संगीता पुरी जी की भूकम्प वाली भविष्यवाणियाँ तथा एक अन्जान विज्ञान का अनुमोदन

अभी थोड़ी देर पहले संगीता पुरी जी की भूकम्प आने की भविष्यवाणियों वाली पोस्ट देख रहा था तो मुझे अपनी उस पोस्ट का स्मरण हो आया जिसमें एक सपाट चिकनी दीवार तथा सूर्य की साफ रोशनी के सहारे, स्थान विशेष पर आने वाले भूकम्प की तीव्रता सहित, संभावित समय की भविष्यवाणी करने वाले कोयम्बटूर के श्री आर शन्मुगसुन्दरम का उल्लेख किया गया था। पूरी पोस्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।
श्री आर शन्मुगसुन्दरम ने इसी तकनीक का प्रयोग करते हुए 2 जनवरी 2010 को ही संभावना व्यक्त की थी कि
वैश्विक क्षेत्रों में
  • उत्तरी सुमात्रा (2.5N 97.2E) में 7 से अधिक की तीव्रता
  • पश्चिमी ईरान (33.6N 48.8E), उत्तरी सुमात्रा का पश्चिमी समुद्र तट (4.8N 94.9E), दक्षिणी सुमात्रा (2.4S 100.8E), फिलीपीन्स द्वीप समूह (19.5N 123.0E) में 6 के आसपास की तीव्रता

भारतीय क्षेत्र में

  • अंडमान निकोबार द्वीप समूह (10.7N 92.0E), हिमाचल प्रदेश (32.59N 76.25E), कच्छ, गुजरात (23.70N 70.20E) में 5 के आसपास की तीव्रता
का भूकम्प 18 जनवरी 2010 तक आ सकता है
इस संबंध में प्रतिदावा यह है कि:
…यह वेधशाला मात्र 0 से 180E डिग्री अक्षांश (लगभग) तथा 30S व 50N देशांतर (लगभग) के मध्य घटित होने वाली घटनायों की भविष्यवाणी, कोयम्बटूर में श्री आर शन्मुगसुन्दरम द्वारा स्थापित वेधशाला के स्थान पर उपलब्ध पर्याप्त सूर्य की रोशनी से संभव हो पाती है। इसलिये कभी कोई त्रुटि हो सकती है। … दर्शायी गयी जानकारी पर अमल करने की जिम्मेदारी स्वयं विजिटर की होगी और संभावित स्थान को छोड़ कर जाने आदि के लिये न ही कहा जाता है, न ही कहा जाएगा। सामान्यतया, बताये गये स्थान में, +/- 3 डिग्री अक्षांश/ देशांतर का अंतर और तीव्रता +/- 1 पाया जा सकता है।

इन भविष्यवाणियों का परिणाम जानने के लिए (वैश्विक क्षेत्र हेतु) EMSC, REDPUMA, USGS , तथा (भारतीय क्षेत्र हेतु) IMD , ASC का विचरण किया जा सकता है। वैसे TAIWAN, GREECEWWGLNORSAR वेबसाईट्स को भी देखा जा सकता है। या फिर हर 60 मिनट (ग्रीनविच समय) में अपडेट होने वाली, नीचे दी गई तस्वीर का अध्ययन किया जा सकता है जो स्वत: पिछले 7 दिनों में एशियाई क्षेत्र में आए भूकम्प का लेखा जोखा प्रस्तुत करती रहती है

 

 
(लगातार अपडेट होता, पिछले 7 दिनों के भीतर एशिया में आए भूकम्प का लेखा जोखा)
 
उनके मूल आंग्ल वेब पते की जानकारी जान-बूझ कर नहीं दे रहा हूं, क्योंकि वह एक ऐसे मुफ़्त प्लेटफॉर्म पर है जिसे खोलते ही मेरे सुरक्षा तंत्र चेतावनी देने लगते हैं। अत: हो सकता है आपके कम्प्यूटर को नुक्सान पहुँचाए।
 
वैसे, इस अन्जान विज्ञान पर आपका क्या कहना है?
संगीता पुरी जी की भूकम्प वाली भविष्यवाणियाँ तथा एक अन्जान विज्ञान का अनुमोदन
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11 comments

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    मै इस पद्धति के बारे में पहले भी कह चुका हूँ कि यह धरती के कंपनों पर आधारित वैज्ञानिक पद्धति है।

  • vinay says:

    अच्छी जानकारी दी पावला जी ।

  • डॉ. मनोज मिश्र says:

    badhiya jaankaaree.

