पूरे भ्रमण में एक ही बार में अधिकतम तय की जाने वाली यह दूरी 775 किलोमीटर की थी। तापमान था शून्य से 7 डिग्री सेल्सियस नीचे। 75-100 किलोमीटर मोटरसाइकिल दौड़ाने के बाद हाथ-पैर सुन्न हो जाते थे। किसी स्थान पर रूक कर हाथ-पैर गर्म किए जाते फिर बढ़ा जाता।

12 जनवरी को फिनिक्स (Phoenix) के बाद 15 जनवरी को देखा गया Grand Canyon –निश्चित रूप से दुनिया में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली जगहों में से एक जो मनुष्य को प्रकृति के भयानक बल की याद दिलाता है।

16 जनवरी को अगला पड़ाव था लास वेगास। रात की रंगीनियों वाला एक शहर जहाँ कई लोग भाग्य आजमाने आते हैं। लेकिन दुनिया की इस जुआ राजधानी ने अधिकांश लोगों को गरीब बना कर वापस भेजा है, संभवत: समझदार बना कर भी!

वे चल पड़े लॉस अंजेल्स Los Angeles के मज़ावे रेगिस्तान Mojave Desert की ओर। लॉस एजेंलिस में स्थानीय यमाहा विक्रेता La Habra Motors ने इनकी मोटरसाइकिल की मुफ़्त में भारी-भरकम मरम्मत की।

यहीं 17 जनवरी को हॉलीवुड के यूनिवर्सल स्टूडियो का भी भ्रमण किया गया।

अमेरिका में अपने अंतिम मार्ग के रूप में लॉस एजेंलिस से पेसिफिक समुद्री तट पर होते, सैनफ्रांसिस्को (San Francisco) जाते हुए हुए 27 जनवरी को खूबसूरत नज़ारों वाले सैन लूईस (San Louis) में रूकना हुआ। सैनफ्रांसिस्को में ही 28 जनवरी को मोटरसाइकिल की पूरी मरम्मत करवाई गई। जिसमें पिस्टन रिंग, सिलेंडर का बोर, चेन का बदलाव, टायर बदलना आदि शामिल था।

3 फरवरी को यहाँ से उन्होंने उड़ान भरी Northwest Orient San Fransisco – Honolulu – Tokyo – Bangkok की। किराया लगा 540 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति। मोटरसाइकिल को भेजा गया था समुद्री रास्ते से 150 डॉलर के भाड़े में।

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टोक्यो में बौद्ध भिक्षुयों के संग

अगले तीन दिन तक हनॉमा (Hanauma) खाड़ी में सूर्य स्नान और मूँगे की चट्टानों वाले तटों पर गोते लगाते बीते। टोक्यो Tokyo में रूकना हुआ निप्पो म्यो-होजी (Nippon Myo-hoji) पर।

जापानियों के विनम्र और सम्मानजनक तरीके ने, जीवन में छोटी-छोटी चीज़ों का ख्याल, सौंदर्य की सराहना और उनके काम करने से दृष्टिकोण ने सुनील व अनिरुद्ध को खासा प्रभावित किया।

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जापान के एक स्थानीय समाचारपत्र की खबर

30 जनवरी को वे इवाटा शी Iwata shi में यामाहा मुख्यालय पहुंचे और जापानी आतिथ्य को अपने सबसे अच्छे रूप में पाया।

9 फरवरी को बुलेट ट्रेन की सवारी कर जा पहुँचे 590 किलोमीटर दूर कोबे (Kobe) में। किराया लगा 50 डॉलर और समय लगा साढ़े तीन घंटे का!

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इवाता शि में यामाहा का मुख्यालय

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यामाहा मुख्यालय के आंतरिक बुलेटिन में इस अभियान की जानकारी

क्योटो (Kyoto) व नारा (Nara), दोनों पूर्व जापानी राजधानियाँ और ज़ेन बौद्ध धर्म के केंद्र। जापानी बागों सहित, दोनों शहर उत्तम बुद्ध मंदिरों से भरे हुए हैं।

कोबे से वे लौटे हम टोक्यो के लिए। रुकना हुया मित्शुबिसी स्टील मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी के होस्टल में। 20 फरवरी को सैनफ्रांसिस्को से भेजी गई मोटरसाइकिल ली गई। टोक्यो में मलेशियाई वीजा प्राप्त करने में आई कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा।

हार कर मोटरसाइकिल को शिपिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के समुद्री जहाज द्वारा सिंगापुर भेज दिया और खुद उड़ गए 2 मार्च को नॉर्थ-वेस्ट एयरलाईन के हवाई जहाज से बैंकॉक के लिए।

