लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?

एक बार फिर गोवा की मशहूर वास्तविक रंगीनी देखने का इरादा लिए 10 जुलाई की रात मैं पहुँच गया वापस, खारघर, नवी मुम्बई में मामाजी के घर।

11 जुलाई को था रविवार। बिटिया ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि बहुत हो गया अब! रविवार को, दो बच्चों वाला ममेरे भाई का परिवार छुट्टी के मूड में रहता है सो उनके साथ मुम्बई का एक चक्कर लगाना ही है। सबसे पहले तो मारूति वैन की वो बैटरी लाई गई जिसे गोवा जाने के पहले चार्जिंग के लिए दिया गया था। चार्ज हुई बैटरी लगाते ही उस गाड़ी का इंजन दो इग्नीशन में ही गुर्रा उठा जिसमें गड़बड़ी बता दी गई थी। गैस थी नहीं, पास के ही पेट्रोल पम्प से पेट्रोल डलवा कर, गाड़ी को धो-पोंछ कर आवश्यक तैयारी कर ली।

दोपहर डेढ़ बजे हम पिता-पुत्री, ममेरे भाई का परिवार और मामीजी, मारूति वैन से रवाना हुए तो पहला काम किया गया ईंधन गैस भरवाने का। मुम्बई में जीपीआरएस बराबर काम कर रहा था। महाराष्ट्र के आटो-एलपीजी स्टेशन्स की सूची देख जीपीआरएस का सहारा ले हम पहुँच गए नेरूल के सेक्टर 25। ममेरा भाई समझना चाह रहा था कि यह पेट्रोल-गैस प्रणाली काम कैसे करती है। मैंने पेट्रोल का स्विच बंद किया और बचाखुचा पेट्रोल जल चुकने पर गैस का स्विच ऑन किया लेकिन इंजिन खामोश ही रहा। नतीजतन, लुढ़कती मारूति वैन को सड़क किनारे लगाना पड़ा।

पहले का अनुभव था सो दन्न से हाथ वहीं गए और शक ठीक निकला। तीन दिन से खड़ी गाड़ी में चूहों ने अपने दांतों का भरपूर इस्तेमाल किया था। पेट्रोल सोलेनॉईड की तारें तो ठीक थीं लेकिन गैस वाली तारें बुरी तरह कटी हुई थीं। सभी औजार व तारें गाड़ी में ही मौज़ूद थीं। बमुश्किल 10 मिनट लगे नई तारें लगाकर गाड़ी को दुरूस्त करने में। तीन बार हो चुके चूहों के इस प्रयास पर पूरा परिवार हैरान था।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»
पोर्टेबल पार्किंग स्लिप मशीन

कुछ आगे जा कर खाने पीने का ढ़ेर सारा सामान लिया गया और गाड़ी में ही ऊधम मचाते बच्चों के साथ पाम बीच रोड से होते हुए हम वाशी पुल को पार कर मानखुर्द, सायन, मांटुंगा, परेल, बायकुला, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, काला घोड़ा पार करते हुए जा पहुँचे मुम्बई हमलों में मुख्य निशाना रहे ताजमहल होटल के सामने गेटवे ऑफ़ इंडिया। समय हो रहा था शाम के चार बजे का।

दूर तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें थीं। होटल हार्बर व्यू के थोड़ा पहले एक खाली स्थान पर गाड़ी पार्क कर, हैंडहेल्ड डिवाईस से कटी पार्किंग पर्ची ले, भीड़ के बीच से रास्ता बनाते हुए, तरह तरह के करतबों, खोमचों, फेरी वालों के चक्रव्यूह को भेदते हुए हम अभी गेटवे ऑफ इंडिया वाले मैदान तक पहुँच ही रहे थे कि मोबाईल की मधुर ध्वनि गूँज उठी।

अनजाना नम्बर। कान से लगाते ही एक मीठी आवाज़ ने सीधे-सीधे पूछ लिया ‘कहाँ हो डार्लिंग?’ मैं उलझन में। नाम पूछा तो नाराज़गी का पुट लिए फिर वही खनकती आवाज़ आई ‘अब क्या मेरा नाम भी भूल गए?’ मेरे ठिठक कर खड़े होते ही मेरे साथ चल रही मामीजी भी रूक गईं। जब मैंने कहा कि आपने शायद गलत नम्बर लगा लिया है, नम्बर देख कर फिर डायल करें तो रूआंसी सी आवाज़ आई ‘नाराज़ हो अब तक?’

