अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात

मुम्बई में हमारा पहला सक्रिय दिन बीता था अनिता कुमार जी के साथ। दूसरे दिन, 3 जुलाई को मैं उस गुड़िया के पास था जिसे देखते ही मुझे अपनी छोटी मौसी की याद आ जाती है। हूबहू वैसा ही चेहरा है उसका। वह है खारघर में ही एक स्थान पर निवासरत, मेरे मंझले ममेरे भाई की 5 वर्षीया बिटिया, जिसे हम सभी सिम्मी के नाम से पुकारते हैं।

पिछली बार जब उस परिवार के साथ समय बिताया था तो मुझे कतई अंदेशा नहीं था कि अगली बार मिलते हुए मुझे अपने आँसू रोकने होंगे। उस मासूम सी बच्ची को एक ऐसा असाध्य रोग हो चुका है जिसे आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में, Aplastic Anemia के नाम से जाना जाता है। अपनी उम्र से कहीं अधिक समझदार, गंभीर, तार्किक क्षमता वाली सिम्मी की स्वभाविक बाल-सुलभ चंचलता ऊपरी तौर पर हमें मुस्कुराने पर विवश करती है किन्तु मन कहीं दहल भी जाता है।

जैसा कि होता ही है, मुसीबत के समय विवश हो चले मानव को जितनी भी सलाहें मिलती हैं वह उसे आजमाने की कोशिश में दर दर भटकता है। बस एक ही तमन्ना रहती है कि किसी तरह दुखों से मुक्ति मिल जाए। बस ऐसा ही कुछ उस परिवार में ही हो रहा है। इसी सिलसिले में तमाम इलाजों के बीच, नवी मुम्बई में वाशी के किसी चिकित्सालय में शनिवार के दिन, सिम्मी को एक्यूपंचर के लिए ले जाया जाता रहा है। उस दिन बारिश भी खूब हो रही थी। उसके पिता, मेरे ममेरे भाई, उस समय अपनी मर्चेंट नेवी की आजीविका के सिलसिले में वेनेजुएला के आसपास थे और मेरे दूसरे ममेरे भाई की तबीयत भी कुछ नासाज़ थी, तो वहाँ जाने की जिम्मेदारी मैंने ली और संध्या 4 बजे चल पड़ा एक बार फिर वाशी की ओर। इस बार साथ थे मामाजी।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

 

(नन्ही सिम्मी)

ठीक-ठीक याद तो नहीं, लेकिन उस दिन का मेरा गूगल लैटीट्यूड इतिहास बताता है कि वह स्थान वाशी बस डिपो के आसपास का होगा। जब तक वहाँ की भीड़ में मामाजी अपनी पोती, सिम्मी की नियमित जाँच आदि से फुरसत पाते, मैं वहीं पास ही एक खूबसूरत से बाग में टहलता रहा। अभी वापस आ भी नहीं पाया था कि एकाएक नज़र गई अपनी मारूति वैन की ओर। सामने का एक टायर संभवत: पंक्चर हो चुका था। आसपास पूछताछ कर ही रहा था कि मामाजी भी सिम्मी के साथ आ पहुँचे। सड़क के दूसरी ओर ही एक टायर दुकान वाले ने खराब हो चुकी ट्यूब को बदला और हम रवाना हुए घर की ओर।

कुछ दिन पहले से मामाजी के एक समधी-समधिन पहली बार मुम्बई में उनके घर पधारे हुए थे। वह रात उनके मुम्बई में रूकने की अंतिम रात थी। सो, भोजन उन्हीं के साथ पारिवारिक चर्चा के माहौल में किया गया। बाद में, कुछ देर के लिए जब ऑनलाईन हुआ तो सतीश पंचम जी को, स्वयं के मुम्बई में होने की बात बताते हुए, अपना मोबाईल नम्बर ई-मेल किया। युनूस खान, विवेक रस्तोगी जी से बात की, कुछ आवश्यक कार्य निपटाए और तान कर सो गया!

