बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा समुद्री तट

कोंकण रेल यात्रा के आखिर में 9 जुलाई को मुम्बई से 800 किलोमीटर दूर मडगाँव स्टेशन पर हमारी ट्रेन रूकी तो शाम के 4 बज रहे थे। प्लेटफार्म पर आम सी चहल पहल थी। इरादा बना कर आए थे कि रेल-यात्रा के दौरान प्राकृतिक नज़ारों का आनंद लेते हुए गोवा पहुँच, रात बिता कर लौट जाना है, किसी समुद्र तट वगैरह की सैर नहीं करनी है। इसीलिए अगले दिन, 10 जुलाई की दोपहर 12:30 का रेल आरक्षण पहले ही करवा चुके थे।

लेकिन चमचमाती धूप देख कर महसूस हुया कि अभी तो अंधेरा गहराने में 5 घंटे लगेंगे। कुछ ‘टहल’ लिया जाए! एक फल विक्रेता से सरसरी तौर पर पूछ्ताछ की तो पता चला कि बस पकड़ कर नज़दीकी समुद्र तट तक पहुँचने के लिए आधा घंटा लग जाएगा। उस समुद्र तट का नाम बताया गया ‘कोल्वा’ Colva. अब इस बारे में कोई जानकारी ले कर नहीं आया था सो इंटरनेट कैफ़े की तलाश हुई। पता चला कि पूरे प्लेटफार्म में बिजली नहीं है, इसलिए वहाँ का इकलौता इंटरनेट ठिकाना बंद पड़ा है।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

इससे पहले कि मैं कुछ निर्णय लेता, निगाह पड़ी एक अजीब से ‘ओवर ब्रिज’ पर! जैसा कि पिछले संस्मरणात्मक लेख के अंतिम चित्र में दिख रहा। महसूस हुआ कि यह किसी अनोखी डिज़ाईन वाला ओवर ब्रिज है। लेकिन उस पर तो कोई हलचल नहीं थी। कुछ तो पूछताछ और कुछ सूचना पटलों पर प्रदर्शित जानकारी से मालूम पड़ा कि यह तो जाँच-परख के लिए बनाई गई विश्व की पहली स्काई-बस संरचना है। लम्बाई है 1.6 किलोमीटर।

बाद में इंटरनेट से और भी जानकारियाँ मिली इस परियोजना की। 2003 की शुरूआत में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा निरीक्षित यह परियोजना 50 करोड़ के अनुदान से बनी थी। लेकिन इसका विस्तार यात्री सुरक्षा के किन्ही विवादास्पद कारणों से रूका हुआ है। भारत सहित अमेरिका व दक्षिण अफ्रीका हेतु इस प्रणाली का पेटेंट कोंकण रेल्वे के पास है।

स्काई-बस परियोजना की एक झलक ले, हम पिता-पुत्री उत्तर की ओर स्टेशन से बाहर निकल गए, जहाँ से केवल 350 मीटर की दूरी पर यामहा मोटरसाईकिल शो रूम के पास से ‘मार्केट’ के लिए बस का मिलना बताया गया था। अब इंटरनेट प्रेमी होने के नाते किसी से क्या पूछताछ करते। सीधे वहाँ दिख रहे इंतरनेट ठिकाने में घुस गए। एक छोटे से हॉल को लकड़ी के फट्टों से बाँट कर, तंग सी जगहों पर परदे गिरा कर, कई मानव अपने अपने कार्यों में व्यस्त थे।


मैंने झटपट गूगल मैप्स, विकिमैपिया जसी साईट्स के सहारे ज़रूरी खाका निकाल लिया और चल पड़ा बाहर ही खड़ी बस की ओर। छोटी सी बस में सवार होते ही बिटिया ने इशारा किया एक सूचना पटल की ओर, जो यह दर्शा रहा था कि यह सीटें अपंगों के लिए है। उसमें लिखा था Handy-Cap ! उसकी फोटो ली तो मेरा सहयात्री घूर कर देखने लगा मुझे। उसे शायद समझ ही नहीं आया कि इस बोर्ड में ऐसा क्या है जो इसकी फोटो ली जा रही।

हर दो-चार सेकेंड में अपने कंधों को झटकाते, आँख मिचमिचाते किशोर वय के बस कंडक्टर ने हम दो जनों के दस रूपए लिए ‘मार्केट’ के और बस चल पड़ी ड्राईवर के सौजन्य से स्थानीय संगीत बजाती हुई। मेरी निगाहें बाहर का जायजा ले रही थीं। आम भीड़ भरे ट्रैफ़िक के बीच मुझे दो चीजों की बहुतायत दिखी। एक तो बैंक और दूसरी, शराब की दुकानें। दुकान तो मैं सौजन्यतावश कह रहा। वास्तव में नजारा वैसा ही था जैसा हमने शहरों में पान की दुकाननुमा डिपार्टमेंटल काऊँटर्स का देखा है गली-मुहल्ले-नुक्कड़ों पर।

