भिलाई के युवकों द्वारा मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण का विश्व रिकॉर्ड

आखिरकार 11 माह तक मोटरसाइकिल पर दुनिया की सैर के अंतिम चरण में तली हुई टिड्डियों, रात की रंगीनी और मेक्सिको की सुंदरियों से मिल 2 अप्रैल 1985 की दोपहर पौने दो बजे, भिलाई के सुनील थवानी तथा अनिरुद्ध गुहा, बम्बई में हवाई जहाज से उतरे। विश्व भ्रमण का शानदार समय बिताने के बावज़ूद घर वापस आना भावविभोर कर रहा था

कुछ दिन आराम करने व 6 अप्रैल को अपनी सहयोगी रही मोटरसाइकिल शिपिंग कार्पोरेशन के जहाज से ले, वह 10 अप्रैल को निकल पड़े बम्बई से और चल दिए मद्रास की ओर (तब यही नाम हुआ करते थे मुम्बई और चेन्नई के)

कोल्हापुर- इस्लामपुर होते हुए वे 11 अप्रैल को रूके कर्नाटक के हिरिया में लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाऊस में, जहाँ अनिरूद्ध को उपहार स्वरूप दी गई घड़ी चुरा ली गई। 12 अप्रैल 1985 को वे थे मद्रास से 165 किलोमीटर पश्चिम श्रीपेरम्बदूर में, जहाँ कुछ वर्षों बाद 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की नृशंस ह्त्या की गई।

12 अप्रैल को मद्रास पहुँचने पर एस्कॉर्ट लिमिटेड द्वारा होटल चोला शेरटन में आयोजित एक स्वागत समारोह में शामिल हुआ गया। यहीं एस्कॉर्ट द्वारा इन्हें दिया गया उपहार चुरा लिया गया


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होटल चोला शेरटन के बाहर

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समाचारपत्रों में एस्कॉर्ट लिमिटेड द्वारा जारी बधाई संदेश

डनलप द्वारा इन्हें ले कर एक विज्ञापन की रूपरेखा पर अधिकारियों के साथ मीटिंग कर वे 14 अप्रैल को रवाना हुए भिलाई के लिए। सूचना पहले ही पहुँचा दी गई थी कि 17 अप्रैल की शाम 4:30 तक भिलाई पहुँच जाएँगे। (आज से ठीक 25 वर्ष पहले!)



15 अप्रैल को आंध्र प्रदेश के Chilakalurpeta होते हुए वे 16 अप्रैल को पहुँचे सुकमा, जहाँ राह चलते एक बछड़े से इनकी मोटरसाइकिल भिड़ गई। 17 अप्रैल की सुबह वे जगदलपुर से भी 100 किलोमीटर दूर थे।
बमुश्किल 50 किलोमीटर की रफ़्तार के लिए बनीं बस्तर की धूल भरी राहों पर इनकी मोटरसाइकिल के स्पीडोमीटर की सुई 60 से 100 बीच ही झूलती रही।
जगदलपुर से पहले ही पेट्रोल खतम हो गया! किसी तरह गांव वालों की चिरौरियां करने के बाद कामचलाऊ पेट्रोल ले कर आगे बढ़े तो मोटरसाइकिल का पिछला टायर पंक्चर हो गया।
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बस्तर की सुनसान राहों पर

स्थानीय निवासियों से बतियाते, अनिरुद्ध मोटरसाइकिल की रखवाली करते रहे और सुनील पास के एक गांव से पंक्चर बनवा कर लाए। दो घंटे इसी में गुजर गए थे। समय कम ही बचा था। अंधाधुंध बाईक दौड़ाते हुए अनिरुद्ध केशकाल घाटी की सुंदरता में ऐसा खोए कि कई बार सड़क से उतरते बचे। तापमान बढ़ता जा रहा था। 40 डिग्री के ऊपर तो रहा ही होगा। साइकिल, ट्रक, जानवर सब पलक झपकते बाजू से निकले चले रहे थे।

आखिर ठीक 4:25 पर वे पहुँचे भिलाई की पावर हाऊस रेल्वे क्रॉसिंग, जो मुश्किल से डेढ़ किलोमीटर दूर था इस्पात भवन में इंतज़ार कर रही उत्सुक भीड़ से।

यह बाद में ज्ञात हुया कि भिलाई में प्रवेश के सभी स्थानों पर पुलिस के दस्ते लगाए गए थे, जिन्हें जिम्मेदारी दी गई थी कि इनके पहुँचने की सूचना प्रशासनिक उच्चाधिकारियों को दी जाए।

