सर्वेश फोटोवाली: संघर्ष, विद्रोह, सफलता की एक जीती जागती मिसाल

हिंदी ब्लॉगरों को वृहद पैमाने पर सम्मानित करने की कड़ी को आगे बढ़ाते रविन्द्र प्रभात जी और उनके सहयोगियों ने इस वर्ष भी इस आयोजन की घोषणा कर दी है. यह आयोजन धूमधाम से 27 अगस्त को लखनऊ में होगा.

इसी के साथ मुझे पिछले वर्ष दिल्ली का आयोजन याद हो आया जिसमें मुझे ‘तकनीकी विशेषज्ञ’ का मान दिया गया था. इस वर्ष, इस आयोजन में मेरे द्वारा संचालित Blogs In Media को सम्मान दिया जाना है.

कई साथियों ने पिछले वर्ष के अवसर पर अपने अपने संस्मरण लिखे थे किंतु कई प्रयासों के बाद भी मैं इस बारे में कुछ नहीं लिख पाया. इसके कई तात्कालिक कारण भी थे.

दिल्ली तो मैं पहुँच गया था लेकिन लगातार हो रहे पारिवारिक हादसों के कारण वैसे ही मन:स्थिति उचाट थी और इस सम्मान समारोह के प्रारंभ होते होते घर से स्वास्थ्य लाभ ले रहे सुपुत्र की तबीयत बिगड़ जाने वाली खबर आई.

कुछ कर तो सकता नहीं था. मुस्कराहट ओढ़े हुए उस माहौल में अपने आप को व्यस्त रखने की कोशिश करता रहा लेकिन इसके भी नतीजे भी सामने आए

हॉल के बाहर जब एक टोपी लगाए सज्जन ने मुझे गले लगाया तो मैंने भी औपचारिक सा प्रत्युत्तर दिया. बाद में वही सज्जन जब काफी देर तक हॉल में बैठे मुझसे बतियाते रहे तो मैं भी उनसे औपचारिक सी बातें करता रहा वो तो भला हो मेरे साथ बैठे नीरज ‘मुसाफिर’ जाट का जिसने उस सज्जन को पुकार कर पूछा ‘अजय जी आप यहीं गीता कालॉनी में हैं ना?’

मैंने गरदन घुमा कर गौर से देखा, टोपी उतारने का आग्रह किया और जैसे मैं आसमान से गिरा! वे थे अजय कुनार झा! मैं ग्लानि में ऐसा डूबा कि आज तक उबर ना पाया. अरे जिनके घर परिवार में इतना घुला मिला हूँ उनको नहीं पहचान पाया!? हद्द है भई 🙁

आयोजन के दौरान दसियों ब्लागरों से कुछ पलों कई दुआ सलाम होती रही. डॉ दराल सा’ब मुझसे ढेर सारी बातें करना चाहते थे. लेकिन हर दूसरे पल कोई ना कोई ब्लॉगर स्नेहपूर्वक चहकते हुए आ जाता था और डॉ सा’ब एक किनारे हो जाते. बहुत कोशिश कई मैंने भी लेकिन दो-चार बातों से आगे मामला बढ़ ही नहीं सका.

इधर आयोजन के बाद जब पता चला कि समारोह में पूरे समय सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार कवियत्री सरोजनी प्रीतम जी मौजूद थीं तो उनके घोर प्रशंसक होने के नाते दर्शन भी ना कर पाने की उदासी घिर आई थी.

सुनीता शानू जी के निवास पर

सुनीता शानू जी के निवास पर
संजीव तिवारी, पवन चोटिया,अल्पना देशपांडे,ललित शर्मा,सुनीता शानू, शाहनवाज सिद्धकी, बी एस पाबला, दिनेश राय दिवेदी, खुशदीप सहगल, जी के अवधिया, सतीश सक्सेना.

 

हाँ, यह बात कहना नहीं भूलूंगा कि आयोजन के पहले और बाद में दूसरे दिन भी सुनीता शानू जी के सारे परिवार ने हमारे छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर समूह पर जो स्नेह वर्षा की, उससे मैं अभी भी अभिभूत हूँ.

इन सब बातों से अलग वह बात जो आपसे साझा कहना चाहता हूँ वह यह कि आयोजन स्थल पर जब रात्रि भोज लगभग समाप्त ही हो रहा था तो किसी ने मेरा परिचय एक महिला से करवाया. दिल्ली की आम शख्सियत और बोली का पुट लिए उन महोदया ने ब्लॉग संबंधित तकनीक के प्रश्नों की झड़ी ही लगा दी. फिर बातें मुड़ गई कुछ औपचारिक विषयों की ओर

सर्वेश

सर्वेश

 

बातो के दौरान ही पता चला कि वे हैं, सर्वेश. सर्वेश फोटोवाली. उन्होंने हँसते हुए बताया कि आम हल्कों में वे इसी नाम से जानी जाती हैं -सर्वेश फोटोवाली. हिन्दुस्तान टाईम्स समाचार पत्र समूह से जुड़ी वे थीं सीनियर फोटोग्राफर सर्वेश.