अब मुझे गुस्सा आने लग गया। थोड़ी तल्ख आवाज़ में मैंने कहा कि मैं वो नहीं जिसे आप तलाश रहीं और कॉल काट दी। मामीजी की प्रश्न भरी निगाहों पर कुछ प्रतिक्रिया दूँ उसके पहले वही नम्बर फिर आ धमका। कॉल रिसीव कर कुछ कहुँ इसके पहले ही फिर वही आवाज़ आई ‘देखो, कान पकड़ कर माफ़ी मांगती हूँ, दुबारा वैसी गलती नहीं करूँगी।’ मैंने झल्ला कर कॉल काटी, झट से उस नम्बर को Advanced Call Manager की काली सूची में डाला और बढ़ चला। साथ चल रही मामीजी को जब किस्सा पता चला तो हंसते हुए, मुझे ही छेड़ने लग गईं।

गेटवे ऑफ़ इंडिया
गेटवे ऑफ इंडिया के ऊपरी हिस्से में खुदी इबारत

इधर-उधर टहल, फोटो ले हम बढ़ चले समुद्र की सैर करने के लिए वहाँ खड़ी फेरी की ओर। व्यस्कों की टिकट दर बताई गई 60 रूपए। छोटे बच्चों को मुफ़्त सवारी। टिकट ले डगमगाती नौका में संभलते हुए दाखिल हुए और सीधे रूख किया ऊपर के खुले भाग की ओर्। सीढ़ी के पहले ही हमें रोक लिया गया कि ऊपर का टिकट 65 रूपए का है।

जब आपत्ति की गई गई कि पहले बताना था तो उन्होने वहीं बाकी भुगतान कर देने की बात कही। तब तक मामीजी का वीटो आ गया कि ये बदमाशी नहीं चलेगी, हम नीचे ही छाया में बैठेंगे। आधे घंटे तक नौसेना के बंदरगाह के सामने से हो कर उछलती कूदती वह बड़ी सी नाव समुद्र में एक चक्कर लगा कर किनारे की ओर लौट गई।

समुद्री नौका से दिखता, होटल ताज, ताज इंटरकॉंटीनेंटल, गेटवे ऑफ़ इंडिया का विहंगम दृष्य
होटल ताज पैलेस (चित्र, विकीपीडिया से साभार)

पार्किंग वाले ने बीस रूपए माँगे तो ममेरे भाई ने मराठी में ही न जाने क्या भाषण पिलाया उन्हें, कि दस रूपए ही ले कर हमें जाने दिया गया। पुलिस हैडक्वार्टर, मंत्रालय के सामने से गुजरते हुए आ गया मैरीन ड्राईव। ममेरा भाई इशारा कर ब्रेबोर्न स्टेडियम, वानखेड़े स्टेडियम, बॉम्बे यूनिवर्सिटी मैदान की जानकारी देते जा रहा था। मुझे बहुत हैरानी हुई जब उसने एक के बाद एक पारसी जिमखाना, इस्लामी जिमखाना, हिन्दु जिमखाना, क्रिश्चन जिमखाना, पुलिस जिमखाना का नाम लिया। यह सभी एक दूसरे से जुड़े हैं। मैंने जिज्ञासा से पूछा कि मराठा जिमखाना कहाँ है? तो वह झेंप सा गया।

समुदी किनारे से दिखती हाजी अली दरगाह

हम जा पहुँचे थे, पौने 6 बजे हाजी अली दरगाह के सामने। सूर्यास्त की बेला में हमने दूर से ही ज़ायज़ा लिया भक्ति-भाव में डूबे लोगों के रेले का। उसके बाद महालक्ष्मी रेस कोर्स, वर्ली सी फेस से होते हुए हमने राह पकड़ी माहिम खाड़ी पर बने बांद्रा वर्ली सी लिंक (राजीव गाँधी सेतु) की। जानकारी मिली कि रविवार होने के कारण ट्रैफ़िक नहीं है। टोल नाका पर कितना भुगतान करना पड़ा, अब याद नहीं।

इंटरनेट पर सर्च से प्राप्त, बांद्रा-वर्ली पुल का एक विहंगम दृष्य

धारावी के पास से होते हुए हमारी मारूति वैन बढ़ गई थी खारघर की ओर जहाँ हम वापस पहुँचे 7:30 बजे। कुल यात्रा हुई थी 145 किलोमीटर की और समय लगा था 6 घंटे का।

नीचे की ओर जा कर टिप्पणी देने के लिए समय नहीं लगेगा ना आपको!? बिल्कुल वैसे ही जैसे हमें समय नहीं लगा था घुघूती जी से मुलाकात में

लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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58 comments

  • Neeraj Rohilla says:

    समय की कोई कमी नहीं है हमारे पास, आप ऐसे ही विस्तार में लिखते रहें और हम आपके साथ यात्रा करते रहें।

    कभी बम्बई जाना हुआ तो इस पोस्ट का प्रिंट साथ में ले जायेंगे।

  • Udan Tashtari says:

    मुम्बई दर्शन कर लिए आपके आलेख से और याद करते रहे अपने पढ़ाई के दिन, जब चार साल हम वहाँ थे, घोर जवानी में.

