वह प्रेम भरा खुशनुमा दिन बीता ब्लॉगर साथियों के साथ

दिल्ली के लक्ष्मी नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर स्थित Gg’s में 15 नवम्बर की सुबह औपचारिक, शुरूआती ठंडे जूस और गर्मागर्म चाईनीज़ स्नैक्स के साथ बातों का सिलसिला एक बार जो शुरू हुआ तो रूकने की कोई गुँजाईश नहीं थी। शुरूआत हुई राजीव तनेजा जी से। राजीव जी ने बताया कि कैसे उनका सामना समीरलाल ‘उड़न तश्तरी वाले’ से हुआ। तब वह उनका पहला मौका था ब्लॉगरों के बीच जाने का। समीरलाल जी ने उन्हें मंच पर आमंत्रित किया और इनके पसीना झलक आया पहली बार माईक के सामने आते ही! क्योंकि राजीव जी गए थे श्रोता बन कर और करना पड़ गया कांपते हाथों से कविता पाठ!!

इसी मसले पर अजय झा ने रामायण के चरित्र बाली का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह सामने पड़ने वाले की आधी शक्ति बाली खीच लेते थे, उसी तरह शायद माईक के सामने आते ही व्यक्ति की आधी शक्ति खत्म हो जाती है।
दिल्ली में लकड़ी के रेडीमेड दरवाजे, खिड़कियों के व्यवसायी राजीव जी जब अपनी ई-बाईक पर एक सिक्ख के बैठने पर स्पीड बढ़ जाने, व उतर जाने पर स्पीड कम हो जाने वाली पोस्ट का रस ले कर वर्णन करने लगे तो उनकी खिंचाई शुरू हो गई। उनकी लम्बी-लम्बी पोस्टों को लेकर धावा बोलने वाले अड़े हुए थे कि वे अपनी पोस्ट की लम्बाई पौने तीन किलोमीटर से अढ़ाई किलोमीटर तो करें कम से कम! लेकिन राजीव जी ने कह दिया कि ऐसा करना लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरूद्ध है!!
फिल्म निदेशालय में कार्यरत्, अविनाश वाचस्पति की अनुपस्थिति सभी को अखर रही थी। किन्तु उनका गोआ का कार्यक्रम निश्चित था और वह लगभग उसी समय रवाना हो रहे थे।
दिल्ली में ब्लॉगरों की संख्या पर पूछताछ होने पर, कड़कड़डुमा अदालत में कार्यरत् अजय झा जी ने पिछली रात देखे गए आंकड़ों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि यह लगभग 1000 हो सकती है।
राजनीति की बातें चली तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर कार्टून बना, न्यायपालिका का कोप झेल रहे, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति पाने वाले, ग्वालियर में पलने-बढ़ने वाले, संप्रति जनसत्ता में कार्टूनिस्ट इरफ़ान जी के कार्टून्स की चर्चा शुरू हुई। विशेषकर उत्तरप्रदेश के कुछ राजनेताओं पर बने कार्टूनों को याद कर इरफ़ान जी ने जो चुटकियां ली, उसका उत्तर, साथियों ने ठहाकों से दिया।