बचपन में सर्वेश

बचपन में सर्वेश

भिलाई लौट कर मैंने उनके बारे में जो कुछ जाना वह आपसे साझा करना चाहता हूँ.

1958 में जनमी पुरानी दिल्ली के एक पारंपरिक बनिया परिवार की इस लड़की का विवाह घरवालों की मर्जी से 1976 में हुआ. जिस व्यक्ति से पाला पड़ा वह न केवल शराबी था, बल्कि मार-पीट करता था, जलती सिगरेट से दागता था.

कम दहेज़ लाने के कारण ससुराल पक्ष से तरह तरह कई प्रतिक्रिया होती थी. घरेलू कलह बाहर निकलने लगी आखिर 10 वर्षों तक बर्दाश्त करने बाद 15 नवंबर 1988 को उन्होंने पति का घर छोड़ दिया.

एक सामाजिक संस्था ‘सहेली’ ने आश्रय दिया. ब्यूटीशियन के कार्य से आजीविका शुरू की. साथ ही साथ एक समूह ‘दखल’ से जुड़ कर विभिन्न शहरों में नुक्कड़ नाटक भी करती रहीं

विवाहोपरांत सर्वेश

विवाहोपरांत सर्वेश

ससुराल तो छूट ही गया था, पिता के घर के दरवाज़े भी बंद थे. दुबारा शादी की बात चली लेकिन किसी परवान ना चढ़ सकी. लेकिन एक मित्र आलोक ने उन्हें जनमदिन पर एक उपहार दिया Pentax K 1000 कैमरा. उसी मित्र ने सिखाया नाजुक सा कैमरा पकड़ना और संभालना बस यहीं से उनकी दुनिया बदल गई.

फोटोग्राफी एक महंगा जुनून है. ब्यूटीशियन के काम से मिले पैसों को फोटोग्राफी में झोंका. पैसों की कई बार इतनी तंगी रही कि कई बार भूखी सोई या लंगर में खाना खा कर गुजारा किया.

देहरादून में आनंद धौंधियाल से फोटोग्राफी सीखी, वहीं पहली फोटो भी छपी. उत्तरकाशी में भूकंप आया तो बतौर स्वतंत्र फोटोग्राफर तस्वीरें लीं. वह तस्वीरें नवभारत टाइम्स और अन्य समाचार पत्रों में छपीं इसके बाद तो उन्होंने मुड़ कर नहीं देखा

टेलीविज़न चैनल ‘सोनी’ के ‘शिखर’ कार्यक्रम में पूरे भारत से बेहद संघर्ष कर मुकाम हासिल करने वाली 12 महिलाओं को चुना था तब उनमें किरण बेदी के साथ मंच साझा करने वाली सर्वेश भी थीं.

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23 साल से मीडिया में स्वतंत्र फोटोग्राफर के तौर पर काम कर रहीं सर्वश ने अब तक साढ़े तीन लाख चित्र लिए हैं. कारगिल युद्ध के शूट को वह अपना एक महत्वपूर्ण पडाव मानती हैं. (कारगिल में वे, एनडीटीवी की बरखा दत्त के साथ एक ही बंकर में थीं, लेकिन उनका कोई नाम कहीं नहीं लिया गया क्योंकि वे किसी प्रभावशाली मीडिया से थोड़े ही जुड़ी थीं)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस विषय पर जो प्रतियोगिता आयोजित की थी उसमे शामिल 15 फोटोग्राफरों के बीच सर्वश अकेली महिला थीं. सीतामढी के दंगों, धनबाद, झरिया की कोयला खदानों के चित्रों ने भी खूब वाहवाही लूटी है.

अन्य महिला फोटो पत्रकारों के साथ सर्वेश

अन्य महिला फोटो पत्रकारों के साथ सर्वेश

विभिन्न समाचार पत्रों में सर्वेश की गाथा

विभिन्न समाचार पत्रों में सर्वेश की गाथा

राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ सर्वेश

राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ सर्वेश

सोनी टीवी के एक विज्ञापन में सर्वेश

सोनी टीवी के ‘शिखर’ कार्यक्रम के विज्ञापन में सर्वेश

प्रथम भारतीय महिला फोटो पत्रकार के साथ सर्वेश

प्रथम भारतीय महिला फोटो पत्रकार के साथ सर्वेश

किरण बेदी के साथ सर्वेश

किरण बेदी के साथ सर्वेश

 

फोटोग्राफी के अलावा उनका एक और झुकाव है अपने कायनेटिक होंडा पर भारत के रोमांचल स्थलों का भ्रमण करना. इस सिलसिले में वे एक बार तुंगनाथ भी जा पहुंची थीं.

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दिल्ली में रहने वाली, भगवान के अलावा किसी से ना डरने वाली, अगले जनम में भी स्त्री जीवन पाने की आकांक्षा लिए, किसी समय की लंबे बालों वाली, बड़ी सी बिंदी लगाए, सिंदूर, साड़ी में लिपटी, शर्माती सकुचाई सी लड़की का आज की जींस पहने, कटे बालों वाली दबंग, बोल्ड सर्वेश से कोई मुकाबला नहीं.

