घुघूती बासूती जी से मुलाकात

11 जुलाई को मुम्बई की सड़कों पर 145 किलोमीटर घूमने के बाद अब बारी थी यथासंभव कुछ ब्लॉगरों से मिलने की। विवेक रस्तोगी जी, युनूस खान जी, घुघूती बासूती जी सूची में थे। Kshama जी से भी इरादा था मिलने का लेकिन पता चला कि वे मुम्बई में नहीं हैं। बताया किसी को नहीं क्योंकि कई बार बताने के बावज़ूद जा नहीं पाए थे सो झेंप लग रही थी।

दोपहर को साढ़े बारह बजे हम पिता-पुत्री मौज़ूद थे कोपरखैरणे के इंदिरा गांधी कॉलेज के पास। पिछले दिनों अनिता कुमार जी से मुलाकात के दौरान उन्होंने 8वीं मंजिल के फ्लैट से बड़ी आसानी से इशारा कर बता दिया था कि वोsssss है घुघूती जी की बिल्डिंग। हमने भी ऐसे आसानी से सिर हिलाया था जैसे समझ गये हों। लेकिन अब चिलचिलाती धूप में खड़े हो कर नज़रें घुमा रहे थे उस बिल्डिंग की तलाश में।

हार कर घुघूती जी को फोन किया गया। अभिवादन करते ही धमकी भरा स्वर कानों में पड़ा कि ‘हमसे मिले बिना चले गए हो मुम्बई से, ये अच्छा नहीं किया आपने पाबला जी!’ मैंने अपने स्वर को भरसक धीमा रखते हुए पूछा कि ‘आपको किसने कह दिया कि हम चले गए हैं? आपसे मिले बिना चले जाते तो शामत न आ जाती!’ तब शायद उन्हें एहसास हुया स्थिति का। बस यही कह सकीं कि अनिता जी ने बताया आप मिल कर चले गये तो सोच लिया…

मैंने कहा कि आपके दरबार में हाजिरी लगाने आए हैं राह ही नहीं मिल रही! बिल्डिंग का नाम पता बताईए और राह भी सुझाईए। अब वे अपना ही फ्लैट नम्बर डायरी में देखने लगीं। मैं मोबाईल को कान से लगाए प्रतीक्षा करते उनकी स्मृति लोप वाली बातों पर सोचता रहा। पता बताने के बाद कुछ दांएं बाएं मुड़ते रहने को कह कॉल खतम कर दी गई। मैंने सहारा लिया जीपीआरएस का और बताई गई इमारत की ओर बढ़ना शुरू किया।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

 

कोपरखैरने रेलवे स्टेशन का एक दृश्य

उस इमारत के सुरक्षा गार्डों ने पूछा कि किससे मिलना है तो बेसाख्ता निकल पड़ा कि घुघूती जी के यहाँ जाना है। गार्ड मुझे घूरने लगे तो मैं हड़बड़ाया। घुघूती जी को फिर सम्पर्क किया गया और उलझन बताए जाने पर वह भी हँस पड़ीं। वास्तविक नाम जान हैरत होनी चाहिए थी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार था।

लिफ़्ट 12वीं मंजिल तक पहुँची, घुघूती जी प्रतीक्षा करती मिल गईं। उम्मीद के विपरीत सामान्य कद की खूबसूरत शख्सियत को सामने देख थोड़ी कम ही हैरानी हुई, क्योंकि जितने ब्लॉगरों से मिल चुका हूँ उनकी छवि के विपरीत ही पाया है। घुघूती जी भी कोई अपवाद नहीं थी।

सबसे पहले तो उन्होंने स्वल्पाहार का प्रबंध अपनी घरेलू सहायिका से करवाया। फिर बातों का दौर चला। ज़्यादातर समय तो वही बोलती रहीं। स्वभाविक तौर पर सारी बातें ब्लॉगिंग पर केन्द्रित थीं। उनकी उत्कंठा ब्लॉगवाणी ठिठक जाने के कारण जानने में थी। इसके अलावा ब्लॉगिंग के कई खट्टे-मीठे प्रकरणों पर विचारों का आदान-प्रदान होता रहा। बिटिया इन सब बातों से निर्लिप्त सी वहाँ रखी पत्र-पत्रिकाओं में व्यस्त रही।

