‘ … शायद हिंदी ब्लॉगरों में कोई ऐसा नहीं’: रवि रतलामी

जब मुझे 4 जुलाई को रवि रतलामी जी की ई-मेल मिली तो थोड़ी हैरानी हुई। छत्तीसगढ़ में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है, विषय है -हिन्दी ब्लॉग इतिहास में सृजनात्मकता के लिहाज से क्या कुछ हासिल हुआ और भविष्य क्या है?

इस संगोष्ठी के बारे में जब मैंने पूछताछ की तो ज्ञात हुआ कि छत्तीसगढ़ के लगभग किसी ब्लॉगर को इसकी जानकारी नहीं है। संयोजकों की ओर से किसी तरह का संवाद स्थापित नहीं किया गया था। रवि जी इस कार्यक्रम की अध्यक्षता 10 जुलाई को करने वाले थे। उन्होंने कुछ सोच कर संयोजकों से मिली ई-मेल, क्षेत्र के कुछ ब्लॉगरों को फॉरवर्ड कर दी। वही मेल मुझे आई थी।

इसके पहले कभी भी रवि रतलामी जी से मेरा संवाद नहीं रहा। उनकी एक टिप्पणी मुझे अपने ब्लॉग पर आखिर GMail के सर्वर ध्वस्त क्यों हो गये? वाली पोस्ट पर मिली थी और दूसरी अपने पंजाबी ब्लॉग पर

मेरे लिए, उनके द्वारा संगोष्ठी में सक्रिय भागीदारी का आग्रह काफी था निर्णय लेने के लिए। संयोजकों द्वारा ध्यान न दिये जाने के कारण साथी ब्लॉगर कुछ अनमने से लग रहे थे। बाद में रवि रतलामी जी से मुलाकात की उत्कंठा में सर्वसम्मति बन ही गई।

पहले तो मैंने ये जानना चाहा कि निरंजन धर्मशाला है कहाँ? अनिल पुसदकर जी ने बताया कि व्ही आई पी रोड पर होटल बेबीलोन के समीप। साथ ही यह भी जानकारी दी कि नाम भले ही धर्मशाला है लेकिन सुविधायें किसी पाँच सितारा होटल से कम नहीं!

संगोष्ठी का समय 10 जुलाई की दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक था। लेकिन घर पर कुछ अतिथियों के आ जाने के कारण मुझे देर हो गई। भिलाई से निकल ही रहा था कि संजीव तिवारी जी का फोन आ गया। मैंने शंकित मन से पूछा – देर हो गई ना? वे बता रहे थे कि अनिल पुसदकर जी बाहर आपका इंतजार कर रहे हैं।

अब उड़न तश्तरी जैसे गाड़ी तो चलाई नहीं जा सकती। यहाँ तो नजर हटी दुर्घटना घटी का बोर्ड यातायात पुलिस ने जगह जगह लगा रखा है। आसमान में काले काले बादल छा चुके थे किन्तु नजर उठाकर देख नहीं पा रहा था। डर था कि भागती वैन से उन्हें देखने की चेष्टा की तो वहीं ना पहुँचा दिया जाऊँ!

 

रिंग रोड 1 से पचपेड़ी नाका, तेलीबांधा चौक से होते हुये जब गंतव्य तक पहुँचा तो लगभग साढ़े तीन बज रहे थे। रवि जी, अनिल जी, संजीत जी, संजीव जी आदि एक जगह एकत्रित हो रवि जी द्वारा विकसित छत्तीसगढ़ी ऑपरेटिंग सिस्टम में तल्लीन थे। अपने कैमरे का उपयोग करने की गरज से मंच पर हमने भी बचे-खुचे ब्लॉगरों के बीच जा कर कब्जा जमा लिया।

थोड़ी देर बाद ही हम गिने चुने लोग प्रेस क्लब जा पहुँचे। बातों का दौर हल्के फुल्के जलपान के बीच चलता रहा। ब्लॉग जगत की हलचलों पर हो रही बातों के बीच, मैं रवि जी से कुछ याद आ रही जिज्ञासायों पर प्रश्न कर लेता था।

आये दिन हो रहे विवादों पर उपस्थित ब्लॉगरों ने इस बात पर चुटकी ली कि अभी तो हिंदी ब्लॉगिंग अपनी शैशवावस्थता में है, जब तरूणाई आयेगी तो और बहुत कुछ होगा! रवि जी का कहना था कि अभी दसेक हजार ब्लॉगर हैं, सब एक दूसरे पर नजर रख पाते हैं, लाख- डेढ़ लाख हो जायेंगे तो सब अपने अपने समूह में मस्त रहेंगे। तब इतना कुछ नहीं सुनने देखने मिलेगा।