4 जुलाई को था रविवार। सतीश पंचम जी से बातचीत के दौरान यह उम्मीद थी कि वह नवी मुम्बई में अपने किसी कार्य से लौटते हुए हमारे घर, खारघर में ही मुलाकात करने आ जायेंगे।

हमारी मामी जी के बड़े भाई, जो कि मुम्बई हॉकी एसोशिएसन के मानद सचिव , वेस्टर्न इंडिया फुटबाल एसोशिएसन के मानद अध्यक्ष, मुम्बई एथलीट एसोशिएसन के अध्यक्ष व नेशनल मास्टर्स एथलीट फेडेरेशन के वरिष्ट उपाध्यक्ष हैं, वह एक गंभीर व्याधि से जूझते हुए मुलुंड के वोक्हार्ट अस्पताल में दाखिल थे। उनकी मिजाजपुर्सी के सिलसिले में कुछ परिचित आ गए और हम दिन भर उनकी सेवा में व्यस्त रहे। शाम को ख्याल आया सतीश जी का, जिन्होंने दर्शन ही नहीं दिए थे! मैंने जब उन्हें फोन किया तो पता चला कि वह तो लौट रहे हैं और राह में ही हैं। मैंने उन्हें खारघर का एक खाका बताया और निश्चित किए गए स्थान पर प्रतीक्षा करने लगा।

(सतीश पंचम)

करीब आधे घंटे पश्चात सतीश जी मेरे सामने थे। उन्हें देखते ही फिर वही बात साबित होते दिखी कि ब्लॉग प्रोफाईल में जो चित्र लगे होते हैं, वास्तविकता में वह ब्लॉगर उससे कहीं अधिक युवा होता है। घर पर ही हम करीब डेढ़ घंटा ब्लॉगवाणी, ब्लॉगिंग में ताज़ा विवाद, मुम्बई की जीवन शैली, अपने-अपने पैतृक स्थानों की चर्चा सहित कई विषयों पर बतियाते रहे। खासतौर पर उनके ब्लॉग-लेख के अंत में स्थान व समय वाले दुमछल्ले की खूब चुटकियाँ ली गईं। जब उन्होंने विदा लेनी चाही तो 8 बज ही रहे होंगे। कैमरा अपना काम कर चुका था, लेकिन अब एक भी चित्र नहीं है मेरे पास। ऊपर वाला चित्र तो अरविन्द मिश्रा जी के ब्लॉग से उड़ाया हुआ है 🙂

अब इंतज़ार था 5 जुलाई का। उससे पहले आपकी टिप्पणी का भी, जो नीचे की ओर जा कर दी जा सकती है 🙂 उस दिन मैंने घुघूती बासूती जी से मुलाकात की सोच रखी थी। लेकिन हुआ क्या? चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब

अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात” पर 36 टिप्पणियाँ

  1. मैं पूछना चाह रहा हूँ कि कैमरा नया लिया या नहीं?

  2. पाबला जी,

    सिम्मी के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।

    आपके साथ बिताये गये डेढ़ घंटे तो पता ही न चले कैसे फुर्र हो गए….हंसी मजाक तो खैर ढेर सारा चलता ही रहा।

    वैसे मैं भी जानना चाहता हूँ कि कैमरा नया लिया या नहीं।

  3. नन्ही सिम्मी को जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं और बहुत बहुत आशीर्वाद !
    आपके साथ साथ हमारा भी मुंबई के सभी ब्लॉगर साथीयो से भी मिलना हो रहा है !

  4. ईश्वर नन्ही सिम्मी को जल्द से जल्द स्वस्थ करे और लम्बी उम्र दे..
    सतीश जी से आपकी मुलाकात सुखद rahi जान कर ख़ुशी हुई ..
    आभार..

  5. पाबला जी , सिम्मी की तबियत जानकार दुःख हुआ| ऐसे में घर-परिवार वाले हर संभव प्रयास करते हैं| यह रोग लाइलाज माना जाता है पर फिर भी पारंपरिक चिकित्सकीय ज्ञान के दस्तावेजीकरण के दौरान एकत्र की गयी जानकारी मुझे उपयोगी लगती है| मुझे अनायास ही छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक व्यंजन याद आ रहा है जो ऐसे रोगियों के लिए वरदान हो सकता है| यदि आप उचित समझे तो मै मदद के लिए तत्पर हूँ|

  6. ईश्वर करे नन्ही सिम्मी जल्दी से अच्छी हो जाये.विज्ञान को समय समय पर छकाने वाली एक शक्ति है,उस पर यकीं करें हो सकता है कोई चमत्कार हो जाये.मुंबई में ही एक बच्ची है कोल्कता की मूल निवासी रूपजा बेनर्जी चार साल की ब्लड केंसर है उसे……वो सर्वाइव कर गई,जबकि हॉस्पिटल का नाम अभी याद नही आरहा,वहाँ के डॉक्टर्स ने भी उम्मीद कम बताई.हमने कहा आप ईलाज कीजिये.डी एंन ए के मुंबई सर्कल ईन्चार्ज राजेश पटेल जी ने भी हमारी बहुत मदद की.इलाज तो अभी भी जारी है पर बच्ची बहुत अच्छा रिस्पोंड कर रही है.खतरे से बाहर है.
    वीरजी! ऐसा ही कोई चमत्कार सिम्मी के साथ भी हो जाये ईश्वर करे.
    सतीशजी,घुघूती बासुतीजी,अनीता कुमार जी सबसे मिल लिए आप और आपके साथ हम भी.
    अब तो आपके बिना मात्राएँ लगे मेसेज मैं आसानी से पढ़ लेती हूं .उसी में पढा-'सड़क मरग स महरषटर;आखर अनत कमर ज स मलकत ह ह ग़ई'
    हा हा हा
    और मैंने अटकल लगा ही ली-'सड़क मार्ग से महाराष्ट्र;आखिर अनीता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई '
    हा हा हा पढ़ लेती हूं ना?
    देखा ऐसीच हूं मैं

