भिवंडी के दंगे, विश्वमोहिनी और विदेशी धरती पर पहला कदम

अपने क्षेत्र में ढेरों कीर्तिमान बना चुके भिलाई के दो नवयुवकों द्वारा अपनी नौकरी के शुरुआती दिनों में मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण के अभियान का इरादा बना था जून 1983 में.

इस सफल अभियान के समापन की रजत जयंती पर लिखी जा रही विशेष लेख-माला में अब तक आप पढ़ चुके हैं कि कई रोचक टिप्पणियाँ और सलाहें के बीच  किस तरह उन्होंने इसकी तैयारी की।

तमाम बाधाओं को पार करते हुए आखिरकार वह दिन आ ही पहुँचा जब 8 मई 1984 की सुबह 10:15 पर तत्कालीन इस्पात व खान मंत्री श्री एक के पी साल्वे ने दिल्ली के लोधी रोड स्थित ‘भारतीय इस्पात प्राधिकरण’ के मुख्यालय से हरी झंडी दिखा कर इन नौजवानों को लगभग एक वर्ष के इस साहसिक अभियान पर रवाना किया

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SAIL मुख्यालय, दिल्ली से रवानगी

उस रात वे दुर्दांत चंबल क्षेत्र को पार करते हुए जा पहुँचे ग्वालियर व 10 मई की सुबह इनकी मोटरसाइकिल की आवाज़ गूँजी भिलाई में।


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नवभारत में 13 मई 1984 की खबर

18 मई को भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से तत्कालीन प्रबंध निदेशक द्वारा इस अभियान को हरी झंडी दे बढ़ाया गया। रिश्तेदारों, सहकर्मियों, शुभचिंतकों की भीड़ ने हर्षोल्लास के साथ इन्हें भावभीनी विदाई दी।

इसी भीड़ का एक हिस्सा मै भी था

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भिलाई मुख्यालय से रवानगी

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मुम्बई की ओर, भिलाई की सीमा पर शिवनाथ नदी के पुल पर

नागपुर-मुम्बई की ओर 80 किलोमीटर की रफ़्तार से भागती मोटरसाइकिल पर सवार सामना कर रहे थे 47 डिग्री सेल्सियस के तापमान का।

चिलचिलाती धूप में जलती चमड़ी व मृग-मरीचिका का अनुभव लेते हुए यह जोड़ी ग्लूकोज़ तथा नीबू-पानी गटकते हुए उस शाम जा पहुँची अमरावती।

20 मई की दोपहर से पहले जब मुम्बई से 90 किलोमीटर पहले शाहपुर में दस्तक दी गई तो पता चला कि मुम्बई-भिवंडी में दंगे भड़क चुके हैं व पूरा क्षेत्र कर्फ़्यू की चपेट में है।

सलाह दी गई कि वापस लौट जाओ। पर मतवाले कहीं मानते हैं। जोखिम उठाते हुए भिवंडी तक पहुँचे तो पता चला कि कर्फ़्यू उठा ही है। धधकते शहर की सुलगती इमारतों को देखते हुए भारी तनाव के बीच चेम्बूर पहुँचे पौने दो बजे -और दो बजे कर्फ़्यू फिर लागू हो गया।

एम वी विश्वमोहिनी पर

तमाम औपचारिकताओं के बाद 28 मई को शिपिंग कार्पोरेशन के जहाज, एम वी विश्वमोहिनी पर जगह मिली शानदार केबिन में। अगली सुबह 10:20 पर रवानगी हुई पोर्ट स्वेज़ के लिए।

डेक पर सामने की ओर खड़े, होंठों पर नमकीन सा स्वाद महसूस करते, मटमैले पानी को पहले हल्के हरे, फिर गहरे हरे और फिर गहरे नीले रंग में बदलते हुए देखते रहे। चेहरे पर उल्लास और रोमांच साफ देखा जा सकता था। फिर भी कहीं सोच उभरी कि एक वर्ष के लिए तो बेड़ियाँ पड़ गईं!

