इंटरनेट पर साफ सुथरी हिंदी लिखने की ज़रूरत क्यों?

अपने ऑनलाइन लेख में साफ सुथरी हिंदी लिखने की ज़रूरत का कारण बतलाता लेख

गूगल एडसेंस, हिंदी के लिए अपना जलवा एक बार फिर बिखेरने के लिए तैयार हैलगभग तीन वर्ष पहले इसने हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में उत्साह ला दिया थाबहुत सी तकनीकी दिक्कतों के कारण इसे अपने कदम पीछे लेने पड़े थे

सबसे बड़ी समस्या थी हिंदी में वर्तनी (Spelling) की गलतियों के कारण, अनुदित शब्दों का विज्ञापनदातायों के विशिष्ठ शब्दों (KeyWords) का मेल ना हो पानाबहुभाषी क्षेत्रों में प्रयुक्त बोलचाल वाली हिंदी की विडम्बना है कि सम्बंधित क्षेत्र का व्यक्ति उसे अपने उच्चारण के हिसाब से लिखता है, जबकि स्थापित मानक कुछ और होते हैं।

पिछले कुछ दिनों से गूगल एडसेंस धारक ब्लॉगों पर यदाकदा विज्ञापन दिखने शुरू हो गए हैं, कुछ में अभी भी सार्वजनिक सेवा के विज्ञापन दिखते हैं। अगर गौर से देखा जाए तो गूगल के विज्ञापन दिखाऊ ब्लॉगों में शब्दों की प्रचुरता नहीं है। जाने अनजाने, कुछ चुनिंदा शब्दों के आधार पर, विज्ञापन आ ही जाते हैं।

गूगल एडसेंस की कार्यप्रणाली यही है कि विज्ञापनदाता के चुने गये विशिष्ठ शब्दों (KeyWords) का मेल यदि संबंधित लेख में लिखे गये शब्दों से हो जाये तो वह विज्ञापन दिखना शुरू हो जाता है। हालांकि यह किसी एक शब्द की बात नहीं है लेकिन फिर भी इसकी कार्यप्रणाली यही है।

साफ सुथरी हिंदी लेखन

गूगल की इस वक्त चल रही प्रक्रिया में, अन्य भाषायों से अनुदित हिंदी के मानक शब्दों का डाटाबेस बन रहा है जो विज्ञापनदातायों को अपने विशिष्ठ शब्द चुनने में मदद करेगा। गड़बड़ यहीं से होनी शुरू हो जाती है।

मान लीजिए कोई ब्लॉगर साथी लिख रहा है कि

 

ब्लोग्गिंग से संबधित कुछ बातें और योनायें तो सोची ही हैं

 

तो वास्तव में वह लिखना चाहता था कि

 

ब्लॉगिंग से संबंधित कुछ बातें और योजनाएं तो सोची ही हैं।

 

इस वाक्य के विशिष्ठ शब्द हैं ब्लॉगिंग व योजनाएं, जिसे विज्ञापनदाता ने अपने विज्ञापन दिखलाने के लिए चुना हुया है। अब लिखे गए वाक्य के आधार पर विज्ञापन दिखेगा क्या? नहीं दिखेगा!

 

अब अगर कोई ब्लॉगर साथी लिखे कि

 

अभी कल ही एक सॉलिड तरीका हाथ लगा! पर किलियर किए देते हैं कि सोमावार को मेरी उंगलियाँ कीबोर्ड्वा पर यूं चली लोगां बोलने लगे कौमा फुलस्टाप की जगह बदलो, शब्दों की प्लेसिंग बदलो।

इसे पाठक तो समझ लेगा पर किन्तु विज्ञापनदाता का मशीनी सर्वर नहीं समझ पाएगा। नतीजा? विज्ञापन नहीं!! क्योंकि उसके डाटाबेस में तो सोमवार, कीबोर्ड, अर्धविराम, पूर्णविराम, स्थान, स्पष्ट, ठोस जैसे शब्द उपलब्ध हैं!