गूगल एडसेंस (Google Adsense) के विज्ञापन न आने के मुख्य कारणों में वे बाजार का समृद्ध ना होना मानते हैं। आम उपभोक्ता का ऑनलाईन आर्थिक लेन-देन में सक्षम न होना भी एक कारण माना उन्होंने।

जब मैंने पूछा कि आपकी जानकारी में कोई ऐसा हिंदी ब्लॉगर है जो गूगल एडवर्ड्स (Google Adwords) के द्वारा अपने ब्लॉग तक आम इंटरनेट उपयोगकर्ता को खींच कर लाता हो? तो उन्होंने खिलखिलाते हुए उत्तर दिया कि जब तक उस ब्लॉग से आमदनी नहीं होगी तब तक कोई ब्लॉगर पैसा खर्च कर अपने ब्लॉग पर आने का आंमंत्रण कैसे देगा? ना में सिर हिलाते हुये उन्होंने अपना उत्तर खत्म किया कि जो गूगल एडवर्ड का उपयोग करता हो, शायद हिंदी ब्लॉगरों में ऐसा कोई नहीं।

बातें होती रहीं। पूर्व निर्धारित ‘प्रेस से मुलाकात’ का समय हो गया था। विभिन्न पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुये रवि जी ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में कार्य करने लायक बने 1 GB के सॉफ्टवेयर में छत्तीसगढ़ी बोली के शब्दकोष के सिलसिले में उन्हे संजीव तिवारी जी से बहुत मदद मिली है तथा इस स्वैच्छिक कार्य में कुल 6 माह का समय व 2 लाख रूपये लगे हैं।

सॉफ्टवेयर विकसित होने के अंतिम चरण में एक प्रवासी भारतीय द्वारा 250 अमेरिकी डॉलर की मदद व दिल्ली की सेंटर फॉर स्टडी डेवलेपिंग सोसायटी से 70 हजार रूपये का अनुदान मिला है। उपस्थित सभी पत्रकारों ने इस नि:शुल्क सॉफ्टवेयर का प्रदर्शन देखा व सराहा। इसी पत्रकार वार्ता में रवि रतलामी जी को प्रेस क्लब का स्मृति चिन्ह भी प्रदान किया गया।

विदा लेते हुये रवि जी ने फिर मुलाकात करने की इच्छा जताई। मैंने भी कहा कि कितनी ही तकनीकी बातों पर बाते करनी है अभी तो! फिर मिलेंगे।

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22 comments

  • काजल कुमार Kajal Kumar says:

    इस मुलाकात की रिपोर्टिंग के लिए धन्यवाद. शब्दकोष जैसे क्षेत्र में पहल करना कोई मज़ाक नहीं है. बहुत कड़ा काम है भई. और फिर वह भी मुफ्त वितरण के लिए….. मेरी समग्र शुभकामनाएं.

  • रंजन says:

    बहुत शानदार रही ये मुलाकात.. और आपने बहुत रोचक तरिके से पेश किया..

  • Udan Tashtari says:

    ये मस्त मुलाकात की रोचक दास्तान! आभार.

  • विवेक सिंह says:

    अच्छा लगा पढ़कर !

  • बी एस पाबला says:

    काजल कुमार जी,

    रवि रतलामी जी ने छत्तीसगढ़ी में ऑपेरेटिंग सिस्टम बनाया है, जैसे हम आप विंडोज़ 98/ एक्स पी/ विस्टा का उपयोग करते हैं। उसमें प्रयुक्त शब्दों के लिए छत्तीसगढ़ी शब्दों के लिए शब्दकोष की सहायता संजीव जी ने की।

  • संगीता पुरी says:

    बहुत रोचक तरीके से आपने इस मुलाकात की रिपोटिंग की है .. धन्‍यवाद !

  • संजय बेंगाणी says:

    मजा आया.

  • राज भाटिय़ा says:

    बहुत सुंदर रही आप की यह मिटिंग मज आ गया
    धन्यवाद हम तक यह सब पहुचने के लिये

  • अभिषेक ओझा says:

    आभार इस मुलाकात के विवरण के लिए. रविजी तो कई बड़े काम कर रहे हैं हिंदी ब्लॉग्गिंग के लिए. अक्सर उनके ब्लॉग के माध्यम से पता चलता रहता है.

