सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी

ब्रिटेन में जनमी-पली उस युवती की सहायता कर हम चल पड़े रात्रि विश्राम के लिए शहर की ओर। दूसरे दिन, 10 जुलाई को समुद्र-तट की ओर आना होगा कि नहीं, इस ख्याल को छोड़ हम ‘मार्केट’ इलाके में KTC बस स्टैण्ड के पहले ही उतर गए बस से। चमचमाती बहुमंजिला दुकानों व मल्टीप्लेक्स पर नज़रें डालते हुए जब हम पिता-पुत्री, मिडास टच बिल्डिंग स्थित, होटल एवेन्यू के पास पहुँचे तो पता चला कि प्रवेश का रास्ता तो दूसरी ओरहै! अंधेरे में आँखें अभ्यस्त हुईं तो पास ही की लम्बी-चौड़ी निर्माणाधीन इमारत के मज़दूरों की अस्थाई झोपड़ियां दिखीं। उन्हीं ने बताया कि कैसे वहाँ की गली पार कर, फिश मार्केट से लगी चहारदिवारी की ओर, होटल के पिछले हिस्से से जाया जा सकता है।

काऊँटर पर पता चला कि टैक्स सहित एक सामान्य कमरे का किराया 745 रूपए तथा वातानुकूलित कमरे का किराया है 945 रूपए। पूरा भुगतान अग्रिम और चेकऑऊट समय दोपहर 12 बजे। होटल सहायक अभी हमें लिफ़्ट की ओर ले जा ही रहा था कि बिजली चली गई! मैंने धीरे से पुछा कि सीढ़ी से जाना पड़ेगा क्या? वह आश्वासन सा देता मुस्कुराया। चद पलों में ही जनरेटर की आवाज़ गूँजी और लिफ़्ट द्वारा हम जा पहुँचे चौथी मंजिल के कमरे में। एसी चल पड़ा, टीवी चला कर दिखा दिया गया। बंद शीशों से पास के चौक पर ट्रैफ़िक की चमचमाती रौनक अजीब सा अनुभव दे रही थी।

रात्रि-भोजन के लिए हमें निचली मंजिल के रेस्तरॉ में जाना पड़ेगा, यह बता दिया गया था। यह भी जानकारी दी गई थी कि 10 बजे वह रेस्तरॉ बंद हो जाएगा। हमने झटपट तरोताज़ा हो पास की दुकानों का रूख किया। कैमरे की बैटरी, समुद्र-तटों की पोशाक व कुछ अन्य वस्तुयों की खरीदी कर हम वापस जा पहुँचे होटल और फिर रेस्तरां।

मद्धिम सी रंग-बिरंगी रौशनियों में बड़े से उस हॉल में चंद टेबलों पर ही रौनक दिखी। जहाँ तक मैं देख पाया सभी टेबलों के इर्द-गिर्द परिवार सरीखे समूह ही थे। मेन्यू कार्ड देख मैंने अपने लिए चिकन बटर मसाला और बिटिया के लिए पनीर कढ़ाही मंगवा लिया। सूप का इंतज़ार करते जब मैंने एक बार फिर मेन्यू ध्यान से देखा तो शराब के कुछ ब्रांड्स की दरें दिखीं। तुलनात्मक रूप से दरें काफी कम थीं।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

एल्कोहल का दीवाना मैं कभी रहा नहीं और वैसे भी सन् 2000 के बाद से हार्ड ड्रिंक्स का सेवन स्वेच्छा से रोक चुका हूँ। यात्रा के दौरान तो परहेज ही करता हूँ। गोवा की फेनी एक बार ‘चखी’ थी। दुबारा मौका लगा ही नहीं। लेकिन इस बार उत्सुकता हुई कि गोवा की एल्कोहल का स्वाद भी देखा जाए। एक पिंट बीयर मंगाई तो घूंट भरते ही मन प्रसन्न हो गया। निश्चित तौर पर मानदण्डों पर खरा उतरने वाली थी वह सुनहरी बीयर

भोजन के दौरान मैंने ध्यान दिया कि लगभग सभी टेबलों पर शराब की बोतलें हैं। वैसे यह सामान्य सा माहौल सभी खान-पान केन्द्रों पर पहले भी देख चुका था। ख्याल आया, यह तो गोवा की संस्कृति है! यूँ ही नहीं इसे सैलानियों का स्वर्ग कहा जाता। अरे हाँ… कई स्थानों पर जब भी मेरा ध्यान गया तो एक विशेषता और भी दिखी कि शराब काऊँटर्स पर महिलायें ही मौज़ूद हैं। चेहरे भले ही खूबसूरत रहे हों लेकिन शरीर भारी-भरकम!