मुझे याद आया कि जब वे अपने पति की नौकरी के चलते गुजरात से मुम्बई स्थानांतरित हुई थीं तो शुरूआती दिनों में खिन्न रहती थीं बदले हुए माहौल से। इस सिलसिले में बातें करते हुए उन्होंने पूरे फ़्लैट का मुआयना करवाया, मुम्बई के विहंगम दृश्य दिखाए और अपनी खुशी जाहिर करते हुए अब बेहद प्रफ़ुल्लित रहना स्वीकार किया।

जब मैंने ढ़ाई बजे के आसपास अनुमति चाही तो वे हैरान हुई कि ऐसी भी क्या जल्दी है। मैंने उन्हें बताया कि आज क्या ठान कर निकले हैं घर से! भोजन का आग्रह भी आया लेकिन विलंब हो जाने का वास्ता दे हम चल पड़े अगले ब्लॉगर की ओर्। बिटिया ने याद दिलाया कि कोई चित्र वगैरह तो लिए ही नहीं। तो मैंने हाथ में पकड़े कैमरे को छुपाने का उपक्रम करते हुए बताया कि घुघूती जी को अपनी फोटो सार्वजनिक किया जाना पसंद नहीं है। एक बार तो ब्लॉगर मिलन संबंधित एक पोस्ट में उनका चित्र लगाए जाने पर उन्होंने वह चित्र हटवा दिया था। किसी तरह की आशंका ना रहे इसलिए घुघूती जी के फ्लैट में कैमरे का कोई उपयोग ही नहीं हुया।

इस तरह 11 जुलाई की दोपहर घुघूती बासूती जी से एक संक्षिप्त मुलाकात के बाद हम रवाना हो गए एक ऐसे परिवार से मिलने, जिसके सभी सदस्य ब्लॉगर हैं!

कौन-कौन हो सकते हैं वो? नीचे की ओर टिप्पणी कर अपना अनुमान बता सकते हैं आप! और फिर देखिए अगली पोस्ट, जहाँ हुया टेलीविज़न धारावाहिक वाले बिग बॉस से सामना

घुघूती बासूती जी से मुलाकात
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मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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घुघूती बासूती जी से मुलाकात” पर 56 टिप्पणियाँ

  1. यात्रा व्रतांत तो कमाल है . हर बात को आप इअतने सलीके से लिख रहे हो जैसे आपने एक डाय़री मेन्टेन कर रखी है .

  2. घुघूती जी का नाम चैट बाक्स में ड्राप कर दीजियेगा किसी और से नहीं बताऊंगा वादा !

  3. मैं सोच ही रहा था कि घुघुती जी के यहाँ पहुँचे कैसे?

  4. जीपीएस तो बड़े काम की चीज है, घुघुती जी का पता भी बता देती है 🙂

    अब अगले ब्लॉगर हैं जादू जी और परिवार 🙂

  5. @ dhiru singh {धीरू सिंह}

    जैसे एक डाय़री मेन्टेन कर रखी है

    (जल चुके) कैमरे के चित्रों के बिना यह डायरी अधूरी है। सुबुक सुबुक 🙁

  6. @ Arvind Mishra

    घुघूती जी का नाम चैट बाक्स में ड्राप कर दीजियेगा किसी और से नहीं बताऊंगा वादा!

    जैसे ही मुझे याद आएगा आपको तुरंत बताता हूँ 🙂

  7. @ दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    मैं सोच ही रहा था कि घुघुती जी के यहाँ पहुँचे कैसे?

    है न बढ़िया टेलीपैथी?

  8. @ Vivek Rastogi

    जीपीएस होता तो घुघूती जी से कुछ भी नहीं पूछता। यह जीपीआरएस था। E71 तो कम्पनी गया हुया था 🙁

    वैसे जादूगिरी अच्छी है आपकी!

  9. अच्छा लगा ये वृतांत भी ..हम तो सोच रहे थे कि आप उनका नाम बताने वाले हैं 🙂

  10. कोपरखैरने में जाकर घुघूती जी को ढूँढना ही एक रोमांच है. आभार.

  11. आपकी यात्रा मंगलमय हो!

    ताकि हमें और भी ब्लॉगर के बारे में जानकारी मिल सके!

  12. वह जी वाह तो आप घुघूती जी से मिल आये, ये तो बढ़िया रहा. देखी हमारी मुलाक़ात कब होती है उनसे,

    वैसे मेरा अनुमान है की अब आप बढ़ रहे हैं युनुस जी ममता जी और जादू साहब से मिलने के लिए, सही न?

  13. हमेशा की तरह ही बेहतरीन प्रस्‍तुति .. आपकी यात्रा में साथ साथ चलना बहुत अच्‍छा लग रहा है !!