  • ललित शर्मा says:

    यही हैं जिन्दगी के मेले।
    लेकिन वो फ़ोन…….खैर अपने समझ के बाहर की बात है:)

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    हम तो आज तक मुंबई गए नहीं ….आपके सहारे ही घूम रहे हैं ….जय हो !!! …वैसे फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ ??

  • P.N. Subramanian says:

    वाह पाबला जी, आपने एक ही दिन में पूरे मुंबई के दर्शन कर लिए. अच्छा लगा.

  • अन्तर सोहिल says:

    "कहां हि डार्लिंग"
    मुझे ऐसा फोन आ जाये तो खूब देर तक बातें कर सकता हूँ। पर अफसोस ऐसे शब्द तो श्रीमति भी नहीं बोलती 🙂

    गेटवे ऑफ इण्डिया से एलीफेंटा की गुफाओं तक भी जाती हैं ये बोट
    क्या आप वहां नहीं गये जी और आशा है एस्सलवर्ल्ड के किस्से अगली किस्त में बतायेंगें?

    प्रणाम

  • बी एस पाबला says:

    @ Udan Tashtari

    जब चार साल हम वहाँ थे, घोर जवानी में

    उड़न तश्तरी कहाँ कहाँ नहीं रही 🙂

  • बी एस पाबला says:

    @ प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

    फ़ोन पर उस मीठी आवाज का क्या हुआ??

    गला घोंट दिया उसका 🙂
    वैसे नम्बर है मेरे पास, आपको दे दूँ?

  • बी एस पाबला says:

    @ अन्तर सोहिल

    मुझे ऐसा फोन आ जाये तो खूब देर तक बातें कर सकता हूँ।

    बातें तो मैं भी कर लूँ, लेकिन रोमिंग में? ऐसी भीड़ में?

    अफसोस ऐसे शब्द तो श्रीमति भी नहीं बोलती:)

    एक चुप सौ सुख 😀

  • राजीव तनेजा says:

    रोचक विवरण…
    परे शहर में घुमते-फिरते वक्त कोई स्थानीय बन्दा हो तो बहुत आसानी हो जाती है…
    ऐसी मीठी-मीठी कॉलज सिर्फ आपको ही क्यों आती हैं 🙁

  • बी एस पाबला says:

    @ राजीव तनेजा

    ऐसी मीठी-मीठी कॉलज सिर्फ आपको ही क्यों आती हैं 🙁

    आपने आकर्षण का नियम तो पढ़ा ही होगा? वही, विपरीत ध्रुवों वाला! 🙂

  • Arvind Mishra says:

    आखिर वो फोन किसका था?
    न था रकीब तो आखिर
    तो वो दिल्लगी किसकी थी ?

  • डॉ टी एस दराल says:

    अरे पाबला जी , एलिफेंटा केवज नहीं गए ?
    खैर मुंबई के फोटो देखकर मज़ा आ गया ।

  • संगीता पुरी says:

    रोचक यात्रा विवरण .. आगे का इंतजार है !!

  • dhiru singh {धीरू सिंह} says:

    ये चूहा कही गाडी मे ही तो सफ़र नही कर रहा था .मुम्बई याद दिला दी आपने .

    और आपका ऎसा वरदान मिला है कि आजकल रोज़ १२५ किमी कार खुद चला रहा हूं. ड्राइवर भगा दिया है .रुपय तो बच रहे है लेकिन थकान बहुत हो जाती है .

  • dhiru singh {धीरू सिंह} says:

    ये चूहा कही गाडी मे ही तो सफ़र नही कर रहा था .मुम्बई याद दिला दी आपने .

    और आपका ऎसा वरदान मिला है कि आजकल रोज़ १२५ किमी कार खुद चला रहा हूं. ड्राइवर भगा दिया है .रुपय तो बच रहे है लेकिन थकान बहुत हो जाती है .

  • राज भाटिय़ा says:

    पाबला जी आप ने बहुत सुंदर लिखा, मजा आ गया यात्रा का, ओर साथ मे लुट का भी पता चला १० की जगह २०, ६० की जगह ६५ हद हे जी….चुहो ने भी पीछले जन्म का बदला ले लिया 🙂
    पाबला जी वो फ़ोन किस का था पता तो करते, शायद राखी सांवत का ना हो…:)

  • बी एस पाबला says:

    @ Arvind Mishra

    आखिर वो फोन किसका था?

    आम खाते समय पेड़ क्या गिनने 🙂

  • बी एस पाबला says:

    @ डॉ टी एस दराल

    एलिफेंटा केवज नहीं गए?

