ललित शर्मा की टाँगे खींच कर टंकी से उतारा गया: क्योंकि सीढ़ी वह साथ ले कर चढ़े थे :-)

उस दिन संगीता पुरी जी की वह पोस्ट पढ़ रहा था जिसमें उन्होंने बुद्धिजीवी ब्लॉगर भाइयों को प्रभावित करने में बुध ग्रह के एक प्रभाव की बात करते एक लेख लिखा था। ज्योतिष की अधिकतर शब्दावली तो अपने पल्ले नहीं पड़ती। सीधा सीधा जो कुछ समझ पाया उससे यह चिंतन करने बैठ गया कि अपने यहाँ किसको बुद्धिजीवी माना जाए 🙂

अब चूंकि बात भाईयों की थी, सो बहनों की ओर ध्यान ही नहीं दिया! अभी कुछ देर ही हुई थी कि ललित शर्मा जी का नाम दिखाती मोबाईल कॉल आ गई। हैलो करते ही सूचना मिली कि बोरिया बिस्तर समेट लिया है जय राम जी की, अब हम चले टंकी पर, वहीं आराम करेंगे। मैंने सोचा तो यह है बुध ग्रह का पहला शिकार।

मैंने कारण पूछा, तो कारण बताया गया। कारक रूपी लघू टिप्पणी पर निगाह पड़ी तो बुदबुदाया कि समय के हिसाब से तो यह है पहला शिकार। ललित जी की प्रतिक्रिया तो उसके बाद आई है ना!

तब तक ललित जी टंकी पर जा चुके थे। सीढ़ी भी ऊपर ही खींच ली थी कि कोई उन तक पहुँच ना सके! अरे सीढ़ी माने टिप्पणी विकल्प।

lait sharma bspabla

एक दिन तो बीत गया। संगीता पुरी जी, पं. डी के शर्मा ‘वत्स’ तक पुकार लगाई। संगीता जी ने कह दिया कि आपका भी नम्बर है प्रभावित होने वालों में। अब हम क्या बताते उन्हें कि हम भी हाथ पर हाथ धर कर बैठ गए हैं और वापस रायपुर पहुँचना हुआ तो पता चला कि अभी वक्त बचा है भिलाई लौटने के लिए। अनिल पुसदकर जी को फोन लगाया गया। 10 मिनट में ही पहुँचना हो गया उनके ऑफिस। ललित शर्मा जी वाले मामले सहित, ब्लॉग जगत की ताज़ा हलचलों पर वाद-संवाद हुआ तो कुछ और बातें पता चलीं।

अब बात यह है कि कतिपय आपसी गलतफहमियों के कारण टंकी पर ऊपर जाते हुए और फिर नीचे पकड़कर उतारते हुए ललित जी को कुछ दिख गया है। और फिर अभी मरहम-पट्टी भी बाकी है, सो वह आराम करते हुए ब्लॉग जगत पर निगाह तो रखेंगे लेकिन लेखन स्थगित रख रहे। कुछ दिनों बाद वे, इस दौरान इक्कठा की गई ऊर्जा से पुन: ब्लॉग जगत में धमाल मचाएँगे।

बताईए, टाँगे खींच कर ठीक किया?
ललित शर्मा की टाँगे खींच कर टंकी से उतारा गया: क्योंकि सीढ़ी वह साथ ले कर चढ़े थे 🙂
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ललित शर्मा की टाँगे खींच कर टंकी से उतारा गया: क्योंकि सीढ़ी वह साथ ले कर चढ़े थे :-)” पर 49 टिप्पणियाँ

  1. बहुत बढ़िया किया जी टांग खींच कर…अब इन्तजार रहेगा कब उर्जा वापस इक्कठी हो!!

  2. आपका हज़ूर मैं शुक्र गुज़ार हू
    यकीन करें न करें मै तो माल गुज़ार हूं

  3. आज, रविवार को रायपुर में एक पारिवारिक कार्यक्रम था। समय निकाल कर पहुँच गए ललित शर्मा के घर। बातें हुईं तो ठीक ठीक पता चला कि मामला क्या है। हमें, टंकी पर उनका यूँ बैठ कर टाँगे लहराते हुए मुस्कुराना पसंद नहीं आया, सीढ़ी थी नहीं, सो टाँगे पकड़ कर नीचे खींच लिया। गिरते ही वे और जोर से मुस्कुराए और गले लग कर बोले कि अपना यही स्टाईल है उतरने का। मैंने भी ठहाका लगाया और बताया कि भाया अपना भी यही स्टाईल है उतारने का 🙂

    एक दम मस्त अंदाज

  4. भाई अब टंकियां बहुत ऊँची हो गयी हैं किसी को उतारने में भी डर लागे है -कहीं ससुरा अपुना तो जाए ही ले आने को भी घसीट ले जाए -फिर भी आपने इस मुश्किल काम को अंजाम किया और भले चंगे मुस्कुरा रहे हैं -कलेजे को ठंडक पहुँची -ललित जी को अभी कुछ दिन आराम करवाईये !

