मेरी पोस्ट पर मठाधीशों की बात करने वाला कुत्ते का पिल्ला है!!

यह बिल्कुल सत्य घटना है, ना तो होली के मूड वाली कोई पोस्ट है और ना ही किसी तरह की मौज या हास्य व्यंग्य वाली पोस्ट। शीर्षक भी बिल्कुल ठीक ही है। कोई गलतफहमी ना रह जाए इसलिए एक बार फिर लिख देता हूँ कि मेरी पोस्ट पर मठाधीशों की बात करने वाला कुत्ते का पिल्ला है।

हुआ यह कि आम तौर पर मेरी पोस्ट्स पर बेनामी या बिना प्रोफाईल वालों की टिप्पणियाँ लगभग नहीं के बराबर आती हैं। पहले एकाध वाक्ये में ऐसा हुआ कि मेरे ब्लॉग के लेख को चुरा लिया गया था लेकिन बाद में जब उसका पता ठिकाना निकाल कर बताया गया तो वह ब्लॉग ही बंद हो गया। इस बार मेरी उत्सुकता तब जागी जब हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन वाले ब्लॉग पर डॉ अनुराग की वैवाहिक वर्षगांठ वाली पोस्ट पर एक टिप्पणी आई कि क्या कारन है कि कुछ खास मठाधीशों ने यहां कभी किसी को बधाई नहीं दी
मेरा माथा ठनका क्योंकि यह कोई विवादित सी पोस्ट भी नहीं थी और इस तरह की टिप्पणी के लिए कोई उचित जगह भी नहीं थी। मैंने प्रोफाईल क्लिक किया वहाँ दिखा कि यह कोई विदुषी हैं Hiral Johari! मैं चुप्पी लगा गया। टिप्पणी हटाऊँ कि नहीं इसी उधेड़बुन में रहा। जब किसी तरह की हलचल नहीं दिखी इस पर, मैंने टिप्पणी तो वहीं रहने दी लेकिन अपने सैनिकों को कुछ आदेश दिए। सैनिक बोले तो सॉफ़्टवेयर जैसा कुछ!

 

उन सैनिकों ने अपने डाटाबेस खंगाल कर जानकारी दी तो मैं भी सकपकाया। ‘राज पिछले जनम का’ जैसी पहली जानकारी मिली कि यह विदुषी रूप बदल कर आई है, इससे पहले वह कुत्ते का पिल्ला थी। (असल में लिखा ‘कुत्ते का पिल्लुरा’ गया है लेकिन मेरे ख्याल से इसका हिन्दी में मतलब होता है कुत्ते का पिल्ला) दूसरी जानकारी मिली कि ताऊ की एक पोस्ट में शायद इन्हें श्री पिल्लुरा लिखा है, तीसरी जानकारी थी कि प्रवीण जाखड़ जी की एक पोस्ट पर इस कुत्ते के पिल्ले ने जम कर टिप्पणियाँ की हैं, चौथी जानकारी मिली कि इसी नाम से एक ब्लॉग भी था जो अब बंद हो चुका। जानकारियाँ मिलती जा रही थीं और …
आईए अब इन बातों की सत्यता देखें। डॉ अनुराग की वैवाहिक वर्षगांठ वाली पोस्ट क्लिक करें, पांचवी टिप्पणी देखें, उस Hiral Johari पर क्लिक करें, एक प्रोफाईल मिलेगा, उसके यूआरएल में प्रोफ़ाईल पते की संख्या पर ध्यान दें या लिख लें कागज पर।
अब चलिए प्रवीण जाखड़ जी की पोस्ट पर्। वहाँ आपको तलाशने की ज़रूरत ही नहीं होगी। कुत्ते का पिल्लुरा नाम से किसी भी टिप्पणी को देख लें। पढ़ लेंगे तो बहुत अच्छा! उस कुत्ते का पिल्लुरा पर क्लिक करें। ऊपर वाला प्रोफाईल ही मिलेगा, उसके प्रोफ़ाईल पते की संख्या पर ध्यान दें। यूआरएल में संख्या वही मिलेगी!
इस पोस्ट के लिखे जाते तक ऊपर दी गई सभी लिंक्स व उससे संबंधित जानकारियाँ अपने अपने स्थान पर मौज़ूद हैं।
जानकारियाँ और भी हैं किन्तु अब आप बताईए कि यह प्रोफाईलधारी Hiral Johari है या कुत्ते का पिल्लुरा?
क्या मैं गलत कह रहा हूँ कि मेरी पोस्ट पर मठाधीशों की बात करने वाला कुत्ते का पिल्ला है?
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मेरी पोस्ट पर मठाधीशों की बात करने वाला कुत्ते का पिल्ला है!!” पर 43 टिप्पणियाँ