कथित मंदी पर गंभीर विमर्श पर ज़ी न्यूज के सीनियर प्रोड्यूसर, खुशदीप सहगल जी ने अपने अनुभव साझा किए। मीडिया संबंधित बातें चलने पर इरफ़ान से पता चला कि वे ज़ी नेटवर्क में करीब साढ़े चार साल बिता चुके हैं। इरफ़ान जी और खुशदीप जी आपस में कई व्यक्तियों का नाम लेकर उनके ताज़ा हाल की जानकारी लेते रहे।
मेरठ के बाशिंदे खुशदीप सहगल जी ने विभाजन के दौरान अपने माता-पिता के पाकिस्तान से आने की बात बताते हुए मेरठ में फिलहाल हिन्दुस्तान से जुड़ीं, (हिन्दी ब्लॉगर) मनविंदर भिम्बर के साथ कार्य कर चुकने की जानकारी भी दी।
श्रीमती तनेजा कुछ असहजता सी अनुभव करती दिखीं तो मैंने उनसे बातचीत शुरू करते हुए बताया कि किसी आकस्मिकता के कारण कतिपय महिला ब्लॉगर नहीं आ सकीं हैं वरना उन्हें बोरियत नहीं होती। उन्होंने भी बड़ी शालीनता से हमारी बातचीत में रुचि लेते हुए सामान्य होने की चेष्टा की।
राजीव तनेजा जी ने जब हमें आपस में बात करते देखा तो झट से आ पहुँचे और पूछने लगे कि आप यहाँ कब तक हैं। मैने बताया कि परसों (17 नवम्बर) की शाम की ट्रेन है तो उन्होंने अपने निवास पर लंच हेतु आमंत्रित किया। इरफ़ान जी पहले ही मुझे कह चुके और मैं हामी भर चुका था। मैंने अगली बार का वादा कर लिया।
ललित शर्मा जी की मूँछों का जिक्र जब हुया तो सब एक दूसरे की प्रोफाईल पर लगे फोटो के बारे में पूछने लगे कि वह कब का है? क्योंकि अधिकतर, सामने दिख रहे ब्लॉगर का चेहरा अक्सर प्रोफाईल के चित्र से कुछ भिन्न ही दिखता है।
इन सब बातों के बीच भोजन की शुरूआत हुई। जैसा कि खुशदीप जी बता चुके हैं मटर पनीर, कोफ्ता, दम आलू, चावल, पापड़, अचार, चटनी, रायता, नान, दाल, गुलाबजामुनें, रसगुल्ले आदि का समावेश किए हुए लज़्ज़तदार व्यंजनों का मजा लेते हुए बातें आगे बढ़ीं।
इसी बीच मौका पा कर श्रीमती तनेजा ने तमाम गृहणियों का प्रतिनिधित्व करते हुए शिकायत की, कि काम से लौटते ही ‘ये’ सीधे कम्प्यूटर के सामने बैठ जाते हैं, फिर भले ही तीन बज जाएँ या चार।
कवि व साहित्यकार शरद कोकास जी की बात चली तो मैंने उनका संक्षिप्त परिचय दिया। वहाँ यह माना गया कि वह फुल टाईम ब्लॉगर हैं।
ब्लॉगिंग की चर्चा हुई तो विषय विशेष पर कुछ ना कुछ योगदान दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अपने अनुभव और सृजन को ब्लॉग पर लाए जाने पर आपको पढ़ा भी जाएगा और मन में यह भावना भी रहेगी कि हम कुछ दे रहे हैं इस मंच के बहाने। धर्म पर छिड़े कई मुद्दों पर खुशदीप जी, द्विवेदी जी ने बड़े संवेदनशील, सकारात्मक व्यक्तिगत अनुभव रखे।
