किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!

उन पुलिस वालों के साथ कारों की दौड़ सरीखे फिल्मी अंदाज़ में रुमाल एक हाथ से दूसरे हाथ में लेते हुए मैं परभनी शहर में दाखिल हुआ। बमुश्किल साढ़े तीन बजे थे सुबह के। सामने ही दिखा एक पेट्रोल पम्प। पुलिस वालों की हिदायत पर हमें रूकना ही है और मारूति वैन में पेट्रोल भी डलवाना ज़रूरी लग रहा। वहाँ लिखा हुया था कि ‘पम्प 24 घंटे खुला रहता है’ लेकिन सब के सब टीवी पर फिल्म देखते हुए सो गए थे।

मुझे हैरानी हुई अब उस काँच से बने बड़े से कमरे का दरवाजा हाथ लगाने से खुलता पाया। चुपचाप बाहर ही से लौटा और उनके किसी सुविधाजनक समय की प्रतीक्षा में वहाँ के लॉन में बड़ी सी चादर बिछा कर लेट गया। बिटिया गाड़ी के अंदर ही गहरी नींद में थी। मैं अपनी पिछली योजना के बारे में सोचकर एक ठंड़ी सांस भर रह गया।

परभनी शहर, पहले से मेरे यात्रा नक्शे में था। योजनानुसार हमें यहाँ से सीधे उत्तर की ओर प्रस्थान कर महाराष्ट्र के उस क्षेत्र में दुनिया के एक अज़ूबे को देखने जाना था जिसे लोनार के नाम से जाना जाता है। परभनी से लोनार 100 किलोमीटर से कुछ अधिक ही है। दरअसल लोनार का संबंध किसी हद तक इस आकाशगंगा के एक ग्रह से है।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»


(आकाश की ऊंचाई से लोनार झील का दृष्य, कुछ बादल भी दिख रहे)

किस्सागोई के अंदाज में बताया जाए तो ईसापूर्व 52 हजार 424 को मंगलवार की रात के 11 बजे, हमेशा की तरह स्वच्छ आकाश में तारों की बारात अपने शबाब पर थी। लम्बे बालों वाले बर्फीले गैंडों का एक झुण्ड लोनार के पास की बर्फीली पहाडियों के बीच भोजन की तलाश में आया। आदिमानवों का एक जत्था शिकार से थका हारा नजदीक ही एक गुफा में आराम कर रहा था। कि अचानक खामोशी टूटती है, आंखें चौंधियां देने वाली रोशनी के साथ एक किलोमीटर व्यास का एक उल्का पिंड लगभग 25 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से जमीन की ओर बढ़ता है।

जानवरों और आदिमानवों में भगदड़। आग का ये गोला तेज धमाके के साथ जमीन में समां जाता है। और बड़े ज्वालामुखी के फटने जैसा दृश्य पैदा हो जाता है। लगभग 11.4 तीव्रता का भूकंप। टकराहट से पैदा हुयी भीषण गर्मी से वहां मौजूद 50 किमी के घेरे में चट्टानें तेजी से पिघलने लगी हैं। आस-पास की नदियों में सुनामी जैसी लहरें। अभूतपूर्व जैवीय परिवर्तनों में एक अंडाकार विशालकाय झील का निर्माण होता है। पिघले हुए हिमनदों ने सूनामी लहरें और वातावरण में ऎसी गैसें पैदा की, जिससे कई महीनों तक तक सूरज की रोशनी गायब रही। लगभग सौ परमाणु विस्फोटों के बराबर ऊर्जा।

दुनिया की पहली बेसाल्टिक झील के अस्तित्व में आते समय ऎसा ही नजारा हुआ होगा।

 

अब बात की जाए वास्तविकता की। आकाशीय उल्का पिंड की टक्कर से निर्मित खारे पानी की दुनिया की पहली झील है लोनार। इसके बनते वक्त करीब दस लाख टन के उल्का पिंड की टकराहट हुई। करीब 1.8 किलोमीटर व्यास की इस उल्कीय झील की गहराई लगभग पांच सौ मीटर है, परिधि लगभग 8 किलोमीटर।