  1. आपके सैनिक भी गजब करते हैं। सब कुछ निकाल लाते हैं, खोद कर। ये विस्फ़ोट धमाकेदार है। होली मे दि्वाली का मजा।:)

  2. पोस्ट देखकर लगता है पाबला भाई बहुत गुस्से में हैं आज। आपके द्वारा दिये गए लिंक को भी देखा – गलतियाँ की गयीं हैं। आपके उद्गार भी उसी के अनुसार है। साथ ही जो ऐसे लोग होते हैं, आगे भी यूँ ही करेंगे – इससे इन्कार भी नहीं किया जा सकता है।

    हम रचनाकार हैं – "ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर" के सिद्धान्त पर अक्सर चलने वाले। हमेशा सकारात्मक सृजन प्रायः हर रचनाकार का सहज उद्येश्य होता है। जहाँ तक मैं व्यक्तिगत तौर आपको जान पाया हूँ कि आप बहुत ही शान्त स्वभाव के हैं।

    आज ऐसे शीर्षक को देखकर मैं आश्चर्यचकित हुआ। मैं विनम्रतापूर्वक अपनी बात कहूँ कि पता नहीं क्यों यह शीर्षक कुछ जँचा नहीं।

    आशा है आप बुरा नहीं मानेंगे।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com

  3. शीर्षक देखकर तो हम भी सन्न रह गये थे…..

  4. मेरे ब्लॉग पर एक बेनामी नजर लगाये हैं जरा अपने सैनिक भेजिये

  5. आपका एक सैनिक आ गया है…. लाठी-बल्लम ले के… कौन है यह कुत्ता….? बताइए तो …..

  6. @ श्यामल सुमन जी

    जहाँ तक शीर्षक न जमने वाली बात है, मेरे ख्याल से अंत में दोहरे आश्चर्यजनक चिन्ह अपना मंतव्य स्पष्ट कर ही रहे हैं।

    मैंने बुरा नहीं माना है, शायद मेरी ही अभिव्यक्ति में कोई कमी रह गई होगी

    आपकी टिप्पणी हेतु आभार

  7. हमें तो आपसे ईर्ष्या होती है। काश हमारे पास भी होते ऐसे सैनिक!

  8. 1) लेकिन सारा प्रोफ़ाइल खंगालने के बाद भी आप ये नहीं बता सके कि ये अल्सेशियन है या बुलडॉग, या फ़िर पामेरियन… 🙂
    2) प्रोफ़ाइल क्रमांक से ये कैसे पता लगेगा, कि पिल्ला कैसे रंग का है इस पर एक पोस्ट लिखी जाये होली के माहौल में… 🙂

  9. ऐसे लोगों का बहिष्कार करना ही सही है।
    आपने अच्छा पर्दाफाश किया है।
    लड़की की फोटो लगाकर लोग बेवक़ूफ़ बनाते हैं।

  10. आप नाहक ही परेशान हो रहे हैं!
    घर की चौकीदारी के लिए पाल लीजिए ना!
    यह तो बहुत प्यारा है जी!
    हमारी तो पहेली पर भी आ चुका है!
    happy holi

  11. मैं तो अब ऐसी पोस्टों को तभी पढूंगा जब यह स्पष्ट तौर पर तकनीकी विद बताने की स्थिति में होंगे वह शख्श आखिर है कौन अन्यथा तो एक नया सामुदायिक ब्लॉग ही बन जाना चाहिए बूझ बुझौअल ब्लॉग जहाँ पोस्ट आती रहे -कोई फायदा नहीं इनका !
    और ऐसी पोस्ट हमारी तकनीकी सीमाओं को जतला कर खिझाती भी रहती हैं -मैं अब और खीझने वाला नहीं !
    कोई महारथी तो बताएगें की असली हरामजादे या हरामजादियां कौन हैं ? बेमतलब समय बर्बाद क्यूं हो लिखने वाले और पढने वालों दोनों का !

  12. वाह भाई पाबला जी। आप तो तगड़े खोजी पत्रकार भी हैं।

  13. अब देखिये….कोई ****या नापसंद का चटका मार गया है…. स्सस्सस्स …….ला….