टमाटर सूप, बीयर, बटर चिकन, पनीर कढ़ाही, मलाईदार रोटी, खूश्बूदार चावल, हरे सलाद, भुने पापड़, आईसक्रीम वाले लज़्ज़तदार भोजन सहित प्रशंसनीय सेवा और बिल बना 310 रूपए! मुझे बड़ी हैरानी हुई। यह तो हमारे शहर से भी कम है।

बिटिया की आंखें तो कमरे में जाते ही नींद के मारे बंद होने लगीं। मैं टीवी पर देखने लगा कि कौन-कौन से चैनल आ रहे। सामान्य रूचि के चैनल्स के अलावा अंग्रेजी, दक्षिण भारतीय भाषायों, उर्दू के भी कई चैनल दिख रहे थे। अभी डिस्कवरी पर आ कर टिका ही था कि बिजली चली गई। उठकर देखा तो शहर में बिजली दिख रही थी, होटल के कुछ हिस्से में थी और हमारे कमरे का एसी भी चल रहा था। मैंने रिसेप्शन पर फोन किया तो बताया गया कि 10 मिनट में लाईट आ जायेगी।

आधा घंटा हो गया, फिर फोन करने पर इलेक्ट्रिशियन भेजा जा रहा है, बताया गया। इंतज़ार से हार कर पुन: सम्पर्क किया तो प्रस्ताव दिया गया किसी दूसरे कमरे में स्थानांतरित हो सकते हैं क्या? मैंने साफ़ मना कर दिया क्योंकि बिटिया गहरी नींद में थी। ‘सुबह बात करूँगा’ कह कर मैं भी सो गया।

सुबह 8 बजे हम रिसेप्शन पर थे। जोशीले स्वर ने हमारा अभिवादन किया और पूछा कि कोई समस्या तो नहीं हुई? मैंने बिजली की याद दिलाई तो धीरे से आवाज़ आई ‘सर, एसी तो चालू था’। मैं मुस्कुराया कि कुछ छूट तो मिलनी चाहिएना! उसने अपने बॉस को फोन कर वस्तुस्थिति बताई और निर्देशानुसार, अग्रिम दिए गए 945 रुपयों से 200 रूपए लौटा दिए।



(विकिमैपिया पर कोल्वा समुद्र तट के चित्रों की झलक, छोटे-बड़े चिन्हों पर क्लिक कर ली जा सकती है)

पास ही के चौक से बस पर सवार हो हम फिर जा पहुँचे कोल्वा बीच। भूख लग आई थी। सड़क किनारे एक रेस्टोरेंट में घुसे तो फिर वही नज़ारा! टेबल पर बीयर, काऊंटर पर महिलायें। मेन्यू ला कर रखा गया। एक नज़र मारी तो चिकन सैण्डविच, बीफ़ सैण्डविच, लैम्ब सैण्डविच, आमलेट, बर्गर!

एक जगह निगाह टिकी -इंडियन डिशेस। मैं चौंका। यह कॉण्टीनेंटल, चाईनीज़, साऊथ इंडियन डिशेस तो पढ़ा था लेकिन इंडियन डिशेस! उस खण्ड में था डोसा, इडली, बड़ा, उपमा। अब साऊथ इंडिया में इन्हें इंडियन डिशेस कहा जाता है? बीफ़-लैम्ब-काफ़ जैसी किसी गफ़लत से बचने के लिए मैंने उत्तपम मंगाए तो नौकर, मालिक मुझे अजीब सी निगाहों से देखने लगे। हम चलने को ही हुए कि पिछली शाम की वह ब्रिटिश युवती धन्यवाद देती आ धमकी।

सुबह की चमकीली धूप में भारत के पश्चिमी भूभाग का यह कोल्वा समुद्र-तट अपनी ऊँची लहरों से मंत्रमुग्ध किए जा रहा था। बिटिया को मैंने बता दिया कि अभी 9 बजे हैं, ज़्यादा से ज़्यादा हम यहाँ 11 बजे तक रूकेंगे। उन डेढ़ घंटों में भी लहरों से खेलते उसका मन नहीं भरा, लेकिन वापस लौटना था हमें। फिर वही राह, बस से ‘मार्केट’, स्टेशन। लौटते हुए मैंने उसे मोटर सायकिल टैक्सियाँ दिखाई तो बिटिया बहुत हैरान हुई।