  14. @ राम त्यागी

    हम तो सोच रहे थे कि आप उनका नाम बताने वाले हैं

    जब फोटो नहीं तो नाम कैसा?

  15. @ Sanjeet Tripathi

    हमारी मुलाक़ात कब होती है उनसे

    बता दूँगा तो गड़बड़ हो जाएगी 😉

  16. @ ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

    लखनऊ आना होगा कि नहीं?

    धमका रहे हैं कि पूछ रहे हैं? 🙂

  17. यानि कि हम लिस्ट में भी नहीं थे…:(

    हम्म नए ब्लोगर होने का ये खामियाजा भुगतना पड़ा…ठीक है…कुछ साल गुजरने दीजिये फिर हमारा नाम लिस्ट में तो आ जायेगा.
    और युनुस जी एवं ममता जी …हमारे घर से २० मिनट की दूरी पर रहते हैं.और १५ मिनट की दूरी पर विविधभारती है..

  18. @ rashmi ravija

    यानि कि हम लिस्ट में भी नहीं थे…:(

    यात्रा समाप्त करने के लिए समय ही इतना कम बचा था कि न मिल पाने पर जो ज़्यादा नाराज़ हो सकते थे उन्हें उस दिन की सूची में रखा गया

    नए ब्लोगर होने का ये खामियाजा भुगतना पड़ा

    ये नया पुराना वाला चक्कर मैंने कभी रखा ही नहीं 🙂 अब आपसे जितनी बातें मोबाईल पर हो जाती हैं उतनी तो 5 वर्ष 'पुराने' ब्लॉगर से भी नहीं हो पाती

    कुछ साल गुजरने दीजिये फिर हमारा नाम लिस्ट में तो आ जायेगा

    तब तक हमारा नाम दुनिया की सूची से निकल चुका होगा 🙂 हा हा हा

    युनुस जी एवं ममता जी …हमारे घर से २० मिनट की दूरी पर रहते हैं.और १५ मिनट की दूरी पर विविधभारती है

    पोस्टें अभी बाकी है दोस्त!

  19. @ काजल कुमार Kajal Kumar

    पोस्ट लेट नहीं हो गई ?

    मैं अपनी पुरानी बात ही दोहराऊँगा कि जो जानकारी पहले न मिली हो वह नई ही होती है, फिर चाहे वह हड़प्पा सभ्यता ही क्यों ना हो 🙂

  20. "जाने कब हमारी बारी आएगी मिलने की" आपके लेखन का कमाल है |पढ़ कर तो मन ललचा जाता है |

  21. वाह सर सफ़र जारी रहे बल्कि मैं तो कहूंगा कि जब तक सफ़रनामा खत्म हो एक नया सफ़र शुरू कर लीजीए सर या कम से कम उसकी तैयारी तो हो ही जाए । घुघुती जी के बारे में जानकर अच्छा लगा । मैं तो बिटिया के बारे में सोच रहा हूं कि ..अक्सर हम ब्लॉगर्स की इस मिलामिली में वे बेचारे बोर हो जाते हैं ….उन्हें क्या मतलब ब्लॉगवाणी से या देववाणी से …हा हा हा । जादू देखने का इंतज़ार है सर अब तो

  22. @ शंकर फुलारा

    जाने कब हमारी बारी आएगी मिलने की

    इससे पहले मैं मिलूँ, आप ही क्यों नहीं मिल लेते 🙂

  23. @ अजय कुमार झा

    एक नया सफ़र शुरू कर लीजीए

    जैसा आपका आदेश 🙂

  24. हाहाहा,पाबला जी,बढिया लिखा है। किन्तु बहुत सी बातों का खंडन तो नहीं किन्तु उनपर अपनी तरफ़ से भी जोड़ना होगा सो लगता है कि एक पोस्ट बनती है।
    और आपने कैसे ब्लौगरों की कल्पना की कोई भी आपकी बनाई फ़ोटो में फ़िट नहीं होता।
    एक बार डायरी मिल जाती है तो मैं बिल्कुल सही रास्ता बताती हूँ, उसमें लिख जो रखा है! यह तो आपको पता था मेरी याद के बारे में सो ध्यान से सुना नहीं। 😀
    खैर पढकर मजा आया। आभार।
    घुघूती बासूती

  25. पाबला जी ,
    देखिये अब तो सबको पता ही चल चुका है कि घुघुती जी ने भूलने का शौक पाल रखा है तो फिर क्यों ना आप सभी को उनका सच्चा नाम बता दें और फोटो भी दिखला दें ! भला उन्हें कहां याद रहेगा कि ये सब किया धरा पाबला जी का है 🙂

  26. @ Mired Mirage said…

    बढिया लिखा है।

    कई बातें तो जानबूझ कर मैंने छोड़ दी हैं 🙂

    एक पोस्ट बनती है।

    बनती है, बनती है

    आभार आपका भी, एकाएक पहुँच जाने पर भी समय देने का

  27. या कहाँ याद रहेगा कि वह नाम या शक्ल मेरी है!