    सफ़र अभी जारी है 🙂

  • बी एस पाबला says:

    @ dhiru singh {धीरू सिंह}

    ये चूहा कही गाडी मे ही तो सफ़र नही कर रहा था.

    शक तो मुझे भी होता था 🙂

    आजकल रोज़ १२५ किमी कार खुद चला रहा हूं.

    हिम्मत ऐ मर्दा, मदद ऐ खुदा

  • बी एस पाबला says:

    @ राज भाटिय़ा

    वो फ़ोन किस का था पता तो करते, शायद राखी सांवत का ना हो…:)

    तभी तो ब्लैक लिस्ट में डाल दिया उसे! न तो मुझे थप्पड़ खाना है अभिषेक समान और ना ही पप्पी लेनी है मीका समान

  • महफूज़ अली says:

    ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ….

  • चन्द्र कुमार सोनी says:

    have a nice journey.
    you are now discovering maharashtra.
    when you will discover whole india, especially rajasthan???
    thanks.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  • शरद कोकास says:

    हम भी अभी अभी यानि पिछले दिसम्बर में परिवार के साथ इन जगहों पर मुम्बई मे घूमकर आये हैं और खूब प्रेम कवितायें लिखीं " वरली सी फेस " गेटवे ऑफ इंडिया " हाजी अली " और मैरीन ड्राइव " आदि शीर्षक से । ब्लॉग पर भी दी हैं अब आप इन्हे पढेंगे तो ज़्यादा मज़ा आयेगा । लेकिन यह भी खूब रही कि बिना कविता लिखे आपको ऐसे फोन आते हैं?चलिये इस पर भी एक कविता लिख ही देते हैं ।
    अब देखिये.. सारे टिप्पणीकार यहीं अटक गये आप भले आदमी हैं , अटके नही वरना आगे का वर्णन कैसे सुनने को मिलता … । हाँ तो फिर क्या हुआ ??????

  • अजय कुमार झा says:

    हा हा हा सर मुंबई पहुंचते ही फ़ोन आने शुरू ….क्या सर क्यों काटा जरूर बिग बॉस फ़ोर आने के लिए इंविटेशन होगा ….आपने यूं ही काट दिया ..। सर कमाल की यात्रा चल रही है एक दम मल्टीप्लैक्स का मजा दे रही है ..और हो भी क्यों न ….आखिर जिंदगी के मेले हैं …जारी रखिए सर मजा आ रहा है भरपूर …उतना ही जितना उन चूहों को आपकी कार की तार काटने में आ रहा था हा हा हा

  • AlbelaKhatri.com says:

    गज़ब है जी………… वाह वाह पोस्ट !

    बल्ले बल्ले

  • बी एस पाबला says:

    @ चन्द्र कुमार सोनी

    when you will discover whole india, especially rajasthan???

    may be next month!

  • बी एस पाबला says:

    @ शरद कोकास

    बिना कविता लिखे आपको ऐसे फोन आते हैं?

    आप क्या समझते हैं? इस तरह के फोन आपको ही आते हैं?

  • बी एस पाबला says:

    @ अजय कुमार झा

    क्यों काटा जरूर बिग बॉस फ़ोर आने के लिए इंविटेशन होगा ….

    आपका मतलब है कि मैं कोई आड़ा-तिरछा-चोर-डाकू-लुटेरा हूँ?

  • arganikbhagyoday says:

    अच्छी जानकारी दी pawala ji .

    या देवी सर्व भूतेषु सर्व रूपेण संस्थिता |
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||

    -नव-रात्रि पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं-
    arganikbhagyoday.blogspot.com
    arganikbhagyoday-jindagijindabad.blogspot.com

  • निर्मला कपिला says:

    चलो इतने कम समय मे और मुफ्त मे हम भी मुम्बई घूम लिये। धन्यवाद बहुत बडिया विवरण।

  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • गजेन्द्र सिंह says:
  • बी एस पाबला says:

    गजेन्द्र जी, आपकी टिप्पणी का इस ब्लॉग पोस्ट की किन बातों से संबंध है बताएँ अन्यथा यह टिप्पणी हटा दी जाएगी

  • भारतीय नागरिक - Indian Citizen says:

    सर जी, वो नम्बर अभी सेव है क्या?
    दूसरा ये कि क्या वाकई में फोन अनवान्टेड लिस्ट में डाल रखा है.
    तीसरा कि किसी अन्य नम्बर से डायल तो नहीं किया? 😉

  • बी एस पाबला says:

    @ भारतीय नागरिक – Indian Citizen

    आपका इरादा क्या है?
    हा हा हा

  • POOJA... says:

    too good sir ji… aapke post ne Mumbai kee yaad dila dee… and aiswe wakye hona achhee baat hai… 🙂

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