मोटरसाईकिल टैक्सियाँ और उनके ‘पायलट’


प्लेटफार्म पर भारी उमस थी। मैंने टहलते हुए कुछ स्थानीय मिठाईयों के पैकेट लिए। निर्मातायों का नाम हल्दीराम से मिलता जुलता। मैंने वहीं उन लेबल्स के चित्र लिए। लेकिन अन्य चित्रों के साथ अब वह भी नष्ट हो चुके।

10 जुलाई की दोपहर लगभग पौने एक बजे चली 2052 मड़गाँव-मुम्बई जनशताब्दी को, 700 किलोमीटर की दूरी तय कर, रात साढ़े दस बजे नवी मुम्बई के पनवेल स्टेशन पर पहुँचना था। हम निश्चिंत हो, रूक रूक कर होती बरसात के बीच, राह के कुदरती नज़ारों में खो गए। मन ही मन मैंने एक बार फिर (मित्रों के साथ) गोवा आने का कार्यक्रम बना डाला। और इस बार गोवा की मशहूर वास्तविक रंगीनी देखने का इरादा है।

कैसा लगा यह आज का दिन? आप बता सकते हैं नीचे टिप्पणी कर. वैसे अगले दिन था लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग? का मामला

सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी” पर 36 टिप्पणियाँ

  1. आपके प्रस्‍तुतिकरण का जबाब नहीं .. और इतना भ्रमण के बाद भी लिख रहे हैं .. मन ही मन मैंने एक बार फिर (मित्रों के साथ) गोवा आने का कार्यक्रम बना डाला .. अच्‍छा है यात्रा वृतांत तो पढने को मिलेगा !!

  2. वाह जी मजा आ गया.. क्या बीयर थी.. यम्म्मी और खाना तो लाजबाब…

  3. सराहनीय पोस्ट के लिए बधाई .

    कृपया इसे भी पढ़े – –

    बीजेपी की वेबसाइट में हाथ साफ http://www.ashokbajaj.com

  4. इस बार गोवा की मशहूर वास्तविक रंगीनी देखने का इरादा है।
    🙂 बहुत भ्रम फैला रखा है लोगों ने गोवा के बारे में

  5. हम तो सोच रहे थे कि आप गोआ की वास्तविक रंगीनियाँ देख चुके हैं …ओह.. तो यह ट्रेलर था । लेकिन आपने किन मित्रों के साथ दोबारा गोआ जाने का प्रोग्राम बना डाला ? लो हमसे तो आपने पूछा ही नहीं ।
    यह मोटरसाइकिल टैक्सी भी मज़ेदार चीज़ है ..पैसा कम , पेट्रोल कम ,प्रदूषण कम… हमारे यहाँ चलवाने के लिये क्या करना होगा ?

  6. गोवा में मोटर साइकल किराए पर भी मिलती थी ।

  7. अरे वाह , इस किश्त में तो कई नई बातें जानने मिली. मैं अभी तक रायपुर में यह कहता फिरता था की भिलाई रायपुर से सस्ता है, आप तो भिलाई से भी सस्ता बिल पेश कर रहे हैं,
    और यह मोटरसाइकिल टैक्सी की परिकल्पना ही अद्भुत है , मुझे लगता है यह हमारे अपने यहाँ ज्यादा सफल साबित होगी , बस अफसरों का एक लंबा चौड़ा अध्ययन दल भेजना पड़ेगा वहां जो आपसे पहले ही वहां की रंगीनियों का लुत्फ़ और इसका अध्ययन कर लौटे 😉 बाकि अन्दर की बात है.

