समस्या आ रही? कौन दोषी है? ब्लॉगस्पॉट, आपका कम्प्यूटर या आप?

आज रविवार है। बरसात की खुशनुमा झड़ी में कहीं बाहर निकलने का मन ही नहीं किया। टीवी देखता नहीं। सोचा बैठकर किसी समस्या पर कुछ लिखा जाए। ब्लॉगर साथियों की जिज्ञासा भरी ईमेल्स को खंगालना शुरू किया तो हैरान रह गया। इतनी समस्यायें!? वर्गीकरण शुरू किया तो फिर हड़बड़ाया। यार! अधिकतर दिक्कतों से तो बेचारे ब्लॉगस्पॉट का कोई लेना-देना नहीं! ये समस्यायें तो ब्लॉगस्पॉट से जुड़े उन लाखों कम्प्यूटरों की है जिन्हें ब्लॉगस्पॉट जानता तक नहीं, जो उसके नियंत्रण में नहीं। मैंने सोचा आज इसी पर अपने की-बोर्ड को टकटकाया जाए (कलम-घसीटी तो बंद ही हो गई है)

सच का सामना किया जाए तो बात यह है कि विश्व में लाखों ब्लॉगर्स कम्प्यूटर अभिकल्पना, तकनीक से अनभिज्ञ हैं। वे मात्र कम्प्यूटर ऑन भर करना जानते हैं। अधिकतर का यह भी मानना है कि उन्हें जिस समस्या से जूझना पड़ रहा है उसके लिए ये ब्लॉगस्पॉट ही जिम्मेदार हैं। बहुत कम ब्लॉगर इस बात को मानेंगे कि हम गूगल के मज़दूर हैं। गूगल अपने व्यवसाय के लिए ब्लॉगस्पॉट नामक मंच को उपलब्ध कराता है अपने फायदे के लिए। हम आप इस पर अपनी कथित मौलिकता लिखते हैं। गूगल वहाँ विज्ञापन दिखा कर पैसे बटोरता है! कमाई करता है और हम खुश होते हैं कि हमें मुफ्त में यहाँ सुविधा मिलती है! दरअसल गूगल हमें अपना ब्लॉगस्पॉट नामक मंच “उपयोग” करने देता है। खैर, इस पर बात फिर कभी।
बात असल मुद्दे की। अधिकतर ब्लॉगर यह समझ ही नहीं पाते कि ब्लॉगस्पॉट के कोड को सफलतापूर्वक उनके स्वामित्व वाले कम्प्यूटर पर चलाने के लिए कौन जिम्मेदार है। उनका यह मानना रहता है कि यह काम ब्लॉगस्पॉट का ही है और यहीं से समस्या शुरू हो जाती है। अब ब्लॉगस्पॉट, पूरे विश्व के उपयोगकर्तायों को अपने कम्प्यूटर (या कहें तो सर्वर) देता है, उपयोग करने के लिए। वह अपने सर्वर की जिम्मेदारी तो लेगा ही, नियंत्रण, समर्थन तो है ही उसी का। अब उससे जुड़ने वाले कम्प्यूटर की जिम्मेदारी कौन लेगा? ब्लॉगस्पॉट या हम आप ब्लॉगर्स? निश्चित तौर पर यह निर्धारण ब्लॉगस्पॉट नहीं कर सकता कि हम अपने कम्प्यूटर को कैसे रखते हैं, कैसे चलाते हैं। यह एक कटु सत्य भी एक सर्वेक्षण में उभर कर आया था कि कई ब्लॉगर तो अपने कम्प्यूटर से बस ब्लॉगिंग करते हैं और कुछ भी नहीं!

कम्प्यूटरों के बारे में मेरा यह मानना है कि कड़ी सुरक्षा नीतियों व मानकों के साये तले चल रहे कतिपय बड़े संगठनों के कम्प्यूटरों को छोड़ कर दुनिया के अन्य कम्प्यूटरों में कोई भी दो कम्प्यूटर एक जैसे नहीं हो सकते। यह ब्लॉगरों की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि ब्लॉगस्पॉट द्वारा जारी कोड उनके अपने स्वामित्व वाले कम्प्यूटरों पर सफलतापूर्वक चल सके। यह ब्लॉगस्पॉट की जिम्मेदारी नहीं है कि वह आपके इकलौते कम्प्यूटर का ख्याल रखे और ना ही उस इंटरनेट प्रदाता पर उसका नियांत्रण है जो आपको ब्लॉगस्पॉट से जुडने हेतु सुविधा देता है।

