‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर

बिग बॉस धारावाहिक के बिग बॉस, विविध भारती के युनुस खान, ममता सिंह और जादू से हुई मुलाक़ात, मुंबई में

घुघूती बासूती जी से एक संक्षिप्त मुलाकात के बाद अब हमें बहुत दूर जाना था। युनूस खान जी से पिछले बरस कह चुके थे कि अब तो तभी मिलना होगा ममता जी से, जब वे दो से तीन हो जाएंगे 🙂 सो अब हम चल पड़े युनूस-ममता-ज़ादू जीज़ से मुलाकात करने।

गूगल बाबा की शरण में जा कर पता किया गया कि रास्ता कौन सा ठीक रहेगा? तो पता चला कि घानसोली रेल्वे स्टेश्न के पास से होते हुए ठाणे-बेलापुर रोड पर सेंट ज़ेवियर स्कूल से मुड़ कर ऐरोली पुल जाना है। लेकिन पता नहीं किस गफ़लत में पहुँच गए दयानंद एंग्लो-वैदिक स्कूल! गनीमत थी कि पास ही वह ऐरोली पुल था।

पुल पार करते ही मिला टोल प्लाज़ा। हम बढ़ चले गूगल की सुझाई राह, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर। समय हो गया था साढ़े तीन का। फिर आया जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक का पहाड़ी इलाकों जैसा मार्ग, जिस पर आईआईटी, पवई झील, शिपिंग कार्पोरेशन, सीप्ज़, कमाल अमरोही स्टूडियो पार करते हुए हम जा पहुँचे 4:10 बजे वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

aeroli bridge

मूल तौर पर यह है राष्ट्रीय राजमार्ग 8। दत्तापाड़ा रोड से हम मुड़ गए बोरिवली की ओर, लेकिन उससे पहले विवेक रस्तोगी जी से उनके घर का पता ठिकाना पूछ लिया और लौटते हुए मिलने का वादा भी कर लिया।


पिछली बार बोरिवली रेल्वे स्टेशन का अंदाज़ा लग चुका था सो बढ़ चले बेफ़िक्री से लेकिन एक स्थान पर ठिठक गए राह कुछ समझ ही नहीं आ रही थी। युनूस जी से सम्पर्क किया गया। कुछ मौखिक निर्देश मिले तो हमारी मारूति वैन दौड़ पड़ी डॉन-बास्को स्कूल से होते हुए बोरिवली फायर स्टेशन के सामने से विविध भारती की ओर। गेट पर खड़े गार्ड को जब हमने बताया कि युनूस जी से मिलना है तो उसने हमें एक सामान्य सा प्रशंसक मानते हुए टरकाने की कोशिश की।

बात नहीं बनी तो मैंने युनूस जी को फोन पर सम्पर्क किया और वस्तुस्थिति बताते हुए गार्ड के हाथ में हैण्डसेट थमा दिया। तब कहीं जा कर वह बड़ा सा गेट खुला। रजिस्टर में आवश्यक जानकारियाँ दर्ज करने बाद एक अस्थाई पास मिला तब हम आगे बढ़ पाए।

vividh bharti building
विविध भारती, मुम्बई की इमारत

 

विविध भारती परिसर का पहले से अनुभव था इसलिए हमने सरपट गाड़ी दौड़ाई इमारत के पोर्च की ओर क्योंकि युनूस जी ने अपना पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम बताया था कि उन्हें एक डबिंग में जाना है। सहमति यही हुई थी कि विविध भारती से, उनके साथ डबिंग थिएटर जा कर फिर उनके निवास की ओर जाया जाए। इमारत की रूपरेखा देखी भाली थी ही। युनूस जी ने स्थानांतरित हो कर आए अपने नए सहयोगी छिब्बर जी से परिचय करवाया और एक संक्षिप्त सा चाय का दौर निपटा कर तैयार हो गए हमें अपने साथ ले जाने के लिए।

फिर पता नहीं उन्हें क्या सूझी, उन्होने डबिंग थिएटर वालों को सम्पर्क किया और अधिकतम समय की सीमा पूछी। वहाँ से शाम 6 बजे तक की छूट मिलते ही इरादा बदला और वे हमें ले गए अपने बहुमंजिला इमारत के निवास में, जहाँ पहली बार मुलाकात हुई ममता जी और जादू से।

mamta-singh-jadoo

 

दो-चार दिन पहले कह कर भी न पहुँच पाने पर हमें स्वभाविक रूप से ममता जी की नाराज़गी का सामना करना पड़ा। जादू तो बिटिया की गोद से उतरने को तैयार नहीं हो रहा था और जब उतरा तो पूरे कमरे में गेंद मार-मार कर हमारा ध्यान आकर्षित करने में लग गया। ममता जी ने चाय का इंतज़ाम किया और उन कुछ मिनटों में युनूस जी ने वहाँ की रिहायशी समस्यायों पर कई बातें साझा कीं। जादू की जादूगिरी से चाय की टेबल का नक्शाबदलता रहा और ममता जी उसे सुधारने की कोशिश करती रहीं।