  5. चलिए पाबलाजी की मेहनत रंग लाई और अदृश्य शक्ति ने अपना कमाल दिखाया…शेर सिंह जी को नीचे खींच लिया गया…मुझे तो डर ये है कि शेर सिंह जी अब अपने डैन में जाकर शूटिंग राइफल्स को तेल पिलाना न शुरू कर दें…न जाने कितनी खालें दीवार पर और न लटक जाएं…

    पाबला जी मुझे तो एक बुलेट प्रूफ जैकेट दिलवा दीजिए…

    जय हिंद…

  6. टांगे खींच कर तो ठीक किया
    एक बुलडोजर लेकर
    ब्‍लॉगजगत की सारी टंकियों को
    कर दिया जाए धराशायी
    जब टंकियां नहीं रहेंगी तो
    क्‍या वे ताजमहल पर चढ़ेंगे
    वहां पर तो सीढि़यां बनी हुई हैं
    अपनी सीढि़यां लेकर जाना मना है
    उन्‍हीं सीढि़यों से काम चलाना है
    वे सीढि़यां बहुत चौड़ी हैं
    वहां पर से उतारने में
    टांगे पकड़कर खींचने की
    जरूरत नहीं है

    दो आदमी गोद में
    उठाकर ला सकते हैं
    पोस्‍ट में उठाते हुए
    फोटो को भी जमा सकते हैं

    हमें तो बस अब पहली
    पोस्‍ट का इंतजार है
    टंकीरिटर्न ललित शर्मा जी
    सबसे पहले एक बुलडोजर मंगवाएं
    वे खुद ही सारी टंकियां तुड़वाएं
    जिससे खुद तो न चढ़ें
    और न अन्‍यों को चढ़ने दें
    फिर हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग को
    तेज से भी तेज गति में
    शिखर की ओर चढ़ने-बढ़ने दें।

    जय हो महामूंछों वाले हिन्‍दी ब्‍लॉगर की
    और साथ में जय हो पाबला जी की
    जिन्‍होंने ललित जी को पा ही लिया।

  7. आखिरकार आपकी मेहनत रंग ले ही आयी .. अविनाश वाचस्‍पति जी सही कह रहे हैं .. सारी टंकियां तुडवायी जानी चाहिए !!

  8. अजी ललित भैया भला कहाँ जायेंगे ।
    अब एक छोटा सा ब्रेक ले लें तो क्या गलत है।

  9. टंकी ज्यादा उँची नहीं थी। वरना कैसे टांग खैंच पाते। अच्छा हुआ, जमाई साहब नीचे आ गए। वरना हम को पापड़ बेलने पड़ते।

  10. यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे…छोड़ेंगे … दम अगर …..तेरा साथ न छोड़ेंगे…. हम तो ललित जी को फोनिया के थक गए… लेकिन फोन नहिये उठा….


    http://www.lekhnee.blogspot.com

    Regards…

    Mahfooz..

  11. ओह, आज ही पता चला कि आप तंग खिंचाई में भी उस्ताद हैं.. आगे से संभल कर चलेंगे.. 😀

  12. पाबला साहब आपने शेर की टांग खींचकर अच्छा नही किया. शेर को कुछ दिन विश्राम करवाते. यहां कई लोगों को चैन रहता. नाहक गर्मी मे आप ने कई लोगों की नींद उडा दी.

    बडी मुश्किल से तो टंकी आरुढ करवाया गया था.:) वैसे भी आजकल टंकियां इतनी ऊंची हैं कि कोई चढने को ही राजी नही होता.:) चार छ दिन तो मजे लेने देते.:)

    बहुत धन्यवाद आपको.

    रामराम.

  13. असरदार आदमी को उतारने के लिये सरदर की ही जरूरत थी. देश का सरदार अमेरिका चला गया पर ब्लोग जगत का सरदार अपने काम मे सफ़ल रहा.
    बधाई आपको भी और हम सबको भी.