आज भी वैज्ञानिकों में इस विषय पर गहन शोध जारी है कि लोनार में जो टक्कर हुई, वो उल्का पिंड और पृथ्वी के बीच हुई या फिर कोई ग्रह पृथ्वी से टकराया था। जो कुछ भी था, उस वक्त वो तीन हिस्सों में टूट चुका था और उसने लोनार के अलावा अन्य दो जगहों पर भी झील बना दी, हालांकि अब पूरी तरह सूख चुकी अम्बर और गणेश नामक इन झीलों का कोई विशेष महत्व नहीं रहा है।

गूगल अर्थ पर लोनार झील का जायजा

महाराष्ट्र यात्रा की योजना बनाते वक्त छानबीन करने पर मैंने पाया कि स्मिथसोनियन इंस्टिट्यूट ऑव वाशिंगटन, जियोलोजिकल सर्वे ऑव इंडिया और यूनाईटेड स्टेट जिओलोजिकल सर्वे द्वारा लगभग 20 वर्ष पहले किए गए एक साझा अध्ययन में इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण मिले थे कि लोनर कैटर का निर्माण पृथ्वी पर उल्का पिंड के टकराने से ही हुआ था।

मंगल ग्रह सरीखे दृश्य दिखाने वाली यह झील अन्तरिक्ष विज्ञान की उन्नत प्रयोगशाला भी है, जिस पर समूचे विश्व की निगाह है। अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा का मानना है कि बेसाल्टिक चट्टानों से बनी यह झील बिलकुल वैसी ही है, जैसी झील मंगल की सतह पर पायी जाती है, यहां तक कि इसके जल के रासायनिक गुण भी मंगल पर पायी गयी झीलों के रासायनिक गुणों से मिलते जुलते हैं। ऊंची पहाडियों के बीच लोनार के शांत पानी को देखने पर यहां घटी किसी बड़ी प्राकृतिक घटना का एहसास होने लगता है।

दिन में लोनार झील के विहंगम दृष्य का आनंद लेने के लिए इस चित्र पर क्लिक कर बड़े आकार में देखें

सांध्य बेला में लोनार झील के विहंगम दृष्य का आनंद लेने के लिए इस चित्र पर क्लिक कर बड़े आकार में देखें

हाल ही यहां के पानी में चुंबकीय कणों से युक्त विशेष किस्म के बैक्टेरिया पाए गए। इस खोज से ब्रह्माण्ड में अन्य कहीं जीवन की खोज में मदद मिली है। कलाड के यशवंतराय चव्हाण विज्ञान कॉलेज के माइक्रोलोजिस्ट महेश चवादार के अनुसार इस बैक्टेरिया और उल्का पिंड में कुछ संबंध दिखता है। करेंट साइंस के एक अंक में छपी जानकारी के मुताबिक जब लोनार झील बनी होगी, उस वक्त जिस किसी उल्का से पृथ्वी टकराई होगी उस उल्का में या फिर वो उल्का पिंड जिस ग्रह का हिस्सा था उनमें कहीं न कहीं जीवन का अंश था।

कुछ और रोचक तत्व आपको यहाँ मिल सकते हैं

मेरे एक सहकर्मी की माताजी उस इलाके की हैं जहाँ अपने तरह की विश्व में इकलौती माने जाने वाली यह झील है। उन्ही के शब्दों को अभिव्यक्ति दी जाए तो जिंदगी में आपको कभी दूसरे ग्रहों पर जाने का मौका नहीं मिल पाए, मगर आप महाराष्ट्र के बुलढ़ाना जनपद के लोनार गांव में जरूर मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली सतह का अनुभव कर सकते हैं। और साथ ही उल्का पिंडों के पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों को भी देख सकते हैं। यहां आपको उस दुनिया की ताकत का एहसास भी होगा, जिसे हमने अब तक सिर्फ किस्से-कहानियों में ही सुना है।

परभनी शहर के पेट्रोल पम्प के बाहर लॉन में चादर पर लेटे, समय की कमी के कारण लोनार न जा पाने के बावज़ूद उसका अनुभव करते कब नींद लग गई, पता ही नहीं चला। जब मच्छरों ने हमला तेज किया तो आँख खुली। अंधेरा छंटने लगा था। पेट्रोल पम्प वालों को जगाने से पहले नित्य कर्मों से निपट हम दोनों चल पड़े 70 किलोमीटर दूर रह गए नांदेड़ की ओर।