बदली हुई योजनानुसार हम पिता-पुत्री को युनूस जी के साथ डबिंग थिएटर की ओर प्रस्थान करना था क्योंकि मेरी इच्छा डबिंग प्रक्रिया का जायजा लेने की थी। एकाएक ही युनूस जी ने ममता जी को साथ चलने को पूछा। सहमति मिलने पर उन्होने शर्त रख दी नियत समय में तैयार हो जाने की। ममता जी झट से तैयार हुई, मैंने जादू को गोद में उठाया, हम सब लिफ़्ट की ओर लपके और युनूस जी की कार में ये जा और वो जा।

युनूस जी के साथ जब हम, बोरिवली कांदिवली लिंक रोड से होते हुए आरे रोड पर गोरेगांव मलाड इलाके के एक स्टूडियो तक पहुँचे तब तक साढ़े छह बज चुके थे। तब भी डबिंग स्टाफ प्रतीक्षारत था। कुछ औपचारिकतायों की पूर्ति तक हम पिता-पुत्री, ममता जी के साथ बाहरी स्वागत कक्ष में सोफे पर बैठे जादू के साथ खेलते रहे। वहीं एक सज्जन भी अकेले बैठे-टहलते किसी चिंतन-मनन में लिप्त दिखे। जादू ने उन्हे भी अपनी कलाकारी दिखाई तो वे मुस्कुराते हुए बाहर की ओर निकल गए। इसी बीच युनूस जी हमें भीतर की ओर ले गए।

ममता जी पहली बार इस डबिंग थिएटर में आईं थी। युनूस जी ने वहाँ उपस्थित एक युवक को उनका परिचय दिया तो उसने लपक कर ममता जी के चरण स्पर्श करते हुए आशीर्वाद माँगा। ममता जी चिहुंकी तो युनूस जी ने पूछा ‘क्या हुआ?’ विस्फ़ारित नेत्रों से अविश्वास का पुट लिए हैरान-परेशान सी ममता जी ने कहा कि ये मेरे पाँव छू रहा! जबकि उनके पैतृक स्थान की ओर का वह युवक अपनी ममता दीदी से साक्षात मिल कर बेहद प्रसन्न था।

जादू को गोद में लिए, मैं डबिंग थिएटर के नियंत्रण कक्ष की तकनीक देख रहा था। युनूस जी ने अपने संवाद वाले कागज पकड़े, दो-चार बातें स्पष्ट कीं और अंदर की ओर प्रस्थान कर गए। पूरे समय उनकी आवाज़ कक्ष में गूँजती रही। टेक-रिटेक चलता रहा। मैं खामोश सा बैठा पूरी प्रक्रिया का जायजा लेता रहा। ममता जी हैरानी से मेरी गोद में बैठे जादू को निहार रहीं थी, जो कि बिना कोई हरकत किए चुपचाप था। वे शंकित सी कह भी रही थीं कि यह आज ‘बदमाशी’ क्यों नहीं कर रहा? अब वह क्या बताता? उसे तो यही समझ नहीं आ रहा था कि पापा की भारी भरकम गूँजती आवाज़ आ कहाँ से रही है? वह तो चकित सा अपनी चंचल नज़रों से पापा को तलाश रहा था। युनूस जी बाहर निकले तब उसकी जान में जान आई

थिएटर से बाहर निकलते वह चिंतन-मनन वाले सज्जन फिर दिखे, शायद सिगरेट सुलगाने जा रहे थे। कुछ आगे बढ़ कर कार की ओर जाते युनूस जी ने पूछने के अंदाज़ में कहा ‘जानते हैं वह कौन है?’ मैंने पलट कर चेहरा देखना चाहा तो दूरी बढ़ चुकी थी। मैंने सिर हिलाया तो बताया गया कि वह ‘बिग-बॉस’ थे! वही ‘बिग-बॉस’ जिसे देखा तो किसी ने नहीं लेकिन आवाज़ सबने सुनी है। (‘बिग-बॉस’ से अनभिज्ञ लोग जान लें कि यहाँ बात एक चर्चित टीवी धारावाहिक की हो रही, जिसमें नेपथ्य से सूत्रधार, बिग-बॉस, की आवाज़ आती रहती है)