  14. बहुत ही नेक काम किया है आपने , अब ब्लॉग जगत का माहौल जो बोझिल हो गया था, ठीक हो जायेगा. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया.

  15. ना ये टन्की होगी ना ब्लोगर चढेन्गे
    ना टान्ग खीचने को हम मज़बूर होन्गे


  16. दार जी, वड्डा चँगा कित्ता !
    कृपया टाँग खिंचाईं की रेट बतायें ।
    ब्लॉगजगत में आप काम के अकेले आदमी सरदार हैं ।
    क्या सकारात्मक उद्देश्य के अलावा हिसाब बरोबर करने की टाँग खिंचाईं की सेवायें हैं ?
    यदि ऎसा है, तो अपना आपात्काल दूरभाष सँख्या साइडबार में लगायें । क्या भविष्य में टाँग तुड़ाई की सेवायें प्रदान करने की भी योजना है ?

  17. सानूं तां जी पैले ही पता सी, बाकी क्रेडिट तुसी जरूर लओ जी,
    बधाई।

  18. @ डॉ अमर कुमार

    ਕਾਫੀ ਦਿਨਾ ਬਾਦ ਗੇੜਾ ਲਾਯਾ!

    टांग़ खिंचाई अलग अलग तरीके से होती है
    -फिज़ियोथेरेपिस्ट के पास
    -केकड़े के जार में
    -दोस्तों-यारों के बीच
    -सुपीरियर के सामने
    वगैरह वगैरह

    रेट तो सबके तय है कोई बदलाव नहीं हुआ है

    हिसाब बराबर करने को टांग खिंचाई तो तभी होगी जब मेरी टांग खिंचाई होगी

    भविष्य में टांग तुड़ाई की कोई योजना नहीं है क्योंकि पहले ही कई ठेके लिए हुए हैं कुछ भाई व उनकी बहनों ने। कम्पटिशन बहुत तगड़ा है जी। अपन नहीं कर पाएंगे यह टाँग तुड़ाई का धंधा

  19. पाबालाजी ये एक और अछ्हा काम किया आपने। लोगो ने तो कोई कसर नहीन छोडि थी आग लगाने में।आप ही थे जो आगे बढ़ कर सब ठिक कर दिया
    असिए ही टांग खीचते रहेन आप
    ललित बाबू की धमादेदार चर्चा का वेट करना पडेगा अभी

  20. ye accha hua ki janab tanki se itni aasani se aur jaldi utar aaye,
    shubhkamnayein unhe……..
    baki batein aap logo me anil bhaiya me to ho hi gai hoingi ki mool maamla kya tha….

  21. …. आपका प्रयास जल्दी ही सार्थक हो … अगर ललित भाई ने लिखना शुरु नहीं किया तो हम उनके ऊपर ही लिखना शुरु कर देगें… और ऎसा ऎसा छापेगें कि बौखलाहट में उन्हे आना ही पड जायेगा … ललित भाई एक पोस्ट "फ़र्राटेदार" चिपका दिया जाये!!!

  22. बहुत बढ़िया किया जी टांग खींच कर 🙂

  23. ab bloggers bhi media se prabhavit ho rahe hain… ipl… bollywood…. channels type ka stunt yahan bhi ho raha hai… iss se lag raha hai ki hum sahi raaste jaa rahe hain….

  24. किसी दूसरी पोस्ट पर चले गई टिप्पणी

    हम भी डायरेक्ट बिना सीडी (sidhee नही छप रहा तो हम क्या करें?) के उपर चढ़ गए और पहुँच गए ललित जी के पास.और बोले -'' बहुत नही जानते हम आपको,पर..हम भी डिफेन्स वालों की फेमिली से ही है चाचा,बड़े पापा(३),उनके तीन बेटे हमारे अपने पापा सभी इंडियन एयर फ़ोर्स, आनमि और नेवी मे थे और अभी भी है. दादी सीहोर राज घराने के दीवान की बेटी थी .बोल्डनेस,कोंफिडेस और डेअरिंग नेचर हमने उन्ही से विरासत में पाया है. डरना तों सिखाईच नही .खुद से डरते हैं या ईश्वर से.

    जैसा सुना ,पाया कि ललितजी भी बहुत कुछ हमारे जैसे ही है,फिर??????
    यहाँ ब्लॉग की दुनियां में राजनीती,दाव पेच ,उठापटक खूब चलती है ये भी सुना और पढा.
    किन्तु हम उनसे डर जाएँ ?