  • अजय कुमार झा says:

    मैं तो बस इतना जानता हूं कि इस तरह की दुर्लभ जानकारी देना, कमाल की बात है , संगीता जी और आपकी पोस्ट ने चिंता बढा दी है , देखना ये है कि आगे होता क्या है और काश कि तैयारियां अभी से कर ली जाएं
    अजय कुमार झा

  • डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक says:

    इस विज्ञान को समझाने के लिए धन्यवाद!

  • राज भाटिय़ा says:

    बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने, लेकिन चिंता भी लग गई अपनो की.
    क्योंकि वह एक ऐसे मुफ़्त प्लेटफॉर्म पर है जिसे खोलते ही मेरे सुरक्षा तंत्र चेतावनी देने लगते हैं जी बिल्कुल सही कहा, ओर मै वहां से जल्द भागने की करता हुं, जो उचित भी है,
    धन्यवाद

  • बी एस पाबला says:

    लीजिए इस पोस्ट के लिखे जाने के बाद दो बड़े भूकम्प आए

    देखिए जानकारी

    कुछ देर पहले ही आया
    http://www.emsc-csem.org/index.php?page=current&sub=detail&id=151256"

    कुछ घंटे पहले
    http://www.emsc-csem.org/index.php?page=current&sub=detail&id=151196

  • शरद कोकास says:

    पाबला जी इसी बारे में सोचते हुए मैने बहुत पहले एक कविता लिखी थी । आपकी नज़र…..
    पृथ्वी शेषनाग पर सवार नहीं
    नहीं जानते थे हम इससे पहले
    क्या होता है रिक्टर स्केल
    नहीं मालूम था हमे
    चट्टानें भी करवट लेती हैं
    धरती के भीतर
    नहीं पता था हमें
    नदियों के नीचे भी बहती हैं नदियाँ
    चलती हैं फिरती हैं इठलाती हैं
    सोई हुई परतों को हिलाती हैं
    जो मालूम होती है वह बस
    एक भयानक गड़्गड़ाहट
    जो दरारों से निकलकर
    आसमान तक पहुँचती है
    एक अंतहीन चीख
    सदियों से चली आ रही
    हमारी मान्यता ध्वस्त करती है
    कि पृथ्वी शेषनाग पर सवार नहीं ।

    – शरद कोकास

  • Arvind Mishra says:

    इतनी बड़ी दुनिया है कही न कहीं भूकंप आते ही रहते हैं -भारत में मकर संक्रांति के आस पास बड़े भूकम्प आने का इतिहास रहा है -भुज का भूकम्प ह्रदय विदारक था ,
    कोई भी ज्योतषी (जी ) तभी अपना लोहा मनवा सकते हैं जब यह बता दें की फला दिन भोपाल में फला प्झाला दिन बनारस और बंगाल और बंगलौर में भूकंप आयेगा -अन्यथा इन्हें जनता को डराने के जुर्ममें जाति बाहर कर देना चाहये

  • zeashan zaidi says:

    संगीता जी की भविष्यवाणी ज्यादा सटीक है.

  • संगीता पुरी says:

    डॉ अरविंद मिश्रा जी,
    मैने तिथि देकर भविष्‍यवाणी की थी .. समय तक सही रहा .. स्‍थान में दोष हुआ तो आप इसे स्‍वीकारना नहीं चाह रहे हैं .. मैने अभी आपकी टिप्‍पणी पढी .. बहुत बुरा लगा आज पहली बार .. यदि विज्ञान इतना सटीक है .. तो कोई ऑपरेशन असफल क्‍यूं होता है .. इसका जबाब है आपके पास .. कल्‍पना चावला की जान क्‍यूं गयी .. इसका जबाब है आपके पास .. पूरे संसार में अरबों रूपए भूकम्‍प की छानबीन या शोध में लगाए जा रहे हैं .. जब भूकम्‍प की तिथि निकाल पाना इतना आसान था .. तो किसी अखबार में क्‍यूं पढने को नहीं मिला कि .. मकर संक्रांति के दुसरे दिन भूकम्‍प आनेवाला है .. आप खुद को वैज्ञानिक विचारधारा वाले मानते हैं .. फिर तो आपको पूर्वाग्रह ग्रस्‍त बिल्‍कुल नहीं होना चाहिए .. कि ग्रह का प्रभाव पृथ्‍वी पर पडता ही नहीं है !!

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