लगभग साढ़े सात बजे जब हम युनूस जी के साथ वापस उनके निवास की ओर चले तो जादू मेरी गोद में ही था, खामोश बिना कोई हलचल-शरारत करता। ममता जी चिंतित सी बार बार पलट कर उसकी ओर देखतीं और एक बार बोल ही उठीं कि कहीं इसकी तबीयत तो खराब नहीं! युनूस जी ने इस स्थिति को ब्लॉगजगत के कुछ क्षणों से जोड़ कर ठहाका लगाया तो मैंने भी उनके ठहाकों का साथ दिया। जादू तो थोड़ी देर में सो गया लेकिन हम, कार में बजते सावन के बेहतरीन गीत सुनते, घर तक पहुँच गए। युनूस जी ने बताया कि गीतों का यह संकलन ममता जी का किया हुया है। इस बीच विवेक रस्तोगी जी ने हमारे आगमन का संभावित समय पूछ कर बता दिया कि वे प्रतीक्षारत हैं। मैंने भी कह दिया कि आज तो आपसे मुलाकात करके ही जाएंगे क्योंकि अगले दिन हम मुम्बई से वापस हो रहे।

गोराई खाड़ी के पास बनी बहुमंजिला इमारतों में से एक के फ्लैट में युनूस जी से हुई अनेकों बातों में ब्लॉगिंग संबंधित विषयों का कोई नामोनिशां ना था। कुछ अन्य योजनायों, घर-परिवार, यादों से ही हमारा वक्त बीतता रहा। ममता जी ने भोजन की चर्चा छेड़ी तो मैंने यही शर्त रखी कि ममता जी के हाथों का बना भोजन होगा तो ठीक वरना हम चले। उन्होंने कहा कि 60-70 किलोमीटर आपको लौटना भी है समय की कमी को देखते हुए सादा सा भोजन ही बन पायेगा। कुछ शिकायत भी कानों तक पहुँची कि तीन दिन पहले जब आपके आने का कार्यक्रम बना था तो बढ़िया से डिनर की तैयारी की गई थी।

भोजन के बाद बिटिया की आँखें नींद से बोझिल होने लगी थीं। मैंने उसे कुछ समय दिया एक झपकी के लिए। फिर चला दौर कैमरे की स्वचालित प्रक्रिया के जिसके दायरे में आए हम चार ब्लॉगर और एक नॉन-ब्लॉगर। इन तीन ब्लॉगरों वाले परिवार से जब हमने विदा ली तो रात के ग्यारह बज चुके थे।

विवेक रस्तोगी जी के इलाके में जब हमने प्रवेश किया तो मैं अजीब से संकोच में पड़ गया। आधी रात होने को आई थी और ऐसे वक्त पहली बार किसी के घर सौजन्य भेंट के लिए जाना!? गाड़ी रोक मैंने विवेक जी को फोन किया अपना संकोच जाहिर करते हुए क्षमा मांगी और मुम्बई से वापसी को एक और दिन टालने का निर्णय बताते हुए अगले दिन आने की इच्छा जाहिर की।

airoli bridge
रौशनियों की चकाचौंध में ऐरोली पुल

 

थाणे-बेलापुर रोड और फिर पाम बीच रोड पर सरपट भागती मारूति वैन जब मामाजी के घर के पास पहुँची तो तारीख 12 जुलाई से 13 जुलाई हो चुकी थी और समय हो चुका था आधी रात के बाद पौने एक बजे का।

मेरा ख्याल है कि अब आपकी टिप्पणी का समय हो चला है! अगली बार है नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…

लेख का मूल्यांकन करें

जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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29 comments

  • राज भाटिय़ा says:

    वाह आप के संग हम भी खूब यात्रा कर रहे हे जी , बहुत सुंदर चित्र, ओर विवरण तो माशा आल्लहा बहुत खुब धन्यवाद
    पाबला जी मुझे एक प्रोगराम डऊन लोड करना हे, जो मेरे से कही खो गया, जिस से हम किसी भी फ़ोटो के फ़रेम या जेसे आप ने यहां फ़ोटो के संग ट्रिक की हे, वेसा प्रोगराम, अगर आप के पास लिंक हो तो कृप्या मुझे भेजे, मैने माता पिता जी का चित्र भारत मै घर मे लगाने के लिये तेयार करना हे, फ़िर से धन्यवाद

  • शिवम् मिश्रा says:

    अरे, क्या मौका छोड़ दिया आपने …….जिस 'बिग बॉस' को किसी ने नहीं देखा है उसका एकदम exclusive चित्र होता आपके पास !! खैर कोई बात नहीं ….
    बढ़िया गति से चल रही है यात्रा ….आभार !

  • ललित शर्मा says:

    यात्रा में कहीं एकाध जगह भी हमारी याद नहीं आई?
    कोई जिक्र ही नहीं है।

  • ललित शर्मा says:

    शायद बिग बॉस को नजदीक से नहीं देखा,
    उसे पहचाना जा सकता था। नहीं तो यहाँ देख लो।

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    🙂

  • Udan Tashtari says:

    अच्छा लगा युनुस और परिवार से पाका मिलना..अब आगे प्रतिक्षा है.