थाईलैंड में कुछ मायनों से भारत जैसा वातावरण होने के कारण उन्हें घर जैसा अनुभव होने लगा। अयोध्या के ऐतिहासिक शहर का दौरा और पटाया (Pattaya) के समुद्र तट का भ्रमण सूकून दे गया। यहीं 7 मार्च को खेली गई होली

मोटरसाइकिल से किये गए विश्व भ्रमण के संस्मरणों को कुल 10 आलेखों में संजोया गया है. सारे आलेखों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें»

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बैंकॉक के एक स्थल पर

इस विश्व भ्रमण के दौरान ये दोनों युवा, स्थानीय व्यंजनों का उत्सुकता के साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश करते रहे। इसी चक्कर में वे जापान की सुशी (sushi) व शस्मी (sashimi) मछलियाँ तक चबा गए थे। लेकिन पटाया में मिली तली हुई टिड्डियाँ!

बैंकॉक में इन्हें ज्ञात हुआ कि मलेशियाई अधिकारियों ने अभी तक वीजा मंजूर नहीं किया था। अलितालिया की उड़ान से वे उड़ गए 13 फरवरी को सीधे सिंगापुर और वहाँ दस दिन तक रूक कर मलेशिया का वीसा प्राप्त करने के उपक्रम में लगे रहे। इसी बीच भारतीय हाई कमिश्नर श्री गोपाल कृष्ण पिल्ले से भी मुलाकात की।

दुनिया में सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक, सिंगापुर विविधता लिए हुए एक छोटा सा देश है। यहाँ चीन, मलेशिया व भारत के लोगों की बहुतायत है। प्रमुख शहरों के बीच आधुनिक गगनचुंबी इमारतों के साथ हरियाली का होना हैरानी की बात लगी इन्हें।

अखिरकार दोनों युवकों को सूचना मिली मलेशियाई वीसा मिल जाने की। बस द्वारा सफर जारी रहा अपने साफ समुद्र तटों और मूँगे के लिए प्रसिद्ध पूर्वी तट पर Mersing की ओर। कुआंटान (Kuantan) के नए बंदरगाह पर, मौसम की किसी खराबी की वज़ह से विलंब से पहुँची अपनी मोटरसाइकिल ली गई, जो टोक्यो से भेजी गई थी।

इंडोनेशिया जा नहीं सके क्योंकि कोई भी समुद्री जहाज इन्हें मोटरसाइकिल सहित सुमात्रा की मुख्य भूमि तक ले जाने को तैयार नहीं हुआ।

दोनों दीवाने चल पड़े रबर और पाम वृक्षों वाले क्षेत्र से होते हुए कुआलालम्पुर Kualalumpur की ओर्। बेशक यहां के मुस्लिम समाज पर पश्चिमी देशों का असर हो रहा है किन्तु वे नशीले पदार्थों के मामले में बेहद सख्त रहे हैं। सजा होती है सीधे मौत की। कोई सवाल नहीं पूछा जाता, कोई स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं समझी जाती।

कुआलालम्पुर में कुछ गगनचुंबी इमारतों की वास्तुकला पर मुस्लिम प्रभाव स्पष्ट दिखा।

दिन बड़ी तेजी से बीत रहे थे। 10 मई 1984 को भिलाई से निकल कर दुनिया घूमते हुए करीब 11 माह होने को आए। अब समय हो चला था भारत लौटने का। ठीक अप्रैल फूल वाले दिन 1 अप्रैल 1985 को एस्कॉर्ट लिमिटेड द्वारा प्रायोजित चेकोस्लोवियन एयरलाईन द्वारा मुम्बई के लिए प्रफ़ुल्लित मन से हुई रवानगी।

आखिर 17 अप्रैल को विश्व भ्रमण का शानदार समय बिताने के बाद भिलाई वापस जो आना था.

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तली हुई टिड्डियाँ, रात की रंगीनी और मेक्सिको की सुंदरियाँ” पर 8 टिप्पणियाँ

  1. यह विश्व यात्रा गागर में सागर बन गयी है !

  2. घूम ली दुनिया आपके साथ .अराउन्ड द वर्ल्ड नो डालर . भिलाई के इस्पात के साथ साथ भिलाई की मिट्टी मे भी इस्पात की तरह इच्छाशकित है

  3. ई-मेल से प्राप्त प्रतिक्रिया:

    बेहद प्रेरणा दायिक है आप को भेजने के लिए धन्यवाद.
    -सुरेश यादव

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