  7. ईश्वर करे नन्ही सिम्मी जल्दी से अच्छी हो जाये.विज्ञान को समय समय पर छकाने वाली एक शक्ति है,उस पर यकीं करें हो सकता है कोई चमत्कार हो जाये.मुंबई में ही एक बच्ची है कोल्कता की मूल निवासी रूपजा बेनर्जी चार साल की ब्लड केंसर है उसे……वो सर्वाइव कर गई,जबकि हॉस्पिटल का नाम अभी याद नही आरहा,वहाँ के डॉक्टर्स ने भी उम्मीद कम बताई.हमने कहा आप ईलाज कीजिये.डी एंन ए के मुंबई सर्कल ईन्चार्ज राजेश पटेल जी ने भी हमारी बहुत मदद की.इलाज तो अभी भी जारी है पर बच्ची बहुत अच्छा रिस्पोंड कर रही है.खतरे से बाहर है.
    वीरजी! ऐसा ही कोई चमत्कार सिम्मी के साथ भी हो जाये ईश्वर करे.
    सतीशजी,घुघूती बासुतीजी,अनीता कुमार जी सबसे मिल लिए आप और आपके साथ हम भी.
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    और मैंने अटकल लगा ही ली-'सड़क मार्ग से महाराष्ट्र;आखिर अनीता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई '
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  8. ईश्वर करे नन्ही सिम्मी जल्दी से अच्छी हो जाये.विज्ञान को समय समय पर छकाने वाली एक शक्ति है,उस पर यकीं करें हो सकता है कोई चमत्कार हो जाये.मुंबई में ही एक बच्ची है कोल्कता की मूल निवासी रूपजा बेनर्जी चार साल की ब्लड केंसर है उसे……वो सर्वाइव कर गई,जबकि हॉस्पिटल का नाम अभी याद नही आरहा,वहाँ के डॉक्टर्स ने भी उम्मीद कम बताई.हमने कहा आप ईलाज कीजिये.डी एंन ए के मुंबई सर्कल ईन्चार्ज राजेश पटेल जी ने भी हमारी बहुत मदद की.इलाज तो अभी भी जारी है पर बच्ची बहुत अच्छा रिस्पोंड कर रही है.खतरे से बाहर है.
    वीरजी! ऐसा ही कोई चमत्कार सिम्मी के साथ भी हो जाये ईश्वर करे.
    सतीशजी,घुघूती बासुतीजी,अनीता कुमार जी सबसे मिल लिए आप और आपके साथ हम भी.
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    अब तो आपके बिना मात्राएँ लगे मेसेज मैं आसानी से पढ़ लेती हूं .उसी में पढा-'सड़क मरग स महरषटर;आखर अनत कमर ज स मलकत ह ह ग़ई'
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  13. ईश्वर करे नन्ही सिम्मी जल्दी से अच्छी हो जाये.विज्ञान को समय समय पर छकाने वाली एक शक्ति है,उस पर यकीं करें हो सकता है कोई चमत्कार हो जाये.मुंबई में ही एक बच्ची है कोल्कता की मूल निवासी रूपजा बेनर्जी चार साल की ब्लड केंसर है उसे……वो सर्वाइव कर गई,जबकि हॉस्पिटल का नाम अभी याद नही आरहा,वहाँ के डॉक्टर्स ने भी उम्मीद कम बताई.हमने कहा आप ईलाज कीजिये.डी एंन ए के मुंबई सर्कल ईन्चार्ज राजेश पटेल जी ने भी हमारी बहुत मदद की.इलाज तो अभी भी जारी है पर बच्ची बहुत अच्छा रिस्पोंड कर रही है.खतरे से बाहर है.
    वीरजी! ऐसा ही कोई चमत्कार सिम्मी के साथ भी हो जाये ईश्वर करे.
    सतीशजी,घुघूती बासुतीजी,अनीता कुमार जी सबसे मिल लिए आप और आपके साथ हम भी.
    अब तो आपके बिना मात्राएँ लगे मेसेज मैं आसानी से पढ़ लेती हूं .उसी में पढा-'सड़क मरग स महरषटर;आखर अनत कमर ज स मलकत ह ह ग़ई'
    हा हा हा
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  14. यात्रा में आपके साथ-साथ हम भी हैं…
    घुघूती जी से मिलने का इंतज़ार है…