भोजन पश्चात् शानदार कॉफी का लुत्फ़ उठाते हुए, ब्लॉगिंग में अक्सर नकारात्मक मुद्दों पर हंगामा होने पर अजय झा जी ने चुटकी ली कि हम सब यहाँ आपस में सौहाद्रपूर्ण वातावरण में बैठे हैं, वापस जा कर पोस्ट लिखेंगे, शायद कोई हलचल न हो। लेकिन अगर मैं और खुशदीप लड़ पड़ें, एक-दूसरे के कपड़े फाड़ दें तो वह हिट हो जाएगा।
मीडिया के बदलते स्वरुप में ब्लॉगिंग की तुलना पहले के समाचारपत्रों से किए जाने की चेष्टा में द्विवेदी जी, अजय झा की ज़ुबानी कई रोचक किस्से सामने आए। यह तो मान ही लिया गया कि अब ब्लॉगर स्वयं ही पीर, बावर्ची, भिश्ती, खर है।
खुशदीप जी ने बड़ी खुशी के साथ बताया कि उन्हें ब्लॉगिंग में जितना मज़ा आया उतना किसी और विधा में नहीं आया। यह टीवी को खा जाएगा! लेकिन जब मैंने जानकारी दी कि अब तो टीवी पर भी ब्लॉगिंग शुरू होने वाली है तो माहौल ही बदल गया। सब अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाते हुए भविष्य की बातें करने लगे।
मोबाईल पर ब्लॉग न पढ़ पाने की बात का जिक्र करते हुए श्रीमती संजू तनेजा ने निराशा जताई तो उन्हें अपने मोबाईल पर यूनिकोड सुविधा स्थापित करने की सलाह मिली।
छद्म नाम से ब्लॉग लिखने वालों के बारे में उत्सुकता सभी को थी। टिप्पू चचा, उन्मुक्त, एम ज्ञान, ईस्वामी, ब्लॉग वकील जैसे नाम तो थे ही, समय समय पर आवश्यकतानुसार बिना प्रोफाईल दिखाए अपने ही ब्लॉग सहित दूसरों के ब्लॉग पर टिप्पणियाँ करने वालों की भी चर्चा हुई। जब एक आवाज़ ने उन्मुक्त जी के संभावित नाम व पद का खुलासा किया तो क्षण भर को खामोशी सी छा गई। कोटा, राजस्थान की अदालत में 3 दशकों से वकालत कर रहे द्विवेदी जी ने हम बच्चों को टॉफियां दे कर फिर पुराने मूड में ला दिया।
इस बीच प्रबंधकों ने सूचना दी कि निर्धारित समय की समाप्ति हो रही है। हम सब उठ कर दूसरे किनारे की ओर बैठ गए। द्विवेदी जी, इरफ़ान जी के साथ बैठ गुफ़्तगू करने लगे। तनेजा दम्पत्ति, खुशदीप जी के साथ पारिवारिक मसलों पर हल्की फुल्की बातों में लग गए। मैं और अजय झा तकनीकी बातों में उलझ गए।
शाम घिरने लगी तो सब विदा लेने के मूड में बाहर आ गए, लेकिन फिर भी चैन कहाँ रे! दुनिया जहाँ की बातें, ठहाकों के बीच चलती रही। वक्त गुजरता रहा।
इरफ़ान जी ने अगले दिन उनके निवास पर लंच की पुष्टि करनी चाही तो खुशदीप जी के कान खड़े हुए। उन्होंने भी उसी क्षेत्र में होने का हवाला देते हुए अपने कार्यालय आने का निमंत्रण दे डाला।
रविवार का वह खुशनुमा दिन एक साथ बिता, जब हम विदा ले रहे थे तो सभी के दिल-ओ-जुबाँ पर अगली मुलाकात का वादा था।
क्या ख्याल है, अगली बार आप भी रहेंगे ना?
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वह प्रेम भरा खुशनुमा दिन बीता ब्लॉगर साथियों के साथ” पर 30 टिप्पणियाँ