  14. पाबला जी आपके पास तो खोजी सैनिक है पर हम जैसे क्या करें

  15. वाह सर तो आपने शुरूआत कर ही दी आज ..चलिए ठीक किया …और हां ज्यादा हलकान होने वालों को बता देना ठीक रहेगा कि .अभी तो सिर्फ़ कौम बताई गई है ..नस्ल तो अब धीरे धीरे बताई जाएगी …

    और हां अरविंद मिश्रा जी के लिए :-

    सर , अब क्या , आपनो तो पढ भी लिया और टीप भी दिया अब तो समय खराब हो ही गया , और हां नहीं कुछ करने से कुछ करते रहना बेहतर होता है , ये तो तय है न कि ये सभी अनामी बेनामी ..ब्लोग्गर्स ही हैं और हां बिल्कुल सही पता लगाना भी कोई मुश्किल काम नहीं है वो भी देर सवेर हो ही जाएगा , अभी तो beware ..work in in progress..का बोर्ड समझिए लटका हुआ है …
    अजय कुमार झा

  16. मुझे तो यह कोई लडकी ही लगती है. लेकिन जो भी हो दोगली नस्ल की लगती है

  17. आदरणीय पाबला साहब, तकनीकी दृष्टि से आपकी बात बिल्कुल ठीक है, लेकिन आप से इतने अधिक गुस्से की उम्मीद नहीं थी और यह शीर्षक उसी गुस्से की उपज है.
    वैसे धरम जी का सुप्रसिद्ध डायलाग याद आ गया "कुत्ते कमीने .." 🙂
    होली के रंग आपको सराबोर कर दें.

  18. दिल्ली में रहते हुए ये मुहावरा सुने अरसा हो गया। आज अच्छा लगा कि अभी भी अपने लोगों के बीच हैं अफन लोग।..

  19. @ भारतीय नागरिक
    @ डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
    @ श्यामल सुमन

    व अन्य

    मैं न तो गुस्से में हूँ और न ही कोई रोष, क्षोभ, हताशा, परेशानी है। इसके अलावा मैंने किसी को भी कोई गाली नहीं दी है।

    यह 'कुत्ते का पिल्ला' तो सिर्फ एक प्रोफाईलधारी का नाम है, विशेषण है जो अलग अलग स्थानों पर चोला बदल कर अर्थहीन भड़काऊ टिप्पणियाँ करता है/ करती है।

    मैंने शीर्षक में भी केवल आश्चर्य जताया है और अब मुझे यह भी आश्चर्य हो रहा है कि इतनी सी बात समझानी पड़ रही है।

    यही वाक्या अगर में ब्लॉग बुखार पर करता तो कहा जाता कि वाह! बढ़िया जानकारी दी है, सावधान करने के लिए धन्यवाद 🙂

    अजय जी ने ठीक कहा है कि यह तो बस एक बोर्ड है कि beware ..work in in progress..

  20. @ Suresh Chiplunkar जी मुझे तो बीच का लगता है, 🙂 क्योंकि अगर आपने गौर किया हो तो प्रोफाइल तो फीमेल है मगर जाखड जी के यहाँ जो टिपण्णी की है उसमे "करूंगा" लिखता है !

  21. वाह! आपने तो मुझे आश्चर्यचकित ही कर दिया था। अरे, कुत्तों से प्यार करने वाले लोग तो 'कुत्ते का पिल्ला' अपशब्द के रूप में उपयोग कर ही नहीं सकते। जब पोस्ट पढ़ी तो बात समझ में आई।
    घुघूती बासूती

  22. यह विक्रित मानसिकता वालेवाली का काम हैं,अच्छा किया पावला जी आपके सैनिकों ने इसे खोज निकाला ।

  23. जय हो पाबला जी की…कोई बच न सका….मत मारी गई होगी जो आपके यहाँ आकर ऐसी टिप्पणी करने की हिम्मत जुटाई इन्होंने. 🙂

  24. कुत्ते का पिल्ला दिख तो बहुत सुंदर रहा है। सच है मत मारी गयी होगी जो आप के ब्लोग पर ऐसी हिमाकत करने की हिम्मत जुटाई और मंशा क्या थी उसकी वो तो बताइए

  25. टिप्पणी देख समझ गयी थी की कुछ ख़ास तरह से मनायी जा रही है होली ….यहाँ आकर देखा तो गजब के लिपे पुते चेहरे ……सब के सब भंग के नशे में …..!!

    सुना है ये बड़ा वफादार होता है ….मेरे पास दो-दो हैं …..!!

  26. आपको व आपके सारे परिवार को होली की बहुत-बहुत बधाई।

  27. मै सोच रहा हूँ कि जब पिल्ला ऐसा है तो कुत्ता कैसा होगा ?

  28. भई पाबला जी हम तो कुत्तों से बहुत डरते हैं. कुत्ता दिखते ही कोसों दूर से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर देते हैं, कहीं पास ना आ जाये. कहीं काट लिया तो उसका तो कुछ नहीं बिगडेगा, मुझे जरूर पेट में चौदह इंजेक्शन लगवाने पडेंगे.

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