इस बार तो मैं वंचित रह गया किसी दूसरे ग्रह की सैर का आनंद देने वाला अनुभव लेने से। लेकिन बहुत जल्द ही लोनार ज़रूर जाऊँगा। आपका क्या इरादा है नीचे टिप्पणी कर बता सकते हैं. फिलहाल तो वर्षों की तमन्ना पूरी हुई गुरुद्वारों की नगरी नांदेड़ में पहुँचने की

* लेखांश व चित्र अन्यत्र से लिए गए हैं

किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
4 (80%) 3 votes
Print Friendly, PDF & Email

मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

Powered by Hackadelic Sliding Notes 1.6.5

किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!” पर 42 टिप्पणियाँ

  1. इसका तो मुझे पता ही नहीं था, अगले दौरे में अब हमारी उड़न तश्तरी शीघ्र ही लोनर पर उतरेगी।
    वहां आपको चित्र भेजे जाएंगे।

  2. इलाके के लोग मांगलिक हो गये, इस मंगलीय झील के कारण 🙂
    मुझे तो यह बिलागरों की आह से उत्पन्न नजर आती है और इसमें जो भरा हुआ देख रहे हैं वो पानी नहीं है, हमारे जैसे किसी बिलागर के आंसू हैं जो टिप्पणियों की गिनती-ब्लागर क्रमांक-पसन्द- नापसन्द देख-देखकर घण्टों टसुये बहाता है..
    😛

  3. लोनार झील की बेजोड़ कवरेज/सचित्र वृत्तांत -आभार !

  4. हाहाहा तो एलियनों को भी जरूरत पडने वाली है आपकी …अब क्या किया जाए सर ..आप तो हमेशा ही ब्लॉगर्स की समस्याओं को सुलझाने में लगे रहते हैं , आपने कभी उन बेचारों की सुनी ही नहीं होगी । अगली बार मैं भी चलूंगा सर

  5. इस श्रंखला की सब से बेहतरीन कड़ी, सहेज कर रखने लायक।

  6. बहुत रोचक जानकारी और चित्र तो कमाल के हैं। धन्यवाद।

  7. लोनार के बारे में जानकारी दिलचस्प है।
    धन्यवाद
    मुझे भी जरूरत है आपकी, बताऊंगा अपनी समस्या 20नवम्बर को

    प्रणाम

  8. लोनार के विषय में तो सच में कोई भी जानकारी नहीं थी … आप का बहुत बहुत आभार ! सफ़र जारी रहे !

  9. आपके शब्दों में चित्रमयी जानकारी पाकर हमें तो लोनर झील एक आविष्कार सा लग रहा है ।
    बहुत सुन्दर चित्रों सहित दिलचस्प वर्णन ।

  10. लोनर के बारे मे पहली बार जाना . इसके लिये आपका धन्यवाद

  11. बहुत ही रोचक और ऐतिहासिक जानकारी दी हैं आपने.
    इस सम्बन्ध में मुझे तो पता ही नहीं था.
    चित्रों का तो जवाब नहीं, लाजवाब.
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  12. सबसे पहले आप लोग को मारे तरफ से स्प्रम नमस्कार, आप का ब्लॉग देखा बहुत अछा लगा आप लोग को भी हमारे तरफ से बहुत बहुत ध्‍यंयबाद .मे आशा करता हू की आप लोग एसी तहर मेरा साथ दे क्यू के मे इस ब्लॉग जगत मे अभी एक डम अकेले हू ओर आप लोग का साथ लेना चाहता हू

  13. पाबला जी, मातृवियोग के भयंकर पलों में आपको और आपके परिवार को मेरी तरफ से हार्दिक सहानुभूति …

  14. बहोत अच्छी ओर रोचक जानकारी प्राप्त हुई, धन्यवाद …मैं नांदेड तो नहीं गया लेकिन जाऊंगा साथ ही लोनर झील भी जाना है, वैसे मैं हेमकुंड साहेब जा चूका हूँ, बेहद खुबसूरत स्थान है….

  15. आपके यात्रा वृतांत से तो मजा ही आ जाता है.

इस लेख पर कुछ टिप्पणी करें, प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
[+] Zaazu Emoticons