  • सतीश पंचम says:

    सुंदर विवरण।

  • वन्दना अवस्थी दुबे says:

    इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की जानकारी अच्छा हुआ हम सब को भी आपके ज़रिये मिल गई..

  • श्यामल सुमन says:

    आपने तो लगभग लाइव टेलिकास्ट कर दिया जनाब। आभार।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

  • अविनाश वाचस्पति says:

    बेहतरीन को अपने समग्र रूप में इस रिपोर्टिंग के द्वारा देखा जा सकता है। रवि जी तो वैसे भी ब्‍लॉगिंग के सूर्य हैं और पाबला जी देदीप्‍यमान सितारे। सितारे और भी हैं। सूर्य की उष्‍मा से पल्‍लवित और पुष्पित सितारों ने संगोष्‍ठी को महकाया। मैं तो वहां नहीं जा पाया। पर यहां पर आकर वहां जाने से भी अधिक आनंद आया।

  • Shefali Pande says:

    bahut rochak …..

  • Shefali Pande says:

    bahut rochak …..

  • अजय कुमार झा says:

    वाह पाबला जी..धाँसू मिलन रहा ..और एकदम कमाल की चर्चा..क्या ऐसा कोई सोफ्टवेयर आप लोग नहीं बना सकते की जिसमें हम घुस कर ऐसे सम्मेलनों में पहुँच सकें…ताकि आप लोगों का चरणस्पर्श का सौभाग्य मिल सके…बहुत शुभकामनायें..

  • बालसुब्रमण्यम says:

    रवि जी तो ब्लोगजगत के एक इंस्टिट्यूशन ही बन गए हैं। इस रिपोर्ट के लिए आभार।

  • ravishndtv says:

    पाबला जी
    रतलामी जैसा कोई नहीं है। तीन चार बार नाकाम कोशिश कर चुका हूं कि ब्लाग वार्ता में उन पर लिखूं लेकिन उनके काम पर जब पहुंचता हूं तो कोई ओर छोर मिलता ही नहीं है। समुद्र की तरह है उनका काम। हिम्मत ही नहीं होती है कि कहां से शुरू कर उनके काम पर टिप्पणी करूं। वक्त भी कम होता है। तीन चार घंटे तक ब्लाग ढूंढने में लग जाते हैं फिर पढने में। कभी सोचता हूं कि पूरा दिन रवि जी का ब्लाग पढूंगा फिर लिखूंगा। लेकिन हो नहीं पाता। इसलिए जाता हूं तो पढ़कर चुपचाप आ जाता हूं। आप ठीक कहते हैं उनके जैसा कोई नहीं है।
    वो हम सबका काम अकेले कर रहे हैं।

  • Raviratlami says:

    धन्यवाद मित्रों, आप सबका प्यार पाकर मैं अभिभूत हूं.

    पाबला जी, आपने फोटो बड़ी सुंदर उतारी हैं. इसके लिए आपको विशेष धन्यवाद 🙂

  • Sanjeet Tripathi says:

    जे हुई न जी मस्त रपट।

    साधुवाद ( एकदम उड़न तश्तरी इश्टाइल में 😉

    फोटु तो बढ़िया आए हैं।

    रवि जी के बारे में कुछ कहने लायक बन जाऊं पहले फिर कह सकता हूं।

    घर में दो दिन से नेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी इसलिए देर से पहुंचा जिंदगी के मेले में। फिलहाल दफ्तर से ही टिपिया रहा हूं।

  • शरद कोकास says:

    ब्लोगर सम्मेलन के लिये तो मै भी गया था लेकिन लेखकों की भीड इतनी थी कि पूछो मत वहाँ ढेर सारे कवि थे लेकिन भाई संजीव तिवारी के सौजन्य से कविओं के बीच भी रवि से मुलाकात हो गई अर्थात रवि रतलामी जी से सम्वाद हो गया और जरा सी देर मे ब्लोग मे आडिओ क्लिप लगाने के नये सोफ्ट्वेयर की जानकारी उन्होने दे दी .पाबला जी आये थे लेकिन मुझे भीड में नहीं दिखे ( पाबला जी ने आज फोन पर इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि…) बहरहाल भीड से अलग हट्कर प्रेस क्लब मे सब लोगो ने मेल मिलाप कर लिया यह अच्छी बात है.

  • anitakumar says:

    बढ़िया रिपोर्टिंग, इंशाल्लाह जल्द रवि जी के अथाह ज्ञान सागर की कुछ बूंदें हम भी पायेगें

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