शरद कोकास जी से जबरन ली गई और सहर्ष दी गई जन्मदिन पार्टी

अलबेला खत्री जी के छत्तीसगढ़ प्रवास के अंतिम दिन जब मैं व संजीव तिवारी उन्हें विदा करने दुर्ग रेल्वे स्टेशन पहुँचे तो शरद कोकास जी ने सूचना दी कि वे भी आ रहे हैं स्टेशन। ट्रेन रवाना हो गई शरद जी का अता पता नहीं। बाहर आ कर उनके मोबाईल पर सम्पर्क किया गया तो पता चला कि वे अपनी कार पार्क कर रहे हैं। जब मुलाकात हुई तो वे सफाई देने लगे कि मोबाईल पर आ रहे बधाई वाले कॉल्स के कारण कार चलाने में बाधाएँ आ रही थीं इसीलिए विलंब हो गया। हमने कहा कि ट्रेन तो गई अब आप तैयारी करो जनमदिन की पार्टी देने की। दर असल उस दिन शरद कोकास जी का जनमदिन था।

शरद जी ने पहले झूठमूठ की आनाकानी की। कहने लगे कि पार्ट तो शाम – रात की होती है, सुबह सुबह क्या पार्टी? मैं और संजीव हाथ आया मौका कैसे छोड़ देते! बर्थडे बॉय को एक बार और छेड़ा तो लगा कि वे तो तैयार हो कर ही आए थे पार्टी देने के लिए!! फिर मनन शुरू हुया कि कहाँ चला जाए? दो तीन जगहों के बाद तय हुया मालवीय नगर में स्टेट बैंक के पास वाला शानदार रेस्तराँ।
रेस्तराँ पहुँच कर हमने अब तक छुपा कर रखा गया फूलों का गुलदस्ता निकाल लिया। बुके पा कर अचंभित हुए शरद जी फूलों जैसे खिल गए। हमारे स्वचलित कैमरे ने भी अपना कमाल दिखाया और बैटरी खतम होने की सूचना देते हुए दो चार चित्र ले ही लिए।

अब समस्या आई कि सुबह के 9 बजे ऐसा क्या मंगाया जाए कि पार्टी सरीखा लगे? मेन्यू कार्ड ने और उलझा दिया। तय यह हुया कि अभी हल्का फुल्का कुछ लिया जाए, रात की पार्टी बकाया रही। हमने मंगा लिया कुछ निरामिष और संजीव जी, शरद जी ने प्राथमिकता दी सामिष को। रेस्तराँ लगभग खाली था। मात्र एक विदेशी सज्जन अपनी धुन में ब्रेकफास्ट निपटा रहे थे, लेकिन हमारे सम्मिलित ठहाकों से कभी कभी चौंक कर देखते थे फिर मुस्कुरा पड़ते थे।

हंसी ठठ्ठे के बीच दुनिया जहाँ की बातें होती रहीं। बीच में शरद जी को बधाई वाली कॉल्स आती रहीं। इनमें अजय झा, दिनेशराय द्विवेदी जी जैसे ब्लॉगर भी शामिल थे। लेकिन जब कुछ ब्लॉगर मिल बैठे हों तो स्वभाविक है कि बातें घूम फिर कर ब्लॉगिंग पर आ ही जाती हैं। विषय आ टिका ब्लॉगवाणी प्रकरण पर। कुख्यात हो गए ज्ञान महाशय की भी चर्चा हुई। मैंने उसके शातिराना अंदाज़ के बारे में बताते हुए यह भी खुलासा किया कि कैसे उसने द्विवेदी जी को संदेश भेजा था और फिर मैंने द्विवेदी जी के साथ उसकी लोकेशन पकड़ी थी। ज्ञान महाशय द्वारा मेरे GTalk चैटबैक बैज पर मेहमान बन कर आना और जानकारियाँ लेकर एकाएक खिसक जाना संजीव जी को भी हैरत में डाल गया।
हम तीनों मज़े से दीन दुनिया की बातें कर रहे थे कि अचानक एक आह की आवाज़ आई। जब निगाहें गईं तो शरद जी अपना गाल थामे बैठे थे। पता लगा कि अंतिम कौर में कंकड़ आ गया। वे दौड़े कुल्ला करने और वेटर दौड़े पूछने कि क्या हुया सर! संजीव जी के हवाले भिलाई का एक प्रसिद्ध स्टार होटल है। उन्होंने तुरंत सबकी परेड ले ली। सहमा हुया सा स्टाफ एक तरफ खड़ा रहा और उनकी नारा