    वाह, अली जी, वाह,मैं तो आपको अपना मित्र मानती थी, और आप तो खुराफ़ाते सिखा रहे हैं।
    घुघूती बासूती

  28. @ ali

    अब तो सबको पता ही चल चुका है कि घुघुती जी ने भूलने का शौक पाल रखा है

    सही है, शौक ही है तो! तभी तो कभी शौक किया कभी नहीं किया 🙂

    क्यों ना आप सभी को उनका सच्चा नाम बता दें और फोटो भी दिखला दें ! भला उन्हें कहां याद रहेगा कि ये सब किया धरा पाबला जी का है 🙂

    अगली बार जब उनसे मुलाकात होगी तो उन्हें शक्ल देख कर ही सब कुछ याद आ जायेगा कि किसका किया धराया था 🙂

  29. सुन्दर यात्रा वृ्तांत ब्लागरों से मिलने की बधाई। अब तो घुघूती जी से मिलने की चाह प्रबल हो गयी है। शायद कभी—-। शुभकामनायें।

  30. गुमनाम है कोई ….लग रहा है कोई सस्पेंस स्टोरी पढ़ ली …:):)

  31. @ वाणी गीत

    लग रहा है कोई सस्पेंस स्टोरी पढ़ ली …:):)

    आप तो मुझे डरा रही हैं 🙂

  32. अगर मै सही हु तो शायद एक बार उन्होंने अपनी फोटो अपनी नतनी के साथ खेलते हुए लगाई थी |

  33. चलिए अच्छा हुआ घुघुती जी की शिकायत भी दूर हो गयी, वैसे अब पता चला कि आप धमकाने पर ही ध्यान देते हैं। मतलब अगली बार आप को बुलाना होगा तो क्या धमकाना पड़ेगा?

  34. बढ़िया ….हम भी ले रहे है मज़ा इस सफ़र का ! २५ को अपना सफ़र भी शुरू होने को है !

  35. पाबला जी से तो पता नहीं कब मिलना हो अब की बार आबला जी को हम नहीं छोड़ने वाले !

  36. @ anshumala

    शायद एक बार उन्होंने अपनी फोटो अपनी नतनी के साथ खेलते हुए लगाई थी|

    नियम अपने थोड़े ही होते हैं 🙂

  37. @ anitakumar

    अगली बार आप को बुलाना होगा तो

    भई हम तो बिन बुलाए पहुँचने वालों में हैं

  38. खूब सैर सपाटे कर आये ,बधाई !

    ग्राम -चौपाल में पधारने के लिए आभार .

  39. @ शिवम् मिश्रा

    अब की बार आ-बला जी को हम नहीं छोड़ने वाले !

    चलिए इसी बहाने पा-बला की तैयारी हो जाएगी 🙂

  40. @ अशोक बजाज

    खूब सैर सपाटे कर आये

    एकाध दिन आप से भी मिलता हूँ

  41. बहुत अच्छा लग रहा हैं आपका यात्रा-वृत्तांत पढ़कर.
    एक महत्तवपूर्ण सीख भी सभी आम और ख़ास लोगो को मिल रही हैं कि =
    कभी कहीं बाहर जाने पर यथासंभव बाकी जानकारों, यार-दोस्तों से मिलने का प्रयास करना चाहिए. नाकि सिर्फ घूम-फिरकर, मौज-मस्ती मारकर घर लौट आना चाहिए.
    बहुत ही बढ़िया सीख देने और यात्रा-वृत्तांत पढवाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
    पुन: धन्यवाद एवं आभार.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  42. बढ़िया लगा आपकी घुघूती जी मुलाकात का विवरण…आगे इन्तजार है. अगले तो युनुस मियां ही लग रहे हैं. 🙂

  43. फोटो ना सही असली नाम तो बता देते जी।
    अगली कडी में भी रोचक मुलाकात होगी।
    इंतजार है

    प्रणाम

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