  • बी एस पाबला says:

    @ राज भाटिय़ा

    अगर आप के पास लिंक हो तो कृप्या मुझे भेजे

    आपकी मेल में लिंक भेजा है, देखिएगा

  • बी एस पाबला says:

    @ शिवम् मिश्रा

    जिस 'बिग बॉस' को किसी ने नहीं देखा है उसका एकदम exclusive चित्र होता आपके पास

    आप तो जानते हैं हैं ना मेरे जल चुके कैमरे के बारे में!
    सुबुक सुबुक 🙁

  • बी एस पाबला says:

    @ ललित शर्मा

    यात्रा में कहीं एकाध जगह भी हमारी याद नहीं आई? कोई जिक्र ही नहीं है।

    उपसंहार बाकी है अभी, यात्रा का 🙂

  • ali says:

    मुलाकात तो ठीक रही पर जो बातें हुईं वो भी तो शेयर करिये ! तभी तो पता चलेगा कि सारी बातें ब्लागिंग विषयों से बाहर थीं कि नहीं 🙂

  • anitakumar says:

    🙂 बढ़िया यादें, जादू है ही इतना प्यारा

    आगे के किस्से का इंतजार

  • बी एस पाबला says:

    @ ali

    जो बातें हुईं वो भी तो शेयर करिये ! तभी तो पता चलेगा कि सारी बातें ब्लागिंग विषयों से बाहर थीं कि नहीं 🙂

    फिर तो यह बातें कभी खतम ही नहीं होगी 🙂

  • Sanjeet Tripathi says:

    लो कल्लो बात आप तो ठीक उनसे ही मिले जा रहे हो जिनसे मिलाने की हमें हसरत है.
    ठीक है जी ठीक है जला लो हमें .

    विवरण बढ़िया चल रहा है, अब अगली किश्त की प्रतीक्षा करते हैं.

  • Arvind Mishra says:

    यह तो बढियां मिलनसार यात्रा चल रही है !

  • rashmi ravija says:

    सुन्दर तस्वीरों के साथ ,बढ़िया यात्रा विवरण..
    जादू तो बहुत ही प्यारा लग रहा है…

  • Vivek Rastogi says:

    वाह तो "बिग बोस" को भी देख आये, ये तो पहले बताया ही नहीं, सही है बोस..

  • बी एस पाबला says:

    @ Sanjeet Tripathi said…

    आप तो ठीक उनसे ही मिले जा रहे हो जिनसे मिलने की हमें हसरत है

    जहाँ चाह, वहाँ राह!

  • बी एस पाबला says:

    @ Vivek Rastogi

    वाह तो "बिग बोस" को भी देख आये, ये तो पहले बताया ही नहीं

    आपने पूछा ही नहीं 🙂

  • बी एस पाबला says:

    @ rashmi ravija

    जादू तो बहुत ही प्यारा लग रहा है

    सच्ची-मुच्ची, जादू बहुत प्यारा है

  • राजीव तनेजा says:

    रोचक एवं विस्तृत विवरण

  • चन्द्र कुमार सोनी says:

    jaadu is very cute baby.
    pul to bahut shaandaar hain ji.
    thanks.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  • vinay says:

    नेट का सी.पी.यु खराब होने के कारण,हम तो आपकी रोचक यात्रा का पूरा लुत्फ ना उठा पायें ।

  • ajit gupta says:

    आप यह यात्रा बिटिया के साथ कर रहे हैं, यह सबसे सुखद पहलू है। रास्‍ते में सभी ब्‍लोगरों से मिलने का भी अनूठा प्रयोग है।

  • डॉ. दलसिंगार यादव says:

    पाबला जी,
    आप भी बड़े जीवट वाले हैं। मुझे भी कुछ लोग क्रैक कहते हैं क्योंकि मैंने कन्याकुमारी से रोहतांग तक की यात्रा अपनी कार में खुद ड्राइव करके तय की है और दो बार जानलेवा ऐक्सीडेंट हुए परंतु साफ सुरक्षित रहा। ईश्वर मेहरबान है और मित्रों की शुभकामना। अभी नागपुर-बंगलौर की यात्रा से वापस आया हूं। आपका वृत्तांत बहुत दिलचस्प और रोमांचक लगा। हिंदी का शिक्षक मैं हूं और इतनी अच्छी हिंदी आप कैसे लिख लेते हैं? मैं आपसे अभिभूत हूं।

  • यूनुस, ममता, जादू और बिग बॉस। क्या संगम है?

  • फिर वही शाम..वही….
    टिप्पणीकर्ता समीर लाल “भूतपूर्व स्टार टिपिण्णीकार” ने हाल ही में लिखा है: कुछ वाँ की.. तो कुछ याँ की…My Profile

  • वाह , साढ़े तीन ब्लॉगर और बिग बॉस की मुलाकात !

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