शरद कोकास जी से जबरन ली गई और सहर्ष दी गई जन्मदिन पार्टी
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शरद कोकास जी से जबरन ली गई और सहर्ष दी गई जन्मदिन पार्टी” पर 17 टिप्पणियाँ

  1. हा हा जन्मदिन की पार्टी वो भी सुबह सुबह बहुत ही बढ़िया आईडिया दिया है कि बर्थडे बॉय जब मिल जाये तभी उससे पार्टी ले ली जाये।

    ब्लॉगरों की पार्टी का अपना ही मजा है।

  2. भई पार्टी तो ठीक है … पर जबरदस्ती पार्टी?

  3. Sharad bhaiya …..mujhe bhi party chahiye……. ab mujhe bhi zabardasti belated party leni padegi….. hahahahahaha…… aur wo raat jab aayegi to is chote bhai ko bhi yaad kar lijiyega….. chota bhai lucknow se pahunch jayega…..

  4. बड़े मज़ेदार और असरदार …..सरदार हैं आप………. लिखने की अदा भी शानदार……… जिओ बादशाहो… शरद से पार्टी लेने का इंतज़ार करते हुए…

  5. कोटा होता तो हम सुबह सुबह ले गए होते कचौड़ियों की दुकान पर वहाँ खड़े-खड़े जो पार्टी होती तो सीधे कुछ मीठा या कोल्ड ड्रिंक की तरफ भगाती।
    आप लोग रात का इंतजार कीजिए। हम तो जिस रात शरद जी से मिलेंगे पार्टी वही पार्टी की रात होगी।

  6. बिलकुल जी , अगली बार बस मिस कॉल दे दीजियेगा…. कॉल करके पार्टी में पहुँच जायेंगे… और हा होटल और समय पिछली पार्टी से अलग रखियेगा……

    अगर नहीं बुलाया तो भी जरुर आएँगे जबरदस्ती पार्टी में ……!!!

  7. उस रात का इन्तजार रहेगा,
    शरद जी अब वो रात कब आयेगी जरा फ़ोन पे सुचना दे देना,

  8. अपने यहाँ पजाँब में एक कहावत है कि "अज ते झोटा चो लया" ।
    वैसे इस कहावत का आपकी इस पार्टी वाली पोस्ट से कुछ लेना-देना नहीं हैं, बस यूँ ही मन में आ गया तो लिख दिया 🙂

  9. वक्त का इन्तिज़ार है…कभी तो मौका मिलेगा ही आप सब से मिलने का.

  10. बहुत ही मजेदार रही यह पोस्ट । जन्मदिन की शुभकामनायें ।

  11. देखना भाई हो सके तो हमको भी याद कर लेना।

  12. शरद भाई इससे पहले कि पाबला जी गाना शुरू कर दें..इन्तेहा हो गई इंतज़ार की…आई न कुछ खबर मेरे यार की…ये हमें है पता बेवफा वो नहीं…फिर क्या वजह हुई इंतज़ार की…
    अपनी पार्टी तो हम खुद ही फाइव स्टार में ले लेते हैं और बिल शरद जी को कूरियर करा देंगे जैसे कि पाबला जी के बर्थडे पर कराया था…
    जय हिंद…

  13. बहुत बढ़िया,
    इस जबरदस्ती की जबरदस्त पार्टी का
    मजा ही अलग है!

  14. पार्टी के लिए तो बस बहाना चाहिए होता है… हब मिल जाए 🙂

  15. बताईये भला ..एक दुधमुंहे बच्चे पर इत्ता जुलम..सुबह सुबह पालटी…वो भी ब्लोग्गिंग की चर्चा-परिचर्चा के साथ…होनहार पूत के पांव पालने में नहीं नहीं ….प्लेटफ़ोर्म में ही दिख जाते हैं…और बाद में …उससे पार्टी ले ली जाती है…..रात का इंतज़ार तो हमें भी है…वो रात……कब आयेगी….म्युजिक आप लगा लेना….टैण टैणेण…

  16. Kabhee man udaas ho to aapke blog pe aa jana chahiye…chaliye…gar aaplog aaneko raazee ho jayen janam din kee party dene ke liye saharsh razee ho jayen!

  17. पावला जी,एक गाना याद आ रहा है,वोह सुबह कभी तो आयेगी,जिस को मैने थोड़ा,बदल दिया,वोह रात कभी तो आयेगी,जब शरद जी पार्टी की याद आयेगी ।

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