रेल्वे क्रॉसिंग पर इंतज़ार करते मिले इनके दोस्त राकेश अस्थाना तथा आशीष दत्ता। यहाँ से वे पहुँचे शिवनाथ नदी के किनारे जहाँ इनके दोस्तों का पूरा गैंग अपने अपने मोटरसाइकिल और स्कूटरों के साथ मौज़ूद था।

वे वापस लौटे एक जूलूसनुमा रैली की शक्ल में। शोर मचाती भीड़ ने इनका स्वागत किया। हर शख्स इनसे हाथ मिला कर अपनी खुशी जाहिर करना चाहता था।

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प्रबंध निदेशक श्री के आर संगमेशवरन द्वारा स्वागत

तत्कालीन प्रबंध निदेशक श्री के आर संगमेशवरन ने इनका स्वागत किया।

तमाम अनिश्चिततायों और संभावनायों से लौट कर, पारिवारिक सदस्यों से करीब एक साल बाद मिलते हुए आंखें बरबस ही छलछला आईं। धन्यवाद दिया इन्होंने अपने प्रबंधन को, जिन्होंने यह विश्व भ्रमण का अविस्मरणीय मौका प्रदान किया

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SAIL मुख्यालय में उल्लास का माहौल

 

इस विश्व भ्रमण की औपचारिक समाप्ति के लिए वे 22 अप्रैल को चल पड़े भिलाई से दिल्ली। 23 अप्रैल को इस अभियान की आखिरी रात बिताई गई आगरा में

24 अप्रैल की शाम 4:30 को भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) के तत्कालीन अध्यक्ष श्री एस समरपुंगवन व सहयोगियों ने, मुख्यालय के प्रांगण में इनका स्वागत किया।

इस तरह दोपहिये पर विश्व भ्रमण का यह अध्याय खतम हुआ। साढ़े ग्यारह माह तक चले इस अभियान में सड़क पर 50,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी 22 देशों की यात्रा करते हुए नापी गई।

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25 अप्रैल 1985 को Hitvada की खबर

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तत्कालीन केन्द्रीय इस्पात मंत्री श्री बसंत साठे द्वारा स्वागत

बाद में, इन्हें मौका मिला इस्पात राज्य मंत्री के नटवर सिंह, केन्दीय इस्पात मंत्री वसंत साठे द्वारा सम्मानित किए जाने का।

और अंत में, तब तक प्रधानमंत्री बन चुके श्री राजीव गांधी से मुलाकात हुई 3 मई 1985 को

मोटरसाइकिल से किये गए विश्व भ्रमण के संस्मरणों को कुल 10 आलेखों में संजोया गया है. सारे आलेखों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें»

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यह तो था 25 वर्ष पहले सुनील थवानी तथा अनिरुद्ध गुहा द्वारा मोटरसाइकिल पर किया गया विश्व भ्रमण, जो लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज़ किया जा चुका है।

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अब बातें की जाएँ कुछ अपनी। कुछ साथियों ने इन दोनों जाँबाज मोटरसाइकिल सवारों का का परिचय जानना चाहा है। आइए मिला जाए।

 

aniruddh-guha-world-recordअनिरुद्ध गुहा उर्फ़ बॉबी का जनम 11 जनवरी 1958 को हुआ था। स्कूल की पढ़ाई हुई थी भिलाई में और मेकेनिकल इंजीनियरिंग इन्होंने की है राऊरकेला के रीज़नल इंजीनियरिंग कॉलेज से।

इस विश्व भ्रमण वाले अभियान के बाद वे 1988 में भिलाई-दिल्ली-जम्मू-श्रीनगर-करगिल-लेह-खरदुंगला-केलेन्ग़-मनाली-दिल्ली-भिलाई के रास्ते दुनिया की सबसे ऊँची सड़क खरदुंगला पास पर पहुँचने वाले 19 दिवसीय अभियान के सदस्य भी रह चुके हैं।

अपने करियर से संतुष्ट, फिलहाल वे भिलाई इस्पात संयंत्र में डिप्टी जनरल मैनेजर हैं। इनसे फेसबुक पर मिला जा सकता है।

sunil-thawani-world-recordसुनील थवानी उर्फ़ जिमी की जनमतिथि 4 जून 1957 है। उन्होंने स्कूल के दिन बिताए हैं दिल्ली में और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से डिग्री ली है।

वे Business Excellence Awards के Senior Examiner and Team Leader हैं, Sheikh Khalifa Excellence Award तथा Dubai Quality Award के मेम्बर ऑफ़ ज़्यूरी रह चुके हैं, American Society for Quality (ASQ) से Six Sigma Black Belt प्राप्त हैं, QMS:2000, IRCA के Principal Auditor हैं तथा उन्हें 2001 में विश्व के Who’s Who of Professionals सूची में रहने का सम्मान प्राप्त है।