जहाज अपनी पूरी रफ़्तार से चला जा रहा था। समुद्र की लहरों से अठखेलियाँ करती मछलियाँ मानो एक अतिरिक्त उपहार हो नज़रों के लिए।

1 जून को इस यात्रा में समुद्र का 5.2 किलोमीटर गहरा हिस्सा पार किया गया। 3 जून को अरब सागर पार करते हुए 5 दिनों में पहली बार जमीन के दर्शन करने को मिले तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल था।

लाल सागर के बाब-एल-मंडेब (आँसुयों का द्वार, Gate of Tears, باب المندب) जलडमरूमध्य से गुजरते हुए, दूरबीन की सहायता से, निगाहें दाईं ओर यमन व बाईं ओर सोमालिया की भूमि पर रहीं।

6 जून को पोर्ट स्वेज़ पर लंगर डाल दूसरे दिन पोर्ट सईद के लिए रवानगी हुई। स्वेज़ नहर से गुजरते हुए बाईं ओर आधुनिक स्वेज़ शहर को देखा जा सकता था।

ठीक दूसरी ओर दिख रहा था मीलों दूर तक युद्ध और तबाही के चिन्ह लिए सिनाई प्रायदीप का रेतीला मैदान और युद्ध को तत्पर मिस्त्र के सैनिकों का जमावड़ा।

मोटरसाइकिल से किये गए विश्व भ्रमण के संस्मरणों को कुल 10 आलेखों में संजोया गया है. सारे आलेखों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें»

आखिरकार उस शाम पोर्ट सईद पहुँच ही गए और अगले दिन, 8 जून को तड़के 3 बजे जानकारी मिली कि हमें तुरंत, एक दिन पहले ही, जहाज छोड़ना होगा।

जहाज से उतर विदेशी धरती पर पहला कदम रखा, कस्टम आदि की औपचारिकता से निपट कर मोटरसाइकिल के टायरों में हवा डलवाई और सवार हो रवाना हो गए मिस्त्र की राजधानी काहिरा की ओर

अब तक का सफर कैसा रहा, बताईएगा!

… और फिर चलिए सफर में आगे, जहाँ है पिरामिड, पोप का आशीर्वाद और वेनिस की नहरें

भिवंडी के दंगे, विश्वमोहिनी और विदेशी धरती पर पहला कदम
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भिवंडी के दंगे, विश्वमोहिनी और विदेशी धरती पर पहला कदम” पर 11 टिप्पणियाँ

  1. बस अब यह यात्रा जारी रहे
    हम भी साथ साथ चल रहे है।

  2. बहुत मजेदार रोमांचकारी सफर चल रहा है. आगे इन्तजार है.

  3. मोटर साइकिलें बहुत तेज दौड़ रही हैं। चित्र में आप की शक्ल कहीं नजर नहीं आई। वापसी के जलसे तक इंतजार करते हैं।

  4. लो शुरू हो गयी एक और' अराउंड द वर्ल्ड इन ८० देस ' जैसा एक वास्तविक रोमांचक सफ़र

  5. गजब सर एकदम गजब ….पिछली सारी कसर पूरी हो रही है पोस्टों की खुराक की । वर्ष की चुनिंदा पोस्टों के लिए इसे भी सहेज रहा हूं सर । कल की प्रतीक्षा है
    अजय कुमार झा

  6. बहुत मजेदार जी अब यात्रा का मजा भी लेते है, मिश्र(मिस्त्र) से आगे की यात्रा का…

  7. पाबला जी, बहुत अच्छा लग रहा है. यदि आप इनके यात्रा संस्मरण चित्रों के साथ प्रस्तुत करें तो और भी अच्छा लगेगा…
    एक प्रार्थना और है.. फिर माइक्रोसाफ्ट वार्म ने हमला कर माइक्रोसाफ्ट वेबसाइट का खुलना बन्द कर दिया है. पिछली बार रजिस्ट्री एडिट कर उस वार्म को खोज कर हटा दिया था. यह पूरी प्रोसेस एक साईट से देख कर की थी.. अब अति-आत्मविश्वास के चलते फिर धोखा खा गया और वह प्रोसेस भी भूल गया..
    कृपया इस बारे में विस्तार से बताने और साल्यूशन देने की कृपा करें>..

  8. बेहद रोमांचकारी रहा होगा ये सफ़र,दंगे,गर्मी।बड़ी हिम्मत का काम किया था दोनो ने।

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