मेरे पापा को तो बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा है!

कई बार इंटरनेट पर अजीब सी बातें पढने-देखने को मिल जाती हैं. ऐसे ही कुछ वर्ष पहले एक ब्लॉग में इसे पढ़ा, अच्छा लगा, कॉपी कर संजो लिया।

इस बार, जून माह के तीसरे रविवार को मनाए जाने वाले फादर्स डे (पितृ-दिवस कहना बैकवर्ड माना जाएगा ना?) पर यह याद हो आया।

आप भी इस गूढ़ार्थ उक्ति का आनंद लें

एक बेटा, अपनी 4 साल से 60 साल की अलग अलग उम्र में, क्या सोचता है?

  • 4 सालमेरे पापा महान हैं।
  • 6 साल – मेरे पापा सब कुछ जानते हैं।
  • 8 साल – मेरे पापा अच्छे हैं, लेकिन गुस्सैल हैं।
  • 10 साल – मेरे पापा, मेरे लिए बहुत अच्छे थे, जब मैं छोटा था।
  • 14 साल – मेरे पापा चिड़चिड़ाते हैं।
  • 16 साल – मेरे पापा ज़माने के हिसाब से नहीं चलते।
  • 18 साल – मेरे पापा हर बात पर नुक्ताचीनी करते हैं।
  • 20 साल – मेरे पापा को तो बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा है, पता नही माँ इन्हें कैसे बर्दाश्त करती है?
  • 25 साल – मेरे पापा तो हर बात पर एतराज़ करते हैं।

  • 30 साल – मुझे अपने बेटे को संभालना तो मुश्किल होता जा रहा है। जब मैं छोटा था, तब मैं अपने पापा से बहुत डरता था।
  • 40 साल – मेरे पापा ने मुझे बहुत अनुशासन के साथ पाल-पोस कर बड़ा किया, मैं भी अपने बेटे को वैसा ही सिखाऊंगा।
  • 45 साल – मैं तो हैरान हूँ किस तरह से मेरे पापा ने मुझको इतना बड़ा किया।
  • 50 साल – मेरे पापा ने मुझे पालने में काफी मुश्किलें ऊठाईं। मुझे तो तो बेटे को संभालना मुश्किल हो रहा है।
  • 55 साल – मेरे पापा कितने दूरदर्शी थे और उन्होंने मेरे लिए सभी चीजें कितनी योजना से तैयार की। वे अपने आप में अद्वितीय हैं, उनके जैसा कोई भी नहीं।
  • 60 सालमेरे पापा महान हैं।
मेरे पापा को तो बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा है!
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मेरे पापा को तो बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा है!” पर 42 टिप्पणियाँ

  1. हर इनसान कुछ ऐसा ही सोचता है…समय के साथ-साथ उसे पिता की महत्ता का पता चलता है …
    बढ़िया पोस्ट

  2. अभी तो १४ साल से २५ साल के बीच में झूल रहा हू ,वैसे ६० साल का इन्त्ज़ार नही आज भी जानता हू मेरे पापा महानतम है

  3. बहुत अच्छा लगा … समय समय की बात… मनोदशा और हकीकत का खेल … अच्छी तरह से उकेरा है …अच्छा लगा

  4. बहुत बढ़िया पोस्ट, पाबला जी |
    आप को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎँ !!

  5. वाह्………………बेहद गम्भीर चिन्तन मगर सत्य……………सब ऐसा ही सोचते हैं मगर वक्त सब को उसी मुकाम पर ले आता है।

  6. मैं तो अभी भी यही कहता हूँ कि मेरे पापा बहुत महान हैं।

  7. ठीक ही कहा है , पृथ्वी गोल है ।
    पितृ दिवस , मांफ कीजिये फादर्स डे पर अच्छी प्रस्तुति ।

  8. हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए अच्छा सोचते हैं और जिंदगी भर जो भी करते हैं सब अपने बच्चों के लिए, पर फिर भी हम अपनी ही धुन मे खोये रहते हैं इसलिए हम उन्हे पहचानने मे भूल कर जाते हैं, पर वक्त से बड़ा शिक्षक कोई नहीं।

  9. बहुत सुंदर, मैने पिछले साल भी कही इसे पढा था.

  10. अच्छी पोस्ट.
    सभी पंक्तियाँ शानदार हैं.