वे दुबई में व्यवसायी हैं। इनसे फेसबुक पर मिला जा सकता है।

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इस कड़ी को मिला कर कुल 10 कड़ियों में आई, मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण के विश्व रिकॉर्ड वाली यह श्रंखला आपको कैसी लगी? बताईएगा। सारे आलेखों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें»

भिलाई के युवकों द्वारा मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण का विश्व रिकॉर्ड
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मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

  1. भिलाई के युवकों द्वारा निर्मित विश्व रिकॉर्ड की रजत जयंती: विशेष लेख-माला
  2. भिलाई के युवकों द्वारा निर्मित विश्व रिकॉर्ड: सलाहें, योजना व तैयारी
  3. भिवंडी के दंगे, विश्वमोहिनी और विदेशी धरती पर पहला कदम
  4. पिरामिड, पोप का आशीर्वाद और वेनिस की नहरें
  5. बीयर की दीवानगी, मोटरसाइकिल का बिगड़ना और रात का वह नज़ारा
  6. बाईक रैली के पुरस्कार, जर्मन युवती और बुल फाईट
  7. मोनालिसा की मुस्कान, प्रिंस हैरी का जनम और शेरवुड के जंगल
  8. नियाग्रा जलप्रपात, चांद से लाई चट्टान और कनाडा का चांदनी चौक
  9. तली हुई टिड्डियाँ, रात की रंगीनी और मेक्सिको की सुंदरियाँ
  10. भिलाई के युवकों द्वारा मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण का विश्व रिकॉर्ड
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भिलाई के युवकों द्वारा मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण का विश्व रिकॉर्ड” पर 11 टिप्पणियाँ

  1. बताईये, इसी में चोरी भी हो गई…बड़ी रोमांचकारी यात्रा रही. अभी कुछ पहले के छूट गये हैं, वो भी पढ़ता हूँ.

  2. बधाई दोनो जांबाजो को और साथ मे आपको भी जिन्होने २५ साल बाद हमे दुनिया घुमवाई मोटर साइकिल से

  3. बहुत सुंदर यात्रा,मेने आप के इस यात्रा वाले सभी लेख पढे, लेकिन हिन्दी की सुबिधा ना होने के कारण टिपण्णी ना दे सका, इस यात्रा मै बहुत से स्थान तो हम ने भी देखे है, इस लिये पढते समय ऎसा लगा जेसे हम भी साथ साथ मै है.
    धन्यवाद

  4. जानकारी के लिए आभार. ऐसा कल, हमेशा ही लालायित करने वाला होता है.

  5. सुनील थवानी तथा अनिरुद्ध गुहा जी की इस रोमांचकारी एतिहासिक यात्रा की सभी कडिया आज फिर से पढा. दोनो जांबाजो को हमारा सलाम. आपने इनकी यात्रा वृत्तांत बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत की है, इस यात्रा के साथ साथ यह यात्रा-विवरण भी एक एतिहासिक दस्तावेज बन रहा है. भ्रमण का नक्शा व स्थानो के सम्बन्ध मे विवरण हिन्दी नेट प्रयोक्ता भविष्य के पर्यटको के काम आयेगा.
    सुनील थवानी तथा अनिरुद्ध गुहा जी एव पाबला जी को बहुत बहुत धन्यवाद.

  6. जबर्दस्त रहा यह सफ़र -लोग नाहक कहते हैं की ई यूं पी वाले बड़े चोर होते हैं -दिल भले चुराते हों -ई छोटी मोटी चीज ,छिः छिः !

  7. एक दो प्रविष्टियाँ मेरी भी छूट गयी हैं ! पहले उन्हें पढ़ता हूँ !
    इस विश्व-रिकॉर्ड का मोहक विवरण लिखा आपने ! पूरा सफर रोमांचक रहा ! आपके इस ब्लॉग की थाती बन गया है यह विवरण सदा के लिए !
    आभार ।

  8. बहुत बहुत शुभकामनाएँ!

  9. ई-मेल पर प्राप्त प्रतिक्रिया:

    पाबला जी ,आप ने जिंदगी के मेले के माद्ध्यम से श्री गुहा और थानवी के साहसपूर्ण विश्व भ्रमण को जिस प्रकार सचित्र प्रस्तुत किया वह रहस्य रोमांच साहस ओर विवेक का अद्भुत उदहारण है .मोटरसाइकिल ने इस यात्रा को प्रेरक बना दिया है. बधाई.

    -सुरेश यादव

  10. Thanks for a wonderful memoir . I also love to roam around on Motorcycle , but never for any record sake . Incidentally, i also have a Yamaha!

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