  8. गोवा की सांस्‍कृतिक धरोहरों को नहीं देखा क्‍या? अच्‍छा वर्णन रहा। गोवा की याद ताजा हो आयी।

  9. गोवा की कुछ सुनहली शामें याद हो आयीं हमें

  10. आपकी घुमक्कड़ी से ईर्ष्या हो रही पा-जी। अगली रिपोर्ट का इंतजार रहेगा।
    और हाँ, कभी कैमरा दूसरों को भी दिया करें, ताकि आपका चेहरा भी देखने को मिल सके।
    …………….
    …ब्लॉग चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।

  11. पाबला जी,आप ने अपने यात्रा vivaran men goaa ko vahan kee puri sundarata ke saath jo jeevantata dee hai ,adbhut hai our romanchit karane wali hai .badhai

  12. वीरजी! मैं खाना खाऊं या नही? आप तो ये बता दो.सुनहरी बीअर,नॉनवेज डिश ..वाह! बच्चे और बच्चो के पापा कह रहे है 'ऋतू'की शादी की तयारी बाद में करेंगे .चलो घूम कर आते है.'
    मरवा कर छोड़ेंगे आप.और क्या फोटोज लगाये हैं,एक कमी रख ही दी….बीच के फोटो 'पूरे' और 'ईमानदारी' से नही खींचे.ना ही वह के मूल निवासियों के फोटो दिए.गोवा के एक चर्च में सेकडो साल पुरानी ममी है वहाँ के चर्च भी बहुत सुन्दर है. कितना कुछ छोड़ दिया.गलत बात! अगली बार चूकना नही.

  13. बहुत ही मनभावन तस्वीरें हैं….और संस्मरण भी उतना ही रोचक…

    वहाँ, बियर का तो ये हाल है…अगर वेटर को अंदाज़ा हो जाए कि कोई कपल हैं तो बियर की बोतल के साथ हमेशा दो ग्लास लाकर रख देते हैं.एक लड़की जो पीले सूट और लाल रिबन में बिलकुल उत्तर भारत के किसी छोटे शहर कि लग रही थी..( जरूर हनीमून पर आई होगी.) धड़ल्ले से बियर के घूँट भर रही थी..मैं ही हैरान थी उसे देख.

  14. देखा मैंने कहा था ना कि-"आप सबसे ज्यादा गोवा में ही एन्जॉय करेंगे."
    और देखो कर भी रहे हो.
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  15. @ डॉ महेश सिन्हा

    बहुत भ्रम फैला रखा है लोगों ने गोवा के बारे में

    सहमत हूँ आपसे। मैं खुद डर रहा था बिटिया के साथ जाने में।

    यहाँ वास्तविक रंगीनी से मेरा मतलब 'वो' नहीं था।

  16. @ शरद कोकास

    आपने किन मित्रों के साथ दोबारा गोआ जाने का प्रोग्राम बना डाला ? हमसे तो आपने पूछा ही नहीं ।

    प्रोग्राम पूछ कर नहीं, बता कर बनाए जाते हैं 🙂

  17. @ डॉ महेश सिन्हा
    गोवा में मोटर साइकल किराए पर भी मिलती थी ।

    ये सच है

  18. @ ajit gupta

    गोवा की सांस्‍कृतिक धरोहरों को नहीं देखा क्‍या?

    मैं पहले ही कई बार बता चुका हूँ कि हम केवल रेल यात्रा का आनंद लेने के लिए गोवा गए थे, घूमने का तो कतई इरादा नहीं था 🙂

  19. @ ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

    कभी कैमरा दूसरों को भी दिया करें, ताकि आपका चेहरा भी देखने को मिल सके।

    आप जानते ही हैं कि मेरा कैमरा कैसे उस धधकती आग में स्वाहा हो गया था

  20. @ इंदु पुरी गोस्वामी

    बीच के फोटो 'पूरे' और 'ईमानदारी' से नही खींचे

    फोटो तो ऐसे थे कि आप अश-अश कर उठते!
    सुबुक-सुबुक 🙁

  21. @ rashmi ravija

    मैं ही हैरान थी उसे देख.

    ऐसी हैरानियाँ मुझे भी कई बार हुईं 🙂

  22. @ चन्द्र कुमार सोनी

    मैंने कहा था ना कि-"आप सबसे ज्यादा गोवा में ही एन्जॉय करेंगे." और देखो कर भी रहे हो.

    बिलकुल सही कहा था आपने

  23. मै गोआ १९८० में गया था . आज भी मुझे वहा की याद है . उस समय मो.साईकिल खुद को भी चलाने के लिये मिल जाती थी किराये पर

  24. दो सौ रुपये बचा लिए ? यहाँ अक्सर बिजली चली जाती है , सी.एस.ई.बी. से बिजली के बिल में कोई छूट दिलवाइये तो जाने 🙂

  25. बहुत बढ़िया यात्राससमरण लिखा है पाबला जी ऐसा लगा जैसे मेन गोवा पाहुच गया हूँ ……………………

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