हर दस कदम पर छोटे-बड़े चर्च भी दिख रहे थे। एक बात पर और ध्यान गया कि यहाँ हर आयु वर्ग के व्यक्तियों का पसंदीदा दुपहिया वाहन एक्टिवा-डियो-कायनेटिक होंडा जैसा ही है। आम धारणा के विपरीत मोटर सायकिलों की तादाद कुछ कम सी लगी। दुपहियों की बहुतायत के कारण सुसज्जित गैरेज भी दिखे।

‘मार्केट’ के इलाके पर भीड़ भरे बस स्टैंड में हमें आगाह किया कंडक्टर ने और बता दिया कि सामने ही कोल्वा बीच की ओर जाने वाली बस खड़ी है। बाहर निकल दूसरी बस की ओर बढ़ ही रहे थे कि मेरे कदम ठिठक गए, शरद कोकास जी को याद करते हुए चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। बिटिया ने प्रश्नवाचक नज़रों से देखा तो मैंने उसे एक बस में सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा किया। वहाँ लिखा हुआ था ‘बैतूल’! मैंने मन ही मन सोचा शरद जी मुझे उलाहना दे रहे हैं और हम बैतूल जाने वाली बस के आगे खड़े हैं। बाद में खबर लगी कि मध्यप्रदेश के जाने-पहचाने बैतूल से दूर, गोवा के इस बैतूल में ONGC का Institute of Petroleum Safety Health and Environment (IPSHEM) है।

कोल्वा की ओर जाने वाली बस में शायद हम दो जनों के 12 रूपए लिये गये थे। बस चली तो क्रमश: इमारतें कम होती चलीं गईं और हरियाली बढ़ती गई। हवा में ठंडक सी लगने लगी जबकि धूप चमक रही थी। सड़क किनारे जितने भी खान-पान केन्द्र दिखे, सभी के बाहर लिखा हुआ था ‘… बार एन्ड रेस्टारेंट’! सीधी सड़क पर जब गति धीमी होने लगी तो ध्यान सामने की ओर गया। ऊँची-ऊँची लहरों के साथ, चमचमाता समुद्र-तट दिखाई दे रहा था।

लेकिन इसके पहले हम चंद कदमों की दूरी पर समुद्र-तट की ओर बढ़ते, मस्तिष्क तक संकेत गया कि कुछ खा लो। वहीं रेत पर बने खान-पान केन्द्रों में से एक की टेबल संभाली तो ऑर्डर के लिए दस मिनट तक कोई फटका ही नहीं उस सुनसान से बार एन्ड रेस्टारेंट में। भुनभुनाते हुए बगल वाले स्थल की ओर गए और त्वरित सेवा के साथ परोसे गए ब्रेड-पकौड़े, ब्रेड-आमलेट चाय के साथ उदरस्थ कर समुद्र-तट की ओर लपक लिए।

जैसा कि सुना था वैसा ही मिला गोवा के समुद्र तटों में से एक, यह कोल्वा बीच। आसपास ऊँची इमारतें नहीं, साफ-सुथरा, दुर दूर तक फैला तट, जीवन-रक्षकों की बहुतायत और अनुशासित दर्शक। बिटिया तो लहरों के बीच जा कर आनंद लेती रही और मैं धड़ाधड़ फोटो व वीडियो लेता रहा। अब लगभग सभी फोटो नष्ट हो चुके हैं। फिर भी कुच्छेक अस्पष्ट से बाकी हैं।

पश्चिम से आते गहरे काले रंग के बादलों को देख मैंने बिटिया को इशारा किया तो वह अनिच्छुक सी वापस आ गई। अभी मैं उसे मना ही रहा था वहाँ से निकल चलने के लिए कि मुझे आभास हुआ कि दबे पाँव कोई आ खड़ा हुआ है मेरे पास। जब तक पलट कर देखता एक जनाना आवाज़ आई ‘एक्सक्यूज़ मी’। सामान्य कद की एक युवती थी वह सफ़ेद पोशाक में। चेहरा मोहरा बता रहा था कि वह पंजाब से ताल्लुक रखती है। खालिस अंग्रेजी जुबान में उसने जानना चाहा कि हम पंजाबी बोल सकते हैं क्या?