 

 

आज भी उनसे गाहे बगाहे फोन पर बातें होती रहती हैं. सच कहूँ तो बातचीत में बहुत बातूनी हैं वे. लगता ही नहीं उनके जीवन में कितना कुछ बीता होगा.

अपडेट@दोपहर 3 बजे, 6 अगस्त, 2012: आज सर्वेश जी से बात हुई तो पता चला कि दो दिन पहले 4 अगस्त को बीबीसी हिंदी सेवा द्वारा उनका एक संक्षिप्त साक्षात्कार प्रसारित किया गया था. उस इंटरव्यू को नीचे दिए गए प्लेयर के सहारे सुना जा सकता है

जिन्हें यहाँ सुनने में दिक्कत हो वे बीबीसी का यह पृष्ठ देख सकते हैं  (अब यह पृष्ठ बीबीसी पर अनुपलब्ध है)

आपके मन में क्या उमड़ घुमड़ रहा है? नीचे टिप्पणी कर बता सकते हैं?

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सर्वेश फोटोवाली: संघर्ष, विद्रोह, सफलता की एक जीती जागती मिसाल” पर 34 टिप्पणियाँ

  1. सर्वेश जी के बारे मे जान काफी खुशी हुई ! उनके साहस को नमन करता हूँ ! उम्मीद है 27 को आपके दर्शन का लाभ मुझे भी मिलेगा !
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: भारत मे इंकलाबMy Profile

  2. कभी आप हमें भी मिलते तो तकनीकी प्रश्नों की झड़ी लगाते और साल भर बाद आपके ब्लॉग पोस्ट का हिस्सा बन पाते ?
    टिप्पणीकर्ता Praveen Trivedi ने हाल ही में लिखा है: जो गुरु बसै बनारसी, सीष समुन्दर तीरMy Profile

  3. पिछले ब्लॉगर-मीट के बहाने यह बड़ी उपलब्धि रही कि आपने हीरे की खोज कर ली.सर्वेशजी की गाथा वास्तव में संघर्ष की अप्रतिम मिसाल है.उन्हें नमन.

    …और हाँ,अजय झा को पहचानने की भूल दुबारा नहीं करना !
    टिप्पणीकर्ता संतोष त्रिवेदी ने हाल ही में लिखा है: संयुक्त-राष्ट्र चले जाओ जी !My Profile

  4. पाबला जी, नमस्कार !
    सबसे पहले आपके पुत्र की खैरियत जानना चाहूँगा ?
    फिर अपनी यादों को बाँटने का आभार .
    सर्वेश जी के बारे में जानकर गर्व हुआ .
    सादर प्रणाम

    • Smile
      सुपुत्र बिलकुल तंदरूस्त है , यह तो डेढ़ वर्ष पहले की बात थी
      स्नेह बनाए रखिएगा

  5. बहुत बढ़िया आलेख पाबला जी…और उससे बढ़िया टिप्पणियों पर आपके स्माईली जवाब…ये ३डी स्माईली तो मुझे भी चाहिये…प्लीज़ तरीक़ा बताएँ…

    • Heart
      बहुत आसान है
      इस टिप्पणी बॉक्स के नीचे की ओर लिखा है [+] Zaazu Emoticons
      उस पर क्लिक कीजिए, स्माइली का सारा पिटारा खुल जाएगा, मनचाहे स्माईली पर एक बार क्लिक कीजिए, उसका प्रतीक अक्षर टिप्पणी बक्से में आ जाएगा जो प्रकाशित होने के बार वास्तविक स्माईली के रूप में दिखेगा

  6. आपसे जब बात करने का अवसर नहीं मिला तब हमें बोध हुआ –ऐसे कार्यक्रम में मिलना जुलना कम ही हो पाता है . हालाँकि हम तो लोगों से मिलने ही गए थे .

    सर्वेश जी का विस्तृत परिचय बढ़िया लगा .

  7. दुःख तकलीफों को दरकिनार कर अपने जुझारूपन से मुग्ध करती एक बेहद सशक्त और साहसी महिला के परिचय के लिए आभार !
    टिप्पणीकर्ता वाणी गीत ने हाल ही में लिखा है: लड़कियां इतनी खुश कैसे रह लेती !!My Profile

  8. अच्छा लगता है,महिलाओं को कुलांचे भरते देखना। कसक रहती है तो बस यही कि इसके लिए वह सब भोगना ज़रूरी नहीं था।
    टिप्पणीकर्ता कुमार राधारमण ने हाल ही में लिखा है: चालीस के बाद गॉलब्लैडर की नियमित जांच करायेंMy Profile

  9. आपका किसी भी बात को रोचक तरीके से प्रस्तुत करना बहुत प्रभावित करता है ,फिर चाहे वो सर्वेश जी की प्रेरनादायी संघर्ष गाथा हो हो या कोई और विषय , अत्यंत प्रेरनादायी जीवन संघर्ष के लिए प्रेरित करने वाली साहसी महिला की जीवन कथा के लिए साधुवाद Pleasure : ।

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