यह हिंदी लेखन के लिए विज्ञापनों के प्रारंभिक काल की स्थिति है। उत्तरोत्तर इसमें भी सहज स्वीकार्य शब्दों का समावेश जैसे जैसे होता जाएगा, स्थिति में परिवर्तन होता जाएगा।

अब प्रश्न किया जा सकता है कि कैसे मालूम किया जाए कि किस शब्द की स्वीकार्यता है किसकी नहीं? इस बारे में सबसे सटीक युक्ति यही है कि संबंधित शब्द/ शब्दों के लिए गूगल सर्च का अध्ययन किया जाए।

विज्ञापन संबंधी खोज परख के लिए गूगल ने एक ऑनलाईन उपकरण दिया हुया है जिसका उपयोग विज्ञापनदाता अपने विशिष्ठ शब्द चुनने के लिए प्रयोग करते हैं। उसका प्रयोग किसी सीमा तक हिंदी लेखों में विज्ञापन आकर्षित करने वाले शब्दों को चुनने के लिए किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि इसका प्रयोग किया जाए तो ज्ञात होगा कि भारत शब्द का विशिष्ठ उपयोग, खोज के लिए, पिछले 12 माहों में लगभग 12000 दर्ज किया गया है जबकि भारतवर्ष शब्द का मात्र 22! जबकि हिन्दुस्तान व इंडिया का 2900!! हिन्दुस्तां, हिन्दुस्ताँ का तो डाटा ही उपलब्ध नहीं।

ऐसे ही आंकड़े मधुमेह के लिए 720 , शुगर के लिए 36 , डायबिटीज के लिए 73 मिलेंगे। स्वभाविक है कि भारतवर्ष या हिन्दुस्तान के बदले भारत तथा मधुमेह शब्द का प्रयोग किए जाने वाले को विज्ञापनों की संभावना अधिक है जबकि शुगर को कोई उम्मीद नहीं।

विज्ञापन प्राप्त करने का इच्छुक कोई भी गंभीर लेखक यदि ऐसी बातों का ध्यान देगा तो इसमें कोई दो मत नहीं कि वह जल्द ही आने वाले गूगल एडसेंस विज्ञापनों के द्वारा धन कमाने में सफल होगा।

यदि कोई इस उपकरण का उपयोग करना चाहे तो क्लिक करे यह गूगल का खोजशब्द उपकरण। परिणामों के लिए आंकड़े कैसे देखे जाएँ इसके लिए यहाँ क्लिक करें, नकारात्मक की वर्ड के उपयोग से बचने जैसे  उन्नत टिप्स हेतु यहाँ क्लिक करें

इसके विस्तृत उपयोग पर एक पोस्ट अलग से लिखी जा रही है, जिसे आप इसी सप्ताहांत देख पाएँगें, ऐसी संभावना है।

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27 comments

  • नन्हीं लेखिका - Rashmi Swaroop says:

    सर, इस उपयोगी जानकारी के धन्यवाद… हम ख्याल रखेंगे…
    सीख रहे हैं…
    🙂

  • संगीता पुरी says:

    बहुत उपयोगी जानकारी है !!

  • डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक says:

    जानकारी देने के लिए आभार!

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    लगता है यह पोस्ट हिन्दी ब्लागिंग की गति और ब्लागरों की संख्या में वृद्धिकारक सिद्ध होगी।

  • राज भाटिय़ा says:

    बहुत सुंदर जानकारी, हम सब के बहुत काम आयेगी.
    धन्यवाद

  • Dr. Mahesh Sinha says:

    यह लिखना की आपने अच्छी जानकारी दी है से बढ़कर यह कहना ज्यादा उचित होगा कि आपने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात रखी है इसके दूरगामी प्रभाव होंगे . अच्छी बात है कि गूगल का डाटाबेस बन रहा है . मुख्य ध्यान देने वाली बात यही होगी कि अंग्रेजी के शब्दों का देवनागरी में क्या सही रूप होगा . बहुत सालों बाद जब हिंदी में ब्लॉग के लिए लिखना प्रारंभ किया तो कुछ परेशानियाँ हुई . शब्दों के चयन की जो बात आपने कही है वाह भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदी में उर्दू के शब्दों का भी काफी उपयोग होता है . हिंदी का डाटा बेस शुद्ध हिंदी का हो या आम भाषा में

  • Ratan Singh Shekhawat says:

    आपने बहुत बढ़िया जानकारी दी है गूगल एडवर्ड के की वर्ड सर्च टूल से सर्च करने वाले शब्दों की खोज आवर्ती का आसानी से पता लग जाता है इस टूल की सहायता से हम ज्यादा खोजे जाने वाले शब्दों को अपनी पोस्ट में इस्तेमाल कर गूगल के विज्ञापनों को आकर्षित कर सकते है |