मेरे हामी भरते ही अंग्रेजियत वाली गुरमुखी में उसने बताया कि वह हमसे किसी तरह की मदद चाह्ती है। मैंने बिटिया की ओर इशारा करते हुए उसे बताया कि शायद आपका काम बन जाए और टहलते हुए कुछ दूरी बना ली उन दोनों से। मामला शायद कुछ ऐसा था कि ब्रिटेन में जनमी-पली वह विवाहित युवती, परिवार को छोड़, अपने साथियों के साथ हिन्दुस्तान आ गई थी घूमने-फिरने के इरादे से। और अब शायद वह अपनी सास सहित परिवार को बताना चाह रही थी कि वास्तव में वह कहाँ है कैसी है। इस सिलसिले में उसे हर पारिवारिक सद्स्य के हिसाब से हिन्दी-पंजाबी-अंग्रेजी एक साथ बोल सकने वाले की सहायता चाहिए थी।

इस घटना क्रम के बाद मैंने बिटिया को अपना इरादा बताया कि हम सुबह फिर आ जायेंगे, लेकिन अभी किसी ऐसी जगह पर ठहरा जाए जहाँ से समय मिलने पर यहाँ समुद्र-तट पर आया जा सके या समय कम पाए जाने पर दोपहर की ट्रेन के लिए स्टेशन की ओर जाया जा सके। सहमति जताते हुए उसने बताया कि एक शानदार होटल दिखा था ‘मार्केट’ के इलाके वाले बस स्टैंड के पास, चौक पर।

इस तरह हम चल पड़े रात्रि विश्राम के लिए शहर की ओर्। समय हालांकि रात के साढ़े सात बजे का था लेकिन अंधेरा गहराने में अभी कुछ देर थी। दूसरे दिन समुद्र-तट की ओर आना होगा या स्टेशन की ओर जाना, यह मालूम नहीं था।

मालूम तो यह भी नहीं है कि इस बार आप कुछ कहेंगे या नहीं ? नीचे टिप्पणी कर के 🙂 क्योंकि अगली बार है सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी

बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा समुद्री तट
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा समुद्री तट” पर 33 टिप्पणियाँ

  1. फेनी आपने ली नहीं ….न जाने कौन से बीच पर चले गए …मैंने तो इसका नाम भी नहीं सुना …वैसे भी गोवा में दर्जन भर बीच है …
    कैलान्गूट ,दोनापाला ,मिरामार की यादें तो अब तक हैं -आपके सौजन्य से इस नए कोल्वा को भी देख लिया !

  2. ये स्कॉय बस वाली जानकारी तो हमारे लिये बिल्कुल ही नई है, और समुद्र तट के किनारे मजा ही कुछ और होता है… और वो भी गोवा का तो बात ही क्या है..

  3. वाह , गोवा की सैर करके मज़ा आ गया ।
    स्काई बस के बारे में जानना दिलचस्प लगा ।
    एक और बीच है वहां –वेगाटॉर बीच । लेकिन वहां फैमिली के साथ नहीं जा सकते ।
    बढ़िया लगा इस सफ़र का वर्णन ।

  4. मैं दो बार गोवा जा चूका हूँ…एक बार फिर से देखने की तमन्ना है…

    रोचक विवरण

  5. Handy-Cap !!!

    🙂

    स्काई बस के बारे में पहली बार जाना है जी, धन्यवाद

    प्रणाम स्वीकार करें

  6. अच्छा किया पाबला जी की आपने फेनी से परहेज किया. बहुत ज्यादा बदबू करती है. कोल्वा बीच गोवा के अच्छे बीचों में से एक है. सुन्दर यात्रा वृत्तांत.

  7. From FeedBurner:

    बेहतरीन संस्‍मरण लिख रहे हैं पाबला सर जी….हो सके तो कभी पुस्‍तकाकार दीजिएगा। जय हो।
    सादर

    -राजू मिश्र

  8. ओह.. तो मेरे जन्मस्थान बैतूल का एक जुड़वा भाई वहाँ भी आपको मिल ही गया । गनीमत है ,मेरा जुडवा नही मिला वरना आप मुझसे पूछते मेले मे कब गए थे । वैसे गोवा का यह द्रश्य मुझे हमेशा मेले जैसा ही लगता है । लगे हाथ बता दूँ कि गोवा के समुद्र तटों पर मेरे एक मित्र नरेश चन्द्रकर ने अच्छी कवितायें लिखी हैं जब पोस्ट करूंगा तो इस पोस्ट की याद रखूंगा ।
    हाँ स्काई बस देखकर अच्छा लगा , हमारे यहाँ तो पाताल बसें चलती हैं , जी हाँ सड़क के गढ्ढों मे चलने वाली बसों को क्या कहेंगे ..।
    चलिए अब आगे बढ़ें ….

  9. badhiya sansmaran,

    goa gaye aur no feni?

    khair, aapke is vivaran se goa jaane ki iccha aur badh gai hai, abhi tak jana nahi hua hai…

    sky bus ki jankari to ekdam new hi hai mere liye….

    baki jaisa ki sharad bhaiya kah hi rahe hain ki apne yahan to Pataal bus chalti hai, ekdam sahi, aap kya kahte hain?

    ab agli kisht ka wait karte hain ji..