    हम तों एक बात जानते एक अच्छा व्यक्ति डर कर अच्छाई छोड़ता है तों उसकी बिरादरी कम होती है.यूँ ही तों बुरे या बिना अच्छाई वालों की संख्या बढती जाती है.क्या आप भी वही चाहेंगे.हर फील्ड में गंदगी बढने का एक मात्र कारण मुझे यही दिखा कि अच्छे लोगों ने आगे आना ही नही चाह या वे पीछे हट गए.मुझे नही मालुम आपने ये फैसला क्यों लिया,पर आप जैसा व्यक्ति ????

    अरे! हमें कौन बचायेगा आप जैसे लोगों के कारण तों हम खुद को अकेला नही समझते आपकी इस दुनिया मे कि हाँ हैं कुछ लोग जो हमें उसी तरह सुरक्षा देंगे जैसे आज सेना के कारण देश की जनता सुख चैन से सो पाती है क्योंकि 'वो' जग रहे हैं.

    ऐसा ना करो भैया जी .नही तों टंकी पर चढना हमें भी आता है और हमें तों किसी सिढ+ई की भी जरूरत नही, समीर दादा, पाबला भैया पद्मसिंहजी और आप जैसे मित्र, वीरजी के कंधो पर पैर रखा और फुदक कर टंकी पर .वैसे पाबला भैया है ना. फिकर नोट उतार लाएं है पेन भी पकड़ा देंगे.अरे सिपाही हथियार से और लेखक कलम से कितने दिन रह सकते हैं?

    आ जाइए वापस प्लीज़ ललितजी /दादा/ भैया/मेरे बाप

    इंदु पुरी

  25. ललित जी के दूसरे लेख का इंतज़ार रहेगा ! शुभकामनायें पाबला जी की मेहनत को !

  26. ललित जी और अनिल जी को आपस में मिलवाने का कार्य सबसे अधिक पुनीत रहा! आपका धन्यवाद!

  27. अच्‍छा हुआ जो आप ललित जी को उतारने टंकी पर नहीं चढ़े। वरना टंकी धराशायी हो जाती है और आप दोनों बहते सो बहते पता नहीं कितने ब्‍लागरों को बहा ले जाते। शुक्रिया टांग खींचने के लिए। यह जरूरी काम है।

  28. @ राजेश उत्‍साही

    इसी लिए तो मैं टंकी नहीं चढ़ता कि इधर टंकी टूटी और उधर तमाशा देख रहे कितनों के ही हाथ-पैर टूटे 🙂

  29. बहुत से पावला जी चाहिये ब्लाग परिवार को .रुठे को मनाने को

  30. पाबला जी की फोटोकापियां करवा सकते हैं

  31. बहुत अच्छा किया जो उतार लाये टंकी से …welcome back 🙂

  32. शुक्र है उतरे तो सही! बस बादशाहो! अब जल्दी से इनकी मुश्कें कस दीजिए ताकि दोबारा से भागने की जुर्रत न करें 🙂

  33. बहुत बढ़िया किया टांग खींच कर.मैं शुक्र गुज़ार हू .बहुत बढ़िया

  34. सही बात समझ में आई
    सभी को बधाई!

  35. यह काम बहुत सही किया। इससे पहले कि किसी की टाँग टूटे, अब टंकी तुड़वानी ही होगी।
    घुघूती बासूती

  36. @ घुघूती बासूती
    टांग टूटना तो सहा भी जाए

    पर ब्‍लॉगिंग छूटना सहा न जाए

  37. "रूठने वाले से मनाने वाला बड़ा होता है " कोटेशन बाय शरद कोकास

  38. अरे ये कब हुआ ! पर्वतारोहण और टाँग खिचाई .

    कोई सुन तो नहीं रहा है श…..
    किसीने बताया की पानी की कमी के कारण ललित टंकी चेक कर रहे थे और आपने आव देखा न ताव
    टाँग खीच दी .
    वैसे अच्छा किया रात को तो ठंडक होती, दिन में लू लग जाती .

  39. टांग खिचाई का उद्देश्‍य अच्‍छा है तो अच्‍छी ही कही जाएगी 🙂

  40. ha…ha….ha…ha…ha….ha…ise hi to kahate hain asli taang khichaayi….varnaa taang khichne vaale to baahar kar dete hain taang kheenchkar…..!!

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