  15. From Feedburner:

    आदरणीय पाबला जी ,आपके यात्रा विवरण बड़ी उत्सुकता से पढ़ रहा हूं ,टिप्पणियां भी दर्ज कीं पर आपको मिलीं नहीं शायद या व्यस्त होने से आप जवाब नहीं दे पाए शायद /जो भी हो ,बिटिया के बारे मे पढ़ कर सदमा लगा ,इतनी प्यारी बच्ची को इतना गहरा रोग/
    होमियोपथी मे एक डॉ.दरबारी हुए हैं अलाहाबाद हाई कोर्ट मे प्रक्टिस करते थे /
    उन्होने इन दवाओं पर दो किताबें लिखी हैं /अच्छी दवाओं की दूकान मे मिलेंगी ,बायो- केमीक दवाओं से इलाज हो सकेगा ये मेरा विश्वास है ,क्योंकि आखिरी रहत के रूप मे मैंने उनकी दावा आजमाई थी अपने मामा जी के कन्सर की आखिरी स्तागे में और उनकी मृत्यु बहुत सहज और कष्टरहित हो सकी ,समय होता तो निश्चित ठीक हो जाते ,सभी देखने वालों ने कहा यह बात /
    आप कोशिश कर लीजिये ,मिलनी चाहिए ,बड़ी प्रसिद्ध किताब है ,होमिओ- पाठ्य सतोरेस मे मिलेगी /इस किताब मे ही हैं इलाज इस अनीमिया का /शेष शुभ है /सहयोग बनाये रखिये ,
    सस्नेह
    Dr.Bhoopendra Singh
    T.R.S.College,REWA 486001
    Madhya Pradesh INDIA

  16. पता नहीं,इश्वर एसी छोटी सी अवस्था में,एसे असाध्य रोग क्यों दे देता है,सिम्मी की स्वस्थ होने की कामना करता हूँ ।

  17. तभी तो मैं सोचू की ये बंदा हमेशा मोबाईल क्यों कान से सटाए हुए रहता है -बढियां चल रही है यात्रा !

  18. आपका यात्रा वृतांत पढना सुखद लग रहा है .. पर बच्‍ची का मुस्‍कुराता चेहरा और गंभीर बीमारी .. बहुत दुख हुआ जानकर .. पंकज अवधिया जी से संपर्क जरूर साधें !!

  19. सिम्मी के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना…

    -बकिया तो वृतांत चकाचक रहा.

  20. यदि भगवान कहीं है तो वह मासूम बच्चों को क्यों तंग करता है ? समझ के बाहर है।

  21. @ दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
    @ सतीश पंचम

    नया कैमरा अभी नहीं लिया है

  22. @ पंकज अवधिया Pankaj Oudhia

    मदद के लिए हार्दिक धन्यवाद
    आपका संदेश सिम्मी के माता-पिता तक पहुँचा दिया है। उनकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है

  23. @ indu puri

    सड़क मरग स महरषटर;आखर अनत कमर ज स मलकत ह ह ग़ई

    आपका मोबाईल ऐसिच्च है

  24. सिम्मी के स्वास्थ्य लाभ की कामना हेतु आप सभी का आभार

  25. सिम्मी के शीघ्र स्वस्थ होने के लिये प्रार्थना करते हैं। सतीश जी से मुलाकात की पोस्ट चकाचक रही, जब हमने मुंबई ब्लॉगर मीट बोरिवली नेशनल पार्क में की थी तो सबसे पहले पहुँचने वाले सतीश जी ही थे, और वाकई हम तो उन्हें देखकर ही धोखा खा गये थे, बात सही है, सामने देखने पर ब्लॉगर कुछ ओर ही दिखते हैं।

  26. uparwala simmi ko jald se jald swasth banaye.. yahi kaamna hai.

    aapki yatra ke bahaane ham bhi ek tarah se satish jee se mil liye…

    ab wait karte hain ghughuti ji se milne kaa….

  27. पाबला साहब, आपकी यात्रा का यह पडाव सच में दुखी कर गया। ईश्वर करे कि सिम्मी जल्द से जल्द स्वस्थ हो। इंदू जी की इस बात से सहमत हूं कि विज्ञान को छलावा देने वाली एक शक्ति है। मेरा दिल कहता है कि सिम्मी के साथ भी ऐसा चमत्कार जरूर होगा।

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