  1. बडा ही मस्त मिलन लग रहा है पाबला जी. फोटो भी सारी कहानी बयां कर रहे हैं. हमारे ईलाके में हुए इस मिलन में काश हम भी शामिल हो पाते…

  2. अगली बार क्या?…मैँ तो हर बार ऐसी मुलाकातों का हिस्सा बनना चाहूँगा

  3. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  4. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  5. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  6. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  7. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  8. वाह जी वाह !
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    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  9. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  10. वाह जी वाह !
    पढ़ कर ऐसा लगा कि हम वहीँ रहे हों?
    बाकी कोशिश तो करेंगे अगली बार आप लोगों का साथ पाने की !

  11. अचानक हुई इस गोष्ठी का स्वरूप अन्य से बिलकुल भिन्न अद्भुत था। यह वास्तव मे मिलन गोष्ठी थी। इस में सब ने एक दूसरे से प्यार बांटा और बढ़ाया।

  12. वाह सर ..आपने तो सीरियल के सारे एपिसोड एक साथ ही दिखा दिये……वो भी बिना ब्रेक के …कमाल है..मजा आ गया सर ..उस दिन की याद ताजा हो गई..सर इस शुरूआत ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है …बहुत से मित्र ब्लोग्गर्स ने भविष्य के लिए अभी से आश्वस्त कर दिया है ..उम्मीद है कि ..ये मिलन ,मिलन के इतिहास के पहले पन्ने की तरह पढा जाएगा …

  13. द्बिवे्दी जी म्हारा हिस्सा की चाकलेट कठे सै, टाबरां को आयटम थे सब हजम कर ग्या काईं?
    पावला जी को साधुवाद

  14. बहुत बढिया हुई होगी मुलाकात , ऐसा प्रतित हो रहा है । बधाई आपको

  15. बार- बार दिन ये आए
    ब्लाग जगत में मन भाए
    हिन्दी की थाती समृद्ध हो
    प्रेम घन हर पल छाए !!!!!!!!!!!!!!

  16. अगली बार वादा रहा…हम भी होंगे साथ में…इरफानजी के बारे में जानकर अच्‍छा लगा…ग्‍वालियर के ही हैं तो कभी मुलाकात भी संभव होगी

  17. बहुत ही सुन्दर सचित्र वर्णन !
    ऐसा लगा मानो कोई बेहतरीन डॉक्युमेंट्री देख रहा हूँ !
    ऐसी मुलाकातें जहन में हमेशा कायम रहती हैं !

  18. ये मस्त मिलन कथा रही. आनन्द आ गया. बस में हो तो हर ब्लॉगर मिलन में उपस्थित रहें..देखिये, कब मौका आता है.

  19. पाबला जी,
    ये मुलाकात तो इक बहाना था,
    प्यार का सिलसिला बढ़ाना था…

    फोटो लाजवाब, रिपोर्ट टॉपम-टॉप, पाबला जी दे प्यार दा तड़का…बस बल्ले ही बल्ले…

    जय हिंद…

  20. बहुत ही प्रेरणादायक, पहल करने से शायद सारे कार्य आसान हो जाते हैं फ़िर बाकी की सारी ऊर्जा तो ऊपर वाला दे देता है, बस कार्य शुरु करने की इच्छा बलवती होनी चाहिये।

    हम भी अगली बार शामिल होने की आशा रखते हैं।

  21. Jia anam logon ka aapne naam liya hai, unme se kuchh ka pata maine apne tarike se laga liya hai.. 🙂
    kabhi phone par batata hun.. 😀

  22. "कवि व साहित्यकार शरद कोकास जी की बात चली तो मैंने उनका संक्षिप्त परिचय दिया। वहाँ यह माना गया कि वह फुल टाईम ब्लॉगर हैं "
    अपना तो यह उसूल है कि दिल्ली से यदि कोई सम्मान प्राप्त होता है तो उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिये । पाबला जी सहित आप सभी को धन्यवाद ।

  23. अच्छा लगा आपकी बैठक का विवरण पढ़कर.

  24. yeh toh bahut mazedaar vivran rahaa aur kapade bhi nahi fatte…:) Tv par blogging? yeh kyaa mazaraa hai humein bhi bataao

  25. मै और मेरी पत्नी दोनो, हिन्दुस्तान के कोने से, आम व्यक्ति हैं।

    हिन्दी से प्रेम करता हूं। उसी के सेवा करना पसन्द करता हूं। मैं अपने विचारों के लिये जाना चाहता हूं और किसी तरह से नहीं।

    लोग क्या कहते हैं, उस पर न जाइये।

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