  • Suresh Chiplunkar says:

    वड्डे भापा जी, तीन साल होने को आये शुद्ध हिन्दी में ब्लॉग लिखते-लिखते, आज तक एक विज्ञापन नहीं लगाया ससुरे एडसेंस ने… अकाउंट में कुल कमाई 4 डालर दिखा रहा है… 🙁 । अब हम और कितनी शुद्ध वर्तनी रखें, गूगल बाबा… कुछ तो बताओ…

  • अजय कुमार झा says:

    पाबला जी…चलिये शुक्र है कि शुद्ध हिंदी लिखने का एक और फ़ायदा बता दिया आपने…अब कम से कम ये दलील देने ..कि भाषा की शुद्धता …कोई विषय नहीं है….को ये तो बता ही सकेंगे..बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दी आपने ..हमेशा की तरह…

  • Mithilesh dubey says:

    इस बेहतरीन जानकारी के लिए आभार।

  • अनुनाद सिंह says:

    चिट्ठाकारों को अपना दायित्व व शक्ति दोनो का आभास होना ही चाहिये। हम सब मिलकर हिन्दी को उसका आधिकारिक स्थान दिला सकते हैं।

    * अंग्रेजी के अनावश्यक शब्दों का प्रयोग न किया जाय।
    * हिन्दी लिखते समय रोमन अक्षरों का प्रयोग न किया जाय भले ही अंग्रेजी शब्द ही लिखना हो। इसको देवनागरी में समुचित तरीके से लिखा जाय। होना तो यह चाहिये कि कभी अंग्रेजी का पूरा वाक्य भी लिखना हो तो उसे देवनागरी में ही लिखा जाय (रोमन में नहीं) और कोष्टक में उसकी हिन्दी लिख दी जाय।

  • Dr Parveen Chopra says:

    पाबला जी ,आप ने इतनी टैक्नीकल बात को इतनी आसानी से समझा दिया—लेख पूरी तरह समझ में आ गया। अब आप के द्वारा दिये गये लिंक्स देखता हूं।
    धन्यवाद. आप के अगले लेख का इंतज़ार रहेगा। यह इंटरनेट से आमदनी वाले ब्लाग पर खूब लिखा करें।

  • डॉ टी एस दराल says:

    एक अच्छी जानकारी के लिए आभार.

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" says:

    जानकारी के लिए धन्यवाद जी!!!!!!!

  • राजीव तनेजा says:

    अच्छी जानकारी के लिए शुक्रिया

  • खुशदीप सहगल says:

    पाबला जी, ऐ ऐडसेंस वाले कदे कुछ देणा वीं शुरू करणगे या ऐवें ही यबलियां मारदे रैणगे…
    जय हिंद…

  • हिमांशु । Himanshu says:

    बेहद काम की जानकारी । चलिये यह भी एक कारण बन जायेगा शुद्ध हिन्दी के लिये । एडसेंस के लिये ही पर लोग प्रवृत्त तो हों शुद्ध हिन्दी लिखने के लिये । आभार ।

  • जी.के. अवधिया says:

    बहुत ही अच्छी जानकारी दी है आपने पाबला जी!

  • Arvind Mishra says:

    बहुत जानकारीपरक -शुक्रिया ! हाँ शब्द अनूदित है अनुदित नहीं !

  • सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi says:

    बहुत उपयोगी जानकारी। पैसा कौन नहीं कमाना चाहता।

  • sada says:

    बहुत ही सही व उपयोगी जानकारी, प्रस्‍तुति के लिये आभार

  • Dipti says:

    आपकी दी गई जानकारी बहुत ही अच्छी है।

  • tulsibhai says:

    " is behtarin jaankari ke liye aapka aabhar "

    —– eksacchai. { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

  • योगेश स्वप्न says:

    deepawali ki hardik shubhkaamnayen.

  • प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI says:

    उपयोगी जानकारी!!

  • Maria Mcclain says:

    interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this website to increase visitor.Happy Blogging!!!

  • bilaspur property market says:

    करे नवीनता का आव्हान,
    नव वर्ष की नव बेला में, करें नव शब्द का निर्माण.
    नूतन वर्ष की बधाई और ढेरों शुभकामनाये ।

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