  10. वाह हमारे लिए तो सभी कुछ नया !……गए नहीं ना ….उधर !

  11. पहली बार साइन्स कॉलेज में मित्रों के साथ गोवा जाने का प्रोग्राम बनाया तो रेल हड़ताल के कारण नागपुर से वापस आना पड़ा । इसके बाद लेकिन दो बार गोवा यात्रा हो चुकी है । खूबसूरत जगह है
    सैंट ज़ेवियर के दर्शन हुए या नहीं और नदी में शाम की सैर ??

  12. बहुत बढिया यात्रा वृतांत .. नई और रोचक जानकारियां मिली!!

  13. स्काई बस के बारे में पहली बार जाना-आनन्द आ गया वृतांत पढ़कर.

  14. स्काई बस के बारे में जानना बहुत अच्छा लगा.
    लगा–चलो कहीं तो हिन्दुस्तान विकास कर रहा हैं.
    गोवा बहुत ही अच्छी जगह हैं, मेरा काफी मन हैं.
    लेकिन गोवा के अत्यधिक दूर होने के कारण जाने का प्रोग्राम नहीं बन पा रहा हैं.
    बहुत अच्छी जानकारी दी हैं आपने.
    चित्र भी पसंद आये.
    (पाबला जी, ऐसा क्या हैं जो उस बीच पर सपरिवार नहीं जाया जा सकता???)
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  15. स्काई बस के बारे में पहली बार जाना,कोल्वा बीच के अच्छे चित्र ।

  16. ई स्काई वाक तो गजब रही…
    इसके बारे में टी वी मे देखे थे…
    गोवा देख कर मजा आ गया…

    भई वाह

  17. बेहतरीन संस्‍मरण लिख रहे हैं पाबला सर जी….

  18. कोलवा बीच बहुत ही मनमोहक है और वहाँ का समुन्द्र बहुत ही शांत…बच्चे भी बिना किसी खतरे का देर तक लहरों का आनंद ले सकते हैं…

  19. @ Arvind Mishra said

    फेनी आपने ली नहीं

    मौके और भी आएंगे 🙂

  20. @ डॉ टी एस दराल

    एक और बीच है वहां –वेगाटॉर बीच । लेकिन वहां फैमिली के साथ नहीं जा सकते।

    बात सही है। लेकिन ऐसी जगहें तो हमारे-आपके शहर में भी मिल जायेंगी 🙂

  21. @ P.N. Subramanian

    अच्छा किया पाबला जी की आपने फेनी से परहेज किया. बहुत ज्यादा बदबू करती है.

    पिछली बार की फेनी से मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं किया था। पिछले सप्ताह तो एक शानदार 'टेलरमेड' महुआ सूंघी लेकिन उसमें भी बदबू नहीं मिली

  22. @ Sanjeet Tripathi

    apne yahan to Pataal bus chalti hai, ekdam sahi, aap kya kahte hain?

    paataala bus ki avdharana apane yahn to patented hai 🙂

  23. @ anitakumar

    wahan ke mandir ka architect dekha ki nahi

    main vahan ghoomane thode hi gyaa thaa 🙂

  24. @ चन्द्र कुमार सोनी

    मेरा काफी मन हैं.
    लेकिन गोवा के अत्यधिक दूर होने के कारण जाने का प्रोग्राम नहीं बन पा रहा हैं.

    अम्बाला-दिल्ली-कोटा होते हुए
    2484 Amritsar Kochuveli Express
    2218 Kerala Sampark Kranti Express
    36 घंटों में
    अम्बाला से मड़गांव
    केवल 5 स्टापेज पर रूकती
    2300 किलोमीटर पार कर
    स्लीपर श्रेणी में 536 रूपए खर्च करवा
    यह आपको स्काई बस वाले स्टेशन तक पहुँचा देगीं। 🙂

    हमें तो भिलाई से लुधियाना के पास अपने गाँव तक पहुँचने में ही 40 घंटे लग जाते हैं 🙁

    ऐसा क्या हैं जो उस बीच पर सपरिवार नहीं जाया जा सकता

    नंगई!

  25. खूब भटक लिए माऊ और आपके साथ. ये फोटो तभी गायब हुए क्या जब आपकी ‘आईडी’ जब ‘गईडी’ बन गई थी? हमारी तो बेचारी ‘गुमडी’ हो गई.नही आई वापस स्काईबस से देखते.
    वैसे गोआ के कोस्ट साफ़ सुथरे हैं या नही? हा हा हा फेनी :Delicious: और खूबसूरत नजारे देखने के लिए हमने तो कह दिया ‘दुष्टों! हमारे साथ नही चलोगे.पापा अनिजी फील करते हैं :In-Love:

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