जब ब्लॉगस्पॉट खुलता नहीं या कोई पोस्ट नहीं कर पाते तो सबसे पहले सुनाई पड़ता है -लो ये ब्लॉगस्पॉट फिर बंद हो गया/ पता नहीं ये साले कब सुधरें
गे/ बहुत हो गया अब, कोई दूसरा मंच देखना पड़ेगा, वो ज्यादा बेहतर होगा, अरे हाँ वो मुफ्त होना चाहिए।
हम कभी नहीं सोचते कि
  • ताजा ताजा कम्प्यूटर में ऐसा क्या बदलाव कर बैठे, क्या हो गया कि ब्लॉगस्पॉट तक पहुँचा ही नहीं जा रहा?
  • फलां सॉफ्टवेयर को इंस्टाल किया था जिससे ब्लॉगस्पॉट को तकलीफ हो रही।
  • क्या ब्लॉगस्पॉट ने हाल ही में कुछ बदलाव किए हैं?
  • क्या कम्प्यूटर के मूल ऑपेरेटिंग सिस्टम, विंडोज़ में कोई अपडेट हुए हैं?
  • क्या ब्राऊज़र अपडेट हुया है?
  • क्या ब्लॉगस्पॉट की कोई सेटिंग में खुद ही बदलाव कर बैठे हैं?
  • क्या एंटीवायरस अपडेट हुया है?
  • क्या फायरवाल में बदलाव हुया है?
  • क्या अर्से से आपने अपने कम्प्यूटर का रखरखाव नहीं किया है?
  • क्या अन्य सुरक्षा साधनों में कुछ हो सकता है?

यह मामला ऐसा नहीं कि पड़ोसी को जुकाम हुया था, फलां दवा ली ठीक हो गया, मेरा जुकाम भी उसी दवा से ठीक हो जायेगा! बाद में पता चलता है कि बात और बिगड़ गई।
यह तथ्य भी अपनी जगह अटल है कि तकनीक के साथ कदम मिला कर चलना हर किसी के बूते की बात नहीं होती। ऊपर से तुर्रा यह कि किसी समस्या के आने पर संबंधित वेबसाईट के FAQ और फोरम आदि की भाषा ऐसी होती है कि कुछ पल्ले नहीं पड़ता। इसके अलावा अपनी समस्या जाहिर करने में भी झिझकते हैं अधिकतर व्यक्ति। उन्हें बस एक ही इलाज दिखता है -फॉर्मेट!
फिलहाल तो इतना ख्याल रखिएगा कि हर माह के दूसरे मंगलवार को माइक्रोसॉफ्ट अपने पैच जारी करता है और अधिकतर अपडेट उपयोगकर्ता की जानकारी के बिना ही हो जाते हैं। कई समस्यायें इसके बाद ही आनी शुरू होती हैं। आए दिन होने वाले अपडेट्स के कारण यही हाल ब्राऊज़रों व अन्य सुरक्षा साधनों का है। अपने कम्प्यूटर का ख्याल रखिए, जैसा अपनों का रखते हैं!
ऐसी ही अनौपचारिक बातें अगले रविवार!
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7 comments

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    आप का कहना सही है। कल फायरफॉक्स में अपडे़ट हुआ है। तब से फायरफॉक्स को फाइल न मिलने की तख्ती दिखाने की बीमारी हो गई है। उसे बंद करने पर फाइल खुल जाती हैं।

  • काजल कुमार Kajal Kumar says:

    अच्छी जानकारी दी है आपने.धन्यवाद.

  • Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" says:

    पाबला जी, आपकी ये अनौपचारिक बातें तो हमारे जैसे अज्ञानियों के लिए बहुत काम की हैं:)

  • अनिल कान्त : says:

    kaam ki baatein hain

  • berojgar says:

    post achhi lagi.

  • चंदन कुमार झा says:

    अच्छी पोस्ट.

  • अजय कुमार झा says:

    पाबला जी ..
    बहुत ही काम की जानकारी दी आपने…ब्लॉग बुखार अपने नाम के अनुरूप चढ़ता ही जा रहा है …और यकीन मानिए ..इसका भी अपना ही एक आनंद है..

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