  11. हम उन किताबों को काबिल-ए-ज़ब्ती समझते हैं,
    जिन्हें पढ़कर बेटे बाप को खब्ती समझते हैं…

    पाबला जी बेहतरीन पोस्ट के लिए आभार…आज मेरी पोस्ट आप को ही समर्पित है…
    http://deshnama.blogspot.com/2010/06/blog-post_20.html

    जय हिंद…

  12. जिंदगी के पंद्रह चैक पोस्टों ने पूरे जीवन का फ़लसफ़ा समझा दिया । और क्या खूब समझा दिया । असल में तो माता पिता संतान के लिए इश्वर का रूप होते हैं ,मगर इत्तेफ़ाकन बहुत बार ऐसा नहीं भी होता है । जो भी हो उनकी भूमिका जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण होती है और आगे तो और भी रहेगी

  13. bhai waah waah waah

    kyabaat hai !

    kamaal ki post………..

    mere khyaal me POST OF THE DAY

    naman hai pabla ji aapko !

  14. बहुत बढ़िया …आज मैंने अपने बेटे और पुत्री को भी यह रचना सुनाई और हम सब काफी देर हँसते रहे, शुक्रिया पाबला जी !

  15. फादर्स डे का भारत मे कोई औचित्य है क्या? आपकी रचना प्रभावी है। पर यह सवाल अवश्य कौंधता है कि – क्या है औचित्य?

  16. बहुत उम्दा-लेखन.
    वैसे फादर्स डे जरुरी हैं, क्योंकि आजकल के घोर-कलयुगी वक़्त में लोगबाग अपने पिता को भूल रहे हैं, दूर हो रहे हैं इसलिए उन्हें उनके पिता की एहमियत बताने के लिए एक निश्चित/ख़ास दिन होना आवश्यक हैं.
    अगर ये दिन नाहो तो कोई अपने बाप के बारे में कुछ सोचेगा ही नहीं. बस, आम दिनों की तरह सारी उम्र निकाल देगा बिना अपने पिता के बारे में कुछ सोचे.
    इसलिए एक ख़ास दिन पिता के नाम होना आवश्यक हैं.
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  17. समय के साथ या जब खुद पिता होने के एहसास से गुजरते हैं तब अपने पिता का मोल पता चलता है …यही हर रिश्ते में होता है …
    रोचक …!!

  18. एकदम सही
    लगभग सभी के विचार एक जैसे ही होते हैं।

    प्रणाम

  19. जब टिप्पणीयां पड़ रहा था,तो पदमसिहं की टिप्पणी पर नजर गयी,तो मुझे लगा,मुझे इस विषय में,मेरे मन के भाव मिल गये,क्योकिं में पोस्ट को किसी विशेशण में नहीं बान्धता,यह बलोगिंग मेरे विचार से लोगों के विचार हैं,और उस पर लोगों की प्रतिक्रियायें,जैसे आपस में बात कर रहें हैं ।

  20. हब हम क्या कहें !! कुछ और जी लें तो इस पर कोई राय देंगे…

  21. जिसने भी लिखा काफी सही लिखा है…
    प्रायः ऐसा ही देखा जाता है….
    पिता जब रहते हैं अच्छे नहीं लगते
    पिता जब नहीं रहते उनकी याद आती है.

  22. लौट के बुद्धू घर को आये ।

  23. आपने इतना अच्छा लिखा है की कुछ कहते नहीं बन पा रहा है ..

  24. भले ही पोस्ट पुरानी और बहुत बार पढ़ी हुई है ..पर आज भी उतनी ही सच है ,जितनी कल थी

  25. ब्लॉग बुलेटिन की फदर्स डे स्पेशल बुलेटिन कहीं पापा को कहना न पड़े,”मैं हार गया” – ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !
    टिप्पणीकर्ता blog bulletin ने हाल ही में लिखा है: कहीं पापा को कहना न पड़े,”मैं हार गया” – ब्लॉग बुलेटिनMy Profile

  26. पितृ दिवस को समर्पित बेहतरीन व सुन्दर
    रचना
    शुभ कामनायें…

  27. मेरा पापा के लिए हर उम्र की सोच बहुत ही सार्थक ढंग से और एक यथार्थ को दर्शाती हुई आपकी परस्तुति वाकई सराहनीय है और बहुत पसंद आई .

  28. क्या बोलूं ! अपुन तो माता जी हैं . पिता जी के लिए क्यों बोले??? माता दिवस पर बोलेंगे.
    पर………..स्पेशल डेज़ पर इतनी पोस्ट्स आती है कि……….. अच्छे आर्टिकल्स भी पढ़ने से चूक जाते हैं. फैशन हो गया है स्पेशल डेज़ पर लिखना.
    हर व्यक्ति अपने माता पिता को इन ख़ास दिनों में या बातचीत में महान बतलाता है फिर वो बुज़ुर्ग कौन है जो अकेले रह रहे हैं. जिनकी मौत के बाद पास पड़ोसी या रिश्तेदार बच्चो को खबर देते हैं कि समय हो तो आ जाओ.
    उफ्फ्फ मैं अचानक एकदम अपसेट हो गई हूँ. सॉरी

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